कक्षा 4 सामाजिक विज्ञान NCERT समाधान: पहाड़ों से समुंदर तक
यह खंड कक्षा 4 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान के अध्याय 'पहाड़ों से समुंदर तक' पर केंद्रित एन.सी.ई.आर.टी. समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय नदी के उद्गम से लेकर समुद्र तक के सफर का पता लगाता है, जिसमें नदी के विभिन्न चरणों और उसके आसपास के वातावरण पर मानवीय गतिविधियों के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। छात्र नदी के जीवन चक्र, प्रदूषण के कारणों और प्रभावों, और जल निकायों के संरक्षण के महत्व के बारे में जानेंगे। समाधानों में नदी के विभिन्न हिस्सों में पानी की गुणवत्ता, जलीय जीवन पर प्रदूषण के प्रभाव और पीने योग्य पानी के स्रोतों की सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा शामिल है। यह छात्रों को जल संसाधनों के महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में शिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए स्पष्ट और संक्षिप्त स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | सामाजिक विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 13. पहाड़ों से समुंदर तक |
Chapter summary
कक्षा 4 के सामाजिक विज्ञान के लिए 'पहाड़ों से समुंदर तक' अध्याय के एन.सी.ई.आर.टी. समाधान नदी की यात्रा का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं। इसमें नदी के उद्गम, उसके रास्ते में आने वाले विभिन्न परिदृश्यों और अंततः समुद्र में मिलने तक की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। समाधान नदी प्रदूषण के कारणों, जैसे कि औद्योगिक कचरा और मानवीय गतिविधियाँ, और इसके प्रभावों पर भी चर्चा करते हैं। छात्र जल निकायों के महत्व और उन्हें स्वच्छ रखने की आवश्यकता को समझेंगे।
Learning outcomes
- नदी के उद्गम से लेकर समुद्र तक की यात्रा को समझना।
- नदी प्रदूषण के विभिन्न कारणों और प्रभावों की पहचान करना।
- जल निकायों के महत्व और संरक्षण की आवश्यकता को समझना।
- साफ और गंदे पानी के बीच अंतर करना सीखना।
- मानवीय गतिविधियों का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- नदी का उद्गम
- नदी का प्रवाह
- नदी प्रदूषण
- मानवीय गतिविधियाँ और पर्यावरण
- जल निकायों का महत्व
- जल संरक्षण
- समुद्र
- नदी के विभिन्न चरण
- पानी की गुणवत्ता
- जलीय जीवन
- पर्यावरणीय बदलाव
- प्रदूषण के प्रभाव
Important topics
- नदी प्रदूषण के कारण और प्रभाव
- जल संरक्षण का महत्व
- साफ और गंदे पानी में अंतर
- मानवीय गतिविधियों का नदी पर प्रभाव
- नदी का जीवन चक्र
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Questions and Solutions
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 106) - कहानी लेखन
शब्द: नाव, बहता पानी, नीला, मछलियाँ, पानी के पौधे, नदी, बड़ा जहाज, तेल, नदी के किनारे, बदबू, फैक्ट्रियाँ, जानवर, कपड़े धोना, दूसरे काम, बदलाव, शहर।
कहानी का नाम: 'बदली हुई नदी'
बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर नदी बहती थी। उसका पानी एकदम साफ और नीले रंग का था, जिसमें रंग-बिरंगी मछलियाँ खुशी-खुशी तैरती थीं और पानी के सुंदर पौधे भी थे। नदी के किनारे का जीवन बहुत शांत और हरा-भरा था।
धीरे-धीरे, नदी के किनारे एक फैक्ट्री लगाई गई। फैक्ट्री के कारण वहाँ लोगों ने बसना शुरू कर दिया और जल्द ही एक छोटा सा शहर बस गया। शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े-बड़े जहाज नदी से आने-जाने लगे। कभी-कभी इन जहाजों से तेल रिसने लगा, जो पानी में फैलकर उसे गंदा करने लगा।
शहर के लोग नदी को सिर्फ पानी का स्रोत ही नहीं, बल्कि कूड़ा फेंकने की जगह भी समझने लगे। वे अपने कपड़े, बर्तन और जानवरों को नदी में ही धोने लगे। घरों और फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी भी सीधे नदी में बहाया जाने लगा।
