कक्षा 12 रसायन विज्ञान अध्याय 5: पृष्ठ रसायन - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 5, 'पृष्ठ रसायन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें अधिशोषण के प्रकार (भौतिक और रासायनिक), उत्प्रेरण की भूमिका, और कोलाइडल समाधानों से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान किया गया है, जिससे छात्रों को जटिल विषयों को समझने में मदद मिलती है। यह संसाधन छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए पृष्ठ रसायन के प्रमुख सिद्धांतों की गहन समझ विकसित करने में सहायता करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectरसायन विज्ञान-I
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. रसायन

Chapter summary

कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 5, 'पृष्ठ रसायन' के लिए NCERT समाधान, अधिशोषण की मूल बातें, भौतिक और रासायनिक अधिशोषण के बीच अंतर, और उनके अभिलक्षणों पर केंद्रित हैं। यह अध्याय उत्प्रेरण की भूमिका, विशेष रूप से हॉबर प्रक्रम और एस्टर के जल-अपघटन में स्व-उत्प्रेरण की अवधारणाओं की भी पड़ताल करता है। इसके अतिरिक्त, समाधान कोलाइडल कणों के स्कंदन और हार्डी-शुल्जे नियम जैसे विषयों को स्पष्ट करते हैं, जो छात्रों को पृष्ठ रसायन के महत्वपूर्ण पहलुओं की व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • रसोवशोषण के दो मुख्य अभिलक्षणों को समझना।
  • ताप बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण के घटने के कारण का विश्लेषण करना।
  • चूर्णित पदार्थों के अधिक प्रभावी अधिशोषण क्षमता के पीछे के सिद्धांत को स्पष्ट करना।
  • उत्प्रेरण प्रक्रिया में विशोषण की भूमिका का वर्णन करना।
  • एस्टर के जल-अपघटन में स्व-उत्प्रेरण की अवधारणा को समझना।
  • हार्डी-शुल्जे नियम के संशोधन और उसके महत्व को समझना।
  • अवक्षेप के मात्रात्मक आकलन से पहले उसे धोने की आवश्यकता का कारण बताना।

Topics covered

Paper topics

  • अधिशोषण
  • भौतिक अधिशोषण
  • रासायनिक अधिशोषण (रसोवशोषण)
  • अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक
  • उत्प्रेरण
  • उत्प्रेरक विष
  • स्व-उत्प्रेरण
  • कोलाइडल कण
  • स्कंदन
  • हार्डी-शुल्जे नियम
  • अवक्षेप का धोना
  • पृष्ठ रसायन

Important topics

  • भौतिक बनाम रासायनिक अधिशोषण
  • उत्प्रेरण और उत्प्रेरक विष
  • स्व-उत्प्रेरण की अवधारणा
  • हार्डी-शुल्जे नियम और स्कंदन
  • अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

रसोवशोषण के दो अभिलक्षण दीजिए।
Solution: रसोवशोषण (रासायनिक अधिशोषण) के दो प्रमुख अभिलक्षण निम्नलिखित हैं:
  1. उच्च विशिष्टता: रसोवशोषण अत्यधिक विशिष्ट होता है। यह केवल तभी होता है जब अधिशोषक और अधिशोष्य के बीच रासायनिक बंध बनने की प्रबल संभावना हो। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन का धातुओं पर अधिशोषण उनके ऑक्साइड बनने के कारण होता है।
  2. पृष्ठीय क्षेत्रफल पर निर्भरता: अधिशोषक का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने के साथ रसोवशोषण की मात्रा भी बढ़ती है। अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक रासायनिक बंधों के निर्माण के लिए अधिक सक्रिय स्थल प्रदान करता है।

प्रश्न 2

ताप बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है?
Solution: भौतिक अधिशोषण एक ऊष्पाक्षेपी प्रक्रम है, जिसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया में ऊष्मा उत्सर्जित होती है। इसे निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है:

ठोस + गैस ↔↔ ठोस पर गैस का अधिशोषण + ऊष्मा

ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी ऊष्पाक्षेपी प्रक्रम के साम्य पर ताप बढ़ाया जाता है, तो साम्य उस दिशा में विस्थापित हो जाता है जहाँ ऊष्मा का अवशोषण होता है (अर्थात पश्च दिशा)। पश्च दिशा में अधिशोषण घटता है। इसलिए, ताप बढ़ने के साथ भौतिक अधिशोषण घट जाता है।

