CBSE Class 8 Social Science पृष्ठ संख्या 129 NCERT Solutions
This comprehensive set of NCERT Solutions for CBSE Class 8 Social Science, focusing on page 129, delves into critical aspects of India's history and socio-political landscape. It explores the nuances of language and expression, particularly Jawaharlal Nehru's use of 'Vyanjana' (implied meaning) in his writings, contrasting it with direct and suggestive modes. The solutions also analyze the driving forces behind India's freedom struggle, highlighting the emergence of new intellectual forces and the pivotal role of Mahatma Gandhi in mobilizing the masses and transforming them into soldiers of independence. Furthermore, it examines the significance of the 'Bharat Mata Ki Jai' slogan, interpreting it as a call for the victory of the land, its people, and culture. The chapter also differentiates historical invasions from British colonial rule, emphasizing the latter's intent to establish a lasting economic and political dominion. Finally, it discusses the British government's ambivalent stance on education and the impact of global capitalism on India's economic structure. These solutions are designed to provide students with clear explanations and insights, aiding in their exam preparation and deepening their understanding of these vital historical and political concepts.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Social Science |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | पृष्ठ संख्या 129 |
Chapter summary
This chapter's NCERT Solutions for CBSE Class 8 Social Science, covering page 129, focuses on understanding different modes of expression in language, analyzing the role of intellectuals and Mahatma Gandhi in the Indian freedom movement, and interpreting nationalistic slogans like 'Bharat Mata Ki Jai'. It also contrasts historical invasions with British rule and examines the impact of British policies on education and the Indian economy under global capitalism. The solutions offer detailed explanations to help students grasp these complex historical and linguistic concepts.
Learning outcomes
- Understand the three main modes of expression: Abhidha, Lakshana, and Vyanjana.
- Analyze Jawaharlal Nehru's use of Vyanjana in his writings.
- Identify the 'new forces' and key leaders, like Mahatma Gandhi, who mobilized rural masses for the freedom struggle.
- Interpret the meaning and significance of the slogan 'Bharat Mata Ki Jai'.
- Differentiate between earlier foreign invasions and the establishment of British rule in India.
- Explain the British government's reasons for disliking the spread of education and their limited efforts in this regard.
- Analyze the impact of global capitalism on India's economic structure during and after British rule.
Topics covered
Paper topics
- Modes of Expression (Abhidha, Lakshana, Vyanjana)
- Jawaharlal Nehru's Writing Style
- Indian Freedom Struggle
- Role of Mahatma Gandhi
- Mobilization of Rural Masses
- Nationalist Slogans ('Bharat Mata Ki Jai')
- Comparison of Invasions and British Rule
- British Education Policy in India
- Impact of Capitalism on India's Economy
- Colonialism and Economic Exploitation
Important topics
- Modes of Expression in Language
- Mahatma Gandhi's Role in Freedom Struggle
- Distinction between British Rule and Earlier Invasions
- British Economic Policies and their Impact
- Significance of Nationalist Slogans
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
