कक्षा 12 हिंदी: कैमरे में बंद अपाहिज - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 हिंदी के लिए रघुवीर सहाय द्वारा रचित 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता के विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कविता दूरदर्शन जैसे माध्यमों द्वारा विकलांग व्यक्तियों की पीड़ा को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है। समाधान कविता के सार, कवि परिचय, और काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या को स्पष्ट करते हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे व्यावसायिक दबाव के चलते संवेदनशीलता की कमी हो जाती है और पीड़ा को एक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह छात्रों को कविता के गहरे अर्थ, माध्यमों की भूमिका और मानवीय संवेदनशीलता के महत्व को समझने में मदद करेगा, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. कैमरे में बंद अपाहिज

Chapter summary

यह खंड कक्षा 12 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'आरोह, भाग-2' में संकलित रघुवीर सहाय की कविता 'कैमरे में बंद अपाहिज' पर केंद्रित है। इसमें कविता का प्रतिपाद्य और सार समझाया गया है, जिसमें दूरदर्शन जैसे माध्यमों द्वारा विकलांग व्यक्तियों की पीड़ा को व्यावसायिक लाभ के लिए प्रस्तुत करने की संवेदनहीनता पर व्यंग्य किया गया है। काव्यांशों की व्याख्या के माध्यम से कविता के मूल भाव को स्पष्ट किया गया है, जो छात्रों को परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • रघुवीर सहाय के जीवन और साहित्यिक योगदान को समझना।
  • कविता 'कैमरे में बंद अपाहिज' के मूल भाव और प्रतिपाद्य को पहचानना।
  • दूरदर्शन जैसे माध्यमों की संवेदनशीलता और व्यावसायिकता पर आलोचनात्मक दृष्टि विकसित करना।
  • काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या करने की क्षमता का विकास करना।
  • विकलांग व्यक्तियों के प्रति समाज की संवेदनशीलता के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • रघुवीर सहाय का जीवन परिचय
  • रघुवीर सहाय की रचनाएँ
  • रघुवीर सहाय की काव्यगत विशेषताएँ
  • रघुवीर सहाय की भाषा-शैली
  • कविता का प्रतिपाद्य
  • कविता का सार
  • काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या
  • दूरदर्शन माध्यम की भूमिका
  • संवेदनशीलता बनाम व्यावसायिकता
  • अपाहिजपन और पीड़ा का चित्रण
  • व्यंग्य और त्रासदी

Important topics

  • कविता का प्रतिपाद्य और सार
  • काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या
  • दूरदर्शन की व्यावसायिकता और संवेदनहीनता पर व्यंग्य
  • कवि का उद्देश्य और संदेश
  • रघुवीर सहाय की भाषा-शैली

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Questions and Solutions

यह पृष्ठ कक्षा 12 हिंदी के लिए रघुवीर सहाय द्वारा रचित 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता के विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कविता दूरदर्शन जैसे माध्यमों द्वारा विकलांग व्यक्तियों की पीड़ा को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है। समाधान कविता के सार, कवि परिचय, और काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या को स्पष्ट करते हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे व्यावसायिक दबाव के चलते संवेदनशीलता की कमी हो जाती है और पीड़ा को एक उत्पाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह छात्रों को कविता के गहरे अर्थ, माध्यमों की भूमिका और मानवीय संवेदनशीलता के महत्व को समझने में मदद करेगा, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी है।

1. काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या

हम दूरदर्शन पर बोलेंगे हम समर्थ शक्तिवान हम एक दुर्बल को लाएँगे एक बंद कमरे में उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं? तो आप क्यों अपाहिज हैं? आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा देता है? (कैमरा दिखाओ इसे बड़ा-बड़) हाँ तो बताइए आपका दुख क्या हैं जल्दी बताइए वह दुख बताइए बता नहीं पाएगा।
Solution:

प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'आरोह, भाग-2' में संकलित रघुवीर सहाय द्वारा रचित कविता 'कैमरे में बंद अपाहिज' से लिया गया है। इस काव्यांश में कवि ने दूरदर्शन जैसे माध्यमों की संवेदनहीनता और व्यावसायिकता पर करारा व्यंग्य किया है।

व्याख्या:

