CBSE Class 10 Hindi Sparsh Chapter 7: Patjhar Ki Tooti Pattiyan - NCERT Solutions
This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 7, 'Patjhar Ki Tooti Pattiyan' from the Sparsh textbook for Class 10 Hindi. The chapter, authored by Ravindra Kelekar, explores the interplay between pure ideals and practical realities, using analogies like gold and copper. It delves into the Japanese 'Tea Ceremony' and its emphasis on peace and mindfulness, contrasting it with the hurried pace of modern life. The solutions also examine leadership qualities, using Mahatma Gandhi as an example of a 'practical idealist' who balanced high principles with grounded actions. Students will find explanations on timeless values and how they remain relevant today. These solutions are designed to help students understand the nuances of the chapter, clarify doubts, and prepare effectively for their Hindi examinations by offering clear, step-by-step answers to all exercise questions.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Sparsh ( Gadd ) - Chapter 7: Ravindra Kelekar - Patjhar Ki Tooti Pattiyan |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Sparsh) Chapter 7, 'Patjhar Ki Tooti Pattiyan' by Ravindra Kelekar, focuses on the philosophical discussion of ideals versus practicality. It explains the symbolism of gold and copper in representing pure ideals and practical compromises, respectively. The chapter also touches upon the serene Japanese Tea Ceremony and its principles. The solutions address questions related to leadership, timeless values, and personal experiences, helping students grasp the chapter's core themes and prepare for exams.
Learning outcomes
- Understand the symbolism of gold and copper in representing ideals and practicality.
- Analyze the principles and significance of the Japanese Tea Ceremony.
- Evaluate leadership qualities through the example of Mahatma Gandhi.
- Identify and discuss the relevance of timeless values in contemporary society.
- Reflect on personal experiences related to ideals and practicality.
Topics covered
Paper topics
- Ideals vs. Practicality
- Symbolism of Gold and Copper
- Japanese Tea Ceremony
- Mindfulness and Present Moment
- Leadership Qualities
- Mahatma Gandhi as a Practical Idealist
- Timeless Values
- Relevance of Values in Modern Times
- Personal Reflection on Ideals
Important topics
- Ideals vs. Practicality (Gold and Copper Analogy)
- Mahatma Gandhi's Practical Idealism
- Timeless Values and their Relevance
- The Essence of the Tea Ceremony
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Questions and Solutions
प्रश्न 1 (खंड – क)
शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से इसलिए की गई है क्योंकि सोना अपनी शुद्धता और चमक कभी नहीं खोता, ठीक उसी तरह जैसे शुद्ध आदर्शवादी व्यक्ति अपने सिद्धांतों और आदर्शों पर हमेशा अडिग रहता है और उनसे समझौता नहीं करता। दूसरी ओर, व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से की गई है। ताँबा सोने की तुलना में कम मूल्यवान होता है और उसमें आसानी से मिलावट की जा सकती है। इसी प्रकार, व्यावहारिक व्यक्ति अक्सर अपने आदर्शों में थोड़ी मिलावट करके या उन्हें थोड़ा कम करके परिस्थितियों के अनुसार ढल जाता है, जिससे वह समाज में आसानी से घुलमिल जाता है। यह तुलना दर्शाती है कि जहाँ आदर्श शुद्धता का प्रतीक हैं, वहीं व्यावहारिकता अनुकूलन और समझौते का प्रतिनिधित्व करती है।
प्रश्न 2 (खंड – क)
चाजीन ने चाय बनाने की प्रक्रिया में कई क्रियाएँ कीं, जिन्हें उसने अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से पूरा किया। इन क्रियाओं में शामिल थे:
- लेखक का 'आइए, तशरीफ लाइए' कहकर स्वागत करना।
- लेखक को बैठने के लिए जगह दिखाना।
- अँगीठी सुलगाना।
- अँगीठी पर चायदानी रखना।
- बगल के कमरे से चाय बनाने के लिए आवश्यक बरतन लाना।
- तौलिए से बरतन साफ करना।
इन सभी सामान्य लगने वाले कार्यों को चाजीन ने इतनी शालीनता, सलीके और ध्यान से किया कि लेखक मंत्रमुग्ध होकर देखता रह गया। उसकी हर क्रिया में एक विशेष लय और सम्मान का भाव था।
प्रश्न 3 (खंड – क)