नेहरू जी का यह वाक्य व्यंजना शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। व्यंजना शैली में, लेखक सीधे तौर पर अपनी बात कहने के बजाय प्रतीकात्मक या अप्रत्यक्ष तरीके से अपनी बात रखता है, जिससे पाठक को अर्थ का अनुमान लगाना पड़ता है। इस वाक्य में, नेहरू जी सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन की आलोचना नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे व्यंग्यात्मक ढंग से यह बता रहे हैं कि ब्रिटिश शासन के कारण भारत की प्रगति रुकी। उन्होंने 'भारी बोझ' और 'कठिन कला' जैसे शब्दों का प्रयोग करके ब्रिटिश शासन के नकारात्मक प्रभाव को अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्त किया है। इस शैली का उद्देश्य विवादों से बचते हुए भी अपनी बात को प्रभावी ढंग से कहना है। अभिधा शैली में सीधा अर्थ निकलता है, जबकि लक्षणा शैली में किसी विशेष गुण के आधार पर अर्थ लिया जाता है। यहाँ नेहरू जी ने इन दोनों से हटकर, छिपे हुए अर्थ को व्यक्त करने के लिए व्यंजना का प्रयोग किया है, जो भारतीय जनता के लिए अधिक मार्मिक और विचारोत्तेजक है।
प्रश्न 2
आपके विचार से आज़ादी की लड़ाई के बारे में कही गई ये बातें उस 'नयी ताकत' की ओर इशारा कर रही हैं जो शिक्षित बुद्धिजीवियों के वर्ग से उभरी थी। इस वर्ग में नए और सक्रिय विचारों को समझने की क्षमता थी और इसी वर्ग ने आधुनिक चेतना का प्रसार किया। इन्होंने आज़ादी के मूल्यों को पहचाना और आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागृत किया।
इस 'नयी ताकत' के सबसे बड़े महानायक महात्मा गाँधी थे। वे भारत की करोड़ों जनता के बीच से निकलकर आए थे और उन्होंने भारत की दयनीय स्थिति को समझा। उन्होंने अंग्रेज़ों के दमनकारी शासन, जमींदारों और साहूकारों के अत्याचारों, बेकारी और भुखमरी से त्रस्त जनता को इन सब के विरुद्ध खड़े होने के लिए प्रेरित किया। गाँधीजी ने गरीबी और भूख से जूझ रही ग्रामीण जनता को चेताया, अपने साथियों को दूर-दूर गाँवों में भेजा, अपने ओजपूर्ण भाषणों से उनके अंदर स्वतंत्रता की भावना को जगाया। इस प्रकार, उन्होंने देश के हर हिस्से में स्वतंत्रता के लिए एक ऐसी सेना खड़ी की जो इतनी शक्तिशाली थी कि अंग्रेज़ों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। महात्मा गाँधी ने ही अपने अथक प्रयासों से भारत के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता का सिपाही बना दिया।
प्रश्न 3
जब हम 'भारत माता की जय' का नारा लगाते हैं, तो हम केवल किसी एक व्यक्ति या समूह की जय की बात नहीं करते, बल्कि हम भारत की संपूर्ण भूमि की जय की बात करते हैं। इसमें भारत की भौगोलिक स्थिति, उसकी धरती, नदियाँ, पहाड़, समुद्र और मैदान शामिल हैं। साथ ही, भारत के लोगों और उसकी समृद्ध संस्कृति को भी इसका अभिन्न अंग माना जाता है। इन सब से मिलकर बने 'भारत' को माँ के रूप में पूजते हुए हम उसकी जय करते हैं।
जवाहरलाल नेहरू ने भी इस विचार का समर्थन किया था। उनके अनुसार, भारत केवल किसी एक राज्य या जिले की मिट्टी नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की मिट्टी है। इसमें वे पहाड़, नदियाँ, जंगल और खेत भी शामिल हैं जो हमारा भरण-पोषण करते हैं। लेकिन इन सबसे भी महत्वपूर्ण भारत की जनता है जो इस विशाल भूखंड पर फैली हुई है। यही भारत माता का मूल रूप है। इसलिए, इस नारे में हमें इन सभी तत्वों - भूमि, प्रकृति, संस्कृति और जनता - की जय बोलनी चाहिए।
प्रश्न 4
(क) भारत पर प्राचीन काल से हुए कुछ प्रमुख विदेशी आक्रमणों की सूची कालानुक्रमिक क्रम में इस प्रकार है:
- लगभग 1000 ई. - महमूद गजनवी के आक्रमण
- 1191 ई. - मुहम्मद गोरी का तराइन का प्रथम युद्ध
- लगभग 1400 ई. - तैमूर लंग का आक्रमण
- 1526 ई. - बाबर का आक्रमण (पानीपत का प्रथम युद्ध)
- लगभग 1700 ई. से 1946 ई. तक - विभिन्न यूरोपीय शक्तियों (जैसे पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और विशेष रूप से ब्रिटिश) का प्रभाव और अंततः ब्रिटिश शासन की स्थापना।
(ख) भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना पहले के आक्रमणों से कई मायनों में अलग थी। पहले के अधिकांश आक्रमणकारी भारत की अपार धन-संपदा को लूटकर अपने देश वापस ले जाते थे और उनका भारत में स्थायी रूप से रहने का मुख्य उद्देश्य नहीं होता था। मुगल साम्राज्य एक अपवाद था जिसने भारत में एक स्थायी साम्राज्य स्थापित किया। अधिकांश अन्य आक्रमणों ने भारत की सभ्यता को नष्ट करने का प्रयास किया।
