NCERT Class 11 Economics Sankhyiki: Chapter 5 — प्रस्तावना
यह अध्याय NCERT अर्थशास्त्र (सांख्यिकी) की कक्षा 11 की पुस्तक का पहला अध्याय, 'प्रस्तावना' है। यह अध्याय केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों का परिचय देता है, जो आँकड़ों के विशाल समुच्चय को एक एकल, प्रतिनिधि मान में संक्षिप्त करने की संख्यात्मक विधियाँ हैं। इसमें औसत अंक, औसत वर्षा, औसत उत्पादन और औसत आय जैसे दैनिक जीवन के उदाहरण शामिल हैं। अध्याय का उद्देश्य छात्रों को आँकड़ों को संक्षिप्त करने की आवश्यकता को समझने, विभिन्न प्रकार के औसतों (समांतर माध्य, माध्यिका, बहुलक) को समझने और उनकी गणना करने, और स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त औसत का चयन करने में सक्षम बनाना है। बैजू नामक एक किसान के उदाहरण का उपयोग करके, यह दर्शाता है कि कैसे केंद्रीय प्रवृत्ति के माप किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति की तुलना समुदाय के औसत से करने में मदद करते हैं। अध्याय में समांतर माध्य की गणना के लिए सूत्र भी प्रस्तुत किया गया है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Economics |
| Book | Sankhyiki |
| Chapter | Chapter 5 — प्रस्तावना |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 2 minutes |
| Word count | 340 |
Learning outcomes
- आँकड़ों के समुच्चय को एक संख्या द्वारा संक्षिप्त करने की आवश्यकता को समझना।
- विभिन्न प्रकार के औसतों (समांतर माध्य, माध्यिका, बहुलक) को समझना और उनमें अंतर करना।
- समांतर माध्य की गणना करना सीखना।
- यह तय करना कि किसी विशेष स्थिति के लिए कौन सा औसत सबसे अधिक उपयोगी है।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| केंद्रीय प्रवृत्ति | आँकड़ों के समुच्चय को एक एकल मान में संक्षिप्त करने की सांख्यिकीय विधि। |
| समांतर माध्य | सभी प्रेक्षणों के मूल्यों के योग को उनकी कुल संख्या से विभाजित करके प्राप्त किया जाने वाला औसत। |
| माध्यिका | आँकड़ों के समुच्चय को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर ठीक बीच में आने वाला मान। |
| बहुलक | आँकड़ों के समुच्चय में सबसे अधिक बार आने वाला मान। |
| आँकड़े | सूचना या डेटा का संग्रह। |
| प्रेक्षण | आँकड़ों के समुच्चय में प्रत्येक व्यक्तिगत मान। |
| संक्षेपण | आँकड़ों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करना। |
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Practice questions
- केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों की आवश्यकता क्यों होती है? Answer: केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों की आवश्यकता आँकड़ों के विशाल समुच्चय को एक एकल, प्रतिनिधि मान में संक्षिप्त करने के लिए होती है, जिससे उनकी व्याख्या आसान हो जाती है।
- समांतर माध्य की गणना का सूत्र क्या है? Answer: समांतर माध्य (X) की गणना का सूत्र है: X = (सभी प्रेक्षणों के मूल्यों का योग) / (प्रेक्षणों की कुल संख्या)। इसे ∑X / N के रूप में भी लिखा जाता है।
- माध्यिका और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति के कौन से माप हैं? Answer: माध्यिका और बहुलक केंद्रीय प्रवृत्ति के दो अन्य महत्वपूर्ण माप हैं, जो आँकड़ों के समुच्चय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Practice MCQs
Q1. आँकड़ों के विशाल समुच्चय को एक एकल मान में संक्षिप्त करने की विधि को क्या कहते हैं?
Explanation: केंद्रीय प्रवृत्ति के माप आँकड़ों के समुच्चय को एक प्रतिनिधि एकल मान में संक्षिप्त करते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन केंद्रीय प्रवृत्ति का सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला माप है?
Explanation: समांतर माध्य केंद्रीय प्रवृत्ति का सबसे सामान्य और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला माप है।
Q3. समांतर माध्य की गणना के लिए, प्रेक्षणों के मूल्यों के योग को किससे विभाजित किया जाता है?
Explanation: समांतर माध्य की गणना में, सभी प्रेक्षणों के योग को प्रेक्षणों की कुल संख्या से विभाजित किया जाता है।
Q4. बैजू के उदाहरण में, उसकी आर्थिक स्थिति की तुलना करने के लिए किस सांख्यिकीय अवधारणा का उपयोग किया गया है?
Explanation: बैजू के उदाहरण में, उसकी जोत के आकार की तुलना अन्य किसानों से करने के लिए केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों का उपयोग किया गया है।
Q5. यदि N प्रेक्षण X1, X2,..., XN हैं, तो समांतर माध्य का सूत्र क्या है?
Explanation: समांतर माध्य का सूत्र सभी प्रेक्षणों के योग (∑X) को प्रेक्षणों की कुल संख्या (N) से विभाजित करना है।
Frequently asked questions
केंद्रीय प्रवृत्ति के माप क्या हैं?
केंद्रीय प्रवृत्ति के माप वे सांख्यिकीय विधियाँ हैं जो आँकड़ों के एक बड़े समुच्चय को एक एकल, प्रतिनिधि मान में संक्षिप्त करती हैं, जैसे कि औसत।
समांतर माध्य की गणना कैसे की जाती है?
समांतर माध्य की गणना सभी प्रेक्षणों के मूल्यों को जोड़कर और फिर उस योग को प्रेक्षणों की कुल संख्या से विभाजित करके की जाती है।
माध्यिका और बहुलक क्या हैं?
माध्यिका वह मध्य मान है जब आँकड़ों को क्रमबद्ध किया जाता है, और बहुलक वह मान है जो आँकड़ों में सबसे अधिक बार आता है।
क्या केंद्रीय प्रवृत्ति के केवल तीन ही माप हैं?
नहीं, समांतर माध्य, माध्यिका और बहुलक सबसे प्रचलित हैं, लेकिन ज्यामितीय माध्य और हरात्मक माध्य जैसे अन्य औसत भी विशिष्ट परिस्थितियों में उपयोग किए जाते हैं।
यह अध्याय छात्रों को क्या सीखने में मदद करेगा?
यह अध्याय छात्रों को आँकड़ों को संक्षिप्त करने की आवश्यकता को समझने, विभिन्न प्रकार के औसतों की गणना करने और स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त औसत का चयन करने में मदद करेगा।
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NCERT Class 11 Economics — Sankhyiki — Chapter 5 — प्रस्तावना. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.