NCERT Class 10 Hindi Sanchayan Bhag-2: Chapter 2 — अपाहिज

NCERT CBSE Class 10 Hindi Sanchayan Bhag-2 Chapter 2 Hindi PDF

यह अध्याय 'सपनों के-से दिन' बच्चों के बचपन के खेल और उनके सामाजिक-आर्थिक परिवेश का सजीव चित्रण करता है। लेखक अपने बचपन के साथियों का वर्णन करते हैं, जो अक्सर फटे-पुराने कपड़ों में, नंगे पैर खेलते थे। चोट लगने और पिटाई के बावजूद, खेलने का उनका उत्साह कम नहीं होता था। लेखक ने बाल मनोविज्ञान का अध्ययन करने के बाद समझा कि बच्चों के लिए खेलना इतना महत्वपूर्ण क्यों है। अध्याय में यह भी बताया गया है कि उस समय कई परिवार गाँवों से आकर बसे थे और उनके बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। कुछ बच्चे पढ़ाई में रुचि न होने के कारण स्कूल छोड़ देते थे, जबकि कुछ के माता-पिता उन्हें दुकानदारी या हिसाब-किताब सिखाने को प्राथमिकता देते थे, क्योंकि वे उन्हें तहसीलदार नहीं बनाना चाहते थे। यह अध्याय उस समय की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और बच्चों के जीवन पर उनके प्रभाव को दर्शाता है, जो आज के छात्रों को उस दौर की शिक्षा और बचपन की झलक देता है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 10
SubjectHindi
BookSanchayan Bhag-2
ChapterChapter 2 — अपाहिज
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time2 minutes
Word count360

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
कच्छीलड़कों का पहनावा, निकर जैसा
वुफर्तेकमीज़ या शर्ट
लथपथपूरी तरह से भीगा हुआ या सना हुआ
तरस खानादया करना
बाल-मनोविज्ञानबच्चों के मन और व्यवहार का अध्ययन
पंडतशिक्षक या पुजारी
लंडेहिसाब-किताब लिखने की पंजाबी प्राचीन लिपि
मुनीमीहिसाब-किताब रखने का काम
बहियाँखाता-बही, दुकान के हिसाब-किताब का ब्यौरा

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Practice questions

  1. लेखक के बचपन के साथियों के पहनावे का वर्णन करें। Answer: लेखक के बचपन के साथियों के पहनावे में नंगे पाँव, फटी-मैली कच्छी और टूटे बटनों वाले, कई जगह से फटे कुर्ते शामिल थे।
  2. बुरी तरह पिटाई होने पर भी बच्चे खेलने क्यों चले आते थे? Answer: बच्चों को खेलना बहुत अच्छा लगता था, इसलिए बुरी तरह पिटाई होने पर भी वे दूसरे दिन फिर खेलने चले आते थे। बाल मनोविज्ञान के अनुसार, यह उनके स्वाभाविक विकास का हिस्सा है।
  3. उस समय के कुछ परिवार गाँवों से आकर क्यों बसे थे? Answer: अध्याय में स्पष्ट रूप से इसका कारण नहीं बताया गया है, लेकिन यह उल्लेख है कि मुहल्ले में कई परिवार गाँवों से आकर बसे थे, जो उस समय के सामाजिक-आर्थिक पलायन का संकेत हो सकता है।
  4. कुछ माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय दुकानदारी क्यों सिखाना चाहते थे? Answer: वे बच्चों को तहसीलदार या उच्च पद पर नहीं देखना चाहते थे, बल्कि चाहते थे कि वे जल्द ही दुकान पर हिसाब-किताब (बहियाँ लिखना) सीखकर आत्मनिर्भर बन जाएँ।

Frequently asked questions

यह अध्याय किस पुस्तक का है और इसका शीर्षक क्या है?

यह अध्याय NCERT की कक्षा 10 की हिंदी पुस्तक 'संचयन भाग-2' का है और इसका शीर्षक 'सपनों के-से दिन' है।

अध्याय में बच्चों के खेलने के बारे में क्या बताया गया है?

अध्याय बताता है कि बच्चे फटे-पुराने कपड़ों में भी चोट लगने और पिटाई के बावजूद खेलने के लिए उत्साहित रहते थे, क्योंकि उन्हें खेलना बहुत प्रिय था।

उस समय शिक्षा को लेकर लोगों की क्या सोच थी?

कुछ लोग शिक्षा को केवल दुकानदारी या हिसाब-किताब सीखने तक सीमित मानते थे और बच्चों को तहसीलदार बनाने की इच्छा नहीं रखते थे।

लेखक ने बाल मनोविज्ञान का अध्ययन कब और क्यों किया?

लेखक ने स्कूल अध्यापक बनने के लिए ट्रेनिंग के दौरान बाल मनोविज्ञान का अध्ययन किया, ताकि वे समझ सकें कि बच्चे पिटाई के बाद भी खेलने क्यों चले जाते हैं।

'लंडे' और 'मुनीमी' का क्या अर्थ है?

'लंडे' हिसाब-किताब लिखने की एक पुरानी पंजाबी लिपि है और 'मुनीमी' हिसाब-किताब रखने का काम है।

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Important topics

बच्चों के खेलने के प्रति उत्साह और उसके कारण तत्कालीन सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का बच्चों के जीवन पर प्रभाव शिक्षा के प्रति अभिभावकों का दृष्टिकोण पारंपरिक व्यवसायों की ओर झुकाव

Topics covered

बच्चों का खेल बचपन का परिवेश सामाजिक-आर्थिक स्थिति शिक्षा का महत्व बाल मनोविज्ञान पारिवारिक प्राथमिकताएँ ग्रामीण-शहरी पलायन (संकेत) पारंपरिक शिक्षा

NCERT Class 10 Hindi — Sanchayan Bhag-2 — Chapter 2 — अपाहिज. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.