इसके विपरीत, अंग्रेज़ी सरकार का उद्देश्य भारत को केवल लूटना नहीं था, बल्कि उसे अपने उपनिवेश के रूप में स्थापित करना था। वे भारत को एक कच्चे माल के स्रोत और अपने तैयार माल के बाज़ार के रूप में इस्तेमाल करना चाहते थे। उन्होंने सीधे तौर पर खून-खराबा करने के बजाय, व्यापार के माध्यम से भारत में प्रवेश किया और धीरे-धीरे अपनी कूटनीति और बुद्धि का प्रयोग करके पूरे देश पर कब्ज़ा कर लिया। उन्होंने विद्रोह होने पर ही दमन का सहारा लिया, लेकिन उनका मुख्य लक्ष्य भारत पर स्थायी प्रभुत्व स्थापित करना था, न कि केवल धन लूटना। इस प्रकार, अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना एक व्यवस्थित औपनिवेशिक शासन की स्थापना थी, जो पहले के आक्रमणों से भिन्न थी।
प्रश्न 23
(क) अंग्रेज़ी सरकार भारत में शिक्षा के प्रसार को इसलिए नापसंद करती थी क्योंकि वह जानती थी कि शिक्षा मनुष्य के विकास के सभी रास्ते खोल देती है। सरकार यह नहीं चाहती थी कि भारतीय समाज में इतनी मजबूती आए। भारत में शिक्षा के अभाव के कारण अधिकांश जनता अशिक्षित थी और पुरानी रूढ़ियों में फंसी हुई थी, जो अंग्रेज़ी शासन के लिए सुविधाजनक था। यदि लोग शिक्षित हो जाते, तो उनमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आती और वे अंग्रेज़ी शासन के लिए एक बड़ा खतरा बन सकते थे। इसलिए, सरकार शिक्षा के व्यापक प्रसार को अपने शासन के लिए हानिकारक मानती थी।
(ख) शिक्षा के प्रसार को नापसंद करने के बावजूद, अंग्रेज़ी सरकार को कुछ हद तक शिक्षा के क्षेत्र में काम करना पड़ा, जिसका मुख्य कारण उनका अपना स्वार्थ था। भारत में अपने शासन को सुचारू रूप से चलाने और अपनी बढ़ती व्यवस्था के लिए, उन्हें बड़ी संख्या में क्लर्कों और प्रशासनिक कर्मचारियों की आवश्यकता थी। इन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए, सरकार को सीमित स्तर पर ही सही, शिक्षा का प्रसार करना पड़ा। यद्यपि यह शिक्षा पूर्ण और व्यापक नहीं थी, फिर भी इसने भारतीयों के दिमाग में नए विचारों के द्वार खोले और उनमें आधुनिक चेतना का प्रसार किया, जिससे भारतीय समाज में परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई।
प्रश्न 24
हाँ, यह बिल्कुल सच है कि नया पूँजीवाद, जो आज पूरे विश्व में बाज़ार तैयार कर रहा है, उसका भारत के आर्थिक ढाँचे पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। ब्रिटिश शासन के दौरान, पूँजीवाद ने भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को हिला दिया था, जिससे भारत एक औपनिवेशिक और खेतिहर अर्थव्यवस्था बनकर रह गया था।
आज भी, वैश्वीकरण और उदारीकरण के इस दौर में, वैश्विक पूँजीवाद का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। इसके कुछ प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
- स्थानीय उद्योगों का पतन: विदेशी उत्पादों के बढ़ते चलन और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण भारत के छोटे और स्थानीय उद्योग-धंधे प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं और धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं।
- पूँजी का बहिर्गमन: भारत की पूँजी बड़े पैमाने पर विदेशी कंपनियों और वैश्विक बाज़ारों में निवेशित हो रही है, जिससे देश के भीतर धन का प्रवाह कम हो रहा है।
- विदेशी उत्पादों पर निर्भरता: भारतीय बाज़ार आज विदेशी उत्पादों से भरा पड़ा है, जिससे उपभोक्ता अपनी स्थानीय वस्तुओं के बजाय आयातित वस्तुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- धन का संकेंद्रण: वैश्विक पूँजीवाद के कारण धन कुछ बड़े पूँजीपतियों और निगमों के हाथों में केंद्रित हो रहा है, जिससे आय असमानता बढ़ रही है।
इस प्रकार, जिस तरह ब्रिटिश शासन के दौरान वैश्विक पूँजीवाद ने भारत के आर्थिक ढाँचे को प्रभावित किया था, उसी तरह आज भी यह भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और आम जनता के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
Common mistakes
- Confusing the different modes of literary expression (Abhidha, Lakshana, Vyanjana).
