CBSE Class 11 Hindi A (Aroh) NCERT Solutions Chapter 15: शेखर जोशी

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

This chapter delves into the life and experiences of Sekhar Joshi, exploring themes of caste, education, and societal pressures through compelling narratives. The NCERT Solutions for Class 11 Hindi A (Aroh) Chapter 15 provide detailed explanations and analyses of the stories presented. Students will gain insights into the characters' struggles, the impact of societal norms on their lives, and the contrast between traditional education and vocational skills. These solutions break down complex ideas into understandable steps, helping students grasp the nuances of the text. They are designed to aid in exam preparation by offering clear answers and contextual understanding, ensuring students are well-equipped to tackle questions related to this chapter.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectआरोह
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. शेखर जोशी

Chapter summary

Chapter 15 of CBSE Class 11 Hindi A (Aroh) focuses on the writings of Sekhar Joshi. The NCERT Solutions provided here analyze the stories, highlighting themes of caste discrimination, the value of different types of knowledge (academic vs. vocational), and the societal expectations placed upon individuals. The solutions clarify character motivations and plot developments, offering a deeper understanding of the social commentary embedded in Joshi's work. This chapter's exercises are crucial for understanding the socio-cultural context presented.

Learning outcomes

  • Understand the societal implications of caste on education and career choices.
  • Analyze the contrast between traditional academic learning and vocational skills.
  • Identify and explain the author's use of 'language as a whip' to depict criticism.
  • Evaluate the significance of urban migration for personal growth and awareness.
  • Recognize the author's portrayal of characters' internal conflicts and societal pressures.

Topics covered

Paper topics

  • Caste discrimination
  • Education vs. Vocational skills
  • Societal expectations
  • Character analysis (Dhanram, Mohan)
  • Author's commentary
  • Rural vs. Urban life
  • Figurative language ('language as a whip')
  • Family responsibilities
  • Social mobility

Important topics

  • The impact of caste on education and opportunities
  • The contrast between academic and practical knowledge
  • Character development of Mohan and Dhanram
  • Author's critique of societal norms
  • The significance of urban migration

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

कहानी के उस प्रसंग का उल्लेख करें जिसमें किताबों की विद्या और घन चलाने की विद्या का ज़िक्र आया है।
Solution: कहानी में वह प्रसंग तब आता है जब धनराम तेरह का पहाड़ा नहीं सुना पाता है। मास्टर त्रिलोक सिंह उसे व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि "उसके दिमाग में तो लोहा ही भरा है, वहाँ विद्या का ताप नहीं पहुँचेगा।" यह कथन इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि धनराम के पिता के पास उसे किताबी विद्या दिलाने के सामर्थ्य नहीं था। जैसे ही धनराम थोड़ा बड़ा हुआ, पिता ने उसे लोहार का काम सिखाना शुरू कर दिया, जिसमें पहले धौंकनी फूँकना और फिर हथौड़े से लेकर घन चलाने की विद्या शामिल थी। धीरे-धीरे धनराम इसी व्यावसायिक विद्या में कुशल हो गया। इस प्रकार, यह प्रसंग किताबी ज्ञान और पारंपरिक व्यावसायिक कौशल (घन चलाना) के बीच के अंतर और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दर्शाता है।

प्रश्न 2

धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं समझता था?
Solution: धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी इसलिए नहीं समझता था क्योंकि बचपन से ही उसे यह सिखाया गया था कि वह निम्न जाति का है और उच्च जाति के लोग उसके प्रतिद्वंद्वी नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त, मोहन कक्षा का सबसे बुद्धिमान छात्र था और मास्टर त्रिलोक सिंह का चहेता था, जो अक्सर कहता था कि मोहन एक दिन विद्यालय का नाम रोशन करेगा। धनराम को यह भी लगता था कि मोहन का उसे दंडित करना उसका अधिकार है, और वह मोहन के प्रति ईर्ष्या या प्रतिद्वंद्विता का भाव नहीं रखता था, बल्कि स्नेह और आदर का भाव रखता था।