प्रश्न 3

अपने क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होते हैं?
Solution: चूर्णित पदार्थों का पृष्ठीय क्षेत्रफल उनके क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में बहुत अधिक होता है। अधिशोषण की मात्रा अधिशोषक के पृष्ठीय क्षेत्रफल के समानुपाती होती है। चूँकि चूर्णित पदार्थों का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होता है, वे अधिशोषण के लिए अधिक सक्रिय स्थल प्रदान करते हैं, जिससे वे अधिक प्रभावी अधिशोषक बन जाते हैं।

प्रश्न 4

हॉबर प्रक्रम में, अमोनिया प्राप्त करने के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) को हटाना क्यों आवश्यक है, जबकि यह प्रक्रम मेथेन के साथ भाप की अभिक्रिया द्वारा हाइड्रोजन प्राप्त करने के लिए भाप-पुनः संमावन विधि का उपयोग करता है?
Solution: हॉबर प्रक्रम में अमोनिया के संश्लेषण के लिए लौह उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है, जिसे मॉलिब्डेनम जैसे उत्प्रेरक वर्धक द्वारा सक्रिय किया जाता है। कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) इन उत्प्रेरकों के लिए एक विष (poison) का कार्य करती है। CO लौह उत्प्रेरक के साथ अभिक्रिया करके लौह कार्बोनिल, Fe(CO)₅, बनाती है, जो उत्प्रेरक की सक्रियता को गंभीर रूप से कम कर देता है। इस प्रकार, CO की उपस्थिति अमोनिया के उत्पादन में बाधा डालती है। इसलिए, अमोनिया के कुशल उत्पादन के लिए अभिक्रिया मिश्रण से CO को हटाना अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 5

एस्टर का जल-अपघटन प्रारम्भ में धीमा तथा कुछ समय पश्चात तीव्र क्यों हो जाता है?
Solution: एस्टर के जल-अपघटन की रासायनिक अभिक्रिया इस प्रकार है:

RCOOR' + H₂O ↔ RCOOH + R'OH

प्रारंभ में, अभिक्रिया धीमी गति से होती है क्योंकि अभिकारकों की सांद्रता कम होती है। जैसे-जैसे अभिक्रिया आगे बढ़ती है, कार्बोक्सिलिक अम्ल (RCOOH) बनता है। यह कार्बोक्सिलिक अम्ल विलयन में H⁺ आयन उत्पन्न करता है, जो जल-अपघटन अभिक्रिया के लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। इस प्रकार, अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न उत्पाद (कार्बोक्सिलिक अम्ल) स्वयं अभिक्रिया की दर को बढ़ा देते हैं। इस घटना को स्व-उत्प्रेरण (auto-catalysis) कहते हैं। इसी कारण, एस्टर का जल-अपघटन प्रारंभ में धीमा होता है और बाद में तीव्र हो जाता है।

प्रश्न 6

उत्प्रेरण के प्रक्रम में विशोषण की क्या भूमिका है?
Solution: उत्प्रेरण में विशोषण (desorption) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्प्रेरक की सतह पर, अभिकारक अधिशोषित होकर उत्पाद बनाते हैं। विशोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बने हुए उत्पाद उत्प्रेरक की सतह से अलग हो जाते हैं। यह पृथक्करण उत्प्रेरक की सतह को अन्य अभिकारक अणुओं के अधिशोषण के लिए पुनः उपलब्ध कराता है, जिससे उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बनी रहती है और अभिक्रिया निरंतर जारी रह पाती है। यदि उत्पाद सतह से विशोषित न हों, तो वे सक्रिय स्थलों को अवरुद्ध कर देंगे और उत्प्रेरक निष्क्रिय हो जाएगा।

प्रश्न 7

आप हार्डी-शुल्जे नियम में संशोधन के लिये क्या सुझाव दे सकते हैं?
Solution: हार्डी-शुल्जे नियम के अनुसार, कोलाइडी कणों के आवेश के विपरीत आवेश वाले आयन (स्कंदन आयन) उनके आवेश को उदासीन करके उनका स्कंदन या अवक्षेपण करते हैं। नियम यह भी बताता है कि आयन की संयोजकता जितनी अधिक होगी, स्कंदन क्षमता उतनी ही अधिक होगी।

