NCERT Class 11 Accountancy Lekhashastra-II: Chapter 2 — वित्तीय विवरण – 2 9

NCERT CBSE Class 11 Accountancy Lekhashastra-II Chapter 2 Hindi PDF

This chapter, 'Financial Statements – 2', builds upon the previous chapter by detailing the adjustments required for preparing final accounts in accounting. It emphasizes the accrual concept, where income is recognized when earned and expenses when incurred, not based on cash receipts or payments. The chapter explains the necessity of adjustments for items like prepaid and outstanding expenses, accrued and advance income, depreciation, bad debts, provision for doubtful debts, and provision for discounts. It also covers adjustments for manager's commission and interest on capital. The text provides examples, such as insurance premium paid in advance and outstanding salaries, to illustrate these concepts. Understanding these adjustments is crucial for presenting a true and fair view of a business's profitability and financial position in the profit and loss account and balance sheet. This chapter is vital for Class 11 students preparing for CBSE examinations in Accountancy.

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 11
SubjectAccountancy
BookLekhashastra-II
ChapterChapter 2 — वित्तीय विवरण – 2 9
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time4 minutes
Word count749

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
अंतिम खातेFinal Accounts
व्यापारिक खाताTrading Account
लाभ व हानि खाताProfit and Loss Account
तुलन-पत्रBalance Sheet
उपार्जन आधारAccrual Basis
अदत्त व्ययOutstanding Expenses
पूर्वदत्त व्ययPrepaid Expenses
उपार्जित आयAccrued Income
अग्रिम प्राप्त आयAdvance Income Received
ह्रासDepreciation
डूबत ऋणBad Debts
संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधनProvision for Doubtful Debts

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Practice questions

  1. समायोजन की आवश्यकता क्यों होती है? Answer: समायोजन की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि कुछ आय प्राप्तियाँ एवं भुगतान किए गए व्यय चालू लेखा अवधि से आंशिक या आगामी अवधि से संबंधित हो सकते हैं, या चालू अवधि से संबंधित कुछ आय तथा व्यय लेखा पुस्तकों में दर्शाना बाकी हो सकता है। इनके समायोजन के बिना अंतिम खाते वास्तविक स्थिति प्रदर्शित नहीं करेंगे।
  2. बकाया व्यय से आप क्या समझते हैं? Answer: बकाया व्यय वे व्यय होते हैं जो चालू लेखा अवधि में अर्जित हो चुके हैं लेकिन उनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
  3. पूर्वदत्त व्यय का क्या अर्थ है? Answer: पूर्वदत्त व्यय वे व्यय होते हैं जिनका भुगतान चालू लेखा अवधि से पहले ही कर दिया गया है, लेकिन उनका लाभ आगामी लेखा अवधि में प्राप्त होगा।
  4. उपार्जित आय को लाभ-हानि खाते में कैसे समायोजित किया जाता है? Answer: उपार्जित आय को लाभ-हानि खाते के नाम पक्ष में संबंधित आय में जोड़कर दिखाया जाता है और तुलन-पत्र के संपत्ति पक्ष में दर्शाया जाता है।
  5. अंतिम खातों में समायोजन कितनी बार किए जाते हैं? Answer: सभी समायोजन अंतिम खातों में दोहरी प्रविष्टि को पूरा करने के लिए दो स्थानों पर किए जाते हैं।

Practice MCQs

Q1. लेखांकन के किस परिकल्पना के अनुसार लाभ अथवा हानि की गणना की जाती है?

Q2. 1 जुलाई 2016 को 1,200 रुपये का बीमा प्रीमियम भुगतान किया गया, जिसका अंत 31 मार्च 2017 को होता है। 2016-17 के लाभ-हानि खाते में कितना बीमा प्रीमियम व्यय दिखाया जाएगा?

Q3. मार्च 2017 माह के वेतन का भुगतान 7 अप्रैल 2017 को किया गया। इसे क्या कहा जाएगा?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सी मद को आमतौर पर समायोजन की आवश्यकता होती है?

Q5. देनदारों पर बट्टे के लिए प्रावधन का समायोजन कहाँ किया जाता है?

Frequently asked questions

वित्तीय विवरणों में समायोजन क्यों महत्वपूर्ण हैं?

समायोजन यह सुनिश्चित करते हैं कि आय और व्यय को उपार्जन आधार पर दर्ज किया जाए, जिससे लाभ-हानि खाता और तुलन-पत्र एक व्यवसाय की वास्तविक वित्तीय स्थिति और लाभप्रदता को सही ढंग से दर्शा सकें।

अंतिम स्टॉक का समायोजन कैसे किया जाता है?

अंतिम स्टॉक को व्यापारिक खाते के जमा पक्ष में और तुलन-पत्र के संपत्ति पक्ष में दिखाया जाता है।

बकाया व्यय और पूर्वदत्त व्यय में क्या अंतर है?

बकाया व्यय वे हैं जो अर्जित हो चुके हैं पर भुगतान नहीं हुए, जबकि पूर्वदत्त व्यय वे हैं जिनका भुगतान हो चुका है पर लाभ आगामी अवधि में मिलेगा।

उपार्जित आय और अग्रिम प्राप्त आय में क्या अंतर है?

उपार्जित आय वह है जो अर्जित हो चुकी है पर प्राप्त नहीं हुई, जबकि अग्रिम प्राप्त आय वह है जो प्राप्त हो चुकी है पर अर्जित नहीं हुई है।

ह्रास को अंतिम खातों में कैसे समायोजित किया जाता है?

ह्रास को लाभ-हानि खाते के नाम पक्ष में व्यय के रूप में दिखाया जाता है और तुलन-पत्र में संबंधित संपत्ति के मूल्य से घटाया जाता है।

प्रबंधक कमीशन का समायोजन कैसे होता है?

प्रबंधक कमीशन की गणना लाभ के आधार पर की जाती है और इसे लाभ-हानि खाते के नाम पक्ष में व्यय के रूप में दिखाया जाता है, तथा तुलन-पत्र में एक दायित्व के रूप में दर्शाया जाता है।

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Important topics

समायोजन की आवश्यकता अदत्त व्यय और पूर्वदत्त व्यय उपार्जित आय और अग्रिम प्राप्त आय ह्रास और डूबत ऋणों के लिए प्रावधन लाभ-हानि खाता और तुलन-पत्र का समायोजन सहित निर्माण

Topics covered

समायोजन की आवश्यकता उपार्जन परिकल्पना अदत्त व्यय पूर्वदत्त व्यय उपार्जित आय अग्रिम प्राप्त आय ह्रास डूबत ऋण संदिग्ध ऋणों के लिए प्रावधन देनदारों पर बट्टे के लिए प्रावधन प्रबंधक कमीशन पूँजी पर ब्याज

NCERT Class 11 Accountancy — Lekhashastra-II — Chapter 2 — वित्तीय विवरण – 2 9. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.