कक्षा 12 भारतीय इतिहास: ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I - II - III के अध्याय 1, 'ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय हड़प्पा सभ्यता के शहरी जीवन, सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं, नगर नियोजन, जल निकासी प्रणालियों और शिल्प उत्पादन की पड़ताल करता है। समाधानों में भोजन की उपलब्धता, सामाजिक असमानताओं का पता लगाने के तरीके, जल निकासी व्यवस्था के महत्व और मनके बनाने की प्रक्रियाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को हड़प्पा सभ्यता की जटिलताओं को समझने, पुरातात्विक साक्ष्यों का विश्लेषण करने और परीक्षा के लिए अपनी समझ को मजबूत करने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I - II - III |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ |
Chapter summary
अध्याय 1 'ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ' हड़प्पा सभ्यता के शहरी पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यह समाधान छात्रों को हड़प्पा शहरों में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों, सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के लिए पुरातत्वविदों द्वारा उपयोग की जाने वाली विधियों, जल निकासी प्रणालियों के माध्यम से नगर नियोजन के प्रमाण और मनके बनाने में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों और तकनीकों की गहन समझ प्रदान करते हैं।
Learning outcomes
- हड़प्पा सभ्यता में उपलब्ध विभिन्न खाद्य स्रोतों की पहचान करना।
- सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के लिए पुरातत्वविदों द्वारा उपयोग की जाने वाली विधियों को समझना।
- हड़प्पा शहरों की जल निकासी प्रणाली और नगर नियोजन के बीच संबंध का विश्लेषण करना।
- मनके बनाने में प्रयुक्त सामग्री और प्रक्रियाओं का वर्णन करना।
- शवाधानों से प्राप्त साक्ष्यों की व्याख्या करना।
Topics covered
Paper topics
- हड़प्पा सभ्यता के खाद्य स्रोत
- पुरातत्वविदों द्वारा सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का अध्ययन
- शवाधानों का विश्लेषण
- विलासिता की वस्तुओं की खोज
- हड़प्पा शहरों की नगर-योजना
- जल निकासी प्रणाली
- मनके बनाने की सामग्री
- मनके बनाने की प्रक्रिया
- मोहनजोदाड़ो की विशिष्टताएँ
Important topics
- हड़प्पा शहरों की नगर-योजना और जल निकासी प्रणाली
- सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने की विधियाँ
- मनके बनाने की सामग्री और तकनीकें
- हड़प्पा सभ्यता के खाद्य स्रोत और उनके प्रदाता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
हड़प्पा सभ्यता के शहरों में रहने वाले लोगों के आहार में पौधों और जानवरों से प्राप्त विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियाँ शामिल थीं।
उपलब्ध खाद्य सामग्री:
- अनाज: गेहूं, जौ, दालें, छोले और तिल जैसे अनाज मुख्य खाद्य स्रोत थे।
- फल और सब्जियाँ: हालाँकि विशिष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन उस काल की कृषि पद्धतियों को देखते हुए विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियाँ भी उपलब्ध होने की संभावना है।
- पशु उत्पाद: भेड़, बकरी, भैंस और सूअर जैसे पालतू जानवरों का मांस उपलब्ध था।
- मछली और पक्षी: हड़प्पा स्थलों से मिली मछलियों और पक्षियों की हड्डियों से पता चलता है कि ये भी आहार का हिस्सा थे।
खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले समूह:
- कृषि समुदाय: ये समुदाय अनाज, दालें और संभवतः फल-सब्जियाँ उगाते थे, जो शहरी आबादी के लिए भोजन का मुख्य आधार थे।
