कक्षा 4 सामाजिक विज्ञान: चलो, चलें स्कूल! - NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 4 PDF

यह खंड कक्षा 4 के छात्रों के लिए सामाजिक विज्ञान के 'चलो, चलें स्कूल!' अध्याय पर केंद्रित है। इसमें विभिन्न प्रकार के पुलों, जैसे बाँस के पुल और सीमेंट के पुल, और उनके उपयोगों पर चर्चा की गई है। छात्र यह भी सीखेंगे कि कैसे बच्चे अलग-अलग परिवहन साधनों जैसे नाव, ऊँट-गाड़ी और ताँगे का उपयोग करके स्कूल पहुँचते हैं। यह समाधान छात्रों को विभिन्न प्रकार के पुलों और परिवहन के साधनों के बीच अंतर समझने में मदद करेगा, साथ ही यह भी बताएगा कि कुछ साधन दूसरों की तुलना में अधिक सुविधाजनक क्यों हैं। यह अध्याय छात्रों को अपने आस-पास की दुनिया का निरीक्षण करने और विभिन्न प्रकार के पुलों और परिवहन के तरीकों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो छात्रों को अवधारणाओं को स्पष्ट करने और महत्वपूर्ण जानकारी को याद रखने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 4
Subjectसामाजिक विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. चलो, चले स्कूल!

Chapter summary

कक्षा 4 के सामाजिक विज्ञान के 'चलो, चलें स्कूल!' अध्याय के ये NCERT समाधान छात्रों को विभिन्न प्रकार के पुलों और परिवहन के साधनों से परिचित कराते हैं। इसमें बाँस के पुल, सीमेंट के पुल, घिरनी (पुली) का उपयोग, नाव, ऊँट-गाड़ी और ताँगे जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को इन साधनों के फायदे और नुकसान समझने में मदद करते हैं, और यह भी बताते हैं कि वे स्कूल पहुँचने में कैसे सहायक होते हैं।

Learning outcomes

  • विभिन्न प्रकार के पुलों की पहचान करना और उनके उपयोगों को समझना।
  • घिरनी (पुली) के कार्य और लाभों को समझना।
  • स्कूल पहुँचने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न परिवहन साधनों का वर्णन करना।
  • बाँस के पुल और सीमेंट के पुल के बीच अंतर बताना।
  • परिवहन के विभिन्न साधनों के फायदे और नुकसान की तुलना करना।

Topics covered

Paper topics

  • पुलों के प्रकार
  • बाँस का पुल
  • सीमेंट का पुल
  • घिरनी (पुली) का उपयोग
  • परिवहन के साधन
  • नाव
  • ऊँट-गाड़ी
  • ताँगा
  • स्कूल पहुँचना
  • सुरक्षा और सुविधा

Important topics

  • विभिन्न प्रकार के पुल और उनकी उपयोगिता
  • घिरनी (पुली) का कार्य और महत्व
  • स्कूल पहुँचने के विभिन्न परिवहन साधन
  • सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलों की तुलना

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

चलो, करके देखें (पृष्ठ 1)

कुछ ईंटें लो। इन्हें किसी खुली जगह पर सीधी लाइन में रखो, जैसे चित्र में दिखाया गया है। अब इन पर चलने की कोशिश करो। क्या यह आसान लगा?
Solution: हाँ, ईंटों को सीधी लाइन में रखकर उन पर चलना आसान लगा। यह एक प्रकार का संतुलन अभ्यास है जो बच्चों को चलने के तरीके को समझने में मदद करता है।

चलो, करके देखें (पृष्ठ 1)

अपनी टीचर की मदद से चार-पाँच बाँसों को बाँध कर एक छोटा सा पुल बनाओ। उस पर चल कर देखो। (क) तुम्हें कैसा लगा? (ख) गिरे तो नहीं?
Solution: (क) बाँस के पुल पर चलना रोमांचक और मजेदार लगा। (ख) मैं गिरा नहीं, लेकिन पुल थोड़ा हिल रहा था, इसलिए सावधानी से चलना पड़ा। यह अनुभव थोड़ा चुनौतीपूर्ण था।

