CBSE Class 12 Hindi (Aroh) Chapter 17: हजारी प्रसाद द्विवेदी NCERT Solutions

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CBSE कक्षा 12 हिंदी (आरोह) अध्याय 17 के लिए यह खंड हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध पर केंद्रित विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। समाधान लेखक के जीवन, प्रकृति और साहित्य पर गहन अवलोकनों में उतरते हैं, विशेष रूप से शिरीष वृक्ष को एक रूपक के रूप में उपयोग करते हुए। प्रमुख विषयों में प्रतिकूलता के सामने लचीलापन, आंतरिक कोमलता और बाहरी कठोरता के बीच संतुलन, एक लेखक के लिए अलगाव का महत्व, और जीवन शक्ति तथा समय के बीच शाश्वत संघर्ष शामिल हैं। ये समाधान स्पष्ट व्याख्याएं और अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को द्विवेदी के दार्शनिक और साहित्यिक दृष्टिकोण की बारीकियों को समझने में मदद मिलती है, जो परीक्षा की तैयारी और अध्याय के मूल संदेशों की गहरी समझ के लिए एक अमूल्य संसाधन है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter17. हजारी प्रसाद द्विवेदी

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 12 Hindi (Aroh) Chapter 17, "हजारी प्रसाद द्विवेदी," offers in-depth explanations of the text. It covers the author's philosophical insights, using the Shrish tree as a symbol of endurance and detachment. The solutions clarify concepts like the necessity of outer toughness to preserve inner softness, the poet's need for both detachment and passionate love, and the importance of adaptability in the face of time's relentless march. This resource helps students understand the chapter's central ideas and literary significance.

Learning outcomes

  • Understand the symbolism of the Shrish tree as presented by Hazariprasad Dwivedi.
  • Analyze the author's perspective on maintaining inner resilience amidst external hardships.
  • Explain the concept of balancing ' व्यवहार की कठोरता' (behavioral toughness) with 'हृदय की कोमलता' (heart's softness).
  • Grasp the author's definition of an ideal poet as a detached ascetic and a passionate lover.
  • Comprehend the idea of continuous adaptation and mobility as essential for survival against time.
  • Identify the author's critique of modern civilization's overemphasis on material strength over inner strength.

Topics covered

Paper topics

  • Hazariprasad Dwivedi's philosophy
  • Symbolism of the Shrish tree
  • Resilience and adaptability
  • Inner softness vs. outer toughness
  • The ideal poet's qualities
  • Detachment (Anasakti)
  • The struggle against time
  • Critique of modern civilization
  • Life force (Prandhara)
  • Mobility and progress

Important topics

  • Symbolism of the Shrish tree
  • The poet's dual nature (Yogi and Lover)
  • Adaptability and continuous mobility
  • Critique of materialism over spirituality
  • Balancing inner softness with outer toughness

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
Solution: लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी शिरीष के वृक्ष को एक अद्भुत अवधूत (संन्यासी) की तरह मानते हैं। इसका कारण यह है कि जिस प्रकार एक संन्यासी सांसारिक सुख-दुख की परवाह नहीं करता, उसी प्रकार शिरीष भी भयंकर गर्मी, लू, आँधी और वर्षा जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल रहता है। वह कोमल फूलों से लदा रहता है, मानो जीवन के अजेय मंत्र का प्रचार कर रहा हो। यह वृक्ष लंबे समय तक खिला और हरा-भरा रहता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्यशील रहने और अपनी अदम्य जिजीविषा (जीने की इच्छा) के साथ निस्पृह भाव से खड़े रहने की क्षमता को दर्शाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से मृत्यु और समय को भी पराजित करने का साहस रखता है।

प्रश्न 2

हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी कभी-कभी ज़रूरी हो जाती है - प्रस्तुत पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
Solution: प्रस्तुत पाठ के आधार पर, हृदय की कोमलता को सुरक्षित रखने के लिए व्यवहार में कठोरता लाना आवश्यक हो जाता है। लेखक शिरीष के वृक्ष का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि जिस प्रकार शिरीष अपनी आंतरिक सरसता और कोमलता को बचाने के लिए बाहरी तौर पर कठोर आवरण धारण करता है ताकि वह भीषण गर्मी और लू को सहन कर सके, उसी प्रकार मनुष्य को भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करने और कठोर निर्णय लेने के लिए बाहरी तौर पर दृढ़ और कठोर बनना पड़ता है। यह कठोरता उसे भावनात्मक रूप से टूटने से बचाती है और जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाती है।

