CBSE Class 6 Hindi Chapter 39: जो देखकर भी नहीं देखते - NCERT Solutions

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This chapter, 'जो देखकर भी नहीं देखते' (Those Who See But Do Not See), from CBSE Class 6 Hindi, delves into the profound experiences of Helen Keller, who, despite her visual impairment, perceived the world through other senses. The NCERT Solutions provide detailed answers to questions that explore Helen's unique perspective on nature and life, emphasizing how she experienced the world through touch, sound, and smell. The solutions also encourage students to reflect on their own sensory experiences and the importance of observation. This resource helps students understand the power of other senses, appreciate the world around them more deeply, and develop empathy. It's an excellent tool for exam revision, offering clear explanations and thought-provoking questions to solidify understanding of the chapter's themes and Helen Keller's remarkable life.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 39

Chapter summary

Chapter 39, 'जो देखकर भी नहीं देखते', focuses on Helen Keller's extraordinary ability to experience the world without sight. The NCERT Solutions cover questions related to her sensory perceptions, her feelings about those who can see but observe little, and her appreciation for nature through touch and sound. It also prompts students to consider their own sensory experiences and the world as perceived by those with visual impairments, fostering a deeper understanding of empathy and observation.

Learning outcomes

  • Understand Helen Keller's perspective on seeing and experiencing the world.
  • Identify how Helen Keller perceived nature through touch and sound.
  • Reflect on the importance of all senses in experiencing life.
  • Analyze the concept of 'seeing but not observing'.
  • Develop empathy towards individuals with visual impairments.
  • Practice descriptive writing based on sensory experiences.

Topics covered

Paper topics

  • Sensory perception
  • Helen Keller's experiences
  • Experiencing nature
  • Observation skills
  • Empathy
  • The world without sight
  • Touch
  • Sound
  • Smell
  • Taste
  • Language and vocabulary (touch-related words)

Important topics

  • Helen Keller's unique perspective
  • Experiencing nature through non-visual senses
  • The difference between seeing and observing
  • The role of other senses in life
  • Empathy and understanding different abilities

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे सचमुच बहुत कम देखते हैं' - हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता था?
Solution: हेलेन केलर को ऐसा इसलिए लगता था क्योंकि उन्होंने अनुभव किया था कि बहुत से ऐसे लोग जो शारीरिक रूप से देख सकते हैं, वे वास्तव में अपने आसपास की दुनिया की सुंदरता, बारीकियों और महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान नहीं देते या उन्हें महसूस नहीं करते। वे अक्सर सामान्य चीजों को भी अनदेखा कर देते हैं। इसके विपरीत, हेलेन, जो देख नहीं सकती थीं, अपनी अन्य इंद्रियों (जैसे स्पर्श, श्रवण, गंध) के माध्यम से दुनिया को गहराई से महसूस करती थीं और छोटी-छोटी बातों में भी असाधारणता पाती थीं। इसलिए, उन्हें लगता था कि देखने की क्षमता होने के बावजूद लोग बहुत कम देखते हैं।

प्रश्न 2

'प्रकृति का जादू' किसे कहा गया है?
Solution: पाठ के अनुसार, 'प्रकृति का जादू' उन अद्भुत और मनमोहक अनुभवों को कहा गया है जिन्हें हेलेन केलर अपनी अन्य इंद्रियों, विशेषकर स्पर्श और श्रवण के माध्यम से महसूस करती थीं। इसमें फूलों की कोमलता, पेड़ों की खुरदरी छाल, हवा का स्पर्श, पक्षियों का संगीत और अन्य प्राकृतिक ध्वनियाँ शामिल हैं। इन अनुभूतियों ने उनके जीवन को आनंदमय और जादुई बना दिया था।

प्रश्न 3

'कुछ खास तो नहीं' - हेलेन की मित्र ने यह जवाब किस मौके पर दिया और यह सुनकर हेलेन को आश्चर्य क्यों नहीं हुआ?
Solution: हेलेन की मित्र ने यह जवाब तब दिया जब हेलेन ने उनसे एक पेड़ की पत्तियों के बारे में पूछा था। हेलेन ने मित्र से पूछा कि क्या उन्हें पेड़ की पत्तियाँ खास लगीं, तो मित्र ने लापरवाही से जवाब दिया, 'कुछ खास तो नहीं'। हेलेन को यह सुनकर आश्चर्य इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वह पहले से ही यह समझती थीं कि बहुत से लोग प्रकृति की सामान्य चीजों के प्रति उदासीन होते हैं और उनकी सुंदरता या महत्व को नहीं पहचान पाते। यह अनुभव उनके इस विश्वास की पुष्टि करता था कि लोग अक्सर अपनी इंद्रियों का पूरा उपयोग नहीं करते।