चलो, करके देखें (पृष्ठ 1)

जूते या चप्पल पहन कर पुल पर चलना ज्यादा आसान होगा या नंगे पैर? क्यों?
Solution: नंगे पैर पुल पर चलना ज्यादा आसान हो सकता है, क्योंकि नंगे पैर बाँस की सतह पर बेहतर पकड़ बना सकते हैं। जूते या चप्पल की चिकनी सतह फिसलने का कारण बन सकती है, खासकर अगर बाँस गीला हो।

करके देखो (पृष्ठ 2)

चित्र 1 और 2 को देखो। बच्चे कुँए से बाल्टी खींच रहे हैं। क्या तुम दोनों चित्रों में अंतर बता सकते हो?
Solution: चित्र 1 में, बच्चा सीधे रस्सी से बाल्टी खींच रहा है, जिसमें अधिक बल लगता है। चित्र 2 में, बच्चा घिरनी (पुली) का उपयोग करके बाल्टी खींच रहा है। घिरनी के कारण बाल्टी को ऊपर खींचना आसान हो जाता है।

करके देखो (पृष्ठ 2)

इन दोनों में से किस तरह से खींचना आसान होगा - पुली (घिरनी) के साथ या बिना पुली के?
Solution: पुली (घिरनी) के साथ बाल्टी खींचना ज्यादा आसान होगा। घिरनी रस्सी की दिशा बदलकर बल लगाने की दिशा को बदल देती है, जिससे कम प्रयास में ही बाल्टी को ऊपर खींचा जा सकता है।

करके देखो (पृष्ठ 2)

अपने आस-पास देखो। तुम कहाँ-कहाँ पुली का प्रयोग देखते हो? उनकी सूची बनाओ।
Solution: मैं अपने आस-पास कई जगहों पर पुली का प्रयोग देखता हूँ, जैसे:
  • निर्माण स्थलों पर भारी सामान उठाने के लिए।
  • कुओं से पानी निकालने के लिए।
  • झंडे को ऊपर चढ़ाने या नीचे उतारने के लिए।
  • कुछ प्रकार की लिफ्टों में।
पुली का उपयोग भारी वस्तुओं को उठाने या उनकी दिशा बदलने में मदद करता है।

करके देखो (पृष्ठ 2)

तुम भी चरखी या खाली धागे की रील से पुली बनाकर कुछ सामान उठाने की कोशिश करो।
Solution: यह एक व्यावहारिक गतिविधि है जिसे छात्र स्वयं करके पुली के कार्य को समझ सकते हैं। एक चरखी या रील को किसी ऊँचे स्थान से लटकाकर, उसके चारों ओर धागा लपेटकर और धागे के एक सिरे पर कुछ वजन बाँधकर, दूसरे सिरे को खींचकर सामान उठाने का अनुभव किया जा सकता है।

(पृष्ठ 3)

यह पुल बाँस के बने पुल से किस तरह अलग है?
Solution: यह पुल बाँस के पुल से कई मायनों में अलग है। यह पुल सीमेंट, गिट्टी और लोहे जैसी मजबूत सामग्री से बना है, जबकि बाँस का पुल केवल बाँस से बनता है। यह पुल अधिक चौड़ा, मजबूत और टिकाऊ है, और इस पर एक साथ कई लोग और गाड़ियाँ भी चल सकती हैं, जबकि बाँस का पुल आमतौर पर संकरा होता है और केवल पैदल चलने वालों के लिए उपयुक्त होता है।

(पृष्ठ 3)