प्रश्न 3

द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल व संघर्ष से भरी जीवन-स्थितियों में अविचल रहकर जिजीविषु बने रहने की सीख दी है। स्पष्ट करें।
Solution: द्विवेदी जी शिरीष के वृक्ष के माध्यम से हमें यह सीख देते हैं कि जीवन में चाहे कितना भी कोलाहल, संघर्ष, भ्रष्टाचार, अत्याचार या मारकाट क्यों न हो, हमें शिरीष की तरह अविचल और धैर्यशील रहना चाहिए। जिस प्रकार शिरीष भयंकर गर्मी में भी कोमल फूलों से लदा रहता है और बाहरी आपदाओं से अप्रभावित रहता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी किसी भी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न होने पर निराश नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, उसे शांत भाव से, अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति (जिजीविषा) के साथ, मंजिल की ओर बढ़ते रहना चाहिए। शिरीष हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर और शांत रहकर सामना करने का साहस कैसे बनाए रखें।

प्रश्न 4

हाय, वह अवधूत आज कहाँ है! ऐसा कहकर लेखक ने आत्मबल पर देह-बल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत किया है। कैसे?
Solution: लेखक का यह कथन कि "हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!" वर्तमान सभ्यता की एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। अवधूत उस व्यक्ति का प्रतीक है जो सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठा होता है और आत्मबल से परिपूर्ण होता है। लेखक के अनुसार, आज मनुष्य आत्मबल को महत्व देने के बजाय देह-बल (शारीरिक शक्ति), धन-बल (आर्थिक शक्ति), और अन्य भौतिक साधनों को जुटाने में लगा हुआ है। उनमें आत्मबल का अभाव हो गया है। वे मानवीय मूल्यों को त्यागकर हिंसा, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और घूसखोरी जैसी गलत प्रवृत्तियों को अपनाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे हैं। अनासक्त और आत्मबल संपन्न व्यक्तियों की कमी के कारण ऐसी स्थिति किसी भी सभ्यता के लिए संकट का कारण बन सकती है, जहाँ मानवता पतन की ओर अग्रसर हो।

प्रश्न 5

कवि (साहित्यकार) के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रज्ञता और विदग्ध प्रेमी का हृदय - एक साथ आवश्यक है। ऐसा विचार प्रस्तुत कर लेखक न साहित्य-कर्म के लिए बहुत ऊँचा मानदंड निर्धारित किया है। विस्तारपूर्वक समझाएँ।
Solution: लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी साहित्य-कर्म के लिए एक अत्यंत उच्च मानदंड निर्धारित करते हुए कहते हैं कि एक महान कवि या साहित्यकार बनने के लिए दो विपरीत गुणों का एक साथ होना आवश्यक है: पहला, अनासक्त योगी की तरह स्थिर प्रज्ञता (शांत और अविचल चित्त) और दूसरा, एक व्याकुल प्रेमी की तरह विदग्ध हृदय (गहरी संवेदना और प्रेम)। केवल छंद रचना या तकनीकी कुशलता से कोई महान कवि नहीं बन जाता। कवि में वज्र (हीरे) जैसी कठोरता और पुष्प (फूल) जैसी कोमलता, दोनों का समावेश होना चाहिए। कबीर, सूरदास, तुलसीदास और कालिदास जैसे महान कवियों को लेखक इसलिए महान मानता है क्योंकि उनमें अनासक्ति का भाव तो था ही, साथ ही उन्होंने मर्यादा का पालन करते हुए मधुरता और गहरी संवेदना का भी संचार किया। यह संतुलन ही साहित्य को उत्कृष्ट बनाता है।

प्रश्न 6

सर्वग्रासी काल की मार से बचते हुए वही दीर्घजीवी हो सकता है, जिसने अपने व्यवहार में जड़ता छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपनी गतिशीलता बनाए रखी है। पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।
Solution: पाठ के आधार पर, यह स्पष्ट है कि जो व्यक्ति समय के निरंतर प्रवाह (सर्वग्रासी काल) के प्रभाव से बचना चाहता है और दीर्घजीवी बनना चाहता है, उसे अपने व्यवहार में जड़ता को त्यागना होगा। उसे चाहिए कि वह निरंतर बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालता रहे और अपनी गतिशीलता बनाए रखे। जिस प्रकार शिरीष का वृक्ष और महात्मा गाँधी जैसे व्यक्तित्व विपरीत परिस्थितियों में भी जड़ होकर नष्ट नहीं हुए, बल्कि उन्होंने उन परिस्थितियों को ही अपने अनुकूल बनाकर अपने जीवन में सरसता उत्पन्न की और दूसरों के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया। जो व्यक्ति सुख-दुःख, आशा-निराशा जैसी स्थितियों में अनासक्त भाव से रहकर निरंतर आगे बढ़ता रहता है, वही प्रतिकूल परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना सकता है और शिरीष की तरह दीर्घजीवी होता है।