- पशुपालक समुदाय: ये समुदाय भेड़, बकरी, भैंस जैसे जानवरों को पालते थे और उनका मांस उपलब्ध कराते थे।
- शिकारी और मछुआरे समुदाय: ये समुदाय जंगली जानवरों का शिकार करके और मछलियाँ पकड़कर मांस और मछली की आपूर्ति करते थे। पुरातत्वविदों के अध्ययन से यह स्पष्ट नहीं है कि हड़प्पावासी स्वयं शिकार करते थे या अन्य समुदायों से मांस प्राप्त करते थे।
पुरातन वनस्पतिविदों (Archaeobotanists) ने अनाज के दानों और बीजों का अध्ययन करके आहार के बारे में जानकारी दी, जबकि पुरातत्व चिड़ियाघर-पुरातत्वविदों (Archaeo-zoologists) ने जानवरों की हड्डियों का विश्लेषण करके पशु उत्पादों के बारे में जानकारी प्रदान की।
प्रश्न 2
पुरातत्वविद हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के लिए मुख्य रूप से दो विधियों का उपयोग करते हैं:
-
शवाधानों का अध्ययन:
हड़प्पा स्थलों से प्राप्त शवाधानों का विश्लेषण करके सामाजिक भिन्नताओं का अनुमान लगाया जाता है। इसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- गर्त की बनावट: कुछ शवाधानों के गर्तों की सतह पर ईंटों की चिनाई की गई थी, जो सामान्य गर्तों से भिन्न थी। यह संभवतः मृतकों के सामाजिक दर्जे में अंतर को दर्शाता है।
- शव के साथ रखी वस्तुएँ: कुछ क़ब्रों में मृदभाण्ड (मिट्टी के बर्तन) और आभूषण मिले हैं। यह माना जाता है कि इन वस्तुओं का मृत्योपरांत जीवन में उपयोग किया जा सकता था। अधिक और कीमती वस्तुएँ संभवतः उच्च सामाजिक स्थिति का संकेत देती हैं। पुरुषों और महिलाओं दोनों के शवाधानों से आभूषण मिले हैं।
-
विलासिता (Luxury) की वस्तुओं की खोज:
पुरातत्वविद कलाकृतियों को दो श्रेणियों में विभाजित करते हैं: उपयोगितावादी वस्तुएँ और विलासिता की वस्तुएँ।
- उपयोगितावादी वस्तुएँ: ये पत्थर या मिट्टी जैसी सामान्य सामग्रियों से बनी दैनिक उपयोग की वस्तुएँ होती हैं।
- विलासिता की वस्तुएँ: ये वे वस्तुएँ होती हैं जो दुर्लभ, महंगी सामग्री से बनी होती हैं, या जिन्हें बनाने में जटिल तकनीक का प्रयोग किया गया हो। ये वस्तुएँ गैर-स्थानीय (दूसरे स्थानों से लाई गई) भी हो सकती हैं।
इन विलासिता की वस्तुओं का वितरण सामाजिक भिन्नताओं को दर्शाता है। ये दुर्लभ वस्तुएँ आमतौर पर मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा जैसे बड़े और प्रमुख बस्तियों में अधिक केंद्रित पाई गई हैं, जबकि छोटी बस्तियों में ये बहुत कम या न के बराबर मिलती हैं। इससे पता चलता है कि इन वस्तुओं तक पहुँच संभवतः समाज के एक विशिष्ट वर्ग तक ही सीमित थी।
इन विधियों के माध्यम से, पुरातत्वविद हड़प्पाई समाज में मौजूद विभिन्न सामाजिक और आर्थिक स्तरों का अनुमान लगाते हैं।
प्रश्न 3
हाँ, मैं इस तथ्य से पूरी तरह सहमत हूँ कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली उनकी उत्कृष्ट नगर-योजना की ओर स्पष्ट रूप से संकेत करती है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:
- ग्रिड पैटर्न (Grid Pattern): सड़कों और गलियों को एक सुनियोजित 'ग्रिड' पैटर्न में बनाया गया था, जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। यह दर्शाता है कि सड़कों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से किया गया था।
- नालियों का निर्माण: ऐसा प्रतीत होता है कि पहले नालियों के साथ गलियों का निर्माण किया गया था, और फिर उनके अगल-बगल आवासों (घरों) का निर्माण हुआ। यह जल निकासी को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।
