कक्षा 6 इतिहास: नए साम्राज्य और राज्य - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 11, 'नए साम्राज्य और राज्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय गुप्त साम्राज्य के उदय, समुद्रगुप्त जैसे शक्तिशाली शासकों की विजयों, और उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रकाश डालता है। समाधानों में राजाओं के युद्ध लड़ने के तरीकों, विभिन्न शासकों के प्रति समुद्रगुप्त की नीतियों, उपाधियों के महत्व, और हर्षवर्धन के साम्राज्य के विस्तार जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय प्राचीन भारत में व्यापार मार्गों, जैसे कि अरब का महत्व, और इस्लाम धर्म के उदय की प्रारंभिक जानकारी भी प्रदान करता है। ये समाधान छात्रों को अध्याय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. नए साम्राज्य और राज्य

Chapter summary

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 11 'नए साम्राज्य और राज्य' के ये NCERT समाधान गुप्त काल के महत्वपूर्ण साम्राज्यों और राज्यों की पड़ताल करते हैं। इनमें समुद्रगुप्त की विजयों, आर्यावर्त और दक्षिणापथ के शासकों के प्रति उसकी नीतियों, और विभिन्न उपाधियों के अर्थ पर चर्चा की गई है। समाधान हर्षवर्धन के साम्राज्य के विस्तार और प्राचीन व्यापार मार्गों, विशेषकर अरब के महत्व को भी स्पष्ट करते हैं। यह अध्याय छात्रों को उस युग की राजनीतिक और सामाजिक संरचना को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • राजाओं के युद्ध लड़ने की विधियों को समझना।
  • समुद्रगुप्त की विजयों और उसके साम्राज्य विस्तार की नीतियों का विश्लेषण करना।
  • आर्यावर्त और दक्षिणापथ के राज्यों के प्रति समुद्रगुप्त के भिन्न व्यवहार के कारणों को समझना।
  • विभिन्न उपाधियों के महत्व और उनके पदानुक्रम को पहचानना।
  • हर्षवर्धन के साम्राज्य के विस्तार से संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करना।
  • प्राचीन काल में व्यापार और यातायात के महत्वपूर्ण केंद्रों को जानना।
  • इस्लाम धर्म के उदय और उसके प्रारंभिक सिद्धांतों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • गुप्त साम्राज्य का उदय
  • समुद्रगुप्त की विजयें
  • आर्यावर्त और दक्षिणापथ के शासक
  • समुद्रगुप्त की नीतियाँ
  • शासकों की उपाधियाँ
  • हर्षवर्धन का साम्राज्य
  • प्राचीन भारत के व्यापार मार्ग
  • अरब का महत्व
  • इस्लाम धर्म का उदय
  • प्राकृत भाषा का प्रयोग

Important topics

  • समुद्रगुप्त की विजयें और नीतियाँ
  • आर्यावर्त बनाम दक्षिणापथ
  • उपाधियों का पदानुक्रम
  • हर्षवर्धन के साम्राज्य का विस्तार
  • अरब और समुद्री व्यापार

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

यह वर्णन तुम्हें उस राजा के बारे में क्या बताता है? राजा किस प्रकार युद्ध लड़ते थे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-112)
Solution: इस वर्णन से पता चलता है कि राजा युद्ध के मैदान में सीधे अपने विरोधियों का सामना करते थे और वीरता से लड़ते थे। वे युद्ध में अपनी शक्ति और कौशल का प्रदर्शन करते थे। राजा युद्ध लड़ने के लिए गदा, तलवार, भाला और तीर जैसे विभिन्न हथियारों का प्रयोग करते थे। यह आमने-सामने की लड़ाई का एक तरीका था, जिसमें शारीरिक बल और साहस का विशेष महत्व होता था।

प्रश्न 2

आर्यावर्त तथा दक्षिणापथ के राज्यों के साथ समुद्रगुप्त के व्यवहार में क्या अंतर था? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-113)
Solution: समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के शासकों के प्रति अधिक कठोर नीति अपनाई। उसने उन्हें युद्ध में हराया और उनके राज्यों को अपने विशाल साम्राज्य में मिला लिया। इसके विपरीत, दक्षिणापथ के शासकों के प्रति उसकी नीति थोड़ी भिन्न थी। उसने उन्हें युद्ध में हराया तो, लेकिन बाद में उन्हें अपने राज्यों पर फिर से शासन करने की अनुमति दे दी। इसका मुख्य कारण यह था कि दक्षिणापथ के राज्य समुद्रगुप्त की राजधानी से बहुत दूर थे, जिस पर सीधे नियंत्रण रखना कठिन था। इसलिए, उसने उन्हें अधीनता स्वीकार करने पर शासन जारी रखने की छूट दी, जिससे साम्राज्य का विस्तार भी हुआ और स्थानीय प्रशासन भी चलता रहा।