प्रश्न 4

हेलेन केलर प्रकृति की किन चीज़ो को छुकर और सुनकर पहचान लेती थीं? पाठ के आधार पर इसका उत्तर लिखो।
Solution: पाठ के आधार पर, हेलेन केलर प्रकृति की कई चीज़ों को छुकर और सुनकर पहचान लेती थीं। छूकर वे महसूस करती थीं:
  • पेड़ों की विभिन्न प्रकार की छालें (जैसे खुरदरी, चिकनी)।
  • फूलों की कोमलता और पंखुड़ियों की बनावट।
  • पत्तियों का आकार और उनकी सतह।
  • मौसम में होने वाले बदलावों का अहसास, जैसे हवा का झोंका या बारिश की बूँदें।
सुनकर वे पहचान लेती थीं:
  • पक्षियों की विभिन्न प्रकार की आवाज़ें और उनके चहचहाने का संगीत।
  • हवा की सरसराहट और अन्य प्राकृतिक ध्वनियाँ।
इस प्रकार, वह अपनी स्पर्श और श्रवण इंद्रियों से प्रकृति के विस्तृत संसार का अनुभव करती थीं।

प्रश्न 5

'जबिक इस नियामत से जिंदगी को खुशियों के इंद्रधनुष रंगों से हरा - भरा किया जा सकता हैं' - तुम्हारी नज़र में इसका क्या अर्थ हो सकता है?
Solution: इस वाक्य का अर्थ है कि हमारे पास जो भी इंद्रियाँ (जैसे देखना, सुनना, सूंघना, चखना, छूना) ईश्वर द्वारा दी गई हैं, वे अनमोल उपहार (नियामत) हैं। यदि हम इन इंद्रियों का सही और भरपूर उपयोग करें, तो हम अपने जीवन को खुशियों और संतुष्टि के अनगिनत रंगों से भर सकते हैं। उदाहरण के लिए, केवल सुनकर भी हम संगीत का आनंद ले सकते हैं, सूंघकर फूलों की महक का अनुभव कर सकते हैं, या छूकर किसी वस्तु की बनावट को समझ सकते हैं। इन अनुभवों से जीवन बहुत समृद्ध और आनंददायक बन सकता है, भले ही कोई एक इंद्रिय कम काम कर रही हो।

प्रश्न 1

आज तुमने अपने घर से आते हुए बारीकी से क्या-क्या देखा-सुना? मितरों के साथ सामूहिक चर्चा करो।
Solution: घर से आते हुए मैंने कई चीज़ें देखीं और सुनीं। मैंने देखा कि सड़क के किनारे लगे पेड़ हरे-भरे थे और उनकी पत्तियाँ हवा में धीरे-धीरे हिल रही थीं। कुछ छोटे पौधे भी खिले हुए थे जिन पर तितलियाँ मंडरा रही थीं। मैंने लोगों को आते-जाते देखा, कुछ जल्दी में थे तो कुछ आराम से चल रहे थे। मैंने गाड़ियों के हॉर्न की आवाज़ सुनी, बच्चों के खेलने की आवाज़ सुनी और पक्षियों को चहचहाते हुए भी सुना। मैंने हवा की हल्की सरसराहट भी महसूस की। इन सभी चीज़ों पर ध्यान देने से यात्रा और भी रोचक बन गई। (यह एक व्यक्तिगत अनुभव है, छात्र अपनी देखी-सुनी बातों के आधार पर चर्चा कर सकते हैं।)