प्रश्न 3

धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों?
Solution: धनराम को मोहन के हथौड़ा चलाने और लोहे की छड़ को सटीक गोलाई देने की कुशलता पर आश्चर्य हुआ। धनराम को उसकी कार्य-कुशलता से अधिक इस बात पर आश्चर्य था कि मोहन, जो एक पुरोहित खानदान से था, निम्न जाति के माने जाने वाले लोहार के काम को इतनी सहजता से कैसे कर रहा है। उसे यह देखकर भी आश्चर्य हुआ कि मोहन ने अपनी जाति की पारंपरिक पहचान को भुलाकर इस तरह का काम क्यों स्वीकार किया।

प्रश्न 4

मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय क्यों कहा है?
Solution: मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय इसलिए कहा है क्योंकि गाँव के सीमित परिवेश से निकलकर वह शहरी परिवेश में आया। यहाँ उसे आगे की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिला, जो गाँव में संभव नहीं था। शहर में आकर उसे पारिवारिक मजबूरियों का भी अहसास हुआ, जिसके कारण वह अपनी पढ़ाई और नौकरी की इच्छा को कभी अपने घरवालों के सामने व्यक्त नहीं कर पाया। यद्यपि यह अध्याय सुखद नहीं था, परंतु यह उसके जीवन में एक महत्वपूर्ण और नया मोड़ लेकर आया, जिसने उसके दृष्टिकोण को बदला।

प्रश्न 5

मास्टर त्रिलोक सिंह के किस कथन को लेखक ने ज़बान की चाबुक कहा है और क्यों?
Solution: लेखक ने मास्टर त्रिलोक सिंह के उस कथन को 'ज़बान की चाबुक' कहा है जब उन्होंने धनराम द्वारा तेरह का पहाड़ा न सुना पाने पर व्यंग्य करते हुए कहा, "उसके दिमाग में तो लोहा ही भरा है।" लेखक का तात्पर्य यह है कि मास्टर जी पहले बेंत का प्रयोग करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने शब्दों के माध्यम से धनराम को ऐसी फटकार लगाई जो शारीरिक चोट से भी अधिक पीड़ादायक थी। यह कथन धनराम के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाला था और उसने उसे आगे पढ़ने से हतोत्साहित किया, जिससे वह अंततः पुश्तैनी काम में लग गया। इस तरह, शब्दों की चोट शारीरिक चोट से अधिक स्थायी और हानिकारक साबित हुई।

प्रश्न 6.1

"बिरादरी का यही सहारा होता है।" - किसने, किससे कहा? किस प्रसंग में कहा? किस आशय से कहा? क्या कहानी का आशय में यह स्पष्ट हुआ है?
Solution:
  1. यह वाक्य पंडित वंशीधर ने अपने बिरादरी के युवक रमेश से कहा था।
  2. यह प्रसंग तब उत्पन्न हुआ जब वंशीधर अपने बेटे मोहन की आगे की पढ़ाई के लिए चिंतित थे। रमेश ने सहानुभूति जताते हुए मोहन को अपने साथ लखनऊ ले जाकर पढ़ाने की पेशकश की। इसी सहायता के प्रस्ताव पर वंशीधर ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह वाक्य कहा।
  3. वंशीधर ने यह वाक्य रमेश के प्रति कृतज्ञता और बिरादरी के आपसी सहयोग के महत्व को दर्शाने के आशय से कहा था। उनका मानना था कि मुश्किल समय में जाति या बिरादरी के लोग ही एक-दूसरे के काम आते हैं।
  4. नहीं, कहानी में वंशीधर का यह आशय पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुआ, बल्कि विपरीत सिद्ध हुआ। वंशीधर ने मोहन को रमेश के साथ इस आशा से भेजा था कि वह पढ़ेगा, लेकिन रमेश ने मोहन को पढ़ाने के बजाय उसे अपने घर का नौकर बना लिया और उसका शोषण किया। इस प्रकार, बिरादरी का सहारा अपेक्षा के अनुरूप सिद्ध नहीं हुआ।