प्रश्न 3

इन उपाधियों को महत्त्व के हिसाब से सजाओ। राजा, महाराज-अधिराज, महा-राजा।। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-114)
Solution: इन उपाधियों को उनके महत्व के बढ़ते क्रम में इस प्रकार सजाया जा सकता है:
  1. राजा
  2. महा-राजा
  3. महाराज-अधिराज
'राजा' सबसे सामान्य उपाधि है। 'महा-राजा' का अर्थ है 'बड़ा राजा', जो संभवतः अधिक शक्तिशाली या बड़े क्षेत्र पर शासन करने वाले राजा के लिए प्रयुक्त होता था। 'महाराज-अधिराज' का अर्थ है 'राजाओं का राजा', जो सर्वोच्च शासक या सम्राट की उपाधि थी, जिसका अर्थ है कि वह अन्य राजाओं से भी श्रेष्ठ है।

प्रश्न 4

मानचित्र 8 (पृष्ठ 136) देखो और सूची बनाओ कि जब हर्षवर्धन (क) बंगाल तथा (ख) नर्मदा तक गए होंगे तो आज के किन-किन राज्यों से गुजरे होंगे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-115)
Solution:

मानचित्र के आधार पर, जब हर्षवर्धन यात्रा कर रहे होंगे, तो आज के राज्यों से उनका मार्ग कुछ इस प्रकार रहा होगा:

(क) बंगाल जाने के लिए: उन्हें संभवतः आज के उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड राज्यों से गुजरना पड़ा होगा। ये क्षेत्र उस समय हर्षवर्धन के साम्राज्य का हिस्सा हो सकते थे या उनके मार्ग में पड़ते थे।

(ख) नर्मदा तक जाने के लिए: नर्मदा नदी तक पहुँचने के लिए उन्हें संभवतः आज के उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों से गुजरना पड़ा होगा। ये क्षेत्र भी उनके साम्राज्य के विस्तार या प्रभाव क्षेत्र में आते थे।

प्रश्न 5

वे कौन-से अन्य शासक थे जो तटों पर अपना नियंत्रण करना चाहते थे? । (एन॰सी॰ई॰आर॰टी॰ पाठ्यपुस्तक, पेज-116)
Solution: वे अन्य शासक जो तटों पर अपना नियंत्रण करना चाहते थे, वे थे चोल, चेर और पांड्य। ये दक्षिण भारत के प्रमुख राजवंश थे जो समुद्री व्यापार और तटीय क्षेत्रों के महत्व को समझते थे। इसके अतिरिक्त, सातवाहन शासक भी ऐसे थे जो तटों पर नियंत्रण रखने में रुचि रखते थे, क्योंकि यह व्यापार और राजस्व के लिए महत्वपूर्ण था।

प्रश्न 6

सोचकर बताओ कि अफ़सरों का पद आनुवंशिक कर देने में क्या-क्या फायदे और क्या-क्या नुकसान हो सकते थे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-117)
Solution:

फायदे:

  • अनुभव का लाभ: पिता के वर्षों के प्रशासनिक अनुभव का लाभ पुत्र को मिलता था। पुत्र अपने पिता के मार्गदर्शन में काम सीखता था, जिससे वह पद के लिए अधिक तैयार हो जाता था।
  • परंपरा और निष्ठा: यदि पिता एक ईमानदार और योग्य अधिकारी होता, तो वह अपने पुत्र को भी वही मूल्य और संस्कार देने का प्रयास करता। पुत्र भी अपने पिता की प्रतिष्ठा और पद की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रेरित होता।

नुकसान:

  • योग्यता की अनदेखी: सबसे बड़ा नुकसान यह था कि योग्य और सक्षम सामान्य व्यक्तियों को अवसर नहीं मिलता था। केवल शाही परिवारों या अधिकारियों के पुत्र ही उच्च पदों पर पहुँच पाते थे, भले ही वे अयोग्य हों।
  • पद का दुरुपयोग: अयोग्य व्यक्ति के पद पर आसीन होने से पद का दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती थी। इससे प्रशासन में भ्रष्टाचार और अक्षमता फैल सकती थी।
  • प्रतिभा का ह्रास: यह व्यवस्था प्रतिभा को पनपने का अवसर नहीं देती थी और योग्यता के बजाय वंशानुगत अधिकार को महत्व देती थी।

प्रश्न 7

आज अगर किसी गरीब आदमी को कुछ मिलता है और वह पुलिस में खबर करता है तो क्या उसके साथ इसी तरह का बर्ताव किया जाएगा? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
Solution: यह प्रश्न उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था और आज की व्यवस्था के बीच तुलना करने के लिए है। प्राचीन काल में, यदि किसी गरीब आदमी को कुछ मिलता था और वह उसकी सूचना देता था, तो संभव है कि उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाता हो जैसा वर्णन किया गया है। हालाँकि, आज के कानूनी और पुलिस तंत्र में, गरीब और अमीर सभी नागरिकों के साथ कानून के अनुसार व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि कोई गरीब व्यक्ति किसी घटना की सूचना पुलिस को देता है, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली में कमी को दर्शाता है, न कि कानून की प्रकृति को।

प्रश्न 8

एक प्रसिद्ध व्यक्ति का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में उपदेश दिए और एक राजा का नाम बताओ, जिसने प्राकृत में अपने अभिलेख लिखवाए। (अध्याय ७ तथा ८ देखो।) (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-118)
Solution:

प्राकृत में उपदेश देने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति थे: वर्धमान महावीर। उन्होंने जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार प्राकृत भाषा में किया ताकि आम लोग उन्हें समझ सकें।

प्राकृत में अपने अभिलेख लिखवाने वाले राजा थे: अशोक। सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों और स्तंभ लेखों में जनता तक अपने संदेश पहुँचाने के लिए प्राकृत भाषा का प्रयोग किया था।

प्रश्न 9

सेना के साथ ले जाई जाने वाली चीजों की सूची बनाओ। (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-119)
Solution: सेना के साथ युद्ध और यात्रा के दौरान कई आवश्यक चीजें ले जाई जाती थीं। इन चीजों की सूची में शामिल हो सकते हैं:
  1. हथियार: तलवारें, भाले, धनुष, बाण, ढाल आदि।
  2. बर्तन: खाना पकाने और खाने के लिए आवश्यक बर्तन।
  3. खाने-पीने का सामान: अनाज, दालें, गुड़, तेल, पानी और अन्य खाद्य सामग्री।
  4. नगाड़े और वाद्य यंत्र: युद्ध के दौरान संकेत देने और सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए।
  5. पालकी या वाहन: घायल सैनिकों या महत्वपूर्ण सामान को ले जाने के लिए।
  6. तंबू और रसद: सैनिकों के आराम और आपूर्ति के लिए।
यह सूची उस समय की सेना की आवश्यकताओं के अनुसार बनाई गई है।

प्रश्न 10

ग्रामवासी राजा के लिए क्या-क्या लेकर आते थे? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-119)
Solution: ग्रामवासी राजा के लिए विभिन्न प्रकार के उपहार और आवश्यक वस्तुएँ लाते थे। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
  • खाद्य पदार्थ: जैसे दही और गुड़, जो स्थानीय उपज होते थे।
  • फूल: राजा के सम्मान में या अनुष्ठानों के लिए।
  • जानवरों के लिए चारा: राजा की सेना या शाही पशुओं के लिए।
यह दर्शाता है कि ग्रामीण जनता राजा के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करती थी और राज्य के संचालन में योगदान देती थी।

Common mistakes

  • युद्ध लड़ने की विधियों को केवल आधुनिक संदर्भ में सोचना।
  • समुद्रगुप्त की नीतियों के पीछे के भौगोलिक और राजनीतिक कारणों को अनदेखा करना।
  • उपाधियों के महत्व को कम आंकना या गलत क्रम में रखना।
  • प्राचीन व्यापार मार्गों के महत्व को कम समझना।
  • इस्लाम के उदय को केवल एक धार्मिक घटना के रूप में देखना, न कि एक सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन के रूप में।

Revision tips

  • समुद्रगुप्त की विजयों और उसके द्वारा शासित क्षेत्रों के मानचित्र का अध्ययन करें।
  • विभिन्न उपाधियों (राजा, महा-राजा, महाराज-अधिराज) के अर्थ और पदानुक्रम को याद करें।
  • हर्षवर्धन के साम्राज्य के विस्तार से जुड़े आज के राज्यों की सूची बनाएं।
  • प्राचीन व्यापार मार्गों और अरब के महत्व पर विशेष ध्यान दें।
  • इस्लाम के उदय से संबंधित मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में लिखें।

Practice MCQs

Q1. समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के शासकों के साथ कैसा व्यवहार किया?

Q2. महाराज-अधिराज उपाधि का क्या अर्थ है?

Q3. हर्षवर्धन को बंगाल जाने के लिए किन वर्तमान राज्यों से गुजरना पड़ा होगा?

Q4. प्राचीन काल में भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार में किसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?

Q5. इस्लाम धर्म की शुरुआत अरब में लगभग कितने साल पहले हुई?

Frequently asked questions

कक्षा 6 के इतिहास के अध्याय 11 में किन मुख्य साम्राज्यों और राज्यों का वर्णन है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से गुप्त साम्राज्य और उसके शक्तिशाली शासक समुद्रगुप्त के बारे में बताया गया है, साथ ही हर्षवर्धन के साम्राज्य का भी उल्लेख है।

समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त और दक्षिणापथ के शासकों के साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों किया?

समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त के शासकों को हराकर उनके राज्यों को सीधे अपने साम्राज्य में मिला लिया, क्योंकि वे उसकी राजधानी के करीब थे। वहीं, दक्षिणापथ के शासक दूर थे, इसलिए समुद्रगुप्त ने उन्हें हराकर फिर से शासन करने की अनुमति दे दी।

इस अध्याय में किन महत्वपूर्ण उपाधियों का उल्लेख है?

इस अध्याय में राजा, महा-राजा और महाराज-अधिराज जैसी उपाधियों का उल्लेख है, जो शासकों की शक्ति और महत्व को दर्शाती हैं।

प्राचीन काल में अरब का क्या महत्व था?

अरब सदियों से यातायात का एक बड़ा केंद्र था। अरब व्यापारी और नाविकों ने भारत और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेगा?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तार से समझाते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ मिलती है और वे परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार होते हैं।

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