- घरों में स्नानघर और जुड़ाव: प्रत्येक घर में पक्की ईंटों से बना अपना स्नानघर होता था, जिसकी नालियाँ दीवार के माध्यम से सड़क की मुख्य नालियों से जुड़ी होती थीं। यह सुनिश्चित करता था कि घरों का गंदा पानी व्यवस्थित तरीके से बाहर निकाला जा सके। इसके लिए यह आवश्यक था कि प्रत्येक घर की कम से कम एक दीवार गली और उसकी नाली से सटी हुई हो।
- ढकी हुई नालियाँ: मुख्य नालियाँ गारे (mortar) में जमाई गई ईंटों से बनी थीं और उन्हें ऐसी ईंटों से ढका गया था जिन्हें सफाई के लिए आसानी से हटाया जा सके। यह रखरखाव और स्वच्छता के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाता है।
- समग्र योजना: यह पूरी व्यवस्था दर्शाती है कि केवल अलग-अलग घरों या सड़कों का निर्माण नहीं किया गया, बल्कि पूरी बस्ती की एक समग्र योजना बनाई गई थी, जिसमें जल निकासी एक महत्वपूर्ण पहलू था।
इस प्रकार, जल निकास प्रणाली की सुसंगतता और दक्षता हड़प्पा शहरों की परिष्कृत नगर-योजना का एक मजबूत प्रमाण है।
प्रश्न 4
हड़प्पा सभ्यता में मनके (beads) बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता था, जो उनकी शिल्प कौशल की विविधता को दर्शाता है।
मनके बनाने में प्रयुक्त पदार्थ:
- पत्थर: कार्नीलियन (एक सुंदर लाल रंग का पत्थर), जैस्पर, स्फटिक (crystal), क्वार्ट्ज़ (quartz) और सेल-खड़ी (steatite) जैसे विभिन्न प्रकार के पत्थरों का प्रयोग होता था।
- धातुएँ: ताँबा, काँसा (bronze) और सोना जैसी धातुओं का भी उपयोग मनके बनाने में किया जाता था।
- अन्य सामग्री: शंख (shell), फियाॅन्स (faience - एक प्रकार का कांच जैसा पदार्थ) और पक्की मिट्टी (terracotta) का भी मनके बनाने में प्रयोग होता था।
कुछ मनके दो या दो से अधिक विभिन्न पत्थरों को जोड़कर बनाए जाते थे, और कुछ मनकों के सिरों पर सोने की टोपी लगी होती थी। इनके आकार भी विविध होते थे, जैसे चक्राकार, बेलनाकार, गोलाकार, ढोलाकार (barrel-shaped) और खंडित (segmented)। कुछ मनकों पर उत्कीर्णन (engraving) या चित्राकारी (painting) के माध्यम से सजावट की जाती थी, और कुछ पर रेखा-चित्र उकेरे जाते थे।
मनका बनाने की प्रक्रिया (उदाहरण: सेल-खड़ी से मनका बनाना):
सेल-खड़ी एक बहुत मुलायम पत्थर है, जिस पर काम करना आसान होता है। मनके बनाने की एक विधि में सेल-खड़ी चूर्ण का उपयोग किया जाता था:
- चूर्ण तैयार करना: सेल-खड़ी पत्थर को पीसकर उसका महीन चूर्ण बनाया जाता था।
- लेप बनाना: इस चूर्ण में पानी या अन्य पदार्थ मिलाकर एक गाढ़ा लेप (paste) तैयार किया जाता था।
- साँचे में ढालना: इस लेप को विभिन्न आकारों के साँचे (moulds) में डाला जाता था। साँचे मनके को वांछित आकार देने में मदद करते थे।
- सुखाना और पकाना: साँचे में ढालने के बाद, लेप को सुखाया जाता था और फिर पकाया (fired) जाता था। पकाने की प्रक्रिया से मनका कठोर और टिकाऊ बन जाता था।
इस विधि से विभिन्न आकारों और डिज़ाइनों के मनके आसानी से बनाए जा सकते थे। अन्य सामग्रियों जैसे कार्नीलियन के लिए ड्रिलिंग (छेद करना) और पॉलिशिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता था, जो अधिक जटिल प्रक्रिया थी।
प्रश्न 5
आकृति 1.30 में एक हड़प्पाई शवाधान (burial) का चित्रण है। इस चित्रण के आधार पर निम्नलिखित अवलोकन किए जा सकते हैं:
- शव की स्थिति: कंकाल को एक गर्त में उत्तर-दक्षिण दिशा में लिटाया गया है। शव को सीधा लिटाया गया है, न कि किसी विशेष मुद्रा में।
- शव के पास रखी वस्तुएँ: कंकाल के पास कुछ मिट्टी के बर्तन (मृदभाण्ड) रखे हुए दिखाई दे रहे हैं। ये बर्तन संभवतः मृतक के साथ उनकी मृत्यु के बाद की दुनिया में उपयोग के लिए रखे गए थे, जो पुनर्जन्म या परलोक में विश्वास का संकेत देते हैं।
