कक्षा 8 दूर्वा पाठ 2: दो गौरैया - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 8 की दूर्वा पाठ्यपुस्तक के पाठ 2, 'दो गौरैया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ भीष्म साहनी द्वारा लिखित एक मार्मिक कहानी है जो मानवीय भावनाओं, करुणा और पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। समाधानों में कहानी के पात्रों, विशेष रूप से माँ और पिताजी के दृष्टिकोण, गौरैयों के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं और उनके कार्यों के पीछे के कारणों का गहन विश्लेषण शामिल है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कैसे छोटे जीव भी अपने घर और परिवार के प्रति लगाव रखते हैं और हमें उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के चरित्र, उनकी प्रेरणाओं और कहानी के नैतिक संदेश को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectदूर्वा
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. दो गौरैया (कहानी)

Chapter summary

कक्षा 8 की दूर्वा पाठ्यपुस्तक के पाठ 2 'दो गौरैया' के ये NCERT समाधान कहानी के मुख्य पात्रों, गौरैयों के प्रति उनके व्यवहार और मानवीय भावनाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। समाधान कहानी के प्रश्नोत्तरों के माध्यम से पिताजी के गुस्से, माँ की करुणा और अंततः पिताजी के हृदय परिवर्तन को स्पष्ट करते हैं। यह पाठ पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता और उनके जीवन के महत्व पर जोर देता है। समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के विचारों और कार्यों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • पाठ 'दो गौरैया' के पात्रों के विचारों और भावनाओं को समझना।
  • पिताजी के गुस्से और माँ की करुणा के पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
  • पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के महत्व को पहचानना।
  • कहानी के माध्यम से घर, परिवार और करुणा के महत्व को समझना।
  • पाठ में वर्णित विभिन्न पशु-पक्षियों के मानवीय व्यवहारों को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • दो गौरैया कहानी का सारांश
  • पात्रों का विश्लेषण (माँ, पिताजी)
  • पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता
  • करुणा और सहानुभूति का महत्व
  • घर और परिवार का महत्व
  • मानवीय भावनाएं (गुस्सा, हँसी, दया)
  • कहानी का नैतिक संदेश
  • पशु-पक्षियों के मानवीय व्यवहार

Important topics

  • पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता का महत्व
  • माँ और पिताजी के चरित्र का विश्लेषण
  • कहानी का नैतिक संदेश: करुणा और घर का महत्व
  • पात्रों के भावनात्मक परिवर्तन

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Questions and Solutions

प्रश्न कः

दोनों गौरैयों को पिताजी जब घर से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे तो माँ क्यों मदद नहीं कर रही थी ? बस, वह हँसती क्यों जा रही थी ?
Solution: माँ पिताजी की मदद इसलिए नहीं कर रही थीं क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि गौरैयों का घर उजड़ जाए। वह जानती थीं कि गौरैया भी पिताजी के इस प्रयास को एक खेल समझ रही हैं। जब गौरैया घोंसले से गर्दन निकालकर बाहर झाँकतीं और फिर अंदर घुस जातीं, तो माँ को यह दृश्य एक खेल की तरह लगता और वह इसी बात पर हँसती जा रही थीं। वह गौरैयों के प्रति सहानुभूति रखती थीं।

प्रश्न खः

"देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो।" माँ ने पिताजी से गंभीरता से यह क्यों कहा ?
Solution: माँ ने पिताजी से यह बात गंभीरता से इसलिए कही क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता थी कि यदि गौरैयों ने घोंसले में अंडे दिए होंगे, तो पिताजी के घर तोड़ने के प्रयास में वे अंडे टूट सकते हैं। साथ ही, वह गौरैयों की परेशानी को भी समझ रही थीं और नहीं चाहती थीं कि उन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट हो।

प्रश्न गः

किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए, पिताजी ने गुस्से में ऐसा क्यों कहा? क्या पिताजी के इस कथन से माँ सहमत थी ? क्या तुम सहमत हो ? अगर नहीं तो क्यों?
Solution: पिताजी ने यह बात गुस्से में इसलिए कही क्योंकि वह गौरैयों को कमरे से बाहर निकालने पर अड़े हुए थे और उन्हें हटाने का कोई और तरीका नहीं सूझ रहा था। वह चाहते थे कि गौरैया खुद ही डरकर या परेशान होकर उड़ जाएँ, लेकिन जब वे नहीं उड़ीं तो उनका गुस्सा इस कथन के रूप में बाहर आया।

माँ पिताजी के इस कथन से बिल्कुल भी सहमत नहीं थीं। माँ का हृदय कोमल था और वह किसी भी जीव का घर तोड़ना उचित नहीं समझती थीं। वह सोच रही थीं कि अगर चिड़ियों का घर तोड़ा गया तो वे बेचारी कहाँ जाएँगी, उनके बच्चों और अंडों का क्या होगा।

हम भी माँ की तरह इस कथन से पूर्णतः असहमत हैं। किसी का भी घर तोड़ना, चाहे वह इंसान हो या पशु-पक्षी, गलत है। हर किसी को अपने घर से लगाव होता है और उसे नुकसान पहुँचाना अमानवीय है।

