NCERT Class 11 Sociology Samaj Shastra Parichay-I: Chapter 5 — समाजशास्त्राµअनुसंधान प(तियाँ

NCERT CBSE Class 11 Sociology Samaj Shastra Parichay-I Chapter 5 Hindi PDF

यह अध्याय 5, 'समाजशास्त्रा अनुसंधान प(तियाँ', समाजशास्त्र में अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डालता है। यह बताता है कि समाजशास्त्र को सामाजिक विज्ञान क्यों कहा जाता है, क्योंकि यह उन विषयों पर चर्चा करता है जिनसे लोग पहले से परिचित हैं। समाजशास्त्रीय अनुसंधान का उद्देश्य केवल तथ्यों का अवलोकन करना नहीं है, बल्कि इसमें शामिल लोगों की भावनाओं, विचारों और अनुभवों को समझना भी है। अध्याय इस बात पर जोर देता है कि समाजशास्त्री अपने ज्ञान को कैसे प्राप्त करते हैं, यह महत्वपूर्ण है। यह प्राकृतिक विज्ञानों की तुलना में सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता प्राप्त करने की चुनौतियों पर भी चर्चा करता है, क्योंकि समाजशास्त्री स्वयं उसी समाज का हिस्सा होते हैं जिसका वे अध्ययन करते हैं। यह पूर्वाग्रह और व्यक्तिपरकता जैसी समस्याओं को उजागर करता है जो अनुसंधान को प्रभावित कर सकती हैं। यह अध्याय छात्रों को समाजशास्त्रीय अनुसंधान की विधियों और इसके महत्व को समझने में मदद करता है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 11
SubjectSociology
BookSamaj Shastra Parichay-I
ChapterChapter 5 — अधयाय 5
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time3 minutes
Word count486

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
अनुसंधानResearch
प(तिMethod/Technique
वस्तुनिष्ठताObjectivity
व्यक्तिपरकताSubjectivity
वैज्ञानिकScientific
सामाजिक प्रघटनाSocial Phenomenon
पूर्वाग्रहBias
मान्यताएँBeliefs

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Practice questions

  1. समाजशास्त्र को सामाजिक विज्ञान क्यों कहा जाता है? Answer: समाजशास्त्र को सामाजिक विज्ञान इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह समाज और उसमें होने वाली विभिन्न घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करता है, जिसमें मानव संबंध, संस्थाएं और सामाजिक संरचनाएं शामिल हैं।
  2. समाजशास्त्रीय अनुसंधान में 'वस्तुनिष्ठता' का क्या अर्थ है? Answer: समाजशास्त्रीय अनुसंधान में वस्तुनिष्ठता का अर्थ है पूर्वाग्रहों, व्यक्तिगत भावनाओं या मान्यताओं से मुक्त होकर तथ्यों के आधार पर ज्ञान प्राप्त करना।
  3. सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता प्राप्त करना प्राकृतिक विज्ञानों की तुलना में कठिन क्यों है? Answer: सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता प्राप्त करना कठिन है क्योंकि समाजशास्त्री स्वयं उसी समाज का हिस्सा होते हैं जिसका वे अध्ययन करते हैं, जिससे उनके व्यक्तिगत पूर्वाग्रह अनुसंधान को प्रभावित कर सकते हैं।

Practice MCQs

Q1. समाजशास्त्र में किस बात का विशेष महत्व है?

Q2. समाजशास्त्री अपने अध्ययन में क्या समझना चाहते हैं?

Q3. सामाजिक विज्ञानों में 'व्यक्तिपरकता' का क्या अर्थ है?

Q4. समाजशास्त्रीय अनुसंधान में पूर्वाग्रह की समस्या क्यों उत्पन्न होती है?

Frequently asked questions

समाजशास्त्र में अनुसंधान पद्धतियों का क्या महत्व है?

समाजशास्त्र में अनुसंधान पद्धतियों का महत्व इसलिए है क्योंकि ये निर्धारित करती हैं कि समाजशास्त्री अपना ज्ञान कैसे प्राप्त करते हैं, जिससे उनके निष्कर्ष वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनते हैं।

समाजशास्त्री अध्ययन करते समय लोगों के अनुभवों को क्यों समझना चाहते हैं?

समाजशास्त्री लोगों के अनुभवों को इसलिए समझना चाहते हैं ताकि वे सामाजिक घटनाओं को गहराई से समझ सकें और विश्व को अध्ययनरत व्यक्तियों की दृष्टि से देख सकें।

सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता का क्या अर्थ है?

सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता का अर्थ है कि अनुसंधानकर्ता अपने व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों, भावनाओं और मान्यताओं को अपने अध्ययन के परिणामों को प्रभावित न करने दे।

समाजशास्त्रीय अनुसंधान में व्यक्तिपरकता कैसे एक समस्या बन सकती है?

व्यक्तिपरकता एक समस्या बन सकती है जब समाजशास्त्री की अपनी व्यक्तिगत पसंद-नापसंद या मान्यताएं उनके अध्ययन के निष्कर्षों को प्रभावित करती हैं, जिससे वे निष्पक्ष नहीं रह पाते।

क्या समाजशास्त्रीय अनुसंधान केवल तथ्यों पर आधारित होता है?

आदर्श रूप से, समाजशास्त्रीय अनुसंधान को तथ्यों पर आधारित होना चाहिए, लेकिन सामाजिक विज्ञानों की प्रकृति के कारण, व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों और व्यक्तिपरकता का प्रभाव पूरी तरह से समाप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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समाजशास्त्रीय अनुसंधान का महत्व वस्तुनिष्ठता और व्यक्तिपरकता सामाजिक विज्ञानों में वस्तुनिष्ठता की चुनौतियाँ समाजशास्त्रीय अनुसंधान में पूर्वाग्रह

Topics covered

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NCERT Class 11 Sociology — Samaj Shastra Parichay-I — Chapter 5 — अधयाय 5. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.