कक्षा 12 रसायन विज्ञान: d और f ब्लॉक के तत्व NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 8, 'd और f ब्लॉक के तत्व' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें संक्रमण धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थाओं, आयनन एन्थैल्पी, कणन एन्थैल्पी और अपचायक गुणों से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में सिल्वर, जिंक, मैंगनीज, कॉपर, क्रोमियम और आयरन जैसे तत्वों के विशिष्ट उदाहरणों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें उनके व्यवहार के कारणों की व्याख्या की गई है। यह संसाधन छात्रों को संक्रमण तत्वों की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करने में मदद करता है।

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BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectरसायन विज्ञान-I
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. d & f ब्लाक के तत्व

Chapter summary

अध्याय 8, 'd और f ब्लॉक के तत्व' के लिए NCERT समाधान, संक्रमण धातुओं के गुणों पर केंद्रित हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं को दर्शाने की प्रवृत्ति, आयनन और कणन एन्थैल्पी में अनियमितताओं, और ऑक्साइड व फ्लोराइड में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं के प्रदर्शन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में Cr2+ और Fe2+ जैसे आयनों के अपचायक गुणों की तुलना भी की गई है, जो छात्रों को d और f ब्लॉक तत्वों की रासायनिक विशेषताओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • संक्रमण तत्वों की परिभाषा और उनके गुणों को समझें।
  • विभिन्न संक्रमण धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का विश्लेषण करें।
  • संक्रमण धातुओं द्वारा प्रदर्शित विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं के कारणों की व्याख्या करें।
  • आयनन एन्थैल्पी और कणन एन्थैल्पी में अनियमितताओं को समझें।
  • ऑक्साइड और फ्लोराइड में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं के प्रदर्शन के पीछे के तर्क को समझें।
  • अपचायक गुणों की तुलना करें और उनके कारणों का विश्लेषण करें।

Topics covered

Paper topics

  • संक्रमण तत्वों की परिभाषा
  • इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
  • ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
  • कणन एन्थैल्पी
  • आयनन एन्थैल्पी
  • जलयोजन एन्थैल्पी
  • धात्विक बंधन
  • अपचायक गुण
  • ऑक्सीकारक गुण
  • ऑक्साइड और फ्लोराइड के यौगिक
  • d-ब्लॉक तत्व
  • f-ब्लॉक तत्व

Important topics

  • संक्रमण तत्वों के गुण (ऑक्सीकरण अवस्था, रंग, उत्प्रेरक गुण)
  • आयनन एन्थैल्पी और कणन एन्थैल्पी में अनियमितताएँ
  • E°(M²⁺/M) मानों का महत्व
  • अपचायक और ऑक्सीकारक क्षमता
  • ऑक्साइड और फ्लोराइड में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाएँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित d-कक्षक (4d10) है। आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक संक्रमण तत्व है?
Solution: सिल्वर (Ag), जिसका परमाणु क्रमांक 47 है, अपनी मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Kr] 4d10 5s¹ दर्शाता है। इस अवस्था में, 4d कक्षक पूर्ण रूप से भरा हुआ है। हालाँकि, सिल्वर +1 ऑक्सीकरण अवस्था में [Kr] 4d¹⁰ 5s⁰ विन्यास प्रदर्शित करता है। परन्तु, सिल्वर कुछ यौगिकों में +2 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है, जिसमें इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Kr] 4d⁹ 5s⁰ होता है। संक्रमण तत्वों की परिभाषा के अनुसार, वे तत्व जिनके परमाणु या उनके सामान्य आयनों में अपूर्ण d-कक्षक होते हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं। चूँकि सिल्वर +2 ऑक्सीकरण अवस्था में अपूर्ण 4d कक्षक (4d⁹) प्रदर्शित करता है, इसलिए इसे एक संक्रमण तत्व माना जाता है।