प्रश्न घः

कमरे में फिर से शोर होने पर भी पिताजी अबकी बार गौरैया की तरफ़ देखकर मुस्कुराते क्यों रहे ?
Solution: जब पिताजी घोंसला तोड़ने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने उसमें अंडे देखे, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका यह कार्य उचित नहीं है। अंडों को देखकर उनका हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने घोंसला वापस रख दिया। इसके बाद, जब उन्होंने गौरैया की तरफ देखा, तो उन्हें उसकी मासूमियत और अपने घर को बचाने की उसकी कोशिश दिखाई दी। इस स्थिति को समझकर और किसी का घर न तोड़ने के निर्णय पर पहुँचकर पिताजी मुस्कुराए। उन्हें यह भी समझ आ गया था कि कुछ दिनों बाद बच्चे बड़े होकर उड़ जाएँगे और समस्या अपने आप हल हो जाएगी।

2. पशु—पक्षी और हम

इस कहानी के शुरू में कई पशु – पक्षियों की चर्चा की गई है। कहानी में वे ऐसे कुछ काम करते हैं जैसे मनुष्य करते हैं। उनको ढूँढ़कर तालिका पूरी करो-

कः पक्षी कः घर का पता लिखवाकर लाए हैं।

खः बूढ़ा चूहा खः भाायद सर्दी लगने के कारण अंगीठी के पीछे छिपकर बैठा है।

गः बिल्ली गः मन आया तो अंदर आकर दूध पी गई, मन आया तो बाहर से ही 'फिर आउँगी' कहकर चली जाती है।

घः चमगादड़ घः शाम होते ही दो-तीन चमगादड़ कमरों के आर-पार पर फैलाकर कसरत करने लगते हैं।

  • ड: चींटियाँ
  • ड: चींटियों की फौज ही छावनी डाले हुए है।
Solution: कहानी में वर्णित पशु-पक्षियों के मानवीय व्यवहारों को निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है:

क) पक्षी: कहानी में पक्षियों (गौरैयों) के घर बनाने और उसमें रहने का वर्णन है, जो मनुष्यों के घर बनाने जैसा व्यवहार है।

ख) बूढ़ा चूहा: सर्दी लगने पर अंगीठी के पीछे छिपकर बैठना एक मानवीय व्यवहार है, जैसे मनुष्य ठंड से बचने के लिए गर्म स्थान ढूंढते हैं।

ग) बिल्ली: बिल्ली का अपनी मर्जी से अंदर आकर दूध पीना और फिर 'फिर आऊँगी' कहकर जाना, यह मनुष्यों के आने-जाने और अपनी इच्छाओं को व्यक्त करने जैसा व्यवहार है।

घ) चमगादड़: शाम होते ही कसरत करने के लिए कमरे में उड़ना, यह मनुष्यों द्वारा व्यायाम करने या शारीरिक गतिविधि करने जैसा है।

ड) चींटियाँ: चींटियों की फौज का एक साथ छावनी डाले हुए होना, यह मनुष्यों के समूह में रहने या किसी विशेष कार्य के लिए संगठित होने जैसा है।

Common mistakes

  • माँ की हँसी को केवल खेल समझना, उसके पीछे की करुणा को न समझ पाना।
  • पिताजी के गुस्से को केवल एक प्रतिक्रिया मानना, उसके पीछे के भावनात्मक कारण को न समझना।
  • पशु-पक्षियों के प्रति केवल बाहरी व्यवहार पर ध्यान देना, उनकी भावनाओं को अनदेखा करना।
  • कहानी के नैतिक संदेश को सतही तौर पर लेना, गहराई से न समझना।

Revision tips

  • कहानी के मुख्य पात्रों - माँ, पिताजी और गौरैयों - के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें।
  • उन घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करें जहाँ पात्रों की भावनाओं में परिवर्तन आता है, जैसे पिताजी का मुस्कुराना।
  • पशु-पक्षियों के प्रति करुणा और संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित करने वाले वाक्यों को याद करें।
  • कहानी के अंत में दिए गए पशु-पक्षियों के मानवीय व्यवहारों की तालिका को अच्छी तरह समझें।

Practice MCQs

Q1. पिताजी जब गौरैयों को घर से निकालने की कोशिश कर रहे थे, तब माँ हँस क्यों रही थी?

Q2. माँ ने पिताजी से 'चिड़ियों को मत निकालो' यह बात गंभीरता से क्यों कही?

Q3. पिताजी ने गुस्से में कहा, 'किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।' क्या माँ इस बात से सहमत थी?

Q4. अंत में पिताजी गौरैया की तरफ देखकर मुस्कुराए, इसका क्या कारण था?

Q5. कहानी में चींटियों के बारे में क्या कहा गया है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 8 की दूर्वा पाठ्यपुस्तक के हिंदी विषय के लिए है, विशेष रूप से पाठ 2 'दो गौरैया' पर केंद्रित है।

इन समाधानों में क्या शामिल है?

इन समाधानों में पाठ 'दो गौरैया' के सभी प्रश्नोत्तरों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर शामिल हैं, जो कहानी के पात्रों, उनकी भावनाओं और मुख्य संदेश को समझने में मदद करते हैं।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?

हाँ, ये समाधान कहानी के गहन विश्लेषण और मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हैं, जो छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होंगे।

कहानी 'दो गौरैया' का मुख्य संदेश क्या है?

कहानी का मुख्य संदेश पशु-पक्षियों के प्रति करुणा, संवेदनशीलता और उनके जीवन के महत्व को समझना है। यह हमें सिखाता है कि उनका भी एक घर और परिवार होता है, जिसे हमें सम्मान देना चाहिए।

माँ की हँसी का क्या महत्व है?

माँ की हँसी केवल मनोरंजन के लिए नहीं थी, बल्कि यह उनकी करुणा और इस विश्वास को दर्शाती थी कि गौरैया इसे खेल समझ रही हैं और उनका घर सुरक्षित रहेगा।

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