इन सब कारणों से नदी का पानी धीरे-धीरे गंदा और बदबूदार हो गया। मछलियों की संख्या कम होने लगी और पानी के पौधे भी मुरझाने लगे। वह सुंदर, नीली नदी अब एक गंदी नदी बन गई थी, जिसने अपना सारा आकर्षण खो दिया था। यह बदलाव देखकर सभी को दुख हुआ, लेकिन किसी ने इसे रोकने की कोशिश नहीं की।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 1
जहाँ से नदी निकलना शुरू हो रही है, वहाँ पानी का रंग आमतौर पर साफ और रंगहीन होता है। यह पानी बहुत शुद्ध होता है। हालांकि, जब हम इसे दूर से देखते हैं या यह सूर्य की रोशनी में चमकता है, तो यह नीला दिखाई दे सकता है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 2
नदी में मछलियों की संख्या में यह अंतर पानी की गुणवत्ता के कारण होता है। जहाँ नदी का पानी साफ है और प्रदूषण कम है, वहाँ मछलियाँ अधिक संख्या में जीवित रहती हैं क्योंकि उन्हें सांस लेने और रहने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है।
इसके विपरीत, जहाँ बस्तियों या उद्योगों के कारण नदी का पानी गंदा हो गया है, वहाँ ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और हानिकारक तत्व बढ़ जाते हैं। ऐसे प्रदूषित पानी में मछलियों का जीवित रहना मुश्किल होता है, जिसके कारण उनकी संख्या कम हो जाती है या वे मर जाती हैं।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 3
चित्र के अनुसार, गाँव में पहुँचने से पहले नदी में बहुत सारी मछलियाँ तैरती हुई दिखाई दे रही हैं। यह इंगित करता है कि इस हिस्से में पानी अभी भी अपेक्षाकृत साफ है और जलीय जीवन के लिए उपयुक्त है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 4
नदी के पानी का रंग मुख्य रूप से उन जगहों पर बदल गया है जहाँ बस्तियाँ (गाँव या शहर) और फैक्ट्री स्थित हैं। इन क्षेत्रों में, नदी का पानी मटमैला या गंदा दिखने लगता है।
पानी का रंग बदलने का कारण यह है कि लोग अपने घरों से निकलने वाला गंदा पानी, कचरा, और अपने जानवरों को धोने के लिए नदी का उपयोग करते हैं। साथ ही, फैक्ट्रियों से निकलने वाला औद्योगिक कचरा और रसायन भी नदी में मिला दिए जाते हैं। ये सभी अशुद्धियाँ पानी में घुलकर उसके प्राकृतिक रंग को बदल देती हैं और उसे गंदा बना देती हैं।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 5
मैं चित्र में दिखाई गई जगहों में से उस जगह के पास रहना पसंद करूँगा जहाँ नदी का पानी साफ है और उसके किनारे का वातावरण हरा-भरा और शांत है। यह आमतौर पर नदी के उद्गम स्थल के पास या उन गाँवों के पास होता है जहाँ प्रदूषण कम होता है।
इसका कारण यह है कि साफ पानी और स्वच्छ वातावरण स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। ऐसी जगह पर प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है और जीवन अधिक सुखद होता है। गंदी और प्रदूषित जगहों पर रहना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 107) - प्रश्न 6
हाँ, मैं चित्र में हो रहे बदलावों में निश्चित रूप से सुधार करना चाहूँगा। मैं चाहूँगा कि नदी को फिर से साफ और सुंदर बनाया जाए।
इसके लिए, मैं यह बदलाव चाहूँगा कि नदी में किसी भी प्रकार का कचरा या गंदा पानी न गिराया जाए। फैक्ट्रियों और घरों से निकलने वाले गंदे पानी को पहले साफ किया जाए और फिर उसे नदी में छोड़ा जाए। जहाजों से तेल के रिसाव को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएँ। लोगों को नदी के किनारे सफाई रखने और उसका सम्मान करने के लिए जागरूक किया जाए। यदि ये कदम उठाए जाएँ, तो नदी फिर से अपने प्राकृतिक सौंदर्य को प्राप्त कर सकती है और जलीय जीवन के लिए एक सुरक्षित घर बन सकती है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 1
अगर मुझे पानी पीना हो, तो मैं नदी के उस हिस्से का पानी पीना चाहूँगा जहाँ से वह निकलना शुरू होती है।
