कक्षा 10 हिंदी NCERT सॉल्यूशंस: एक कहानी यह भी

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 'एक कहानी यह भी' के लिए विस्तृत NCERT सॉल्यूशंस प्रदान करता है। इसमें लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के अनुभवों, उनके व्यक्तित्व पर विभिन्न व्यक्तियों के प्रभाव, विशेषकर उनके पिता और हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल के योगदान पर प्रकाश डाला गया है। समाधान स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लेखिका की सक्रिय भूमिका, समाज में महिलाओं की स्थिति, और 'पड़ोस कल्चर' जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा करते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने और अपने उत्तरों को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter14 एक कहानी यह भी

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी के 'एक कहानी यह भी' पाठ के ये NCERT सॉल्यूशंस लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के आत्मकथात्मक अंशों पर केंद्रित हैं। इनमें उनके पिता और शीला अग्रवाल जैसे व्यक्तियों के प्रभाव, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी, और तत्कालीन सामाजिक परिदृश्य का विश्लेषण किया गया है। समाधान पाठ के मुख्य प्रश्नों के उत्तर विस्तार से देते हैं, जिसमें वैचारिक मतभेद, रसोईघर का प्रतीकात्मक अर्थ और बदलती सामाजिक परिस्थितियाँ शामिल हैं।

Learning outcomes

  • लेखिका के व्यक्तित्व पर विभिन्न व्यक्तियों के प्रभाव को समझना।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • रसोईघर के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना।
  • पिता और लेखिका के बीच वैचारिक मतभेदों के कारणों की पहचान करना।
  • बदलते सामाजिक परिदृश्य और 'पड़ोस कल्चर' पर अपने विचार व्यक्त करना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखिका के व्यक्तित्व पर प्रभाव
  • पिताजी का प्रभाव
  • शीला अग्रवाल का प्रभाव
  • रसोईघर का प्रतीकात्मक अर्थ
  • वैचारिक मतभेद
  • स्वतंत्रता आंदोलन का परिदृश्य
  • महिलाओं की भूमिका
  • बचपन के खेल
  • लड़कियों की स्वतंत्रता
  • पड़ोस कल्चर
  • शहरी जीवन
  • साहित्यिक पुस्तकें

Important topics

  • लेखिका के व्यक्तित्व पर विभिन्न व्यक्तियों का प्रभाव
  • पिताजी और लेखिका के बीच वैचारिक मतभेद
  • स्वतंत्रता आंदोलन में लेखिका की भूमिका
  • रसोईघर का प्रतीकात्मक अर्थ
  • बदलती सामाजिक परिस्थितियाँ और लड़कियों की स्वतंत्रता
  • पड़ोस कल्चर का महत्व

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?

अथवा

'एक कहानी यह भी' पाठ की लेखिका के व्यक्तित्व को किन-किन व्यक्तियों ने किस रूप में प्रभावित किया?
Solution:

लेखिका मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व निर्माण में मुख्य रूप से दो व्यक्तियों का गहरा प्रभाव पड़ा:

  1. पिताजी का प्रभाव: लेखिका के पिता ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ने और बिगाड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लेखिका के मन में हीनता की भावना उत्पन्न की, उसे शक्की और विद्रोही बनाया। साथ ही, उन्होंने ही उसे देश और समाज के प्रति जागरूक किया और सामान्य गृहस्थी की दुनिया से निकालकर एक प्रबुद्ध व्यक्तित्व की ओर अग्रसर किया। पिता की प्रेरणा से ही लेखिका में देश के प्रति जागरूकता आई।
  2. शीला अग्रवाल का प्रभाव: लेखिका की हिंदी प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने उन्हें एक क्रियाशील, क्रांतिकारी और आंदोलनकारी व्यक्तित्व बनाने में योगदान दिया। शीला अग्रवाल ने अपने जोशीले भाषणों और विचारों से लेखिका के मन में दबे संस्कारों को कार्यरूप में बदलने की प्रेरणा दी। जहाँ पिता उसे घर की चारदीवारी तक सीमित रखना चाहते थे, वहीं शीला अग्रवाल ने उसे समाज में खुलकर विद्रोह करने और जन-जीवन में सक्रिय होने का साहस दिया।

प्रश्न 2

इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भिटयारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?
Solution:

'भटियारखाना' शब्द के दो अर्थ हो सकते हैं: पहला, वह स्थान जहाँ लगातार भट्ठी जलती रहती है, यानी चूल्हा-चौका। दूसरा, वह स्थान जहाँ बहुत शोर-गुल रहता है या जहाँ कभीने और असभ्य लोगों का जमघट होता है।

