कक्षा 4 हिंदी NCERT समाधान: अध्याय 14 - मुफ्त ही मुफ्त (गुजराती लोककथा)
यह पृष्ठ कक्षा 4 के हिंदी विषय के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जो 'मुफ्त ही मुफ्त' नामक एक मनोरंजक गुजराती लोककथा पर आधारित है। यह समाधान छात्रों को कहानी की गहरी समझ विकसित करने में मदद करते हैं, जिसमें पात्रों के उद्देश्यों, घटनाओं के कारणों और भाषा के प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें 'तुम्हारी समझ', 'भीखूभाई ऐसे थे', 'क्या बढ़ा, क्या घटा', 'कहो कहानी', 'बात की बात', 'शब्दों की बात', 'मंडी', और 'गुजरात की झलक' जैसे अनुभागों के प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। समाधानों को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से लिखा गया है, जिससे छात्रों को कहानी के मुख्य पात्र भीखूभाई के कंजूस स्वभाव, नारियल के दाम में उतार-चढ़ाव के कारणों और कहानी के अंत में हुई घटनाओं को समझने में आसानी हो। यह पृष्ठ परीक्षा की तैयारी और हिंदी भाषा कौशल को बेहतर बनाने के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 14. मुफ्त ही मुफ्त (गुजराती लोककथा ) |
Chapter summary
कक्षा 4 के लिए 'मुफ्त ही मुफ्त' NCERT समाधान गुजराती लोककथा पर केंद्रित हैं। यह समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों, विशेषकर भीखूभाई के कंजूस स्वभाव, और उनके नारियल खरीदने के अनुभव को समझने में मदद करते हैं। इसमें कहानी के विभिन्न पहलुओं जैसे दाम में अंतर, पात्रों के व्यवहार, और भाषा के प्रयोग पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। यह खंड छात्रों को कहानी की बारीकियों को समझने और अपनी समझ को बेहतर बनाने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- कहानी के पात्रों के व्यवहार और उनके कारणों को समझना।
- वस्तुओं के मूल्य में परिवर्तन के कारणों का विश्लेषण करना।
- कहानी के मुख्य संदेश को पहचानना।
- अपनी भाषा में संवाद को फिर से लिखना।
- विभिन्न भाषाओं में आदर सूचक शब्दों की पहचान करना।
- कहानी के आधार पर अपने विचार व्यक्त करना।
Topics covered
Paper topics
- गुजराती लोककथा
- पात्र विश्लेषण
- मूल्य और लागत
- कंजूसी का स्वभाव
- कहानी का सारांश
- संवाद लेखन
- शब्द ज्ञान
- बाजार और मंडी
- सांस्कृतिक संदर्भ
- आदर सूचक शब्द
Important topics
- भीखूभाई का कंजूस स्वभाव
- नारियल के दाम में अंतर के कारण
- कहानी का मुख्य संदेश
- संवाद को अपनी भाषा में लिखना
- गुजरात की सांस्कृतिक झलक
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Questions and Solutions
प्रश्न (क)
भीखूभाई हर बार नारियल का दाम कम देना चाहते थे क्योंकि वे बहुत ज़्यादा कंजूस थे। वे किसी भी चीज़ को खरीदने में कम से कम पैसे खर्च करना पसंद करते थे, भले ही इसके लिए उन्हें ज़्यादा मेहनत करनी पड़े या दूर जाना पड़े।
प्रश्न (ख)
नारियल के दाम में फर्क इसलिए था क्योंकि जहाँ नारियल की खेती होती है, यानी नारियल के बगीचे में, वह सबसे सस्ता मिलता है। जैसे-जैसे नारियल बाजार तक पहुँचता है, उसमें परिवहन का खर्च, व्यापारियों का मुनाफा और अन्य खर्चे जुड़ते जाते हैं, जिससे उसकी कीमत बढ़ती जाती है। अंततः बाजार में उसकी कीमत सबसे अधिक हो जाती है।
प्रश्न (ग)
नहीं, भीखूभाई को नारियल सचमुच मुफ्त में नहीं मिला। हालाँकि अंत में नारियल उनके सिर पर गिर गया, लेकिन इस तक पहुँचने के लिए उन्हें बहुत दूर पैदल चलना पड़ा, धूप में पसीना बहाना पड़ा और काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसलिए, यह कहना कि उन्हें यह पूरी तरह से मुफ्त में मिला, सही नहीं है क्योंकि इसके लिए उन्होंने काफी प्रयास और कष्ट उठाए।