इसका कारण यह है कि नदी का उद्गम स्थल आमतौर पर बहुत ऊँचाई पर और प्राकृतिक वातावरण में होता है, जहाँ पानी सबसे शुद्ध और साफ होता है। जैसे-जैसे नदी नीचे आती है और शहरों या गाँवों के पास से गुजरती है, उसमें प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वह पीने के लिए असुरक्षित हो जाती है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 2
हाँ, मैंने समुद्र देखा है। मैंने समुद्र को मुंबई में देखा है। (छात्र अपने अनुभव के अनुसार स्थान बदल सकते हैं, जैसे - फिल्म में, टीवी पर, या किसी अन्य स्थान पर)।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 3
हाँ, मैं पिछले वर्ष मुंबई गया था तब समुद्र के किनारे गया था। (छात्र अपने व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार उत्तर दे सकते हैं)।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 4
समुद्र की लहरें ऊपर-नीचे उठती हैं और आगे बढ़ती हैं। इसे दर्शाने के लिए, आप अपने हाथ को हथेली खुली रखकर, उंगलियों को थोड़ा मोड़कर, ऊपर-नीचे हिला सकते हैं, जैसे पानी की लहरें उठती और गिरती हैं। आप अपनी कलाई को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करके भी लहरों की गति का अनुकरण कर सकते हैं।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 5
नहीं, समुद्र का पानी पीने योग्य नहीं होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि समुद्र का पानी बहुत अधिक खारा होता है। इसमें नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक है और प्यास को और बढ़ा देता है। इसलिए, समुद्र का पानी पीने के लिए उपयुक्त नहीं है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 6
हाँ, पूरे साल नदी, तालाब और झरनों के पानी के स्तर और मात्रा में बदलाव होते रहते हैं। ये बदलाव मुख्य रूप से मौसम पर निर्भर करते हैं:
- बरसात का मौसम: इस दौरान सबसे अधिक वर्षा होती है, जिससे नदियों और तालाबों में पानी का स्तर बढ़ जाता है। झरने भी अधिक वेग से बहते हैं।
- गर्मी का मौसम: गर्मी में तापमान बढ़ने और वर्षा की कमी के कारण पानी का वाष्पीकरण अधिक होता है। इससे नदियों और तालाबों में पानी का स्तर न्यूनतम हो जाता है, और कुछ छोटे झरने सूख भी सकते हैं।
- सर्दी का मौसम: सर्दी में तापमान कम होता है और वर्षा भी कम होती है। इस मौसम में पानी का स्तर गर्मियों से अधिक लेकिन बरसात से कम होता है।
इन बदलावों का मुख्य कारण वर्षा की मात्रा और तापमान में होने वाला मौसमी परिवर्तन है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 7
नहीं, बरसात के मौसम में तालाब या नदी में जितना पानी होता है, उतना पानी गर्मी के दिनों में नहीं रहता है। बरसात में वर्षा के कारण पानी का जलस्तर अधिकतम होता है, जबकि गर्मी में वाष्पीकरण और कम वर्षा के कारण पानी का जलस्तर बहुत कम हो जाता है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 8
मेरे शहर के पास एक नदी बहती है।
पानी में बदलाव: हाँ, नदी के पानी के स्तर में सर्दी, गर्मी और बरसात के महीनों में बदलाव होते हैं। बरसात के मौसम में नदी में पानी सबसे ज्यादा होता है क्योंकि खूब बारिश होती है। गर्मी के महीनों में पानी का स्तर सबसे कम हो जाता है क्योंकि गर्मी से पानी भाप बनकर उड़ जाता है और बारिश भी कम होती है। सर्दी के मौसम में पानी का स्तर मध्यम रहता है।
मछलियाँ: इस नदी में कई तरह की मछलियाँ पाई जाती हैं, जैसे रोहू, कतला, सिंघारा आदि। इनमें कुछ बड़ी मछलियाँ भी होती हैं और कुछ छोटी भी।
पेड़-पौधे: नदी के किनारों पर मुख्य रूप से घास, झाड़ियाँ और कुछ बड़े पेड़ जैसे पीपल, नीम और जामुन के पेड़ उगते हैं।
पक्षी: यहाँ अक्सर चील, कौवे, बगुले, गौरैया और अन्य छोटे-बड़े पक्षी आते हैं।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 9