प्रश्न 2

कान से न सुन पाने के पर आस-पास की दुनिया कैसी लगती होगी? इस पर टिप्पणी लिखो और कक्षा में पढ़कर सुनाओ |
Solution: यदि कोई व्यक्ति कान से सुन नहीं पाता है, तो उसके लिए आस-पास की दुनिया काफी अलग और शांत महसूस हो सकती है। जहाँ हम आवाज़ों के माध्यम से खतरों (जैसे गाड़ी का हॉर्न) या खुशी के पलों (जैसे संगीत, हँसी) को जानते हैं, वहीं श्रवण बाधित व्यक्ति को इन चीज़ों का अनुभव अन्य इंद्रियों से करना होगा। वह कंपन महसूस कर सकता है, होंठों की हरकतें पढ़कर संवाद कर सकता है, या इशारों का उपयोग कर सकता है। दुनिया में होने वाली घटनाओं की जानकारी उसे देखकर या दूसरों के माध्यम से मिलेगी। हालाँकि, संगीत, बातचीत की गूँज या प्रकृति की ध्वनियों का आनंद वह नहीं ले पाएगा। यह एक ऐसी दुनिया होगी जहाँ संवाद और सूचना का प्रवाह मुख्य रूप से दृश्य और स्पर्श पर आधारित होगा, जो हमारे अनुभव से बहुत भिन्न होगा।

प्रश्न 3

तुम्हें किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो तो तुम उससे सुनकर, सूँघकर, चखकर, छूकर अनुभव की जानेवाली चीज़ों के संसार के विषय में क्या-क्या प्रश्न कर सकते हो? लिखो।
Solution: यदि मुझे किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका मिले जिसे दिखाई न देता हो, तो मैं उनसे उनके अनुभव की दुनिया के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकता हूँ: सुनकर:
  • आप आवाज़ों से कैसे पहचानते हैं कि कौन सी चीज़ या व्यक्ति आपके पास है?
  • क्या आप अलग-अलग आवाज़ों से मौसम का अंदाज़ा लगा पाते हैं?
  • संगीत सुनकर आपको कैसा महसूस होता है?
  • क्या आप किसी की आवाज़ से उसके मूड को समझ पाते हैं?
सूँघकर:
  • आप गंध से कैसे पहचानते हैं कि कौन सा फूल है या कौन सा खाना पक रहा है?
  • क्या कुछ खास गंधें आपको किसी खास जगह या समय की याद दिलाती हैं?
  • क्या आप गंध से किसी व्यक्ति को पहचान पाते हैं?
चखकर:
  • क्या आप स्वाद से खाने की सामग्री या उसकी ताज़गी का पता लगा लेते हैं?
  • क्या कुछ खास स्वाद आपको बचपन की याद दिलाते हैं?
छूकर:
  • आप किसी चीज़ की बनावट (जैसे चिकना, खुरदरा, मुलायम) से उसके बारे में क्या-क्या जान पाते हैं?
  • क्या आप छूकर किसी व्यक्ति के हाव-भाव या उसकी भावना को समझ पाते हैं?
  • आप अपने आस-पास की चीज़ों को छूकर कैसे रास्ता ढूँढते हैं?
इन प्रश्नों के माध्यम से मैं उनकी संवेदी दुनिया को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश करूँगा।

प्रश्न ४

हम अपनी पाँचों इंद्रियों में से आँखों का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा करते हैं। ऐसी चीज़ों के अहसासों की तालिका बनाओ जो तुम बाकी चार इंद्रियों से महसूस करते हों -

सुनकर चखकर सूँघकर छुकर

Solution: यहाँ एक तालिका दी गई है जिसमें बाकी चार इंद्रियों से महसूस की जाने वाली चीज़ों के अहसास बताए गए हैं:
सुनकर चखकर सूँघकर छूकर
संगीत की धुनें मिठाई का मीठा स्वाद फूलों की खुशबू कपड़े का मुलायम अहसास
बारिश की आवाज़ नींबू का खट्टा स्वाद मिट्टी की सौंधी खुशबू (बारिश के बाद) पत्थर की खुरदरी सतह
किसी का पुकारना मिर्च का तीखा स्वाद ताज़े फल की महक बर्फ़ की ठंडक
घंटी की आवाज़ करेले का कड़वा स्वाद अगरबत्ती की सुगंध पानी की नमी
जानवरों की आवाज़ें (जैसे कुत्ता भौंकना) नमक का नमकीन स्वाद ताज़ी पकी रोटी की महक गर्म चाय का अहसास
यह तालिका दर्शाती है कि हमारी अन्य इंद्रियाँ भी हमें दुनिया का अनुभव कराने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न 1

पाठ में स्पर्श से संबंधित कई शब्द आए हैं। नीचे ऐसे कुछ और शब्द दिए गए है। बताओं कि किन चीज़ों का स्पर्श ऐसा होता है -