अंदाजा लगाओ, इस पुल को एक समय पर कितने लोग पार कर सकते हैं?
Solution: यह पुल काफी मजबूत और चौड़ा है, इसलिए एक समय पर बीस से भी ज्यादा लोग आसानी से इसे पार कर सकते हैं। इसकी क्षमता बाँस के पुल से कहीं अधिक है।

(पृष्ठ 3)

तुमने देखा कैसे बच्चे अलग-अलग पुलों की मदद से उबड़-खाबड़ रास्ते और नदियों को पार करके स्कूल पहुँचते हैं।
Solution: हाँ, मैंने देखा कि विभिन्न प्रकार के पुल, जैसे कि बाँस के पुल और सीमेंट के पुल, बच्चों को उबड़-खाबड़ रास्तों और नदियों को पार करके स्कूल पहुँचने में मदद करते हैं। ये पुल यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाते हैं।

(पृष्ठ 3)

अगर तुम्हें मौका मिले, तो तुम कौन-से पुल से जाना चाहोगे? क्यों?
Solution: अगर मुझे मौका मिले, तो मैं सीमेंट से बने पुल से जाना चाहूँगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीमेंट का पुल बाँस या रस्सी से बने पुल की तुलना में बहुत अधिक सुरक्षित, मजबूत और स्थिर होता है। इस पर चलना भी आसान होता है और यह अधिक लोगों और वाहनों का भार वहन कर सकता है।

(पृष्ठ 3)

स्कूल जाने के लिए क्या तुम भी कोई पुल पार करते हो? वह पुल कैसा दिखाई देता है?
Solution: मेरे स्कूल जाने के रास्ते में कोई पुल नहीं पड़ता है। हालाँकि, मैंने कई बार सीमेंट और लोहे से बने मजबूत पुलों को पार किया है, जो नदियों और सड़कों के ऊपर बने होते हैं। ये पुल बहुत चौड़े और पक्के होते हैं।

(पृष्ठ 3)

अपने दादा-दादी से पता करो कि उनके बचपन के समय में पुल कैसे होते थे?
Solution: मेरे दादा-दादी ने बताया कि उनके बचपन में भी कई तरह के पुल होते थे, जिनमें लकड़ी और पत्थर के पुल प्रमुख थे। कुछ जगहों पर आज की तरह ही बाँस के पुल भी होते थे, लेकिन सीमेंट और लोहे के पुल उतने आम नहीं थे जितने आज हैं। पुराने पुल अक्सर छोटे और कम मजबूत होते थे।

(पृष्ठ 4)

अपने आस-पास किसी पुल या पुलिया को देखो और उसके बारे में कुछ बातें पता करो- वह कहाँ बना है—पानी पर, सड़क पर, पहाड़ों के बीच या कहीं और?
Solution: मैंने अपने आस-पास एक पुल देखा है जो एक नदी के ऊपर बना हुआ है। यह पुल पानी को पार करने के लिए बनाया गया है ताकि लोग और गाड़ियाँ आसानी से नदी के एक ओर से दूसरी ओर जा सकें।

(पृष्ठ 4)

पुल को कौन-कौन पार करता है? लोग ही जाते हैं या जानवर और गाड़ियाँ भी?
Solution: इस पुल को लोग, जानवर और गाड़ियाँ - सभी पार करते हैं। यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है जहाँ से दैनिक यातायात गुजरता है, जिसमें कार, बसें, मोटरसाइकिलें, साइकिलें, पैदल चलने वाले लोग और कभी-कभी पशु भी शामिल होते हैं।

(पृष्ठ 4)

क्या वह पुल पुराना-सा लगता है या नया?
Solution: यह पुल बहुत पुराना नहीं लगता है। यह अच्छी स्थिति में है और ऐसा प्रतीत होता है कि इसका हाल ही में रखरखाव किया गया है या यह अपेक्षाकृत नया है।

(पृष्ठ 4)

