कक्षा 12 इतिहास के लिए NCERT समाधान: अध्याय 13 - महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन सविनय अवज्ञा और उससे आगे

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यह पृष्ठ कक्षा 12 के लिए भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II के अध्याय 13, 'महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन सविनय अवज्ञा और उससे आगे' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो महात्मा गांधी द्वारा अपनाई गई जन-संपर्क की रणनीतियों, किसानों के साथ उनके जुड़ाव, नमक सत्याग्रह के महत्व, राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन में समाचार पत्रों की भूमिका, चरखे को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में चुनने के कारणों, असहयोग आंदोलन की प्रकृति, गोलमेज सम्मेलनों की अनिर्णायकता और राष्ट्रीय आंदोलन पर गांधीजी के समग्र प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I - II - III
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter13. महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन सविनय अवज्ञा और उससे आगे

Chapter summary

अध्याय 13 के ये NCERT समाधान 'महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन सविनय अवज्ञा और उससे आगे' पर केंद्रित हैं। यह छात्रों को गांधीजी की आम लोगों से जुड़ने की विधियों, किसानों के प्रति उनके दृष्टिकोण, नमक कानून जैसे प्रतीकात्मक संघर्षों के महत्व, और असहयोग जैसे आंदोलनों की प्रकृति को समझने में मदद करते हैं। समाधान समाचार पत्रों की भूमिका और चरखे जैसे प्रतीकों के उपयोग पर भी प्रकाश डालते हैं, जो राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Learning outcomes

  • महात्मा गांधी द्वारा आम लोगों से जुड़ने के तरीकों को समझना।
  • किसानों के प्रति गांधीजी के दृष्टिकोण का विश्लेषण करना।
  • नमक कानून को राष्ट्रीय आंदोलन के एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में पहचानना।
  • राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन में समाचार पत्रों के महत्व का मूल्यांकन करना।
  • चरखे को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में चुने जाने के कारणों को स्पष्ट करना।
  • असहयोग आंदोलन को विरोध के एक रूप के रूप में समझना।
  • गोलमेज सम्मेलनों की अनिर्णायकता के कारणों का वर्णन करना।
  • राष्ट्रीय आंदोलन पर महात्मा गांधी के प्रभाव का आकलन करना।

Topics covered

Paper topics

  • महात्मा गांधी की आम लोगों से पहचान
  • किसानों के साथ गांधीजी का जुड़ाव
  • नमक कानून और सविनय अवज्ञा
  • राष्ट्रीय आंदोलन में समाचार पत्रों की भूमिका
  • चरखा: राष्ट्रवाद का प्रतीक
  • असहयोग आंदोलन
  • गोलमेज सम्मेलन
  • राष्ट्रीय आंदोलन पर गांधीजी का प्रभाव

Important topics

  • महात्मा गांधी की जन-संपर्क की रणनीतियाँ
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक सत्याग्रह
  • असहयोग आंदोलन की प्रकृति और प्रभाव
  • राष्ट्रीय आंदोलन में प्रतीकों का महत्व (जैसे चरखा)
  • गोलमेज सम्मेलनों की भूमिका और परिणाम

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

महात्मा गांधी ने आम लोगों के साथ किस प्रकार पहचान बनाई?
Solution: महात्मा गांधी ने आम लोगों के साथ गहरी पहचान बनाने के लिए कई तरीके अपनाए। उन्होंने आम लोगों की भाषा में बात की, जिससे वे आसानी से जुड़ सकें। उन्होंने गरीबों जैसी ही साधारण पोशाक पहनी, जो उनकी सादगी और समानता की भावना को दर्शाती थी। गांधीजी ने छुआछूत और जाति व्यवस्था जैसी सामाजिक बुराइयों का कड़ा विरोध किया, जो उस समय समाज में व्याप्त थीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने चरखे पर सूत कातकर आत्मनिर्भरता का संदेश दिया और स्वच्छता के महत्व को दर्शाने के लिए स्वयं शौचालयों की सफाई की। इन सभी कार्यों के माध्यम से, उन्होंने खुद को एक आम व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया और लोगों का विश्वास जीता।

प्रश्न 2

महात्मा गांधी को किसानों द्वारा किस प्रकार माना जाता था?
Solution: महात्मा गांधी को किसानों द्वारा अत्यधिक सम्मान और विश्वास की दृष्टि से देखा जाता था। इसका एक प्रमुख कारण यह था कि उन्होंने किसानों की समस्याओं को समझा और उनके लिए आवाज उठाई। उदाहरण के लिए, खेड़ा सत्याग्रह के दौरान, उन्होंने फसल खराब होने के बावजूद किसानों से कर वसूली के खिलाफ राज्य सरकार से संघर्ष किया और करों में छूट दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह, चंपारण में, उन्होंने ब्रिटिश नील बागान मालिकों द्वारा किसानों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया। जब उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में अपना उद्घाटन भाषण दिया, तो उन्होंने बहुसंख्यक भारतीय आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले किसानों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। गांधीजी ने अपने उपदेशों को व्यवहार में लाकर किसानों का विश्वास जीता, जिससे वे उन्हें अपना नेता मानने लगे।

