NCERT Class 11 Geography Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant: Chapter 13 — महासागरीय जल
यह अध्याय महासागरीय जल की गतियों का विस्तृत वर्णन करता है, जिसमें क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों प्रकार की गतियाँ शामिल हैं। महासागरीय धाराएँ और लहरें क्षैतिज गतियों के उदाहरण हैं, जबकि ज्वार-भाटा ऊर्ध्वाधर गति से संबंधित है। अध्याय लहरों की उत्पत्ति, विशेषताओं जैसे तरंग शिखर, गर्त, ऊँचाई, आयाम, काल, तरंगदैर्ध्य, गति और आवृत्ति पर प्रकाश डालता है। यह बताता है कि कैसे वायु की गति तरंगों को उत्पन्न करती है और कैसे वे तटरेखा पर ऊर्जा स्थानांतरित करती हैं। ज्वार-भाटा की उत्पत्ति चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रीय बल के कारण होती है, जिसके परिणामस्वरूप दिन में दो बार समुद्र तल का नियतकालिक उठना और गिरना होता है। यह अध्याय छात्रों को महासागरीय जल की गतिकी और इसके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने में मदद करता है, जो भूगोल के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Geography |
| Book | Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant |
| Chapter | Chapter 13 — महासागरीय जल |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 5 minutes |
| Word count | 910 |
Learning outcomes
- महासागरीय जल की क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गतियों को समझना।
- लहरों की उत्पत्ति, विशेषताओं और व्यवहार का विश्लेषण करना।
- ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के कारणों (चंद्रमा, सूर्य, अपकेंद्रीय बल) की व्याख्या करना।
- महासागरीय जल संचलन के महत्व को पहचानना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| महासागरीय धाराएँ | एक निश्चित दिशा में बहुत बड़ी मात्रा में जल का लगातार बहाव। |
| लहरें | जल की क्षैतिज गति जो वायु द्वारा उत्पन्न होती है। |
| ज्वार-भाटा | चंद्रमा एवं सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण दिन में एक या दो बार समुद्र तल का नियतकालिक उठना या गिरना। |
| तरंग शिखर | एक तरंग का उच्चतम बिंदु। |
| तरंग गर्त | एक तरंग का निम्नतम बिंदु। |
| तरंगदैर्ध्य | दो लगातार शिखरों या गर्तों के बीच की क्षैतिज दूरी। |
| तरंग काल | एक निश्चित बिंदु से गुजरने वाले दो लगातार तरंग शिखरों या गर्तों के बीच का समयान्तराल। |
| अपकेंद्रीय बल | गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करने वाला बल जो ज्वार-भाटा उत्पन्न करने में सहायक है। |
| महोर्मि | जलवायु संबंधी प्रभावों (वायु एवं वायुमंडलीय दाब) के कारण जल की गति। |
The complete chapter text is read in the official NCERT PDF viewer below (streamed from ncert.nic.in). This page provides NCERT Help study material — summary, vocabulary, practice questions, and FAQs — not a full reproduction of the textbook.
Read chapter online
This PDF is loaded from the official NCERT website (ncert.nic.in). Use the page buttons below to read — download is disabled on NCERT Help.
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Practice questions
- महासागरीय जल की दो मुख्य गतियाँ कौन सी हैं? Answer: महासागरीय जल की दो मुख्य गतियाँ क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर हैं।
- लहरें कैसे उत्पन्न होती हैं? Answer: लहरें मुख्य रूप से वायु के जल की विपरीत दिशा में गति से उत्पन्न होती हैं, जब वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती है।
- ज्वार-भाटा किन खगोलीय पिंडों के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होता है? Answer: ज्वार-भाटा मुख्य रूप से चंद्रमा और कुछ हद तक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के कारण उत्पन्न होता है।
- तरंग शिखर और तरंग गर्त को परिभाषित करें। Answer: तरंग शिखर एक तरंग का उच्चतम बिंदु है और तरंग गर्त एक तरंग का निम्नतम बिंदु है।
Practice MCQs
Q1. महासागरीय जल की क्षैतिज गति से संबंधित कौन सी घटना है?
Explanation: लहरें जल की क्षैतिज गति से संबंधित हैं, जबकि ज्वार-भाटा ऊर्ध्वाधर गति से संबंधित है।
Q2. तरंगों में जल कण किस रूप में गति करते हैं?
Explanation: तरंगों में जल कण छोटे वृत्ताकार रूप में गति करते हैं, ऊर्जा आगे बढ़ती है, जल नहीं।
Q3. ज्वार-भाटा उत्पन्न करने में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के साथ कौन सा बल भी भूमिका निभाता है?
Explanation: चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के साथ-साथ अपकेंद्रीय बल भी ज्वार-भाटा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी है।
Q4. एक निश्चित बिंदु से गुजरने वाले दो लगातार तरंग शिखरों के बीच के समयान्तराल को क्या कहते हैं?
Explanation: दो लगातार तरंग शिखरों या गर्तों के बीच के समयान्तराल को तरंग काल कहा जाता है।
Q5. जब दो नॉट या उससे कम वाली समीर शांत जल पर बहती है, तब क्या बनता है?
Explanation: शांत जल पर कम गति वाली समीर से छोटी-छोटी उर्मिकाएँ बनती हैं, जो वायु की गति बढ़ने पर बड़ी हो जाती हैं।
Frequently asked questions
महासागरीय जल संचलन क्या है?
महासागरीय जल संचलन से तात्पर्य महासागरों में जल की क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर गतियों से है, जो तापमान, खारापन, घनत्व, सूर्य, चंद्रमा और वायु जैसे कारकों से प्रभावित होती हैं।
लहरें और धाराएँ में क्या अंतर है?
लहरें जल की क्षैतिज गति हैं जिनमें जल कण वृत्ताकार रूप में गति करते हैं, जबकि महासागरीय धाराएँ एक निश्चित दिशा में जल का लगातार और बड़ी मात्रा में बहाव हैं।
ज्वार-भाटा क्यों आते हैं?
ज्वार-भाटा मुख्य रूप से चंद्रमा और कुछ हद तक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल तथा पृथ्वी के अपकेंद्रीय बल के कारण आते हैं, जो समुद्र तल को ऊपर उठाते और नीचे गिराते हैं।
तरंग की ऊँचाई क्या होती है?
तरंग की ऊँचाई एक तरंग के निम्नतम बिंदु (गर्त) से उच्चतम बिंदु (शिखर) तक की ऊर्ध्वाधर दूरी होती है।
महोर्मि (Surge) क्या है?
महोर्मि जलवायु संबंधी प्रभावों जैसे वायु और वायुमंडलीय दाब में परिवर्तन के कारण जल की गति है, जो ज्वार-भाटा की तरह नियमित नहीं होती।
क्या तरंगें महासागर के गहरे तल को प्रभावित करती हैं?
नहीं, तरंगों का प्रभाव मुख्य रूप से सतह के जल तक सीमित होता है और वे महासागरों के गहरे तल के स्थिर जल को कदाचित ही प्रभावित करती हैं।
Related resources
Important topics
Topics covered
NCERT Class 11 Geography — Bhautique Bhugol ke Mool Sidhant — Chapter 13 — महासागरीय जल. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.