पता करो कि वह पुल किन-किन चीजों से बना है? उन चीजों की सूची बनाओ।
Solution: यह पुल मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजों से बना है:
  • सीमेंट
  • गिट्टी (कंकड़-पत्थर)
  • लोहे की छड़ें (सरिया)
  • अलकतरा (सड़क बनाने के लिए)
  • रेत
ये सामग्रियाँ मिलकर पुल को मजबूती और टिकाऊपन प्रदान करती हैं।

(पृष्ठ 4)

उस पुल का चित्र कॉपी में बनाओ। पुल पर चलती ट्रेन, गाड़ियाँ, जानवर और लोग दिखाना मत भूलना।
Solution: यह एक रचनात्मक कार्य है जहाँ छात्र अपने देखे हुए पुल का चित्र अपनी कॉपी में बना सकते हैं। चित्र बनाते समय, पुल के विभिन्न हिस्सों जैसे कि पिलर, सड़क की सतह, और रेलिंग को दिखाना चाहिए। साथ ही, पुल पर चलते हुए विभिन्न प्रकार के यातायात जैसे कार, बस, साइकिल, पैदल यात्री और जानवरों को भी दर्शाना चाहिए ताकि पुल की जीवंतता का पता चले।

(पृष्ठ 4)

सोचो, अगर वह पुल नहीं होता, तो क्या-क्या परेशानियाँ होतीं? कुछ अन्य तरीके देखें, जिनसे बच्चे स्कूल पहुँचते हैं।
Solution: यदि वह पुल नहीं होता, तो नदी पार करने में बहुत कठिनाई होती। लोगों को या तो नाव का उपयोग करना पड़ता, जिसमें अधिक समय लगता और खतरा भी हो सकता था, या फिर उन्हें बहुत लंबा रास्ता तय करके नदी के किसी दूसरे छोर पर जाना पड़ता। इससे स्कूल पहुँचने में देरी होती और दैनिक जीवन भी अस्त-व्यस्त हो जाता। बच्चे स्कूल पहुँचने के लिए नाव, या कुछ दूर जाकर बस का उपयोग कर सकते थे, या फिर उन्हें बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता।

(पृष्ठ 5)

क्या तुमने किसी और तरह की नाव देखी है?
Solution: हाँ, मैंने कई अन्य तरह की नावें देखी हैं। छोटी डोंगी से लेकर बड़ी मोटरबोट और यात्री जहाज तक, विभिन्न आकार और प्रकार की नावें होती हैं जिनका उपयोग अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है, जैसे मछली पकड़ना, माल ढोना या लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना।

(पृष्ठ 5)

पानी पार करने के और क्या तरीके हो सकते हैं?
Solution: पानी पार करने के कई तरीके हो सकते हैं, जैसे:
  • पुल (यदि संभव हो)
  • नाव या जहाज
  • तैर कर (यदि पानी सुरक्षित हो और दूरी कम हो)
  • हवाई जहाज (यदि दूरी बहुत अधिक हो)
  • कुछ जगहों पर रस्सियों या केबल कार का भी उपयोग किया जा सकता है।
सही तरीका पानी की चौड़ाई, गहराई और उपलब्ध साधनों पर निर्भर करता है।

(पृष्ठ 5)

क्या तुम भी कभी ऊँट-गाड़ी या ताँगे पर बैठे हो?
Solution: हाँ, मैं ताँगे पर बैठा हूँ। यह एक अनोखा अनुभव था जिसमें घोड़े द्वारा खींची जाने वाली गाड़ी में बैठकर यात्रा करना मजेदार था। ऊँट-गाड़ी पर बैठने का अनुभव शायद रेगिस्तानी इलाकों में ही संभव है।

(पृष्ठ 5)

कहाँ? खुद चढ़े थे या किसी ने बिठाया था?
Solution: मैं अपने दादाजी के घर जाते समय ताँगे पर बैठा था। मेरे चाचाजी ने मुझे ताँगे पर चढ़ने में मदद की थी और वे मेरे साथ ही बैठे थे।