प्रश्न (घ)
बरगद के पेड़ को 'बूढ़ा' इसलिए कहा गया है क्योंकि बरगद के पेड़ बहुत लंबे समय तक जीवित रहते हैं और बहुत पुराने होते हैं। वे कई पीढ़ियों से एक ही स्थान पर खड़े रहते हैं, इसलिए उन्हें 'बूढ़ा' कहना उनकी प्राचीनता और विशालता को दर्शाता है।
प्रश्न (क)
यह कथन भीखूभाई के बारे में कहानी से पता चलता है। वे केवल नारियल ही नहीं, बल्कि अन्य स्वादिष्ट चीज़ों का भी आनंद लेना पसंद करते थे, जैसा कि कहानी के संदर्भ से अनुमान लगाया जा सकता है कि वे अच्छी चीज़ों के लिए प्रयास करते थे।
प्रश्न (ख)
यह बात बिल्कुल सही है। भीखूभाई इतने कंजूस थे कि वे किसी भी चीज़ के लिए ज़्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे। वे हमेशा सबसे सस्ता विकल्प ढूंढते थे, भले ही उसमें उनकी मेहनत ज़्यादा लगे।
प्रश्न (ग)
हाँ, भीखूभाई को नारियल बहुत पसंद था। इसी पसंद के कारण वे उसे खरीदने के लिए इतनी दूर तक गए और दाम कम करवाने की कोशिश की। उनकी नारियल के प्रति चाहत ही कहानी का मुख्य आधार है।
प्रश्न (घ)
यह भीखूभाई के कंजूस स्वभाव का एक और प्रमाण है। वे चाहते थे कि नारियल का दाम इतना कम हो कि उन्हें लगे कि उन्हें बहुत अच्छी डील मिल गई है, भले ही इसके लिए उन्हें मोलभाव करने में काफी समय लगाना पड़े।
प्रश्न (ङ)
भीखूभाई अपनी बातों से दूसरों को मनाने या अपनी बात मनवाने में माहिर थे। वे मोलभाव करने और अपनी कंजूसी को सही ठहराने के लिए तरह-तरह की बातें बना सकते थे, ताकि वे कम दाम में सामान खरीद सकें।
प्रश्न
कहानी के आगे बढ़ने के साथ निम्नलिखित चीज़ों का अनुभव हुआ:
- नारियल का दाम: कहानी की शुरुआत में दाम ज़्यादा था, लेकिन भीखूभाई के मोलभाव और अलग-अलग जगहों पर जाने के कारण, अंततः दाम कम होता गया (या वे कम दाम पर पाने की कोशिश करते रहे)। इसलिए, दाम के संदर्भ में, यह 'घटा' (या घटने की कोशिश हुई)।
- भीखूभाई का लालच: जैसे-जैसे भीखूभाई नारियल के करीब पहुँचते गए और उसे पाने की कोशिश करते रहे, उनका लालच बढ़ता गया। वे हर हाल में सस्ता नारियल चाहते थे। इसलिए, उनका लालच 'बढ़ा'।
- रास्ते की लंबाई: भीखूभाई ने नारियल खरीदने के लिए कई जगहों की यात्रा की, जिससे तय की गई दूरी या रास्ते की लंबाई 'बढ़ी'।
- भीखूभाई की थकान: लंबी यात्रा और धूप में चलने के कारण भीखूभाई की थकान भी 'बढ़ी'।
प्रश्न
यदि भीखूभाई को आम खाने की इच्छा होती, तो कहानी कुछ इस प्रकार आगे बढ़ सकती थी:
भीखूभाई को आम खाने का मन करता। वे सबसे सस्ते आम खरीदने के लिए बाजार जाते। वहाँ उन्हें आम ₹50 प्रति किलो के भाव से मिलते। भीखूभाई सोचते, "इतने महंगे आम! मैं तो ₹20 किलो वाले आम ही खरीदूंगा।" वे आम वाले से मोलभाव करते। आम वाला कहता, "भाई साहब, ये दशहरी आम हैं, ₹50 से कम में नहीं मिलेंगे।" भीखूभाई कहते, "ठीक है, मैं दूसरी दुकान से ले लूंगा।" वे दूसरी दुकान पर जाते जहाँ आम ₹40 किलो मिल रहे थे। वहाँ भी वे ₹30 के लिए मोलभाव करते। अंत में, शायद वे किसी ऐसे ठेले वाले को ढूंढते जहाँ आम ₹25 किलो मिल रहे हों, और वहाँ भी वे ₹20 के लिए ज़िद करते। हो सकता है कि वे आम खरीदने के बजाय, आम के पेड़ के नीचे बैठकर गिरे हुए आम खाने की कोशिश करते, या फिर बिना आम खरीदे ही घर लौट आते क्योंकि उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार बहुत सस्ते आम नहीं मिलते।
प्रश्न
यहाँ कहानी की बातचीत को एक सामान्य घरेलू बोली में फिर से लिखा गया है:
भीखूभाई: अरे भाई, ये नारियल कितने का दिया?
