Class 7 Hindi Vasant Chapter 14: खानपान की बदलती तसवीर NCERT Solutions

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This chapter, 'Khanpan Ki Badalti Tasveer' (The Changing Picture of Food and Drink), from CBSE Class 7 Hindi Vasant, delves into the evolution of food habits in India. The NCERT Solutions provided here explain the concept of a 'mixed food culture' where regional and international cuisines blend. It discusses the advantages of this culinary diversity, such as exposure to different cultures and national unity, while also highlighting the concerns raised by the author regarding the decline of local dishes and potential health implications. The solutions also explore the meaning of 'locality' in food and encourage students to reflect on their own household food practices. These solutions are designed to help students understand the nuances of changing food trends and prepare effectively for their exams.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectवसंत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14. खानपान की बदलती तसवीर

Chapter summary

Chapter 14, 'Khanpan Ki Badalti Tasveer', focuses on the transformation of food habits in India. The NCERT Solutions explain the concept of a mixed food culture, its benefits like cultural exchange and national integration, and the author's concerns about the loss of local culinary traditions and potential health issues. It also prompts students to analyze their own food consumption patterns and differentiate between cooking methods and tastes. This chapter's solutions are crucial for understanding the socio-cultural impact of changing food trends.

Learning outcomes

  • Understand the concept of 'mixed food culture' in India.
  • Analyze the advantages and disadvantages of changing food habits.
  • Explain the significance of local cuisines.
  • Identify different cooking methods and taste profiles.
  • Reflect on personal and family food consumption patterns.

Topics covered

Paper topics

  • खानपान की मिश्रित संस्कृति (Mixed Food Culture)
  • खानपान में बदलाव के फायदे (Benefits of Changing Food Habits)
  • खानपान में बदलाव की चिंताएं (Concerns about Changing Food Habits)
  • स्थानीय व्यंजनों का महत्व (Importance of Local Cuisines)
  • पकाने की विधियाँ (Cooking Methods)
  • स्वाद के प्रकार (Types of Tastes)
  • भोजन की आदतों का सामाजिक प्रभाव (Social Impact of Food Habits)
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान (Cultural Exchange)
  • राष्ट्रीय एकता (National Unity)
  • खानपान की विविधता (Food Diversity)

Important topics

  • खानपान की मिश्रित संस्कृति की अवधारणा
  • बदलाव के फायदे और लेखक की चिंताएं
  • स्थानीय व्यंजनों का घटता प्रचलन
  • पकाने की विधियों और स्वादों का वर्गीकरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

खानपान की मिश्रित संस्कृति से लेखक का क्या मतलब है? अपने घर के उदाहरण देकर इसकी व्याख्या करें।
Solution: लेखक का 'खानपान की मिश्रित संस्कृति' से तात्पर्य उस स्थिति से है जहाँ विभिन्न क्षेत्रों और देशों के खान-पान एक साथ उपलब्ध होते हैं और लोग उन्हें अपने दैनिक भोजन में शामिल करते हैं। यह विभिन्न संस्कृतियों के मेलजोल का परिणाम है, जो अक्सर लोगों के प्रवास, नौकरी या व्यापार के कारण होता है। उदाहरण के लिए, मेरे घर में, जो कि कोलकाता में स्थित है और मैं एक बंगाली परिवार से हूँ, हमारा पारंपरिक भोजन चावल और मछली है। हालाँकि, अब हम केवल इसी तक सीमित नहीं हैं। हम दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे इडली और सांभर, और पश्चिमी फास्ट फूड जैसे बर्गर और नूडल्स का भी आनंद लेते हैं। ये व्यंजन अब बाज़ार से खरीदे जाने के बजाय अक्सर घर पर ही तैयार किए जाते हैं, जो मिश्रित खानपान संस्कृति का एक स्पष्ट उदाहरण है।