हाँ, मैंने बाढ़ के बारे में सुना और पढ़ा है। मैंने बिहार राज्य के दरभंगा और मधेपुरा जिलों में आई बाढ़ के बारे में पढ़ा है, जहाँ नदियों का पानी खतरनाक स्तर तक बढ़ जाने के कारण भारी तबाही हुई थी। (छात्र अपने सुने या पढ़े हुए बाढ़ के किसी अन्य उदाहरण का भी उल्लेख कर सकते हैं)।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 10
हम कई तरीकों से जान सकते हैं कि पानी गंदा है:
- रंग: गंदा पानी अक्सर मटमैला, भूरा या किसी अन्य अस्वाभाविक रंग का दिखाई देता है। साफ पानी आमतौर पर पारदर्शी होता है।
- गंध: गंदे पानी से अक्सर बदबू आती है, जो सड़े हुए कचरे या अन्य अशुद्धियों के कारण हो सकती है। साफ पानी में कोई गंध नहीं होती।
- अशुद्धियाँ: गंदे पानी में कचरा, प्लास्टिक, तेल की परत या अन्य ठोस कण तैरते हुए दिखाई दे सकते हैं।
- झाग: कभी-कभी डिटर्जेंट या रासायनिक प्रदूषण के कारण पानी में झाग भी दिखाई देता है।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 108) - प्रश्न 11
नहीं, अगर पानी देखने में साफ हो तो यह जरूरी नहीं है कि वह पीने के लिए भी ठीक होगा। पानी साफ दिख सकता है, लेकिन उसमें सूक्ष्मजीव जैसे बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी हो सकते हैं जो दिखाई नहीं देते। ये सूक्ष्मजीव पानी को पीने के लिए असुरक्षित बना सकते हैं और बीमारियाँ फैला सकते हैं।
इसलिए, केवल पानी के साफ दिखने पर भरोसा नहीं करना चाहिए। पीने से पहले पानी को उबालना, फिल्टर करना या किसी अन्य शुद्धिकरण विधि का उपयोग करना एक सुरक्षित तरीका है, खासकर यदि पानी का स्रोत विश्वसनीय न हो या उसमें प्रदूषण की आशंका हो।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 110) - प्रश्न 1
हम जो पानी पीते हैं, वह आमतौर पर हमारे शहर या गाँव के जल आपूर्ति विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। यह पानी अक्सर पास की किसी नदी, झील या तालाब से लिया जाता है। इस पानी को शुद्धिकरण संयंत्रों में उपचारित किया जाता है ताकि यह पीने योग्य बन सके, और फिर पाइपों के माध्यम से हमारे घरों तक पहुँचाया जाता है। (छात्र अपने क्षेत्र के अनुसार उत्तर दे सकते हैं)।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 110) - प्रश्न 2
हाँ, बिल्कुल। हमारे शहर या गाँव के पास जो भी तालाब या नदी है, उसके साथ भी वही हो सकता है जो चित्र वाली नदी के साथ हुआ। यदि लोग उस जल स्रोत में कचरा फेंकना जारी रखते हैं, गंदा पानी बहाते हैं, या किसी भी तरह से उसे प्रदूषित करते हैं, तो वह भी धीरे-धीरे गंदा और अनुपयोगी हो जाएगा। इसलिए, यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपने जल स्रोतों को साफ रखें और उन्हें प्रदूषित होने से बचाएं।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 110) - करके देखें - गतिविधि
यह एक मजेदार गतिविधि है जो हमें सिखाएगी कि विभिन्न चीजें पानी में कैसे घुलती या मिश्रित होती हैं।
सामग्री:
- 5-6 गिलास या बोतलें
- पानी
- नमक, चीनी, हल्दी, आटा, खाने का सोडा, दाल (आधा चम्मच प्रत्येक)
- नींबू का रस, साबुन का पानी, शरबत, तेल (एक चम्मच प्रत्येक)
विधि:
- सभी गिलासों या बोतलों को पानी से आधा भर लें। सुनिश्चित करें कि सभी में पानी की मात्रा बराबर हो।
- अब प्रत्येक बर्तन में एक-एक चीज डालें: एक में हल्दी, दूसरे में तेल, तीसरे में खाने का सोडा, इत्यादि।
- हर चीज को पानी में अच्छी तरह से मिलाएं और ध्यान से देखें कि क्या होता है।
इस गतिविधि के माध्यम से हम देखेंगे कि कौन सी चीजें पानी में घुल जाती हैं (जैसे नमक, चीनी, नींबू का रस, साबुन का पानी, शरबत) और कौन सी नहीं घुलतीं या अलग रहती हैं (जैसे तेल, दाल, आटा)। हल्दी पानी में रंग मिला देगी लेकिन पूरी तरह घुलेगी नहीं। खाने का सोडा पानी में घुल जाएगा। यह हमें विभिन्न पदार्थों की पानी में घुलनशीलता के बारे में सिखाएगा।
एन.सी.ई.आर.टी. पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 110) - करके देखें - तालिका