नारियल वाला: अंकल जी, एक नारियल ₹2 का है।
भीखूभाई: ₹2? बहुत ज़्यादा है! ₹1 में दे दो, नहीं तो मैं नहीं लूँगा।
नारियल वाला: अरे अंकल जी, ₹1 में तो मंडी में भी नहीं मिलेगा। आप वहीं जाकर ले लीजिए।
भीखूभाई: अच्छा, मंडी कहाँ है? कितनी दूर है?
नारियल वाला: यहाँ से थोड़ी सी दूर है, चले जाइए।
भीखूभाई: ठीक है, मैं वहीं जाता हूँ।
प्रश्न
दिए गए उदाहरणों के अनुसार, हमें लिंग बदलकर शब्दों को लिखना है:
- काका (पुरुष) - काकी (स्त्री)
- दर्ज़िन (स्त्री) - दर्ज़ी (पुरुष)
- मालिन (स्त्री) - माली (पुरुष)
- टोकरा (पुल्लिंग) - टोकरी (स्त्रीलिंग)
- मटका (पुल्लिंग) - मटकी (स्त्रीलिंग)
- गद्दी (स्त्रीलिंग) - गद्दा (पुल्लिंग)
प्रश्न (क)
मंडी में विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियाँ, फल, अनाज, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थ बिक रहे होंगे। उदाहरण के लिए: आलू, टमाटर, प्याज़, गाजर, गोभी, बैंगन, हरी मिर्च, धनिया, पालक, आम, केले, संतरे, चावल, दालें, गेहूँ, तेल, घी, और अन्य रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें।
प्रश्न (ख)
मंडी में तरह-तरह की आवाज़ें सुनाई देती हैं, जैसे:
- विक्रेताओं की पुकारें: "ताज़ा माल ले लो!", "सबसे सस्ता यहीं मिलेगा!", "मीठे आम!"
- ग्राहकों की बातचीत: मोलभाव करते हुए, चीज़ों की कीमत पूछते हुए।
- सामान की आवाज़ें: सब्ज़ियों और फलों को तौलते हुए, बोरों को उठाते हुए।
- वाहनों की आवाज़ें: ट्रकों और ठेलों के हॉर्न या इंजन की आवाज़।
- अन्य आवाज़ें: जैसे "भेलपुरी खाओ!", "रंग-बिरंगे गुब्बारे ले लो!", "दस रुपये में डेढ़ किलो आलू भरो!"