कवि कहता है कि दूरदर्शन के संचालक स्वयं को बहुत शक्तिशाली और सक्षम मानते हैं। वे अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए एक कमजोर या विकलांग व्यक्ति को स्टूडियो में ले आते हैं। एक बंद कमरे (स्टूडियो) में उस विकलांग व्यक्ति से वे सीधे और असंवेदनशील प्रश्न पूछते हैं, जैसे "क्या आप अपाहिज हैं?" और "आप अपाहिज क्यों हैं?"। वे यह भी पूछते हैं कि क्या आपका यह अपाहिजपन आपको कष्ट देता है? संचालक चाहते हैं कि विकलांग व्यक्ति अपने दुख को तुरंत बताए, क्योंकि "परदे पर वक्त की कीमत है"। वे कैमरे को निर्देश देते हैं कि विकलांग व्यक्ति के चेहरे को बड़ा करके दिखाया जाए ताकि उसके दुख को और अधिक प्रभावी ढंग से दिखाया जा सके। संचालक चाहते हैं कि विकलांग व्यक्ति अपना दुख बताए, लेकिन वे जानते हैं कि शायद वह बता न पाए, क्योंकि शायद वह इतना अधिक दुखी है कि शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता, या फिर वह इस तरह के प्रश्नों से घबरा गया है। संचालक का उद्देश्य विकलांग व्यक्ति को रुलाकर दर्शकों में करुणा जगाना है, ताकि उनका कार्यक्रम सफल हो सके।

विशेष: इस काव्यांश में कवि ने माध्यमों की व्यावसायिकता पर प्रश्न उठाया है, जहाँ वे मानवीय पीड़ा को भी एक वस्तु की तरह प्रस्तुत करते हैं। भाषा सरल और सीधी है, लेकिन व्यंग्य गहरा है।

Common mistakes

  • कविता के व्यंग्यात्मक पक्ष को अनदेखा करना।
  • माध्यमों की भूमिका को सतही तौर पर समझना।
  • काव्यांशों की व्याख्या में मूल भाव से भटक जाना।
  • कवि के उद्देश्य को केवल विकलांगों के प्रति सहानुभूति तक सीमित रखना।

Revision tips

  • कविता के सार को अपने शब्दों में लिखें।
  • कवि द्वारा उठाए गए सामाजिक मुद्दों पर विचार करें।
  • काव्यांशों की व्याख्या का अभ्यास करें, विशेषकर व्यावसायिकता और संवेदनशीलता के द्वंद्व पर ध्यान दें।
  • रघुवीर सहाय की भाषा-शैली की विशेषताओं को समझें।

Practice MCQs

Q1. रघुवीर सहाय का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

Q2. 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है?

Q3. कविता में 'हम समर्थ शक्तिवान' कहकर कौन संबोधित कर रहा है?

Q4. दूरदर्शन संचालक अपाहिज से क्या पूछना चाहते हैं?

Q5. कविता में किस बात पर व्यंग्य किया गया है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 12 के हिंदी विषय के लिए है, जो 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता पर आधारित है।

'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता का मुख्य संदेश यह है कि दूरदर्शन जैसे माध्यमों को किसी की पीड़ा को सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत करने के बजाय संवेदनशील होना चाहिए और दर्शकों में करुणा जगाने का प्रयास करना चाहिए, न कि केवल व्यावसायिक लाभ के लिए।

कविता में कवि ने किस पर व्यंग्य किया है?

कवि ने दूरदर्शन जैसे माध्यमों की उस प्रवृत्ति पर व्यंग्य किया है जहाँ वे विकलांगों की पीड़ा को व्यावसायिक लाभ के लिए सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत करते हैं, और इस प्रक्रिया में वे स्वयं संवेदनहीन हो जाते हैं।

इस समाधान से छात्रों को क्या लाभ होगा?

यह समाधान छात्रों को कविता के अर्थ, व्याख्या, कवि के उद्देश्य और माध्यमों की भूमिका को गहराई से समझने में मदद करेगा, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

रघुवीर सहाय की भाषा-शैली की क्या विशेषताएँ हैं?

रघुवीर सहाय की भाषा-शैली बातचीत की शैली के समान, सरल, सीधी और सधी हुई है। वे अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से बचते हैं और भयाक्रांत अनुभव की आवेग रहित अभिव्यक्ति करते हैं।

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