यह तालिका गतिविधि के परिणामों को दर्ज करने के लिए है। छात्र प्रत्येक पदार्थ को पानी में मिलाने के बाद जो देखते हैं, उसके आधार पर निशान लगाएंगे। यहाँ एक संभावित तालिका दी गई है, जिसे छात्र अपने अवलोकन के अनुसार भर सकते हैं:
| डाली गई चीज | पानी में घुल गई | पानी में नहीं घुली | पानी का रंग बदल गया | पानी में तैरने लगी | अन्य बदलाव |
|---|---|---|---|---|---|
| नमक | |||||
| चीनी | |||||
| हल्दी | पानी पीला हो गया | ||||
| आटा | पानी मटमैला हो गया, नीचे बैठ गया | ||||
| खाने का सोडा | |||||
| दाल | नीचे बैठ गई | ||||
| नींबू का रस | पानी में खट्टापन आया | ||||
| साबुन का पानी | झाग बना | ||||
| शरबत | पानी मीठा और रंगीन हो गया | ||||
| तेल | तेल की परत बन गई |
निष्कर्ष: इस गतिविधि से हमने सीखा कि कुछ पदार्थ पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं, कुछ नहीं घुलते, कुछ पानी का रंग बदल देते हैं, और कुछ पानी की सतह पर तैरते रहते हैं।
Common mistakes
- यह मान लेना कि साफ दिखने वाला पानी हमेशा पीने योग्य होता है।
- नदी प्रदूषण के सभी स्रोतों को पहचानने में विफलता।
- जल संरक्षण के महत्व को कम आंकना।
- नदी के विभिन्न चरणों में पानी की गुणवत्ता में अंतर को न समझना।
Revision tips
- नदी के चित्र को ध्यान से देखें और उसमें हो रहे बदलावों को समझें।
- प्रदूषण के कारणों और प्रभावों पर चर्चा करें।
- साफ पानी के महत्व और उसे बनाए रखने के तरीकों पर विचार करें।
- नदी, तालाब और झीलों में मौसमी बदलावों को याद करें।
Practice MCQs
Q1. जहाँ से नदी निकलना शुरू होती है, वहाँ पानी का रंग कैसा होता है?
Explanation: नदी के उद्गम स्थल पर पानी आमतौर पर साफ और रंगहीन होता है, लेकिन दूरी या प्रकाश के कारण यह नीला दिखाई दे सकता है।
Q2. नदी में मछलियाँ कहाँ कम या मरी हुई पाई जा सकती हैं?
Explanation: मानवीय गतिविधियों और कचरे के कारण नदी का पानी गंदा हो जाता है, जिससे मछलियों के लिए जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।
Q3. नदी के पानी का रंग कहाँ बदल जाता है?
Explanation: बस्तियों से निकलने वाला गंदा पानी और फैक्ट्री से निकलने वाला कचरा नदी के पानी को प्रदूषित करके उसका रंग बदल देता है।
Q4. समुद्र का पानी क्यों नहीं पिया जा सकता?
Explanation: समुद्र का पानी अत्यधिक खारा होता है, जो उसे पीने के लिए अनुपयुक्त बनाता है।
Q5. बरसात के मौसम में नदी या तालाब में पानी का स्तर कैसा होता है?
Explanation: बरसात के मौसम में नदियों और तालाबों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जलस्तर अधिकतम हो जाता है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 4 के सामाजिक विज्ञान विषय के लिए है, जो 'पहाड़ों से समुंदर तक' अध्याय पर केंद्रित है।
'पहाड़ों से समुंदर तक' अध्याय में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
यह अध्याय नदी के उद्गम से लेकर समुद्र तक की यात्रा, नदी प्रदूषण के कारणों और प्रभावों, और जल संरक्षण के महत्व के बारे में सिखाता है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान विस्तृत स्पष्टीकरण और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के साथ परीक्षा की तैयारी में छात्रों की सहायता के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
क्या साफ दिखने वाला पानी हमेशा पीने योग्य होता है?
नहीं, पानी देखने में साफ होने पर भी उसमें हानिकारक कीटाणु हो सकते हैं, इसलिए उसे पीने से पहले उबालना या शुद्ध करना आवश्यक हो सकता है।
नदी प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं?
नदी प्रदूषण के मुख्य कारणों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा, घरों से निकलने वाला गंदा पानी, और जहाजों से तेल का रिसाव शामिल हैं।
समुद्र का पानी क्यों नहीं पिया जा सकता?
समुद्र का पानी बहुत खारा और कठोर होता है, जिस कारण वह पीने योग्य नहीं होता है।
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