चिकना

चिपचिपा

मुलायम

खुरदरा

सख्त

भूरभूरा

Solution: यहाँ दिए गए स्पर्श से संबंधित शब्दों के अनुसार चीज़ों के उदाहरण दिए गए हैं:
  • चिकना (Smooth): पॉलिश किया हुआ लकड़ी का फर्नीचर, कांच, साबुन, गीली मिट्टी, केले का छिलका।
  • चिपचिपा (Sticky): गोंद, शहद, गुड़, टेप का पिछला हिस्सा, कुछ प्रकार की मिठाइयाँ।
  • मुलायम (Soft): रुई, पंख, बिल्ली का फर, ऊनी कपड़ा, तकिया, बच्चे की त्वचा।
  • खुरदरा (Rough): रेत का ढेर, खुरपी से खुदी हुई दीवार, ऊबड़-खाबड़ पत्थर, सूखी ब्रेड का बाहरी हिस्सा, सैंडपेपर।
  • सख्त (Hard): पत्थर, धातु की छड़, लकड़ी का तख्ता, ईंट, प्लास्टिक का डिब्बा।
  • भूरभूरा (Crumbly/Powdery): सूखी मिट्टी, रेत, आटा, केक का चूरा, कुछ प्रकार के बिस्कुट।
ये शब्द हमें वस्तुओं की सतह को छूकर महसूस होने वाले अहसास को समझने में मदद करते हैं।

Common mistakes

  • Confusing 'seeing' with 'observing' or 'experiencing'.
  • Underestimating the richness of experience through senses other than sight.
  • Not fully appreciating the challenges and unique perceptions of visually impaired individuals.
  • Providing superficial answers to questions requiring deeper reflection on sensory experiences.

Revision tips

  • Read Helen Keller's descriptions of nature carefully and try to imagine the sensations.
  • Discuss with friends how you experience different textures and sounds.
  • Reflect on the difference between simply looking at something and truly observing it.
  • Consider how you would describe the world to someone who cannot see.
  • Pay attention to the vocabulary used to describe touch and sound in the chapter.

Practice MCQs

Q1. हेलेन केलर को ऐसा क्यों लगता था कि जिन लोगों के पास आँखें हैं, वे बहुत कम देखते हैं?

Q2. पाठ के अनुसार, 'प्रकृति का जादू' किसे कहा गया है?

Q3. हेलेन की मित्र ने 'कुछ खास तो नहीं' जवाब किस अवसर पर दिया?

Q4. हेलेन केलर किन चीज़ों को छुकर और सुनकर पहचान लेती थीं?

Q5. यह वाक्य 'जबिक इस नियामत से जिंदगी को खुशियों के इंद्रधनुष रंगों से हरा - भरा किया जा सकता हैं' किस इंद्रिय के महत्व को बताता है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 6 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 39 'जो देखकर भी नहीं देखते' के लिए।

यह समाधान किस बारे में हैं?

यह समाधान हेलेन केलर के जीवन और उनके अनुभवों पर आधारित हैं, जिसमें बताया गया है कि कैसे उन्होंने अपनी अन्य इंद्रियों का उपयोग करके दुनिया को महसूस किया, भले ही उन्हें दिखाई नहीं देता था।

क्या इन समाधानों में हेलेन केलर के बारे में प्रश्न हैं?

हाँ, इन समाधानों में हेलेन केलर के विचारों, प्रकृति के प्रति उनकी समझ और उनकी संवेदी अनुभवों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।

ये समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?

ये समाधान छात्रों को हेलेन केलर के दृष्टिकोण को समझने, अपनी इंद्रियों के महत्व को पहचानने और सहानुभूति विकसित करने में मदद करते हैं। ये परीक्षा की तैयारी के लिए भी उपयोगी हैं।

क्या समाधानों में भाषा से संबंधित कोई भाग है?

हाँ, 'भाषा की बात' खंड में स्पर्श से संबंधित विभिन्न शब्दों और उनके अर्थों पर चर्चा की गई है, जिससे छात्रों की शब्दावली बढ़ती है।

क्या ये समाधान केवल पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों के उत्तर देते हैं?

ये समाधान पाठ्यपुस्तक के 'निबंध से', 'निबंध से आगे' और 'भाषा की बात' खंडों में दिए गए सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं।

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