प्रश्न 2

श्रेणी, Sc (Z=21) तथा Zn (Z=30) में जिंक की कणन एन्थैल्पी का मान सबसे कम होता है, अर्थात 126 kJ mol-1 क्यों?
Solution: जिंक (Zn), जिसका परमाणु क्रमांक 30 है, का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d¹⁰ 4s² है। इस विन्यास में, 3d कक्षक पूर्ण रूप से भरा हुआ है। संक्रमण धातुओं की कणन एन्थैल्पी मुख्य रूप से धातु के परमाणुओं के बीच बनने वाले धात्विक बंध की प्रबलता पर निर्भर करती है। धात्विक बंध में (n-1)d इलेक्ट्रॉनों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। चूँकि जिंक में 3d कक्षक पूर्ण रूप से भरे होते हैं, इसके d-इलेक्ट्रॉन धात्विक बंधन में प्रभावी ढंग से भाग नहीं ले पाते हैं। इसके विपरीत, श्रेणी के अन्य संक्रमण तत्वों में अपूर्ण d-कक्षक होते हैं जो धात्विक बंधन में योगदान करते हैं, जिससे उनके धात्विक बंध अधिक प्रबल होते हैं। इसलिए, जिंक में दुर्बल धात्विक बंध के कारण इसकी कणन एन्थैल्पी अपनी संक्रमण श्रेणी में सबसे कम होती है।

प्रश्न 3

संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी का कौन-सा तत्व बड़ी संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है एवं क्यों?
Solution: संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में मैंगनीज (Mn), जिसका परमाणु क्रमांक 25 है, सबसे अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है। मैंगनीज का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d⁵ 4s² है। यह तत्व +2 से लेकर +7 तक की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है, जैसे +2, +3, +4, +5, +6, और +7। इसका कारण यह है कि मैंगनीज के पास 3d कक्षक में 5 इलेक्ट्रॉन और 4s कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इन दोनों कक्षकों की ऊर्जाएँ लगभग समान होती हैं, जिससे ये सभी इलेक्ट्रॉन रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग ले सकते हैं। इलेक्ट्रॉनों को खोने या साझा करने की यह क्षमता मैंगनीज को विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करने की अनुमति देती है।

प्रश्न 4

कॉपर के लिए E°(M²⁺/M) का मान धनात्मक (+0.34 V) है। इसके संभावित कारण क्या हैं?
Solution: किसी धातु के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°(M²⁺/M)) का मान तीन मुख्य ऊर्जा परिवर्तनों पर निर्भर करता है: धातु के परमाणुओं को गैसीय अवस्था में लाने के लिए आवश्यक कणन एन्थैल्पी (ΔaH), गैसीय धातु परमाणु से दो इलेक्ट्रॉन निकालकर M²⁺ आयन बनाने के लिए आवश्यक आयनन एन्थैल्पी (ΔiH), और गैसीय M²⁺ आयन को जलयोजित करने के लिए मुक्त होने वाली जलयोजन एन्थैल्पी (ΔhydH)। इन ऊर्जाओं का संबंध इस प्रकार है: E°(M²⁺/M) ∝ -[ΔaH + ΔiH + ΔhydH]। कॉपर (Cu) के मामले में, कणन एन्थैल्पी का मान उच्च होता है, और जलयोजन एन्थैल्पी का मान इतना अधिक नहीं होता कि यह आयनन एन्थैल्पी की क्षतिपूर्ति कर सके। इन ऊर्जाओं का शुद्ध परिणाम यह होता है कि Cu²⁺ आयन का बनना Cu धातु की तुलना में कम अनुकूल होता है, जिसके परिणामस्वरूप E°(Cu²⁺/Cu) का मान धनात्मक (+0.34 V) होता है।