- शरीर पर कलाकृतियाँ: हाँ, कंकाल के हाथ या कलाई पर एक चूड़ी (bracelet) जैसी कलाकृति दिखाई दे रही है।
- लिंग का संकेत: शरीर पर मिली चूड़ी जैसी कलाकृति यह संकेत दे सकती है कि यह कंकाल एक महिला का है, क्योंकि प्राचीन समाजों में अक्सर महिलाओं द्वारा आभूषण पहने जाते थे। हालाँकि, केवल एक आभूषण के आधार पर निश्चित रूप से लिंग का निर्धारण करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह एक संभावित संकेत है।
यह शवाधान हड़प्पा सभ्यता के अंतिम संस्कार की प्रथाओं और उनके विश्वासों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
प्रश्न 6
मोहनजोदाड़ो, हड़प्पा सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण और सुनियोजित शहरों में से एक था। इसकी कुछ प्रमुख विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं:
-
उत्कृष्ट नगर-योजना (Town Planning): मोहनजोदाड़ो की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुनियोजित नगर-योजना है। शहर को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया था:
- दुर्ग (Citadel): यह एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ था और इसमें संभवतः सार्वजनिक भवन, भंडार-गृह और महत्वपूर्ण संरचनाएँ थीं।
- निचला शहर (Lower Town): यह बड़े क्षेत्र में फैला हुआ था और यहाँ आम नागरिक रहते थे।
- सड़कें और गलियाँ: शहर की सड़कें और गलियाँ ग्रिड पैटर्न में बनी थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। सड़कें चौड़ी और सीधी थीं।
- जल निकास प्रणाली (Drainage System): मोहनजोदाड़ो में एक अत्यंत विकसित जल निकास प्रणाली थी। हर घर की नालियाँ सड़क की मुख्य नालियों से जुड़ी हुई थीं, जो शहर के गंदे पानी को बाहर ले जाती थीं। ये नालियाँ पक्की ईंटों से बनी और ढकी हुई थीं, जो स्वच्छता के प्रति उनकी उच्च जागरूकता को दर्शाती हैं।
- आवास (Houses): यहाँ के आवास पक्की ईंटों से बने थे और उनमें स्नानघर, शौचालय और आँगन की व्यवस्था होती थी। कुछ बड़े भवन भी मिले हैं, जो संभवतः सार्वजनिक उपयोग के लिए थे।
- स्नानागार (Great Bath): मोहनजोदाड़ो में एक विशाल सार्वजनिक स्नानागार मिला है, जिसे 'महास्नानगार' कहा जाता है। यह ईंटों से बना था और इसके चारों ओर कमरे थे। यह संभवतः धार्मिक अनुष्ठानों या सार्वजनिक स्नान के लिए उपयोग किया जाता था।
- भंडार-गृह (Granaries): शहर में बड़े-बड़े भंडार-गृह भी मिले हैं, जिनका उपयोग अनाज के भंडारण के लिए किया जाता था।
ये सभी विशेषताएँ मोहनजोदाड़ो को हड़प्पा सभ्यता के एक उन्नत और सुव्यवस्थित शहरी केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं।
Common mistakes
- खाद्य स्रोतों को उपलब्ध कराने वाले समूहों की पहचान करने में चूक।
- सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं के निर्धारण में केवल एक विधि पर ध्यान केंद्रित करना।
- जल निकासी प्रणाली के महत्व को कम आंकना।
- मनके बनाने की प्रक्रिया के चरणों को गलत क्रम में बताना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों को ध्यान से पढ़ें।
- जल निकासी प्रणाली और नगर नियोजन के बीच संबंध को दर्शाने वाले बिंदुओं को सूचीबद्ध करें।
- मनके बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली विभिन्न सामग्रियों और तकनीकों की तुलना करें।
- शवाधानों और विलासिता की वस्तुओं के विश्लेषण से सामाजिक भिन्नताओं को समझने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. हड़प्पा सभ्यता के शहरों में लोगों के लिए कौन सा अनाज उपलब्ध था?
