कक्षा 10 हिंदी स्पर्श: डायरी का एक पन्ना - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की स्पर्श पुस्तक के दूसरे अध्याय, 'डायरी का एक पन्ना' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय 26 जनवरी 1931 के ऐतिहासिक दिन का वर्णन करता है, जब भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था और कोलकाता में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी की जा रही थी। समाधान में उस दिन की तैयारियों, लोगों के उत्साह, पुलिस द्वारा किए गए दमन और स्वतंत्रता सेनानियों के साहस का वर्णन किया गया है। इसमें पुलिस कमिश्नर के नोटिस, कौंसिल के नोटिस, जुलूस का टूटना और घायल लोगों की तस्वीरें खिंचवाने जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को उस दिन के महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में आम लोगों की भागीदारी को गहराई से समझने में मदद करेंगे, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterSparsh ( Gadd ) - Chapter 2: Sitaram Seksariya - Dairy Ka Eak Panna

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी की स्पर्श पुस्तक के अध्याय 'डायरी का एक पन्ना' के ये NCERT समाधान 26 जनवरी 1931 के ऐतिहासिक दिन पर केंद्रित हैं। समाधान में उस दिन कोलकाता में स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों, राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आयोजन, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और स्वतंत्रता सेनानियों के दृढ़ संकल्प का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह छात्रों को उस समय के माहौल, लोगों के उत्साह और स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • 26 जनवरी 1931 के ऐतिहासिक महत्व को समझना।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए विभिन्न आयोजनों और उनकी तैयारियों का विश्लेषण करना।
  • पुलिस और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच हुए टकराव के कारणों और परिणामों को पहचानना।
  • किसी घटना के विभिन्न पहलुओं को डायरी के रूप में प्रस्तुत करने की शैली को समझना।
  • उस समय के सामाजिक और राजनीतिक माहौल का आकलन करना।

Topics covered

Paper topics

  • 26 जनवरी 1931 का ऐतिहासिक महत्व
  • स्वतंत्रता दिवस का आयोजन
  • कोलकाता में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी
  • पुलिस कमिश्नर का नोटिस
  • कौंसिल का नोटिस
  • जुलूस का आयोजन और उसका टूटना
  • पुलिस का दमनकारी रवैया
  • स्वतंत्रता सेनानियों का साहस
  • डॉ. दास गुप्ता की भूमिका
  • जनता की भागीदारी
  • डायरी लेखन की शैली
  • राष्ट्रीय भावना का प्रसार

Important topics

  • 26 जनवरी 1931 की मुख्य घटनाएँ
  • पुलिस और स्वतंत्रता सेनानियों के बीच टकराव
  • जुलूस का टूटना और उसके कारण
  • डॉ. दास गुप्ता द्वारा फोटो खिंचवाने का उद्देश्य
  • उस दिन की 'निराली' बात का विश्लेषण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1:

26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं ?
Solution:

26 जनवरी 1931 के दिन को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियाँ की गईं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया गया और इसके लिए दो हजार रुपए खर्च किए गए। कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को इस महत्वपूर्ण आयोजन के बारे में समझा रहे थे और उन्हें इसमें भाग लेने के लिए प्रेरित कर रहे थे। बड़े बाजार जैसे प्रमुख स्थानों पर लोगों के घरों पर राष्ट्रीय झंडे फहराए जा रहे थे, जो उस दिन के राष्ट्रीय महत्व को दर्शा रहे थे।

प्रश्न 2:

'आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
Solution:

यह कथन कि 'आज जो बात थी वह निराली थी', उस दिन के असाधारण माहौल और लोगों के उत्साह को दर्शाता है। 26 जनवरी 1931 को, सुभाष बाबू के नेतृत्व में होने वाले जुलूस का पूरा भार पूर्णदास पर था। महिलाएँ भी अपना जुलूस निकालने और निर्धारित स्थान पर पहुँचने की पूरी कोशिश कर रही थीं। भोर से ही मोनुमेंट के पास व्यवस्था की जा रही थी, और दोपहर एक बजे तक भी वहाँ वैसी भीड़ नहीं थी जैसी उम्मीद थी। लेकिन दोपहर तीन बजे से ही मैदान में हजारों की संख्या में लोग जमा होने लगे। लोग छोटे-छोटे समूहों (टोलियों) में बँटकर मैदान में घूम रहे थे और आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे थे। लोगों का यह विशाल जमावड़ा और उनका उत्साह ही उस दिन को 'निराला' बना रहा था।

प्रश्न 3:

पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
Solution:

पुलिस कमिश्नर और कौंसिल द्वारा जारी किए गए नोटिसों के उद्देश्य और प्रभाव में स्पष्ट अंतर था। पुलिस कमिश्नर ने एक नोटिस जारी किया था जिसमें कुछ विशेष धाराओं का हवाला देते हुए किसी भी प्रकार की सभा या जुलूस पर रोक लगा दी गई थी। उन्होंने उन लोगों को भी सूचित कर दिया था जो इस आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले थे, कि यदि वे इसमें भाग लेते हैं तो उन्हें दोषी माना जाएगा। इसके विपरीत, कौंसिल के नोटिस का उद्देश्य लोगों को एक निश्चित समय और स्थान पर एकत्रित होने के लिए आमंत्रित करना था। कौंसिल के नोटिस के अनुसार, मोनुमेंट के ठीक नीचे चार बजकर चौंतीस मिनट पर झंडा फहराया जाना था और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जानी थी। इस प्रकार, एक नोटिस दमनकारी था, जबकि दूसरा लोगों को संगठित करने और स्वतंत्रता की भावना को जागृत करने वाला था।

प्रश्न 4:

धर्म तल्ले की मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
Solution:

धर्म तल्ले की मोड़ पर जुलूस इसलिए टूट गया क्योंकि वहाँ पहले से ही काफी भीड़ जमा थी और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इस लाठीचार्ज के कारण कई लोग घायल हो गए, जिससे लोगों की संख्या में कमी आ गई। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने वहाँ बैठी लगभग 50-60 महिलाओं को पकड़कर लाल बाज़ार भेज दिया। इन दोनों घटनाओं के सम्मिलित प्रभाव के कारण, जो लोग जुलूस में शामिल थे, वे तितर-बितर हो गए और जुलूस अपने निर्धारित मार्ग पर आगे नहीं बढ़ सका, जिससे वह धर्म तल्ले की मोड़ पर आकर टूट गया।

प्रश्न 5:

डॉ. दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देखरेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहें थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
Solution:

डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायल लोगों के फोटो खिंचवाने के पीछे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक कारण था। उस समय सरकार अक्सर अपने दमनकारी कार्यों को छिपाने के लिए घटनाओं को कम करके बताती थी और घायलों की संख्या को भी कम करके आँकती थी। डॉ. दास गुप्ता इन तस्वीरों के माध्यम से सरकार की इस दोहरी नीति और जनता पर हो रहे अत्याचार को उजागर करना चाहते थे। इन तस्वीरों से यह प्रमाण मिलता कि सरकार जनता पर कितना जुल्म कर रही थी और कितने लोग इस संघर्ष में घायल हुए थे। इस प्रकार, वे जनता की भागीदारी और सरकार के दमन चक्र को दुनिया के सामने लाना चाहते थे।

Common mistakes

  • घटनाओं के क्रम को समझने में गलती करना।
  • पुलिस की कार्रवाई के पीछे के कारणों को ठीक से न समझ पाना।
  • विभिन्न नोटिसों के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।
  • लेखक के दृष्टिकोण और भावनाओं को समझने में चूक करना।

Revision tips

  • 26 जनवरी 1931 की मुख्य घटनाओं की सूची बनाएँ।
  • पुलिस की कार्रवाई और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिक्रिया के बीच संबंध स्थापित करें।
  • पाठ में वर्णित विभिन्न पात्रों (जैसे सुभाष बाबू, पूर्णदास, डॉ. दास गुप्ता) की भूमिका को समझें।
  • डायरी शैली के महत्व और उसके प्रभाव पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में क्या विशेष आयोजन किया जा रहा था?

Q2. पुलिस कमिश्नर के नोटिस का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q3. धर्मतल्ले की मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

Q4. डॉ. दास गुप्ता घायल लोगों के फोटो क्यों उतरवा रहे थे?

Q5. पाठ के अनुसार, 26 जनवरी 1931 को कौन सी बात 'निराली' थी?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय के लिए है, जो स्पर्श पुस्तक के अध्याय 'डायरी का एक पन्ना' पर आधारित है।

'डायरी का एक पन्ना' अध्याय किस ऐतिहासिक घटना से संबंधित है?

यह अध्याय 26 जनवरी 1931 को कोलकाता में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस और उस दिन हुई घटनाओं से संबंधित है।

समाधान में किन मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है?

समाधान में उस दिन की तैयारियों, पुलिस की कार्रवाई, जुलूस के टूटने, घायल लोगों की स्थिति और स्वतंत्रता सेनानियों के जज्बे जैसे मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया है।

डॉ. दास गुप्ता द्वारा फोटो खिंचवाने का क्या महत्व था?

डॉ. दास गुप्ता फोटो इसलिए खिंचवा रहे थे ताकि सरकार द्वारा फैलाई जाने वाली गलत सूचनाओं का खंडन किया जा सके और जनता की भागीदारी व सरकार के दमनकारी रवैये को उजागर किया जा सके।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

यह समाधान छात्रों को अध्याय की गहराई से समझ विकसित करने, परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखने और उत्तर लिखने का तरीका सीखने में मदद करता है।

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