जापानी 'टी-सेरेमनी' (चाय समारोह) में बहुत कम लोगों को, अधिकतम तीन व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाता था। इसका मुख्य कारण यह था कि इस समारोह का उद्देश्य शांति और एकाग्रता बनाए रखना होता है। अधिक लोगों की उपस्थिति से शोरगुल बढ़ सकता है और वह शांत, ध्यानपूर्ण वातावरण भंग हो सकता है जो टी-सेरेमनी के लिए आवश्यक है। इसलिए, कम संख्या में लोगों को आमंत्रित किया जाता है ताकि वे पूरी प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर सकें और शांति का अनुभव कर सकें।
प्रश्न 4 (खंड – क)
चाय पीने के बाद लेखक ने अपने अंदर एक गहरा परिवर्तन महसूस किया। उन्होंने पाया कि उस दिन उनके दिमाग से भूतकाल की चिंताएँ और भविष्य की योजनाएँ, यानी दोनों कालों का बोझ पूरी तरह से हट गया था। वे केवल वर्तमान क्षण में पूरी तरह से उपस्थित थे। यह वर्तमान क्षण उन्हें अनंतकाल जितना विस्तृत और गहरा लगने लगा। इस अनुभव ने उन्हें सिखाया कि जीवन को वास्तव में कैसे जिया जाता है, यानी वर्तमान में पूरी तरह से डूबकर जीना ही सच्चा जीवन है।
प्रश्न 1 (खंड – ख)
गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी, जिसका एक प्रमुख कारण यह था कि वे अपने आदर्शों को कभी भी व्यावहारिकता के स्तर पर गिरने नहीं देते थे, बल्कि वे व्यावहारिकता को ही अपने आदर्शों के स्तर तक उठा देते थे। इसका अर्थ है कि वे केवल बातें नहीं करते थे, बल्कि अपने कार्यों से अपने सिद्धांतों को सिद्ध करते थे। लोग उनके भक्त इसलिए थे क्योंकि वे कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं रखते थे। वे जो कहते थे, वही करते थे। इस प्रकार, उन्होंने अपने उच्च आदर्शों को व्यावहारिक जीवन में उतारकर लोगों के सामने एक मिसाल पेश की, जिससे उनमें स्वाभाविक रूप से नेतृत्व की अद्भुत क्षमता विकसित हुई।
प्रश्न 2 (खंड – ख)
मेरे विचार से निम्नलिखित मूल्य शाश्वत हैं, जो समय और परिस्थिति के बंधन से परे हैं:
- सत्य का आचरण: हमेशा सच बोलना और सच्चाई के रास्ते पर चलना।
- अहिंसा: किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना।
- परोपकार: दूसरों की भलाई के लिए कार्य करना।
- ईमानदारी: अपने कर्तव्यों और वादों के प्रति सच्चा रहना।
- करुणा: दूसरों के दुख को समझना और सहानुभूति रखना।
वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के भौतिकवादी और प्रतिस्पर्धी युग में, जहाँ लोग अक्सर स्वार्थ और धोखे का सहारा लेते हैं, ये शाश्वत मूल्य समाज को नैतिक आधार प्रदान करते हैं। सत्य और ईमानदारी हमें सही दिशा दिखाते हैं, परोपकार और करुणा हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं और सामाजिक सद्भाव बढ़ाते हैं। अहिंसा हमें शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सिखाती है। इन्हीं मूल्यों के बल पर आज भी धर्म, ईमान और मानवता हमारे समाज में जीवित हैं और हमें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देते हैं।
प्रश्न 3 (खंड – ख)
समाज में अक्सर लोग आदर्शों की बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं, लेकिन जब उन्हें व्यवहार में लाने का समय आता है, तो वे पीछे हट जाते हैं। मेरे जीवन की एक ऐसी ही घटना है जब मैंने शुद्ध आदर्शों पर चलने का प्रयास किया और मुझे उसका अनुभव हुआ।
एक बार की बात है, मैं बैंक में नोट बदलवाने के लिए एक लंबी कतार में खड़ा था। तभी एक सज्जन आए और बिना लाइन में लगे सीधे अंदर चले गए। मैंने और कतार में खड़े अन्य लोगों ने इसका विरोध किया। उस समय, एक व्यक्ति जो पहले आदर्शों की बातें कर रहा था, वह भी थोड़ी देर बाद किसी जुगाड़ या पहचान का उपयोग करके लाइन तोड़कर अंदर चला गया। इस घटना ने मुझे सिखाया कि कभी-कभी शुद्ध आदर्शों पर चलना अव्यावहारिक हो सकता है और इससे हमें नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि दूसरे लोग व्यावहारिकता का लाभ उठा लेते हैं।
इस अनुभव से मैंने सीखा कि जहाँ आदर्श महत्वपूर्ण हैं, वहीं जीवन की वास्तविकताओं और व्यावहारिकता को समझना भी आवश्यक है। कभी-कभी, अपने आदर्शों को बनाए रखते हुए भी, परिस्थितियों के अनुसार थोड़ा लचीलापन अपनाना या व्यावहारिकता का पुट देना आवश्यक हो जाता है, ताकि हम केवल पीछे न रह जाएँ और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
प्रश्न 4 (खंड – ख)
यह कहावत कि 'शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट' या 'ताँबे में सोना', गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में इस प्रकार झलकती है कि गांधीजी को एक 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' (व्यावहारिक आदर्शवादी) माना जाता था। इसका अर्थ यह है कि वे केवल ऊँचे आदर्शों की बात नहीं करते थे, बल्कि वे व्यावहारिकता को भी समझते थे और उसकी कीमत जानते थे।