- Underestimating the role of intellectual movements and leaders like Gandhi in the freedom struggle.
- Failing to distinguish the unique nature of British colonial rule from earlier invasions.
- Not understanding the economic motivations behind British policies on education and trade.
- Overlooking the long-term impact of global capitalism on India's economy.
Revision tips
- Focus on understanding the examples provided for Abhidha, Lakshana, and Vyanjana to clarify their meanings.
- Create a timeline of key events and leaders associated with the Indian freedom movement discussed in the solutions.
- Compare and contrast the characteristics of British rule with previous invasions to highlight its distinct nature.
- Analyze the cause-and-effect relationships between British policies and their impact on Indian society and economy.
- Practice explaining the significance of nationalistic slogans like 'Bharat Mata Ki Jai' in your own words.
Practice MCQs
Q1. नेहरू जी के वाक्य में किस प्रकार की शैली का प्रयोग किया गया है, जहाँ सीधे प्रहार न कर प्रतीक के रूप में बात कही जाती है?
Explanation: व्यंजना शैली में लेखक सीधे तौर पर अपनी बात कहने के बजाय प्रतीकों या घुमावदार भाषा का प्रयोग करता है, जैसा कि नेहरू जी के वाक्य में देखा गया है।
Q2. आज़ादी की लड़ाई में ग्रामीण जनता को सिपाही बनाने में किस महानायक की भूमिका प्रमुख थी?
Explanation: महात्मा गाँधी ने अपने ओजपूर्ण भाषणों और जमीनी स्तर पर प्रयासों से ग्रामीण जनता को स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
Q3. 'भारत माता की जय' नारे में मुख्य रूप से किसकी जय की बात कही जाती है?
Explanation: इस नारे में भारत की भौगोलिक भूमि, उसकी नदियों, पहाड़ों, खेतों के साथ-साथ वहाँ रहने वाले लोगों और उनकी संस्कृति को अभिन्न अंग मानकर 'भारत माता' के रूप में जय घोष किया जाता है।
Q4. अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना पहले के आक्रमणों से किस प्रकार भिन्न थी?
Explanation: पहले के आक्रमणकारी धन लूटकर चले जाते थे, जबकि अंग्रेजों ने भारत को अपना उपनिवेश बनाया, उसका आर्थिक शोषण किया और लंबे समय तक शासन किया।
Q5. अंग्रेज़ी सरकार शिक्षा के प्रसार को क्यों नापसंद करती थी?
Explanation: अंग्रेज़ी सरकार जानती थी कि शिक्षा भारतीयों में जागृति ला सकती है और वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो सकते हैं, जो उनके शासन के लिए खतरा था।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान विषय के लिए है, जो पृष्ठ संख्या 129 पर आधारित है।
समाधान में भाषा की किन तीन प्रमुख शैलियों का उल्लेख किया गया है?
समाधान में भाषा की तीन प्रमुख शैलियाँ बताई गई हैं: अभिधा, लक्षणा और व्यंजना।
महात्मा गाँधी ने आज़ादी की लड़ाई में ग्रामीण जनता को कैसे जोड़ा?
महात्मा गाँधी ने ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया, उन्हें अत्याचारों के विरुद्ध खड़ा होने के लिए प्रेरित किया और अपने भाषणों से उनमें स्वतंत्रता की ज्वाला जलाई।
अंग्रेज़ी शासन को पहले के आक्रमणों से अलग क्यों माना जाता है?
पहले के आक्रमणकारी धन लूटकर चले जाते थे, जबकि अंग्रेजों का उद्देश्य भारत को अपना उपनिवेश बनाकर आर्थिक शोषण करना और लंबे समय तक शासन करना था।
अंग्रेज़ी सरकार शिक्षा के प्रसार को क्यों नापसंद करती थी?
सरकार को डर था कि शिक्षा से भारतीयों में जागृति आएगी और वे अपने अधिकारों के लिए सचेत हो जाएंगे, जो उनके शासन के लिए खतरा था।
'भारत माता की जय' नारे का क्या अर्थ है?
इस नारे का अर्थ है भारत की भूमि, उसके लोगों और उसकी संस्कृति की जय, जो मिलकर 'भारत माता' का निर्माण करते हैं।
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