प्रश्न 3

नमक कानून संघर्ष का एक महत्वपूर्ण मुद्दा क्यों बन गया?
Solution: नमक कानून संघर्ष का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया क्योंकि नमक प्रत्येक भारतीय घर की एक बुनियादी और अनिवार्य आवश्यकता है। ब्रिटिश सरकार ने नमक के उत्पादन और बिक्री पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया था, जिससे नमक की कीमतें बहुत बढ़ गईं। भारतीयों को अपने घरेलू उपयोग के लिए भी नमक बनाने की अनुमति नहीं थी और उन्हें दुकानों से ऊंचे दामों पर नमक खरीदना पड़ता था। इस अन्यायपूर्ण कानून के माध्यम से, गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष को संगठित करने का एक अवसर देखा। नमक जैसे सामान्य और आवश्यक वस्तु पर लगाया गया कर, ब्रिटिश सरकार के शोषणकारी शासन का प्रतीक बन गया, जिसने इसे राष्ट्रीय आंदोलन का एक केंद्रीय मुद्दा बना दिया।

प्रश्न 4

राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए समाचार पत्र एक महत्वपूर्ण स्रोत क्यों हैं?
Solution: राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए समाचार पत्र एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में कार्य करते हैं। वे महात्मा गांधी के आंदोलनों और गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रदान करते थे, जिससे यह पता चलता था कि उन्होंने क्या किया और उनके कार्यों का क्या प्रभाव पड़ा। इसके अलावा, समाचार पत्र यह भी दर्शाते थे कि आम भारतीय इन आंदोलनों और गांधीजी के बारे में क्या सोचते थे। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि समाचार पत्रों के खातों को पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं माना जा सकता, क्योंकि वे अक्सर उन लोगों द्वारा प्रकाशित किए जाते थे जिनकी अपनी राजनीतिक राय और दुनिया को देखने का एक विशेष दृष्टिकोण होता था। फिर भी, वे उस समय की घटनाओं, जनमत और आंदोलन की गतिशीलता को समझने के लिए अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

प्रश्न 5

चरखे को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में क्यों चुना गया?
Solution: महात्मा गांधी ने चरखे को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में चुना क्योंकि यह उनके कई महत्वपूर्ण विचारों का प्रतिनिधित्व करता था। वे मशीनों पर आधारित आधुनिक युग के आलोचक थे, जहाँ मशीनों ने मनुष्यों को गुलाम बना लिया था और श्रमिकों को विस्थापित कर दिया था। चरखा, इसके विपरीत, एक ऐसे समाज का प्रतीक था जो मशीनों और अत्यधिक प्रौद्योगिकी का महिमामंडन नहीं करता था, बल्कि मानव श्रम और सादगी को महत्व देता था। इसके अलावा, गांधीजी का मानना था कि चरखा गरीबों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत प्रदान कर सकता है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस प्रकार, चरखा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और मशीनीकृत औद्योगीकरण के विकल्प के रूप में राष्ट्रवाद का एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया।

प्रश्न 6

असहयोग आंदोलन किस तरह विरोध का एक रूप था?
Solution: असहयोग आंदोलन विरोध का एक अत्यंत प्रभावी रूप था, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिला दिया। रौलेट सत्याग्रह की सफलता से प्रेरित होकर, गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के साथ "असहयोग" का आह्वान किया। इस आंदोलन के तहत, भारतीयों से आग्रह किया गया कि वे औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के उद्देश्य से स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करें, और करों का भुगतान न करें। यदि बड़ी संख्या में लोग इसका पालन करते, तो यह ब्रिटिश सरकार के कामकाज को पूरी तरह से बाधित कर देता। इसके परिणामस्वरूप, छात्रों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना बंद कर दिया, वकीलों ने अदालतों में पेश होने से इनकार कर दिया, और मजदूर वर्ग ने कई शहरों में हड़तालें कीं। कुमाऊं जैसे क्षेत्रों में किसानों ने भी औपनिवेशिक अधिकारियों के लिए काम करने से इनकार कर दिया। इस व्यापक असहयोग ने ब्रिटिश राज को 1857 के विद्रोह के बाद पहली बार अपनी जड़ों से हिला दिया था।

