NCERT Class 11 Sociology Samaj Shastra Parichay-I: Chapter 3 — समाजशास्त्रा परिचय

NCERT CBSE Class 11 Sociology Samaj Shastra Parichay-I Chapter 3 Hindi PDF

यह अध्याय, 'सामाजिक संस्थाओं को समझना', NCERT की कक्षा 11 समाजशास्त्र की पुस्तक 'समाज शास्त्र परिचय-I' का अध्याय 46 है। यह अध्याय सामाजिक संस्थाओं की अवधारणा, उनके प्रकारों और समाज में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालता है। इसमें परिवार, विवाह, नातेदारी, राजनीति, धर्म और शिक्षा जैसी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का परिचय दिया गया है। अध्याय बताता है कि संस्थाएँ व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाती हैं और अवसर भी प्रदान करती हैं। यह विभिन्न समाजशास्त्रीय दृष्टिकोणों, जैसे प्रकारवादी और संघर्षवादी, के माध्यम से संस्थाओं की समझ में भिन्नताओं को भी स्पष्ट करता है। यह अध्याय छात्रों को सामाजिक संरचनाओं और उनके व्यक्तिगत जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में मदद करता है, जो CBSE पाठ्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 11
SubjectSociology
BookSamaj Shastra Parichay-I
ChapterChapter 3 — समाजशास्त्रा परिचय
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time3 minutes
Word count432

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
संस्थास्थापित या स्वीकृत नियमों के अनुसार कार्य करने वाली व्यवस्था।
प्रस्थितिसमाज में व्यक्ति की स्थिति या पद।
भूमिकाकिसी प्रस्थिति से जुड़े अपेक्षित व्यवहार।
नातेदारीरक्त या विवाह संबंध पर आधारित संबंध।
प्रकारवादी दृष्टिकोणसमाज को एक एकीकृत प्रणाली के रूप में देखने वाला दृष्टिकोण।
संघर्षवादी दृष्टिकोणसमाज में शक्ति और संघर्ष पर केंद्रित दृष्टिकोण।
औपचारिक संस्थालिखित नियमों और प्रक्रियाओं वाली संस्था (जैसे कानून, शिक्षा)।
अनौपचारिक संस्थाअलिखित नियमों और परंपराओं पर आधारित संस्था (जैसे परिवार, धर्म)।

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Practice questions

  1. संस्था को परिभाषित करें। Answer: संस्था वह है जो स्थापित या कानून/प्रथा द्वारा स्वीकृत नियमों के अनुसार कार्य करती है।
  2. सामाजिक संस्थाएँ व्यक्तियों पर क्या प्रभाव डालती हैं? Answer: सामाजिक संस्थाएँ व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाती हैं और साथ ही अवसर भी प्रदान करती हैं।
  3. परिवार को एक अनौपचारिक सामाजिक संस्था क्यों माना जाता है? Answer: क्योंकि यह अलिखित नियमों, परंपराओं और भावनात्मक संबंधों पर आधारित है।
  4. प्रकारवादी दृष्टिकोण सामाजिक संस्थाओं को कैसे देखता है? Answer: प्रकारवादी दृष्टिकोण सामाजिक संस्थाओं को समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले संबंधों के ताने-बाने के रूप में देखता है।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सी एक प्रमुख सामाजिक संस्था है जिसका उल्लेख अध्याय में किया गया है?

Q2. संस्थाएँ व्यक्तियों के लिए क्या करती हैं?

Q3. संघर्षवादी दृष्टिकोण के अनुसार, सामाजिक संस्थाएँ किसके हित में संचालित होती हैं?

Q4. कानून और शिक्षा को किस प्रकार की सामाजिक संस्थाओं के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सी एक अनौपचारिक सामाजिक संस्था है?

Frequently asked questions

सामाजिक संस्था क्या है?

सामाजिक संस्था वह है जो स्थापित या कानून/प्रथा द्वारा स्वीकृत नियमों के अनुसार कार्य करती है और जिसके नियमित तथा निरंतर कार्य चालन को इन नियमों के बिना समझा नहीं जा सकता।

सामाजिक संस्थाएँ व्यक्तियों पर क्या प्रभाव डालती हैं?

सामाजिक संस्थाएँ व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाती हैं, साथ ही उन्हें अवसर भी प्रदान करती हैं।

अध्याय में किन प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का उल्लेख किया गया है?

अध्याय में परिवार, विवाह, नातेदारी, राजनीति, धर्म और शिक्षा जैसी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं का उल्लेख किया गया है।

औपचारिक और अनौपचारिक सामाजिक संस्थाओं में क्या अंतर है?

औपचारिक संस्थाओं में लिखित नियम होते हैं (जैसे कानून, शिक्षा), जबकि अनौपचारिक संस्थाएँ अलिखित नियमों और परंपराओं पर आधारित होती हैं (जैसे परिवार, धर्म)।

प्रकारवादी दृष्टिकोण सामाजिक संस्थाओं को कैसे देखता है?

प्रकारवादी दृष्टिकोण सामाजिक संस्थाओं को समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निर्मित संबंधों की भूमिका के जटिल ताने-बाने के रूप में देखता है।

संघर्षवादी दृष्टिकोण के अनुसार, सामाजिक संस्थाएँ किसके हितों की पूर्ति करती हैं?

संघर्षवादी दृष्टिकोण के अनुसार, सामाजिक संस्थाएँ समाज के प्रभावशाली अनुभागों के हितों में संचालित होती हैं।

Important topics

सामाजिक संस्थाओं की अवधारणा और प्रकार परिवार, विवाह और नातेदारी का महत्व प्रकारवादी और संघर्षवादी दृष्टिकोणों की तुलना औपचारिक बनाम अनौपचारिक संस्थाएँ सामाजिक संस्थाओं का व्यक्तियों और समाज पर प्रभाव

Topics covered

सामाजिक संस्थाओं का परिचय संस्था की परिभाषा संस्थाओं के कार्य (प्रतिबंध और अवसर) परिवार, विवाह और नातेदारी राजनीति धर्म शिक्षा प्रकारवादी दृष्टिकोण संघर्षवादी दृष्टिकोण औपचारिक और अनौपचारिक संस्थाएँ सामाजिक संस्थाओं का महत्व समाजशास्त्रीय अध्ययन

NCERT Class 11 Sociology — Samaj Shastra Parichay-I — Chapter 3 — समाजशास्त्रा परिचय. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.