Explanation: हड़प्पा स्थलों से गेहूं और जौ के अवशेष मिले हैं, जो उस समय के प्रमुख अनाज थे।
Q2. पुरातत्वविद हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के लिए किन विधियों का उपयोग करते हैं?
Explanation: पुरातत्वविद शवाधानों में मिली वस्तुओं और विलासिता की वस्तुओं के वितरण का विश्लेषण करके सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाते हैं।
Q3. हड़प्पा शहरों की जल निकासी प्रणाली किस प्रकार की नगर-योजना की ओर संकेत करती है?
Explanation: सड़कों और गलियों का ग्रिड पैटर्न में समकोण पर काटना एक सुनियोजित नगर-योजना को दर्शाता है।
Q4. मनके बनाने के लिए निम्नलिखित में से कौन सी सामग्री का उपयोग नहीं किया गया था?
Explanation: हड़प्पा सभ्यता में लोहे का ज्ञान नहीं था, इसलिए इसका उपयोग मनके बनाने में नहीं किया गया था।
Q5. आकृति 1.30 में दिखाए गए शवाधान में कंकाल को किस दिशा में रखा गया है?
Explanation: आकृति 1.30 में कंकाल को उत्तर-दक्षिण दिशा में दफनाया गया है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 के इतिहास के अध्याय 1 के लिए ये NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये समाधान छात्रों को हड़प्पा सभ्यता के शहरी जीवन, नगर नियोजन, सामाजिक संरचनाओं और शिल्प उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक हैं।
इन समाधानों में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?
समाधानों में हड़प्पा शहरों में उपलब्ध भोजन सामग्री, सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने की विधियाँ, जल निकासी प्रणाली का महत्व, और मनके बनाने की प्रक्रिया जैसे विषयों को विस्तार से समझाया गया है।
क्या ये समाधान केवल उत्तर प्रदान करते हैं या वे व्याख्या भी करते हैं?
ये समाधान न केवल प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, बल्कि प्रत्येक उत्तर को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत व्याख्या, कारण और अतिरिक्त जानकारी भी देते हैं, जिससे छात्रों की समझ बेहतर होती है।
शवाधानों का अध्ययन हड़प्पा समाज में भिन्नताओं को समझने में कैसे मदद करता है?
शवाधानों में दफनाए गए व्यक्तियों के साथ रखी गई वस्तुओं (जैसे मृदभाण्ड, आभूषण) और गर्त की बनावट के अंतर का अध्ययन करके पुरातत्वविद सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भिन्नताओं का अनुमान लगाते हैं।
जल निकासी प्रणाली हड़प्पा की नगर-योजना के बारे में क्या बताती है?
सड़कों और गलियों का ग्रिड पैटर्न, घरों का नालियों से जुड़ाव, और मुख्य नालियों का निर्माण यह दर्शाता है कि हड़प्पा शहरों की योजना बहुत व्यवस्थित थी और जल निकासी को प्राथमिकता दी गई थी।
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