प्रश्न 7

आशय स्पष्ट कीजिए -
  1. दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है। मूर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर तक बने रहें तो काल देवता की आँख बचा पाएँगे। भोले हैं वे। हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे।
Solution: इन पंक्तियों का आशय जीवन जीने की कला और परिवर्तन की अनिवार्यता से है। लेखक के अनुसार, जीवन की प्रबल शक्ति (दुरंत प्राणधारा) और समय या विनाश की अग्नि (सर्वव्यापक कालाग्नि) के बीच एक निरंतर संघर्ष चलता रहता है। जो लोग मूर्खतापूर्ण ढंग से यह सोचते हैं कि एक ही स्थान पर स्थिर रहकर वे समय के प्रभाव से बच जाएँगे, वे वास्तव में भोले हैं। लेखक का मानना है कि जड़ता मृत्यु के समान है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है निरंतर गतिशील रहना, स्थान बदलते रहना, और हमेशा आगे की ओर बढ़ते रहना। जो व्यक्ति इस गतिशीलता को अपनाता है, वही जीवन की चुनौतियों और असफलताओं (कोड़े की मार) से बच सकता है और प्रगति कर सकता है, जबकि जो स्थिर हो जाता है, वह अंततः नष्ट हो जाता है।

प्रश्न 7

  1. जो कवि अनासक्त नहीं रह सका, जो फक्कड़ नहीं बन सका, जो किए-कराए का लेखा-जोखा मिलाने में उलझ गया, वह भी क्या कवि है?....मैं कहता हूँ कवि बनना है मेरे दोस्तो, तो फक्कड़ बनो।
Solution: इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक एक सच्चे और महान कवि बनने के लिए आवश्यक गुणों पर बल देते हैं। लेखक का मानना है कि जो कवि सांसारिक मोह-माया से अनासक्त नहीं रह पाता, जो जीवन के प्रति एक फक्कड़ (उदात्त और बेफिक्र) रवैया नहीं अपना पाता, और जो केवल अपने कर्मों के हिसाब-किताब में उलझा रहता है, वह वास्तव में श्रेष्ठ कवि नहीं कहा जा सकता। लेखक अपने मित्रों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यदि तुम्हें सच्चा कवि बनना है, तो तुम्हें अनासक्त और फक्कड़ बनना होगा। इसका अर्थ है कि कवि को सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर, तटस्थ भाव से जीवन का अवलोकन करना चाहिए और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने की क्षमता रखनी चाहिए, बिना किसी व्यक्तिगत लाभ या हानि की चिंता किए।

Common mistakes

  • Confusing the Shrish tree's resilience with mere stubbornness rather than adaptable strength.
  • Underestimating the importance of detachment ('अनासक्ति') for creative individuals.
  • Interpreting 'व्यवहार की कठोरता' as general harshness instead of a protective measure.
  • Failing to connect the author's observations on nature to broader life philosophies.

Revision tips

  • Focus on the Shrish tree's characteristics and how they relate to human life and literature.
  • Understand the author's dual requirements for a poet: the detachment of a yogi and the passion of a lover.
  • Analyze the meaning of 'कालजयी अवधूत' and its relevance to the chapter's themes.
  • Pay attention to the author's critique of contemporary society and its values.
  • Relate the concept of 'गतिशीलता' (mobility) to overcoming life's challenges.

Practice MCQs

Q1. लेखक ने शिरीष को 'कालजयी अवधूत' की तरह क्यों माना है?

Q2. हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता क्यों आवश्यक है?

Q3. लेखक के अनुसार, कवि में कौन से दो गुण एक साथ आवश्यक हैं?

Q4. सर्वग्रासी काल की मार से बचने के लिए लेखक क्या सलाह देता है?

Q5. वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत करते हुए लेखक ने किस चीज़ के वर्चस्व की बात कही है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 12 के हिंदी कोर (आरोह भाग-2) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 17: हजारी प्रसाद द्विवेदी पर केंद्रित हैं।

पाठ 17 में शिरीष के वृक्ष को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?

पाठ में शिरीष के वृक्ष को कालजयी अवधूत (संन्यासी) के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो सुख-दुख से परे, विपरीत परिस्थितियों में भी अविचल रहता है और जीवन के अजेय मंत्र का प्रचार करता है।

लेखक के अनुसार, एक महान कवि बनने के लिए क्या आवश्यक है?

लेखक के अनुसार, एक महान कवि बनने के लिए अनासक्त योगी की तरह स्थिर-प्रज्ञ (शांत चित्त) और विदग्ध प्रेमी की तरह सहृदय होना आवश्यक है।

लेखक ने आधुनिक सभ्यता के किस संकट की ओर संकेत किया है?

लेखक ने आधुनिक सभ्यता में आत्मबल के अभाव और देह-बल, धन-बल आदि के बढ़ते वर्चस्व की ओर संकेत किया है, जिसे वे मानवता के लिए संकट मानते हैं।

समय के साथ तालमेल बिठाने के लिए लेखक क्या सलाह देता है?

लेखक सलाह देते हैं कि जड़ता को छोड़कर, निरंतर गतिशील रहना, स्थान बदलते रहना और आगे बढ़ते रहना ही समय की मार से बचने और जीवन में सफल होने का उपाय है।

यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और लेखक के विचारों का विश्लेषण करने में मदद करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकते हैं।

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