प्रश्न 2

खानपान में बदलाव के कौन से फ़ायदे हैं? फिर लेखक इस बदलाव को लेकर चिंतित क्यों है?
Solution: खानपान में बदलाव के कई फायदे हैं, जिनमें शामिल हैं:
  1. सांस्कृतिक ज्ञान: विभिन्न प्रदेशों की संस्कृतियों और उनके व्यंजनों को जानने और समझने का अवसर मिलता है।
  2. राष्ट्रीय एकता: विभिन्न प्रकार के खान-पान के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलता है।
  3. रुचिकर भोजन: अलग-अलग तरह के व्यंजन खाने को मिलते हैं, जिससे भोजन में रुचि बनी रहती है।
  4. वैश्विक जानकारी: देश-विदेश के खान-पान और व्यंजनों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
  5. सुविधा: गृहिणियों और कामकाजी महिलाओं के लिए जल्दी तैयार होने वाले विविध व्यंजनों की विधियाँ उपलब्ध होती हैं, जिससे समय की बचत होती है।
  6. चयन की स्वतंत्रता: लोग स्वाद, स्वास्थ्य और सरसता के आधार पर अपने भोजन का चयन कर सकते हैं।
इन फायदों के बावजूद, लेखक इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसके कुछ नकारात्मक परिणाम भी हो रहे हैं:
  1. स्थानीय व्यंजनों का ह्रास: नई पीढ़ी स्थानीय व्यंजनों से अनभिज्ञ होती जा रही है क्योंकि उनका चलन कम होता जा रहा है।
  2. शुद्धता में कमी: खाद्य पदार्थों में शुद्धता की कमी देखी जा रही है।
  3. स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ: कुछ व्यंजन स्वास्थ्य की दृष्टि से उतने उपयुक्त नहीं हैं और उनमें पौष्टिक तत्वों का अभाव हो सकता है।
इसलिए, जहाँ खानपान में विविधता स्वागत योग्य है, वहीं स्थानीय परंपराओं और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना भी आवश्यक है।

प्रश्न 3

खानपान के मामले में स्थानीयता का क्या अर्थ है?
Solution: खानपान के मामले में 'स्थानीयता' का अर्थ है उन व्यंजनों से जो किसी विशेष क्षेत्र की अपनी पसंद, उपलब्ध सामग्री और स्थानीय परंपराओं के आधार पर पारंपरिक रूप से तैयार किए जाते थे। इन व्यंजनों का उस क्षेत्र की संस्कृति और पहचान से गहरा संबंध होता था। उदाहरण के तौर पर, मुंबई की पाव-भाजी, दिल्ली के छोले-कुलचे, मथुरा के पेड़े, आगरा के पेठे-नमकीन, या किसी प्रदेश की विशेष जलेबियाँ, पूड़ी और कचौड़ी स्थानीय व्यंजनों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। इन व्यंजनों का अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष महत्व था और ये आसानी से उपलब्ध होते थे। हालाँकि, खानपान की मिश्रित संस्कृति के प्रसार के कारण, लोगों के पास अब इतने सारे विकल्प उपलब्ध हैं कि इन पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों का प्रचलन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

प्रश्न 4

घर में बातचीत करके पता कीजिए कि आपके घर में क्या चीज़ें पकती हैं और क्या चीज़ें बनी-बनाई बाज़ार से आती हैं? इनमें से बाज़ार से आनेवाली कौन सी चीज़ें आपके माँ-पिता जी के बचपन में घर में बनती थीं?
Solution: इस प्रश्न का उत्तर व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित होगा। यहाँ एक उदाहरण दिया गया है कि कैसे कोई छात्र इसका उत्तर दे सकता है:

घर में बनने वाली चीजें:

  • भात (चावल)
  • दाल
  • रोटी/पराठे
  • सब्जियाँ
  • हलवा

बाजार से आने वाली चीजें:

  • समोसे
  • कचौड़ी
  • जलेबियाँ
  • पेड़े/मिठाई
  • बर्गर/नूडल्स (कभी-कभी)

मेरे माँ-पिताजी के बचपन में घर में बनने वाली बाजार से आने वाली चीजें:

  • समोसे (पहले घर पर बनते थे, अब बाजार से लाते हैं)
  • कचौड़ी (पहले घर पर बनती थी, अब बाजार से लाते हैं)
  • जलेबियाँ (पहले घर पर बनती थीं, अब बाजार से लाते हैं)
  • पेड़े/मिठाई (कुछ खास मौकों पर घर पर बनती थी, अब अक्सर बाजार से आती है)
यह अवलोकन दर्शाता है कि कैसे समय के साथ खान-पान की आदतें बदली हैं, और कुछ व्यंजन जो पहले घर पर बनते थे, अब सुविधा के लिए बाजार से खरीदे जाते हैं।