प्रश्न 6.2

"उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी" - कहानी के इस वाक्य - किसके लिए कहा गया है? किस प्रसंग में कहा गया है? यह पात्र विशेष के किन चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है?
Solution:
  1. यह वाक्य मोहन के लिए कहा गया है।
  2. यह वाक्य उस प्रसंग में कहा गया है जब मोहन भट्टी में काम करते हुए लोहे की मोटी छड़ को बड़ी कुशलता और सटीकता से ढालकर एक सुडौल आकार देता है। इस कार्य को करते समय उसकी आँखों में एक शिल्पी या कारीगर की तरह सृजन करने की चमक दिखाई देती है।
  3. यह वाक्य मोहन के निम्नलिखित चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है:
    • कौशल और प्रतिभा: यह दर्शाता है कि मोहन में लोहार का काम करने की स्वाभाविक प्रतिभा और कौशल है, भले ही वह पुरोहित परिवार से है।
    • कार्य के प्रति समर्पण: उसकी आँखों में चमक यह दर्शाती है कि वह अपने काम में पूरी तरह तल्लीन और समर्पित है।
    • जातिगत पूर्वाग्रहों से मुक्ति: यह इस बात का भी संकेत देता है कि मोहन जाति को व्यवसाय से नहीं जोड़ता और अपने काम को पूरी लगन से करता है।
    • उदारता: मित्र की मदद के लिए आगे बढ़कर उसने अपनी उदारता का परिचय दिया, भले ही वह काम उसके पारंपरिक व्यवसाय से अलग था।

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'language as a whip' with physical punishment.
  • Underestimating the impact of societal expectations and caste on individual aspirations.
  • Failing to connect the character's actions to the broader social commentary of the story.
  • Not fully appreciating the significance of the shift from rural to urban settings for character development.

Revision tips

  • Focus on understanding the characters' motivations, especially Dhanram and Mohan.
  • Pay close attention to the author's use of figurative language, like 'language as a whip'.
  • Analyze the social commentary on caste and education presented in each question.
  • Relate the characters' experiences to the broader societal context of the time.
  • Review the explanations for why certain events or character traits are significant.

Practice MCQs

Q1. मास्टर त्रिलोक सिंह ने धनराम को 'ज़बान की चाबुक' क्यों कहा?

Q2. धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी क्यों नहीं समझता था?

Q3. मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को नया अध्याय क्यों कहा गया है?

Q4. पंडित वंशीधर ने रमेश से 'बिरादरी का यही सहारा होता है' वाक्य किस संदर्भ में कहा?

Q5. मोहन की आँखों में 'सर्जक की चमक' कब दिखाई दी?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE कक्षा 11 के हिंदी कोर (आरोह भाग-1) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 15: शेखर जोशी पर केंद्रित हैं।

अध्याय 15 में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

अध्याय 15 जाति व्यवस्था, शिक्षा के विभिन्न रूपों (किताबी ज्ञान बनाम व्यावसायिक कौशल), सामाजिक अपेक्षाओं और शहरी जीवन के प्रभाव जैसे विषयों पर केंद्रित है।

क्या इन समाधानों में सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं?

हाँ, इन समाधानों में अध्याय 15 के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर दिए गए हैं, जो NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित हैं।

समाधानों में 'ज़बान की चाबुक' का क्या अर्थ है?

'ज़बान की चाबुक' का अर्थ है शब्दों के माध्यम से की गई तीखी टिप्पणी या ताना, जो शारीरिक चोट से भी अधिक कष्टदायक हो सकती है और मनोबल गिरा सकती है।

मोहन के लखनऊ जाने को 'नया अध्याय' क्यों कहा गया है?

मोहन के लखनऊ जाने को नया अध्याय इसलिए कहा गया है क्योंकि इससे उसे शहरी परिवेश का अनुभव हुआ, आगे पढ़ने का अवसर मिला और जीवन की वास्तविकताओं का ज्ञान हुआ।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों के उत्तर देने में छात्रों की सहायता करते हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.