प्रश्न (ग)
हाँ, मेरे घर के पास एक सड़क पर निर्माण कार्य चल रहा है। वहाँ बहुत शोर होता है। सुबह से ही ड्रिल मशीन की तेज़ आवाज़, हथौड़ों की खट-खट, सीमेंट मिलाने वाली मशीन की गड़गड़ाहट और मजदूरों की चिल्लाने की आवाज़ें आती रहती हैं। कभी-कभी भारी सामान उठाने या उतारने की भी ज़ोर की आवाज़ें होती हैं। यह शोर दिन भर चलता रहता है और काफी परेशान करने वाला होता है।
प्रश्न (क)
इस लोककथा के चित्रों से यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह गुजरात की है क्योंकि:
- चित्रों में दिखाए गए लोगों के पहनावे गुजराती संस्कृति से मिलते-जुलते हैं।
- मंडी में बिकने वाली कुछ चीज़ों के नाम गुजराती में हो सकते हैं, जैसे 'बटाटा' (आलू) या 'कांदा' (प्याज़)।
- पुरुष पात्रों के नाम के साथ 'भाई' और महिला पात्रों के नाम के साथ 'बेन' (बहन) जैसे प्रत्यय लगे हुए हैं, जो गुजरात में आदरसूचक रूप से प्रयोग किए जाते हैं।
प्रश्न (ख)
यह एक गतिविधि आधारित प्रश्न है जिसे छात्रों को अपनी कक्षा के साथियों से पूछकर पूरा करना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कक्षा में पंजाबी बोलने वाले बच्चे हैं, तो वे आदर देने के लिए 'जी' या 'जीजा' जैसे शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं। बंगाली में 'दा' या 'दीदी' का प्रयोग हो सकता है। हर भाषा की अपनी विशिष्टता होती है। छात्र अपने सहपाठियों से पूछकर इस सूची को पूरा कर सकते हैं।
Common mistakes
- पात्रों के कंजूस स्वभाव को गलत समझना।
- मूल्य परिवर्तन के कारणों को सतही तौर पर देखना।
- कहानी के अंतर्निहित संदेश को न समझ पाना।
- अपनी भाषा में संवाद को प्रभावी ढंग से न लिख पाना।
Revision tips
- कहानी को ध्यान से पढ़ें और मुख्य पात्र भीखूभाई के लालच पर विशेष ध्यान दें।
- नारियल के दाम में हुए बदलाव के कारणों को समझें।
- कहानी के अंत में हुई घटनाओं पर विचार करें और उनके पीछे के कारणों को जानें।
- अपनी भाषा में संवाद लिखने का अभ्यास करें।
- कहानी से जुड़े प्रश्नों के उत्तर स्वयं देने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. भीखूभाई हर बार नारियल का कम दाम क्यों देना चाहते थे?
Explanation: भीखूभाई बहुत कंजूस थे, इसलिए वे हर बार नारियल का दाम कम से कम देना चाहते थे।
Q2. बाजार में नारियल की कीमत सबसे अधिक क्यों होती है?
Explanation: बाजार तक पहुँचने में नारियल की कीमत में परिवहन और अन्य खर्च जुड़ जाते हैं, जिससे वह सबसे महंगा बिकता है।
Q3. कहानी के अनुसार, भीखूभाई को नारियल कैसे मिला?
Explanation: कहानी में बताया गया है कि अंत में एक नारियल पेड़ से गिरकर भीखूभाई के सिर पर आ फूटा, जिससे उन्हें वह 'मुफ्त' में मिला।
Q4. कहानी में बरगद के पेड़ को 'बूढ़ा' क्यों कहा गया है?
Explanation: बरगद के पेड़ को बूढ़ा इसलिए कहा गया है क्योंकि वह बहुत वर्षों से अस्तित्व में है और बहुत पुराना है।
Q5. गुजरात में आदर देने के लिए नाम के साथ किन शब्दों का प्रयोग होता है?
Explanation: गुजरात में बड़ों या आदरणीय व्यक्तियों के नाम के साथ 'भाई' (पुरुषों के लिए) और 'बेन' (महिलाओं के लिए) जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह समाधान कक्षा 4 के हिंदी विषय के लिए हैं, जो 'मुफ्त ही मुफ्त' नामक अध्याय पर आधारित हैं।
इस अध्याय का मुख्य पात्र कौन है और उसका स्वभाव कैसा है?
इस अध्याय का मुख्य पात्र भीखूभाई है, जो बहुत कंजूस स्वभाव का है और कम से कम पैसों में चीजें खरीदना चाहता है।
कहानी में नारियल के दाम में अंतर क्यों दिखाया गया है?
कहानी में नारियल के दाम में अंतर यह दिखाने के लिए दिखाया गया है कि खेती की जगह पर चीजें सस्ती होती हैं और बाजार तक पहुँचते-पहुँचते उनकी कीमत बढ़ जाती है।
क्या यह समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान कहानी की गहरी समझ विकसित करने, मुख्य बिंदुओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेंगे।
कहानी में 'मुफ्त ही मुफ्त' का क्या अर्थ है?
कहानी में 'मुफ्त ही मुफ्त' का अर्थ प्रतीकात्मक है। भीखूभाई को अंततः नारियल मुफ्त में तब मिलता है जब वह पेड़ से गिरकर उनके सिर पर आ फूटता है, लेकिन इस तक पहुँचने में उन्हें काफी परेशानी और मेहनत करनी पड़ती है।
इस समाधान में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया गया है?
इस समाधान में सरल और स्पष्ट हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया है, जो कक्षा 4 के छात्रों के समझने के स्तर के अनुकूल है।
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