कक्षा 12 इतिहास NCERT समाधान: अध्याय 15 - संविधान का निर्माण
यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जो 'संविधान का निर्माण: एक नए युग की शुरुआत' नामक अध्याय पर केंद्रित है। इसमें संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प के आदर्शों, अल्पसंख्यक शब्द की विभिन्न परिभाषाओं, प्रांतों को अधिक शक्तियाँ देने के पक्ष में तर्कों, और महात्मा गांधी द्वारा हिंदुस्तानी को राष्ट्रभाषा बनाने के विचार पर चर्चा की गई है। समाधान ऐतिहासिक ताकतों, दलित समूहों की सुरक्षा के लिए तर्कों, और एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता के संबंध में संविधान सभा के सदस्यों के विचारों का भी विश्लेषण करते हैं। ये विस्तृत स्पष्टीकरण छात्रों को परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I - II - III |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 15. संविधान का निर्माण एक नए युग की शुरुआत |
Chapter summary
यह अध्याय भारत के संविधान के निर्माण की प्रक्रिया पर केंद्रित है, जिसे 'एक नए युग की शुरुआत' के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें संविधान सभा द्वारा अपनाए गए उद्देश्य संकल्प के मूल सिद्धांतों, विभिन्न समूहों द्वारा अल्पसंख्यकों की परिभाषा पर दिए गए विचारों, और शक्तियों के वितरण को लेकर प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देने के पक्ष और विपक्ष में दिए गए तर्कों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह महात्मा गांधी के भाषा संबंधी विचारों और दलितों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डालता है।
Learning outcomes
- उद्देश्य संकल्प में निहित आदर्शों को समझना।
- संविधान निर्माण के दौरान अल्पसंख्यकों की परिभाषा और सुरक्षा पर विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण करना।
- संघीय ढांचे में शक्तियों के वितरण पर बहस को समझना।
- ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक ताकतों के संविधान पर प्रभाव का मूल्यांकन करना।
- दलित समूहों की सुरक्षा के लिए दिए गए तर्कों की जांच करना।
- एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता के पीछे के कारणों को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- उद्देश्य संकल्प
- अल्पसंख्यक सुरक्षा
- संघीय ढांचा
- केंद्र-राज्य संबंध
- भाषा नीति
- दलित अधिकार
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- संविधान सभा की बहसें
- भारत का विभाजन
- रियासतें
Important topics
- उद्देश्य संकल्प के आदर्श
- अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर विभिन्न मत
- केंद्र की शक्तियों का निर्धारण
- संविधान निर्माण को प्रभावित करने वाली ऐतिहासिक ताकतें
- भाषा और राष्ट्रभाषा का मुद्दा
- दलित समूहों के लिए प्रावधान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- भारत को एक "स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य" घोषित किया गया, जिसका अर्थ है कि यह आंतरिक और बाहरी दोनों मामलों में स्वतंत्र होगा और इसका अपना निर्वाचित प्रमुख होगा।
- यह संकल्प अपने सभी नागरिकों के लिए न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक), समानता (अवसर की समानता) और स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, पूजा की स्वतंत्रता) के अधिकारों की गारंटी देता है।
- अल्पसंख्यकों, पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों, अवसादग्रस्त और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय प्रदान करने का आश्वासन दिया गया, ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी मुख्यधारा में शामिल किया जा सके।
- भारतीय संविधान का उद्देश्य लोकतंत्र के उदार विचारों को आर्थिक न्याय के समाजवादी विचारों के साथ एकीकृत करना था, और इन सभी सिद्धांतों को भारतीय संदर्भ के अनुकूल बनाना था।
प्रश्न 2
एन. जी. रंगा के अनुसार, असली अल्पसंख्यक केवल धार्मिक या भाषाई समूह नहीं थे, बल्कि वे थे "देश की जनता" जो अत्यधिक निराश, प्रताड़ित और वंचित थी। उन्होंने तर्क दिया कि ये लोग सामान्य नागरिक अधिकारों का लाभ उठाने या प्रारंभिक शिक्षा तक पहुँचने में भी असमर्थ थे। इस प्रकार, उनके लिए सुरक्षा की आवश्यकता सबसे महत्वपूर्ण थी। यह परिभाषा केवल संख्यात्मक या सामुदायिक आधार पर अल्पसंख्यकों को देखने के बजाय उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर केंद्रित थी।
प्रश्न 3
- केंद्र पर बोझ कम करना: यह तर्क दिया गया कि यदि केंद्र सरकार को बहुत अधिक जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं, तो वह प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाएगी। शक्तियों को प्रांतों में स्थानांतरित करके, केंद्र को कुछ कार्यों से मुक्त किया जा सकता था, जिससे वह अपने मुख्य उत्तरदायित्वों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सके और इस प्रकार अधिक मजबूत बन सके।