प्रश्न 5

संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में आयनन एन्यैल्पी (प्रथम तथा द्वितीय) में अनियमित परिवर्तन को आप कैसे समझायेगें।
Solution: प्रथम संक्रमण श्रेणी (Sc से Zn तक) में प्रथम आयनन एन्थैल्पी में एक सामान्य प्रवृत्ति देखी जाती है, जो प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के साथ बढ़ती है। हालाँकि, इस प्रवृत्ति में कुछ अनियमितताएँ होती हैं। ये अनियमितताएँ मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के स्थायित्व से संबंधित हैं। सामान्यतः, जैसे-जैसे नाभिकीय आवेश बढ़ता है, आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है। लेकिन, क्रोमियम (Cr, 3d⁵ 4s¹) के लिए आयनन एन्थैल्पी अपेक्षा से थोड़ी कम होती है क्योंकि 4s से एक इलेक्ट्रॉन निकालने पर 3d⁵ का अर्ध-भरे हुए स्थायी विन्यास प्राप्त होता है। इसके विपरीत, मैंगनीज (Mn, 3d⁵ 4s²) के लिए आयनन एन्थैल्पी थोड़ी अधिक होती है। जिंक (Zn, 3d¹⁰ 4s²) के लिए आयनन एन्थैल्पी का मान उच्च होता है क्योंकि 4s कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालने पर 3d¹⁰ का पूर्ण रूप से भरा हुआ स्थायी विन्यास प्राप्त होता है। द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में भी इसी प्रकार की अनियमितताएँ देखी जाती हैं, जो विशेष रूप से अर्ध-भरे (d⁵) और पूर्ण-भरे (d¹⁰) विन्यासों के स्थायित्व के कारण होती हैं।

प्रश्न 6

कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है?
Solution: ऑक्सीजन (O) और फ्लोरिन (F) अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व हैं। जब कोई धातु इन तत्वों के साथ यौगिक बनाती है, तो ऑक्सीजन और फ्लोरिन धातु से इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इस उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण, वे धातु को उसकी उच्चतम संभव ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत करने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के लिए, संक्रमण धातुएँ अपने ऑक्साइड (जैसे, V₂O₅, CrO₃) और फ्लोराइड (जैसे, WF₆, OsF₆) में अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती हैं। अन्य कम विद्युत ऋणात्मक तत्वों के साथ, धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था को प्राप्त नहीं कर पाती है क्योंकि वे धातु को उस सीमा तक ऑक्सीकृत करने के लिए पर्याप्त प्रबल नहीं होते हैं।

प्रश्न 7

Cr²⁺ तथा Fe²⁺ में से कौन प्रबल अपचायक है तथा क्यों?
Solution: Cr²⁺, Fe²⁺ की तुलना में एक प्रबल अपचायक है। इसका कारण उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) मानों और उनके ऑक्सीकरण के बाद प्राप्त होने वाले इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों से समझा जा सकता है।

Cr²⁺ के लिए, E°(Cr³⁺/Cr²⁺) = -0.41 V है।

Fe²⁺ के लिए, E°(Fe³⁺/Fe²⁺) = +0.77 V है।

एक प्रबल अपचायक वह होता है जो आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है। Cr²⁺ का ऑक्सीकरण होकर Cr³⁺ बनता है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d³ होता है। यह विन्यास अर्ध-भरे d-कक्षक के स्थायित्व के कारण अपेक्षाकृत स्थिर होता है।

Cr²⁺ → Cr³⁺ (3d³)

दूसरी ओर, Fe²⁺ का ऑक्सीकरण होकर Fe³⁺ बनता है, जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d⁵ होता है। यह विन्यास पूर्ण रूप से भरे हुए d-कक्षक के स्थायित्व के कारण बहुत स्थिर होता है।

Fe²⁺ → Fe³⁺ (3d⁵)

यद्यपि Fe³⁺ का विन्यास अधिक स्थिर है, Fe²⁺ का ऑक्सीकरण होना Cr²⁺ के ऑक्सीकरण होने की तुलना में अधिक ऊर्जा की मांग करता है (जैसा कि धनात्मक E° मान से संकेत मिलता है)। इसलिए, Cr²⁺ का ऑक्सीकरण अधिक आसानी से होता है, जिससे यह एक प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करता है।

Common mistakes

  • संक्रमण तत्व की परिभाषा को गलत समझना (जैसे, पूर्ण भरे हुए d-कक्षक वाले तत्वों को शामिल करना)।
  • ऑक्सीकरण अवस्थाओं की संख्या को प्रभावित करने वाले कारकों को गलत समझना।
  • आयनन एन्थैल्पी में अनियमितताओं के कारणों को स्पष्ट रूप से न बता पाना।
  • अपचायक क्षमता की तुलना करते समय मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) के महत्व को नजरअंदाज करना।