इस पाठ के संदर्भ में, पिता ने 'भटियारखाना' शब्द का प्रयोग पहले अर्थ में किया है। उनका आशय यह था कि रसोईघर केवल खाना पकाने और घर-गृहस्थी तक सीमित रहने का स्थान है। पिताजी अपनी बेटी को केवल इस चारदीवारी में सीमित नहीं रखना चाहते थे; वे उसे एक जागरूक और सक्रिय नागरिक बनाना चाहते थे। इसलिए, उन्होंने रसोईघर को 'प्रतिभा को नष्ट करने वाला स्थान' कहकर संबोधित किया, ताकि लेखिका का ध्यान इससे हटकर व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित हो सके।

प्रश्न 3

वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?
Solution:

वह घटना तब हुई जब लेखिका के कॉलेज की प्रिंसिपल ने उसके आंदोलनकारी व्यवहार से तंग आकर उसके पिता को कॉलेज बुलाया। लेखिका के पिता, जो पहले से ही उसकी विद्रोही प्रवृत्ति से परेशान थे, यह सोचकर कॉलेज गए कि शायद उनकी बेटी ने कोई ऐसा काम किया है जिससे उन्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा।

कॉलेज पहुँचने पर, पिता को पता चला कि उनकी बेटी केवल विद्रोही ही नहीं, बल्कि सभी लड़कियों की प्रिय नेता है और पूरा कॉलेज उसके इशारों पर चलता है। लड़कियाँ प्रिंसिपल की बात भी नहीं मानतीं, केवल लेखिका के कहने पर चलती हैं, जिससे प्रिंसिपल के लिए कॉलेज चलाना मुश्किल हो गया है। यह सुनकर पिता का सीना गर्व से फूल उठा और उन्होंने प्रिंसिपल को जवाब दिया कि ये आंदोलन तो समय की पुकार हैं और इन्हें रोका नहीं जा सकता। लेखिका ने जब यह सुना कि उसके पिता उसकी प्रशंसा कर रहे हैं और उसके कार्यों का समर्थन कर रहे हैं, तो उसे अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उसे तो यही उम्मीद थी कि पिता उसे डांटेंगे, घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा देंगे, लेकिन इसके विपरीत हुई प्रशंसा उसके लिए अविश्वसनीय थी।

प्रश्न 4

लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।

अथवा

लेखिका के पिता और लेखिका के बीच मतभेदों के असली कारण क्या थे? - 'एक कहानी यह भी' पाठ के आधार पर लिखिए।
Solution:

लेखिका मन्नू भंडारी और उनके पिता के बीच विचारों का टकराव कई स्तरों पर था। पिताजी चाहते थे कि लेखिका देश और समाज के प्रति जागरूक बने, लेकिन वे उसे केवल घर की चारदीवारी तक ही सीमित रखना चाहते थे। वे उसके मन में विद्रोह और जागरण के स्वर भरना चाहते थे, पर उसे सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति नहीं देना चाहते थे। इसके विपरीत, लेखिका अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और देश की स्वतंत्रता के लिए सक्रिय रूप से भाग लेने की इच्छा रखती थी। यहीं पर दोनों के विचारों में टकराव होता था।

इसके अतिरिक्त, विवाह के मामले में भी उनके विचार भिन्न थे। पिताजी नहीं चाहते थे कि लेखिका अपनी पसंद के अनुसार राजेंद्र यादव से विवाह करे, लेकिन लेखिका ने अपने पिता की इच्छा की परवाह न करते हुए अपनी मर्जी से निर्णय लिया। इस प्रकार, लेखिका की स्वतंत्रता की चाह और पिता की नियंत्रणकारी प्रवृत्ति के कारण उनके बीच वैचारिक मतभेद बने रहे।

प्रश्न 5

इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
Solution:

यह आत्मकथ्य 1942 से 1947 के स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर का चित्रण करता है जब पूरे देश में देशभक्ति का ज्वार अपने चरम पर था। इस समय हर शहर में हड़तालें, प्रभात-फेरियाँ, जलसे और जुलूस निकाले जा रहे थे। युवक-युवतियाँ सड़कों पर नारे लगा रहे थे और पारंपरिक मर्यादाएँ टूट रही थीं। घर, स्कूल और कॉलेज के नियम-कायदे भी आंदोलन की लहर में बह रहे थे। लड़कियाँ भी लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