- प्रस्तावित शक्तियों के आवंटन से अपंगता का डर: कुछ सदस्यों को चिंता थी कि शक्तियों का प्रस्तावित वितरण प्रांतों को इतना कमजोर कर देगा कि वे अपने क्षेत्रों के विकास और प्रशासन में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाएंगे। अधिक शक्तियाँ प्रांतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बनाने और लागू करने में सक्षम बनातीं।
प्रश्न 4
गांधीजी के अनुसार, हिंदुस्तानी भारत के लोगों के एक बड़े हिस्से की लोकप्रिय भाषा थी। यह एक समग्र भाषा थी जो विभिन्न संस्कृतियों की बातचीत और आदान-प्रदान से समृद्ध हुई थी। उनका मानना था कि इस भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने से विभिन्न समुदायों के बीच एकता को बढ़ावा मिलेगा और संचार की बाधाएं दूर होंगी, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी।
प्रश्न 5
- स्वतंत्रता की तीव्र आकांक्षा और निराशा: संविधान निर्माण से पहले के वर्षों में स्वतंत्रता की एक प्रबल आशा थी, लेकिन साथ ही विभाजन और हिंसा की कड़वी यादें भी ताजा थीं। 1942 का 'भारत छोड़ो आंदोलन' जैसी व्यापक जन आंदोलनों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनता की इच्छा को स्पष्ट कर दिया था।
- विभाजन और हिंसा: भारत की स्वतंत्रता के साथ ही देश का विभाजन हुआ, जिसके कारण बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे और आबादी का विस्थापन हुआ। अगस्त 1946 की कलकत्ता हत्याओं से शुरू हुआ हिंसा का सिलसिला भारत के विभाजन की घोषणा के साथ चरम पर पहुंच गया। इस पृष्ठभूमि ने संविधान निर्माताओं को एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र की आवश्यकता का एहसास कराया।
- देशी रियासतों की समस्या: ब्रिटिश राज के दौरान, लगभग एक-तिहाई क्षेत्र देशी रियासतों के अधीन थे, जिनके शासक (नवाब और महाराजा) अपनी संवैधानिक स्थिति को लेकर अनिश्चित थे। स्वतंत्रता के बाद इन रियासतों को भारतीय संघ में एकीकृत करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए एक मजबूत केंद्रीय ढांचे की आवश्यकता थी।
- लोकप्रिय आंदोलनों की विरासत: भारत छोड़ो आंदोलन जैसे जन आंदोलनों ने जनता की भागीदारी और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया था, जिसका प्रभाव संविधान के लोकतांत्रिक और समावेशी स्वरूप पर पड़ा।
प्रश्न 6
- राजनीतिक ढांचे में समावेश: यह तर्क दिया गया कि एक ऐसा राजनीतिक ढांचा तैयार करना आवश्यक है जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर दलित, अन्य समुदायों के साथ सामंजस्य स्थापित कर सकें और उनके बीच मतभेद कम हों। इसके लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण था कि उनकी आवाज़ सुनी जाए और उनके विचारों को राजनीतिक व्यवस्था में महत्व दिया जाए।
- प्रतिनिधित्व की आवश्यकता: यह माना गया कि केवल अलग मतदाता (separate electorates) जैसी व्यवस्थाएं ही मुसलमानों जैसे समूहों के लिए देश के शासन में सार्थक आवाज़ सुनिश्चित कर सकती हैं। इसी तरह, दलितों और अन्य वंचित समूहों के लिए भी प्रभावी प्रतिनिधित्व की वकालत की गई।
- मूल अधिकारों और शिक्षा तक पहुंच: गरीब, दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को अल्पसंख्यक और दलित समूह माना गया क्योंकि उन्हें अक्सर मूल अधिकारों और प्रारंभिक शिक्षा तक पहुंच से वंचित रखा जाता था। इसलिए, ऐसी परिस्थितियाँ बनाना आवश्यक था जहाँ वे संवैधानिक रूप से प्रदत्त अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- सामाजिक और नैतिक बाधाएं: यह भी तर्क दिया गया कि 'अछूतों' की समस्या केवल सुरक्षा उपायों से हल नहीं हो सकती। उनकी अक्षमताएं और कठिनाइयां काफी हद तक सामाजिक मानदंडों और जाति-आधारित समाज के नैतिक मूल्यों के कारण थीं। इसलिए, सामाजिक सुधार और मानसिकता में बदलाव की भी आवश्यकता थी।
प्रश्न 7
- विभाजन और अस्थिरता: भारत का विभाजन एक अत्यंत दर्दनाक प्रक्रिया थी, जिसके साथ बड़े पैमाने पर हिंसा, सांप्रदायिक दंगे और आबादी का विस्थापन हुआ। इस अस्थिरता के माहौल ने सदस्यों को यह महसूस कराया कि देश को एकजुट रखने और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक मजबूत केंद्रीय सरकार का होना अनिवार्य है।
- आर्थिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता: लंबे ब्रिटिश शासन और विभाजन के कारण भारत की अर्थव्यवस्था काफी कमजोर हो गई थी। सदस्यों का मानना था कि देश के आर्थिक पुनर्निर्माण, विकास योजनाओं को लागू करने और उपलब्ध संसाधनों को प्रभावी ढंग से जुटाने के लिए एक शक्तिशाली केंद्र की आवश्यकता होगी।
- प्रशासनिक क्षमता: एक मजबूत केंद्र ही एक कुशल और प्रभावी प्रशासन स्थापित कर सकता था, जो देश की कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था।