प्रश्न 7

गोल मेज सम्मेलन में संवाद अनिर्णायक क्यों थे?
Solution: लंदन में ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित गोलमेज सम्मेलन कई कारणों से अनिर्णायक साबित हुए। पहली गोलमेज बैठक नवंबर 1930 में आयोजित की गई थी, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दल की अनुपस्थिति के कारण यह व्यर्थ साबित हुई। इसके बाद, वायसराय के साथ हुई लंबी वार्ताओं के परिणामस्वरूप "गांधी-इरविन समझौता" हुआ, जिसमें सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करने, कैदियों को रिहा करने और नमक बनाने की अनुमति देने की शर्तें थीं। हालांकि, इस समझौते की कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों ने आलोचना की। गांधीजी वायसराय से भारतीयों के लिए पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता की प्रतिबद्धता प्राप्त करने में असमर्थ रहे। 1931 के उत्तरार्ध में आयोजित दूसरे गोलमेज सम्मेलन में, गांधीजी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनकी इस बात को चुनौती मिली कि कांग्रेस पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती है। मुस्लिम लीग, रजवाड़े और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं ने तर्क दिया कि गांधीजी और कांग्रेस वास्तव में सबसे निचले तबके के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इन मतभेदों और प्रतिबद्धताओं की कमी के कारण, गोलमेज सम्मेलन किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके, जिसके परिणामस्वरूप गांधीजी भारत लौट आए और सविनय अवज्ञा आंदोलन को फिर से शुरू किया।

प्रश्न 8

किस तरह से महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन के स्वरूप को बदल दिया?
Solution: जनवरी 1915 में भारत लौटने के बाद, महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के स्वरूप को मौलिक रूप से बदल दिया। उन्होंने आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया और इसे केवल अभिजात वर्ग तक सीमित न रखकर, इसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं और छात्रों सहित समाज के सभी वर्गों को शामिल किया। गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा जैसे अपने अनूठे तरीकों से आंदोलन को एक नई दिशा दी, जिसने इसे नैतिक बल प्रदान किया। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित न रखकर, सामाजिक सुधारों, अस्पृश्यता निवारण, हिंदू-मुस्लिम एकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों को भी इसमें जोड़ा। उनके नेतृत्व में, राष्ट्रीय आंदोलन एक जन आंदोलन बन गया, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष को एक नई ऊर्जा और व्यापक आधार प्रदान किया।

Common mistakes

  • गांधीजी द्वारा अपनाई गई रणनीतियों के पीछे के गहरे अर्थ को समझने में चूक।
  • विभिन्न आंदोलनों के ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व को ठीक से न समझना।
  • समाचार पत्रों जैसे स्रोतों की सीमाओं को अनदेखा करना।
  • गोलमेज सम्मेलनों के परिणामों का गलत अर्थ निकालना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को मुख्य बिंदुओं में सारांशित करें।
  • गांधीजी द्वारा अपनाई गई विभिन्न रणनीतियों और आंदोलनों के बीच संबंध स्थापित करें।
  • समाचार पत्रों और चरखे जैसे प्रतीकों के महत्व पर विशेष ध्यान दें।
  • गोलमेज सम्मेलनों की विफलता के कारणों को समझें और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. महात्मा गांधी ने आम लोगों के साथ किस प्रकार पहचान बनाई?

Q2. गांधीजी को किसानों द्वारा विशेष रूप से क्यों माना जाता था?

Q3. नमक कानून संघर्ष का एक महत्वपूर्ण मुद्दा क्यों बना?

Q4. चरखे को राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में क्यों चुना गया?

Q5. असहयोग आंदोलन के दौरान छात्रों और वकीलों से क्या करने की अपेक्षा की गई थी?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 12 के लिए भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II के अध्याय 13 पर केंद्रित हैं।

इन समाधानों में किन प्रमुख आंदोलनों को शामिल किया गया है?

इन समाधानों में असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों को शामिल किया गया है।

महात्मा गांधी ने आम लोगों से कैसे जुड़ाव स्थापित किया?

महात्मा गांधी ने आम लोगों की भाषा बोलकर, उनकी तरह पोशाक पहनकर, जाति व्यवस्था का विरोध करके, चरखे पर काम करके और शौचालय की सफाई जैसे कार्यों से जुड़ाव स्थापित किया।

नमक कानून राष्ट्रीय आंदोलन के लिए क्यों महत्वपूर्ण था?

नमक कानून महत्वपूर्ण था क्योंकि यह हर घर की बुनियादी आवश्यकता थी, इस पर ब्रिटिश सरकार का एकाधिकार था, और यह ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण नियमों के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया।

गोलमेज सम्मेलन क्यों अनिर्णायक रहे?

गोलमेज सम्मेलन अनिर्णायक रहे क्योंकि कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले गांधीजी विभिन्न समूहों (मुस्लिम लीग, रजवाड़े, अंबेडकर) से चुनौती का सामना कर रहे थे और ब्रिटिश सरकार भारतीयों के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही थी।

समाचार पत्र राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए कैसे उपयोगी हैं?

समाचार पत्र महात्मा गांधी के आंदोलनों और गतिविधियों पर नज़र रखते थे, उनकी रिपोर्ट करते थे, और आम भारतीयों की सोच को दर्शाते थे, जिससे वे राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बनते थे।

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