(पृष्ठ 5)

तुम्हें उस गाड़ी पर बैठकर कैसा लगा?
Solution: मुझे ताँगे पर बैठकर बहुत मजा आया। घोड़े की चाल और गाड़ी की हल्की हलचल एक अलग ही अनुभव था, जो आजकल की गाड़ियों से बिल्कुल भिन्न है। यह एक सुखद और यादगार अनुभव था।

(पृष्ठ 5)

अपना अनुभव कक्षा में बताओ।
Solution: दोस्तों, मैंने हाल ही में ताँगे की सवारी का अनुभव किया। ताँगा एक पारंपरिक गाड़ी होती है जिसे घोड़ा खींचता है। यह लकड़ी से बनी होती है और इसकी सवारी काफी आरामदायक और मजेदार थी। इंजन की आवाज के बिना, घोड़े की टापों की आवाज सुनना एक अलग ही अनुभव था। मैं आप सभी को भी सलाह दूँगा कि यदि आपको कभी अवसर मिले तो ताँगे की सवारी अवश्य करें।

Common mistakes

  • पुलों के विभिन्न प्रकारों और उनके निर्माण सामग्री के बीच भ्रमित होना।
  • घिरनी (पुली) के कार्य को ठीक से न समझना।
  • परिवहन के विभिन्न साधनों के लाभों को कम आंकना या अधिक आंकना।
  • सुरक्षा और सुविधा के आधार पर पुलों की तुलना करने में कठिनाई।

Revision tips

  • विभिन्न प्रकार के पुलों के चित्र बनाएं और उनकी सामग्री लिखें।
  • घिरनी (पुली) के उपयोग के उदाहरणों की सूची बनाएं।
  • स्कूल पहुँचने के विभिन्न साधनों की तुलना करते हुए एक तालिका बनाएं।
  • अपने दादा-दादी से उनके बचपन के पुलों के बारे में पूछें और अंतर नोट करें।

Practice MCQs

Q1. बाँस के पुल की तुलना में सीमेंट का पुल क्यों बेहतर माना जाता है?

Q2. कुएँ से पानी खींचने में घिरनी (पुली) का उपयोग क्यों किया जाता है?

Q3. निम्नलिखित में से कौन सा परिवहन का साधन है जो मुख्य रूप से घोड़े द्वारा खींचा जाता है?

Q4. ईंटों को सीधी लाइन में रखकर उन पर चलना कैसा अनुभव हो सकता है?

Q5. नंगे पैर पुल पर चलने से क्या फायदा हो सकता है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान कक्षा 4 के सामाजिक विज्ञान विषय के लिए है, जो 'चलो, चलें स्कूल!' अध्याय पर केंद्रित है।

इस अध्याय में किस प्रकार के पुलों पर चर्चा की गई है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से बाँस के पुल और सीमेंट के पुल पर चर्चा की गई है, साथ ही पुलों के निर्माण और उनकी मजबूती के बारे में भी बताया गया है।

घिरनी (पुली) का क्या कार्य है?

घिरनी (पुली) का उपयोग कुएँ से बाल्टी खींचने जैसे कार्यों को आसान बनाने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह कम बल लगाकर भारी वस्तुओं को उठाने में मदद करती है।

छात्र इस समाधान का उपयोग कैसे कर सकते हैं?

छात्र इस समाधान का उपयोग अध्याय की अवधारणाओं को समझने, प्रश्नों के उत्तर जानने और परीक्षा की तैयारी के लिए कर सकते हैं।

क्या इस अध्याय में विभिन्न परिवहन साधनों के बारे में भी बताया गया है?

हाँ, इस अध्याय में नाव, ऊँट-गाड़ी और ताँगे जैसे विभिन्न परिवहन साधनों के बारे में बताया गया है और वे स्कूल पहुँचने में कैसे मदद करते हैं, इस पर भी चर्चा की गई है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.