- विदेशी आक्रमण से सुरक्षा: सदस्यों ने यह भी तर्क दिया कि एक मजबूत केंद्र ही विदेशी आक्रमण के खिलाफ देश की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सकता है।
- अंबेडकर का दृष्टिकोण: डॉ. बी. आर. अंबेडकर जैसे प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट रूप से एक मजबूत और संयुक्त केंद्र की वकालत की, जो भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत स्थापित केंद्र से भी अधिक शक्तिशाली हो।
Common mistakes
- उद्देश्य संकल्प के आदर्शों को केवल सतही तौर पर समझना।
- अल्पसंख्यकों की परिभाषा को लेकर विभिन्न तर्कों के बीच अंतर करने में कठिनाई।
- प्रांतों को अधिक शक्ति देने के पक्ष और विपक्ष के तर्कों को भ्रमित करना।
- ऐतिहासिक संदर्भों को संविधान निर्माण से जोड़ने में चूक।
Revision tips
- उद्देश्य संकल्प के मुख्य बिंदुओं को सूचीबद्ध करें और उनके महत्व को समझें।
- विभिन्न समूहों द्वारा अल्पसंख्यकों की परिभाषा पर दिए गए तर्कों की तुलना करें।
- केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन पर बहस के मुख्य तर्कों को संक्षेप में लिखें।
- संविधान निर्माण को प्रभावित करने वाली प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को याद करें।
Practice MCQs
Q1. उद्देश्य संकल्प किसके द्वारा और कब प्रस्तुत किया गया था?
Explanation: जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में उद्देश्य संकल्प प्रस्तुत किया था, जिसमें भारत के स्वतंत्र गणराज्य के आदर्शों को रेखांकित किया गया था।
Q2. एन. जी. रंगा के अनुसार, 'असली अल्पसंख्यक' कौन थे?
Explanation: एन. जी. रंगा ने तर्क दिया कि असली अल्पसंख्यक वे लोग हैं जो इतने निराश और प्रताड़ित हैं कि वे सामान्य नागरिक अधिकारों का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, न कि केवल धार्मिक या भाषाई समूह।
Q3. प्रांतों को अधिक शक्तियाँ देने के पक्ष में एक मुख्य तर्क क्या था?
Explanation: एक तर्क यह था कि यदि केंद्र को बहुत अधिक जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं, तो वह प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर पाएगा। शक्तियों को राज्यों में स्थानांतरित करके केंद्र को मजबूत किया जा सकता था।
Q4. महात्मा गांधी ने हिंदुस्तानी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन क्यों किया?
Explanation: गांधीजी का मानना था कि राष्ट्रभाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे आम लोग आसानी से समझ सकें। हिंदुस्तानी, हिंदी और उर्दू का मिश्रण, एक ऐसी ही भाषा थी जो विविध संस्कृतियों के मेल से बनी थी।
Q5. संविधान सभा के सदस्यों ने एक मजबूत केंद्र की आवश्यकता पर क्यों जोर दिया?
Explanation: सदस्यों ने सांप्रदायिक उन्माद को रोकने और देश को एकजुट रखने के लिए केंद्र की शक्तियों को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की, खासकर भारत के विभाजन और उसके बाद हुई हिंसा को देखते हुए।
Frequently asked questions
उद्देश्य संकल्प क्या था और इसका क्या महत्व था?
उद्देश्य संकल्प जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत किया गया था। इसमें भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु गणराज्य घोषित किया गया और नागरिकों के लिए न्याय, समानता और स्वतंत्रता के आदर्शों को रेखांकित किया गया। यह भारतीय संविधान की नींव बना।
संविधान निर्माण के समय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर क्या चिंताएं थीं?
विभिन्न समूहों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग तर्क दिए। कुछ का मानना था कि असली अल्पसंख्यक वे वंचित लोग हैं जिन्हें अधिकारों तक पहुंच नहीं है, जबकि अन्य ने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व और सुरक्षा पर जोर दिया।
क्या संविधान सभा में एक मजबूत केंद्र के पक्ष में कोई तर्क थे?
हाँ, कई सदस्यों ने भारत के विभाजन और सांप्रदायिक हिंसा के अनुभव के बाद एक मजबूत और संयुक्त केंद्र की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना था कि केवल एक मजबूत केंद्र ही देश की भलाई के लिए योजना बना सकता है और बाहरी आक्रमण से रक्षा कर सकता है।
महात्मा गांधी की राष्ट्रभाषा के बारे में क्या राय थी?
महात्मा गांधी का मानना था कि राष्ट्रभाषा ऐसी होनी चाहिए जिसे आम लोग आसानी से समझ सकें। उन्होंने हिंदुस्तानी (हिंदी और उर्दू का मिश्रण) का समर्थन किया क्योंकि यह एक समग्र भाषा थी जो विविध संस्कृतियों के मेल से बनी थी और भारत के बड़े हिस्से की लोकप्रिय भाषा थी।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान 'संविधान का निर्माण' अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है।
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