प्रश्न 5

यहाँ खाने, पकाने और स्वाद से संबंधित कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए और इनका वर्गीकरण कीजिए - उबालना, तलना, भूनना, सेंकना, दाल, भात, रोटी, पापड़, आलू, बेंगन, खट्टा, मीठा, तीखा, नमकीन, कसैला।
Solution: दिए गए शब्दों को उनके अर्थ के अनुसार निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

भोजन कैसे पकाया जाता है (पकाने की विधियाँ):

  • उबालना (Boiling)
  • तलना (Frying)
  • भूनना (Roasting/Grilling)
  • सेंकना (Baking/Roasting)

भोजन के प्रकार (खाद्य पदार्थ):

  • दाल
  • भात (चावल)
  • रोटी
  • पापड़
  • आलू
  • बैंगन

स्वाद (Taste):

  • खट्टा (Sour)
  • मीठा (Sweet)
  • तीखा (Spicy/Hot)
  • नमकीन (Salty)
  • कसैला (Astringent)
यह वर्गीकरण हमें विभिन्न खाद्य पदार्थों, उन्हें पकाने के तरीकों और उनके विभिन्न स्वादों को समझने में मदद करता है।

Common mistakes

  • Confusing the benefits of mixed food culture with its drawbacks.
  • Not clearly distinguishing between local and global food influences.
  • Failing to provide specific examples from personal experience when asked.
  • Incorrectly classifying cooking methods or taste descriptors.

Revision tips

  • Focus on understanding the author's perspective on the 'mixed food culture'.
  • List the pros and cons of changing food habits discussed in the chapter.
  • Think about examples of local dishes from your own region.
  • Practice categorizing food-related words as shown in the exercises.

Practice MCQs

Q1. लेखक के अनुसार, खानपान की मिश्रित संस्कृति का क्या अर्थ है?

Q2. खानपान में बदलाव का एक फ़ायदा क्या है?

Q3. लेखक खानपान में बदलाव को लेकर क्यों चिंतित हैं?

Q4. खानपान के मामले में 'स्थानीयता' का क्या अर्थ है?

Q5. दिए गए शब्दों में से कौन सा 'स्वाद' से संबंधित नहीं है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के हिंदी वसंत पाठ 14 का मुख्य विषय क्या है?

पाठ 14, 'खानपान की बदलती तसवीर', भारत में खान-पान की आदतों में हो रहे बदलावों, मिश्रित खाद्य संस्कृति के उदय और इसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर केंद्रित है।

खानपान की मिश्रित संस्कृति से क्या तात्पर्य है?

इसका तात्पर्य है कि विभिन्न क्षेत्रों और देशों के खान-पान अब एक साथ उपलब्ध हैं और लोग अपनी पसंद के अनुसार उन्हें अपने भोजन में शामिल कर रहे हैं, जिससे एक मिली-जुली खाद्य संस्कृति बन रही है।

लेखक खानपान में बदलाव के क्या फायदे बताते हैं?

लेखक बताते हैं कि इससे विभिन्न संस्कृतियों को जानने, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, खाने में रुचि बनाए रखने और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों तक पहुँचने का मौका मिलता है।

लेखक खानपान में बदलाव को लेकर क्यों चिंतित हैं?

लेखक चिंतित हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस बदलाव से स्थानीय व्यंजनों का चलन कम हो रहा है, खाद्य पदार्थों में शुद्धता घट रही है और कुछ व्यंजन स्वास्थ्य के लिए उतने उपयुक्त नहीं हैं।

क्या ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ की अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, मुख्य बिंदुओं को समझाते हैं और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक हैं।

पाठ में 'स्थानीयता' शब्द का क्या अर्थ है?

खानपान के संदर्भ में 'स्थानीयता' का अर्थ है वे व्यंजन जो किसी विशेष क्षेत्र की पसंद, उपलब्ध सामग्री और परंपराओं के आधार पर बनते थे, जैसे मुंबई की पाव-भाजी या दिल्ली के छोले-कुलचे।

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