इस नियम में संशोधन के लिए यह सुझाव दिया जा सकता है कि केवल विपरीत आवेश वाले आयन ही स्कंदन नहीं करते, बल्कि समान आवेश वाले आयनों के सॉल को मिलाने पर भी स्कंदन हो सकता है, यदि उनके आवेशों का पारस्परिक उदासीनीकरण हो। अतः, नियम को इस प्रकार संशोधित किया जा सकता है: "जब दो विपरीत आवेश वाले कोलाइडी विलयनों को समान मोलर अनुपात में मिलाया जाता है, तो उन पर उपस्थित आवेशों के पारस्परिक उदासीनीकरण के कारण स्कंदन हो जाता है।" यह संशोधन यह स्पष्ट करता है कि आयनों की प्रकृति और उनकी सांद्रता स्कंदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, न कि केवल विपरीत आवेश का होना।

प्रश्न 8

अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना क्यों आवश्यक है?
Solution: आयनिक अभिक्रियाओं में जब अवक्षेप बनता है, तो अवक्षेप के कणों की सतह पर कुछ अभिकारक आयन या अन्य अशुद्धियाँ अधिशोषित या चिपकी रह सकती हैं। यदि अवक्षेप को धोने से पहले ही उसका मात्रात्मक आकलन (जैसे वजन करना) कर लिया जाए, तो ये अधिशोषित आयन भी अवक्षेप के साथ मापे जाएँगे। इससे प्राप्त परिणाम वास्तविक मात्रा से अधिक होगा और मात्रात्मक आकलन में त्रुटि आएगी। इसलिए, अवक्षेप को शुद्ध करने और उस पर चिपके हुए अशुद्ध आयनों को हटाने के लिए उसे जल से धोना आवश्यक है, ताकि सटीक मात्रात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें।

Common mistakes

  • अधिशोषण और अवशोषण के बीच भ्रमित होना।
  • भौतिक और रासायनिक अधिशोषण के बीच अंतर को ठीक से न समझना।
  • उत्प्रेरक विष की अवधारणा को गलत समझना।
  • हार्डी-शुल्जे नियम में आयनों की स्कंदन क्षमता को गलत तरीके से लागू करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के समाधान को ध्यान से पढ़ें और मुख्य अवधारणाओं को नोट करें।
  • भौतिक और रासायनिक अधिशोषण के बीच अंतर सारणीबद्ध करें।
  • उत्प्रेरण से संबंधित उदाहरणों (जैसे हॉबर प्रक्रम) को याद करें।
  • हार्डी-शुल्जे नियम और स्व-उत्प्रेरण के अनुप्रयोगों का अभ्यास करें।
  • अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारकों (जैसे पृष्ठीय क्षेत्रफल, ताप) पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. रसोवशोषण (रासायनिक अधिशोषण) की एक प्रमुख विशेषता क्या है?

Q2. ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है?

Q3. चूर्णित पदार्थ क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में बेहतर अधिशोषक क्यों होते हैं?

Q4. हॉबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है?

Q5. एस्टर के जल-अपघटन में स्व-उत्प्रेरक का कार्य कौन करता है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 5 में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

अध्याय 5, 'पृष्ठ रसायन', मुख्य रूप से अधिशोषण (भौतिक और रासायनिक), उत्प्रेरण, कोलाइडल समाधानों और उनके गुणों जैसे विषयों को शामिल करता है।

रसोवशोषण (रासायनिक अधिशोषण) की मुख्य विशेषता क्या है?

रसोवशोषण की मुख्य विशेषता इसकी उच्च विशिष्टता है, जो अधिशोषक और अधिशोष्य के बीच रासायनिक बंध बनने की क्षमता पर निर्भर करती है।

ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है?

भौतिक अधिशोषण एक ऊष्पाक्षेपी प्रक्रम है। ला-शातेलिए के नियम के अनुसार, ताप बढ़ाने पर साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होता है, जिससे अधिशोषण कम हो जाता है।

हॉबर प्रक्रम में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) को हटाना क्यों महत्वपूर्ण है?

CO लौह उत्प्रेरक के लिए एक विष के रूप में कार्य करता है, जिससे उत्प्रेरक की दक्षता कम हो जाती है और अमोनिया का उत्पादन बाधित होता है।

एस्टर के जल-अपघटन में स्व-उत्प्रेरण का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि अभिक्रिया के दौरान उत्पन्न उत्पाद (कार्बोक्सिलिक अम्ल) स्वयं अभिक्रिया की दर को बढ़ा देते हैं, जिससे अभिक्रिया तीव्र हो जाती है।

अवक्षेप को धोने की प्रक्रिया मात्रात्मक आकलन के लिए क्यों आवश्यक है?

अवक्षेप को धोने से उस पर चिपके हुए अशुद्ध आयन या अभिकारक हट जाते हैं, जिससे मात्रात्मक आकलन में होने वाली त्रुटि को रोका जा सकता है।

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