Revision tips

  • प्रत्येक तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को याद करें, विशेष रूप से अपवादों पर ध्यान दें।
  • विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं को दर्शाने वाले सामान्य तत्वों और उनके कारणों की सूची बनाएं।
  • आयनन एन्थैल्पी और कणन एन्थैल्पी के रुझानों को समझने के लिए ग्राफिकल प्रतिनिधित्व का उपयोग करें।
  • अपचायक और ऑक्सीकारक गुणों की तुलना के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) मानों का अभ्यास करें।
  • महत्वपूर्ण यौगिकों और उनके गुणों से संबंधित प्रश्नों पर विशेष ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. सिल्वर (Ag) को संक्रमण तत्व क्यों माना जाता है, भले ही इसकी मूल अवस्था में 4d कक्षक पूर्ण रूप से भरे हों?

Q2. 3d श्रेणी में जिंक (Zn) की कणन एन्थैल्पी सबसे कम क्यों होती है?

Q3. 3d श्रेणी में कौन सा तत्व सबसे अधिक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है और क्यों?

Q4. कॉपर (Cu) के लिए E°(M²⁺/M) का मान धनात्मक (+0.34 V) क्यों है?

Q5. Cr²⁺ और Fe²⁺ में से कौन अधिक प्रबल अपचायक है और क्यों?

Frequently asked questions

d और f ब्लॉक के तत्व क्या हैं?

d-ब्लॉक के तत्व आवर्त सारणी के समूह 3 से 12 तक के तत्व हैं, जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन d-कक्षक में प्रवेश करता है। f-ब्लॉक के तत्व (लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स) वे हैं जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन f-कक्षक में प्रवेश करता है।

संक्रमण तत्व किसे कहते हैं?

संक्रमण तत्व वे तत्व होते हैं जिनके परमाणु या उनके सामान्य आयनों में अपूर्ण d-कक्षक होते हैं। उदाहरण के लिए, सिल्वर (Ag) को संक्रमण तत्व माना जाता है क्योंकि यह +2 ऑक्सीकरण अवस्था में 4d⁹ विन्यास दर्शाता है।

संक्रमण तत्व विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्यों दर्शाते हैं?

संक्रमण तत्व विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ इसलिए दर्शाते हैं क्योंकि उनके (n-1)d और ns कक्षक की ऊर्जाएँ लगभग समान होती हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनों को खोना या साझा करना आसान हो जाता है।

जिंक (Zn) को संक्रमण तत्व क्यों नहीं माना जाता है?

जिंक का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d¹⁰ 4s² है। इसके परमाणु और इसके सामान्य आयन (Zn²⁺, जिसका विन्यास 3d¹⁰ है) दोनों में d-कक्षक पूर्ण रूप से भरे होते हैं, इसलिए इसे संक्रमण तत्व की श्रेणी में नहीं रखा जाता है।

E°(M²⁺/M) का मान धनात्मक होने का क्या अर्थ है?

E°(M²⁺/M) का धनात्मक मान दर्शाता है कि धातु आयन (M²⁺) का जलयोजित रूप, धातु (M) की तुलना में अधिक स्थिर है, या धातु का ऑक्सीकरण होना कठिन है।

Cr²⁺ और Fe²⁺ में से कौन अधिक प्रबल अपचायक है?

Cr²⁺ एक प्रबल अपचायक है क्योंकि यह आसानी से Cr³⁺ में ऑक्सीकृत हो जाता है, जिसका विन्यास 3d³ होता है। Fe²⁺ का Fe³⁺ (3d⁵) में ऑक्सीकरण होना भी अनुकूल है, लेकिन Cr²⁺ का ऑक्सीकरण होना अधिक आसान है।

यह समाधान किन कक्षाओं के लिए उपयोगी हैं?

यह समाधान विशेष रूप से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध कक्षा 12 के छात्रों के लिए रसायन विज्ञान (रसायन विज्ञान-I) के अध्याय 8 'd और f ब्लॉक के तत्व' की तैयारी के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

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