जब 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन में व्यावहारिकता का महत्व बढ़ने लगता है, तो कभी-कभी उनके शुद्ध आदर्श पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझबूझ ही प्रमुख हो जाती है। यह स्थिति 'शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट' जैसी है, जहाँ आदर्श रूपी सोना अपनी शुद्धता खोने लगता है और व्यावहारिकता रूपी ताँबा हावी होने लगता है।
गांधीजी के संदर्भ में, इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने अपने आदर्श छोड़े, बल्कि यह कि उन्होंने अपने विलक्षण आदर्शों को लोगों तक पहुँचाने और उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए तत्कालीन समाज की व्यावहारिकता को समझा और उसका उपयोग किया। वे जानते थे कि केवल आदर्शों की बात करने से समाज नहीं बदलता, बल्कि उन्हें जमीनी हकीकत से जोड़ना पड़ता है। इसलिए, वे अपने आदर्शों को व्यावहारिक बनाते थे, न कि अपने आदर्शों में व्यावहारिकता की मिलावट करते थे।
Common mistakes
- Confusing the analogy of gold and copper, misinterpreting the balance between ideals and practicality.
- Failing to connect the principles of the Tea Ceremony to the broader theme of mindfulness and peace.
- Providing superficial answers regarding timeless values without explaining their contemporary relevance.
- Struggling to articulate personal experiences that illustrate the conflict or harmony between ideals and practical actions.
Revision tips
- Focus on the core analogy of gold and copper to understand the chapter's central theme.
- Note down the key characteristics of the Japanese Tea Ceremony and its underlying philosophy.
- Analyze the examples provided for Mahatma Gandhi's leadership to understand 'practical idealism'.
- Reflect on the timeless values discussed and consider their application in your own life.
- Practice answering the questions by relating them to real-life situations or examples.
Practice MCQs
Q1. शुद्ध आदर्श की तुलना किससे की गई है?
Explanation: पाठ के अनुसार, शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से की गई है क्योंकि सोना अपनी चमक नहीं खोता, ठीक वैसे ही आदर्शवादी अपने आदर्शों पर अडिग रहते हैं।
Q2. जापानी 'टी-सेरेमनी' में कितने लोगों को प्रवेश दिया जाता था?
Explanation: टी-सेरेमनी में शांति बनाए रखने के लिए अधिकतम तीन लोगों को ही प्रवेश दिया जाता था, क्योंकि इसमें शांति मुख्य होती है।
Q3. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
Explanation: लेखक ने महसूस किया कि चाय पीने के बाद उनके मन से भूत और भविष्य के विचार समाप्त हो गए और वे केवल वर्तमान क्षण में जीने लगे, जिसे उन्होंने अनंतकाल जैसा विस्तृत पाया।
Q4. गांधीजी को किस प्रकार का आदर्शवादी कहा गया है?
Explanation: गांधीजी को 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' यानी व्यावहारिक आदर्शवादी कहा गया है, क्योंकि वे व्यावहारिकता को समझते थे और अपने आदर्शों को उसके स्तर पर ले आते थे।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा मूल्य शाश्वत माना गया है?
Explanation: पाठ के अनुसार, सत्य का आचरण, परोपकार और दूसरों के सुख-दुख में भागीदार होना जैसे मूल्य शाश्वत हैं जो आज भी समाज को टिकाए हुए हैं।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय के स्पर्श पुस्तक के अध्याय 7: 'पतझर की टूटी पत्तियाँ' के लिए हैं।
अध्याय 'पतझर की टूटी पत्तियाँ' का मुख्य विषय क्या है?
इस अध्याय का मुख्य विषय शुद्ध आदर्शों और व्यावहारिकता के बीच का संबंध है, जिसे सोने और तांबे के उदाहरण से समझाया गया है।
जापानी टी-सेरेमनी का क्या महत्व बताया गया है?
टी-सेरेमनी में शांति, एकाग्रता और वर्तमान क्षण में जीने के महत्व पर जोर दिया गया है, जहाँ केवल तीन लोगों को ही प्रवेश मिलता है।
गांधीजी के नेतृत्व क्षमता को कैसे समझाया गया है?
गांधीजी को एक 'व्यावहारिक आदर्शवादी' के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने व्यावहारिकता को समझते हुए भी अपने आदर्शों को बनाए रखा।
क्या इन समाधानों से परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी?
हाँ, ये समाधान अध्याय के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय को गहराई से समझने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।
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