ऐसे माहौल में, लेखिका मन्नू भंडारी ने भी अपूर्व उत्साह दिखाया। उन्होंने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध सड़कों पर घूम-घूमकर नारेबाजी की, भाषण दिए, हड़तालें कीं और जलूसों में भाग लिया। उनके नेतृत्व और प्रेरणा से पूरा कॉलेज कक्षाएँ छोड़कर आंदोलन में शामिल हो जाता था। इस प्रकार, मन्नू भंडारी उस समय की एक सक्रिय स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उभरीं, जिन्होंने अपने कार्यों से तत्कालीन स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रश्न 6

लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
Solution:

आज लड़कियों के लिए स्थितियाँ काफी हद तक बदल गई हैं, हालाँकि कुछ चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं।

बदलाव:

  • खेलों का स्वरूप: महानगरों में गिल्ली-डंडा और पतंग उड़ाने जैसे पारंपरिक खेल अब कम खेले जाते हैं। बच्चों का ध्यान टीवी और कंप्यूटर की ओर अधिक आकर्षित हुआ है। छोटे शहरों में जहाँ ये खेल अभी भी प्रचलित हैं, वहाँ भी मोहल्लेदारी का भाव कम हो गया है।
  • सामाजिक दृष्टिकोण: पहले संयुक्त परिवार होते थे और खुले आँगन या छतें होती थीं, जिससे बच्चे आसानी से एक-दूसरे के घर आ-जा सकते थे। अब एकल परिवारों का चलन बढ़ा है और लोग अपने निजी स्थान को लेकर अधिक सजग हैं। पड़ोसी बच्चों को अपने घर में खेलने देना या उनके द्वारा होने वाले नुकसान को सहना अब सामान्य नहीं रहा।
  • सुरक्षा चिंताएँ: टीवी संस्कृति ने नर-नारी संबंधों को जिस तरह से प्रस्तुत किया है, उससे माता-पिता अपनी लड़कियों की सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित रहते हैं। वे उन्हें अकेला बाहर जाने या खेलने की अनुमति देने में हिचकिचाते हैं।

निष्कर्ष: कुल मिलाकर, लड़कियों की स्वतंत्रता बढ़ी है, लेकिन सुरक्षा संबंधी चिंताओं और बदलती जीवनशैली के कारण उनके खेलने और घूमने का दायरा कुछ हद तक सीमित भी हुआ है। पहले की तुलना में आज की लड़कियाँ अधिक शिक्षित और जागरूक हैं, लेकिन उनके खेलने के तरीके और स्थान बदल गए हैं।

प्रश्न 7

मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्त्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्राय: 'पड़ोस कल्चर' से विंचत रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।

अथवा

मन्नू भंडारी ने यह क्यों कहा है कि अपनी ज़िंदगी खुद जीने के कल्चर ने हमें 'पड़ोस कल्चर' से विच्छिन कर दिया है।
Solution:

यह कथन बिल्कुल सत्य है कि महानगरों में रहने वाले लोग 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। आस-पड़ोस मनुष्य के जीवन की एक वास्तविक शक्ति होती है, जो मुश्किल समय में सबसे पहले काम आता है। परंतु आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह संबंध लगभग समाप्त हो गया है।

इसके कई कारण हैं:

  • व्यस्त जीवनशैली: आज के समय में नर और नारी दोनों ही कमाने में व्यस्त रहते हैं। उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे अपने निजी काम निपटा सकें, छुट्टी का दिन भी घर के कामों में ही बीत जाता है। ऐसे में पड़ोसियों से मिलने-जुलने का समय कहाँ से मिले?
  • व्यक्तिवाद का बढ़ना: 'अपनी ज़िंदगी खुद जीने के कल्चर' ने लोगों को अत्यधिक व्यक्तिगत बना दिया है। बच्चे भी जन्म से ही करियर की दौड़ में शामिल हो जाते हैं और उन्हें अपने अलावा किसी और की खबर नहीं रहती।
  • शहरी जीवन की प्रकृति: शहरी जीवन में लोग अपने घरों में सिमट कर रह गए हैं। एक-दूसरे के प्रति उदारता, विशालता, हँसी-ठिठोली और उल्लास जैसे भाव कम हो गए हैं।

इन सब कारणों से मनुष्य अकेला, उदास और बेचारा हो गया है, और वह पड़ोस जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक ताने-बाने से कट गया है।

प्रश्न 8

लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।
Solution:

लेखिका मन्नू भंडारी द्वारा पढ़े गए उपन्यासों में से पाठ में दो उपन्यासों का उल्लेख किया गया है:

  1. महाभोज
  2. आपका बंटी

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे इन उपन्यासों को अपने विद्यालय या स्थानीय पुस्तकालय में खोजें और उन्हें पढ़ने का प्रयास करें ताकि वे लेखिका की साहित्यिक दुनिया को और गहराई से समझ सकें।

प्रश्न 9

आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।
Solution:

यह एक व्यक्तिगत गतिविधि है जिसे छात्रों को स्वयं करना चाहिए। अपनी डायरी में दैनिक अनुभवों को लिखना एक अच्छी आदत है जो विचारों को व्यवस्थित करने, यादों को सहेजने और लेखन कौशल को बेहतर बनाने में मदद करती है। छात्र अपने दिन की महत्वपूर्ण घटनाओं, अपनी भावनाओं, सीखों और विचारों को इसमें दर्ज कर सकते हैं।

प्रश्न 10

इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ:
  • (क) इस बीच पिता जी के एक निहायत दिकयानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिता जी की लू उतारी।
  • (ख) वे तो <u>आग लगाकर</u> चले गए और पिता जी सारे दिन भभकते रहे।
  • (ग) बस अब यही रह गया है कि लोग घर आकर थू-थू करके चले जाएँ।
  • (घ) पत्र पढ्ते ही पिता जी आग-बबूला।
Solution:

यहाँ दिए गए मुहावरों का प्रयोग करके कुछ अन्य वाक्य बनाए गए हैं:

  • (क) लू उतारना: किसी की खूब डाँट-फटकार करना या उसकी भड़ास निकालना।

    उदाहरण: जब रमेश ने परीक्षा में फेल होने की खबर दी, तो उसके पिता ने उसकी खूब लू उतारी।

  • (ख) आग लगाना: झगड़ा या फसाद खड़ा करना या भड़काना।

    उदाहरण: उसने तो बस बातों-बातों में आग लगा दी और खुद चुपचाप निकल गया, बाकी सब आपस में लड़ते रहे।

  • (ग) थू-थू करना: किसी की निंदा करना, तिरस्कार करना या अपमानित करना।

    उदाहरण: जब सच्चाई सामने आई कि उसने चोरी की है, तो पूरे मोहल्ले ने उस पर थू-थू की।

  • (घ) आग-बबूला होना: बहुत अधिक क्रोधित होना।

    उदाहरण: अपने कीमती सामान के खो जाने की खबर सुनकर वह गुस्से से आग-बबूला हो गया।

Common mistakes

  • लेखिका के पिता के विचारों को पूरी तरह से नकारात्मक समझना।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में लेखिका की भूमिका को केवल व्यक्तिगत अनुभव मानना।
  • 'भटियारखाना' शब्द के प्रतीकात्मक अर्थ को न समझ पाना।
  • बदलती सामाजिक परिस्थितियों का सही आकलन न कर पाना।

Revision tips

  • लेखिका के पिता और शीला अग्रवाल के प्रभाव वाले अंशों को ध्यान से पढ़ें।
  • स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित लेखिका की भूमिका पर विशेष ध्यान दें।
  • 'भटियारखाना' और 'पड़ोस कल्चर' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ और संदर्भ को समझें।
  • सभी प्रश्नों के उत्तरों को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका के व्यक्तित्व को किन दो मुख्य व्यक्तियों ने प्रभावित किया?

Q2. लेखिका के पिता ने रसोईघर को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया?

Q3. लेखिका को किस घटना के बारे में सुनकर अपनी आँखों और कानों पर विश्वास नहीं हुआ?

Q4. लेखिका और उसके पिता के बीच वैचारिक मतभेद का मुख्य कारण क्या था?

Q5. लेखिका ने स्वतंत्रता आंदोलन में किस प्रकार भाग लिया?

Frequently asked questions

यह पाठ 'एक कहानी यह भी' किस कक्षा के लिए है?

यह पाठ CBSE बोर्ड की कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक का हिस्सा है।

इस पाठ के मुख्य विषय क्या हैं?

इस पाठ के मुख्य विषय लेखिका मन्नू भंडारी के जीवन के अनुभव, उनके व्यक्तित्व पर विभिन्न व्यक्तियों का प्रभाव, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी और तत्कालीन सामाजिक परिदृश्य हैं।

लेखिका के पिता ने रसोईघर को 'भटियारखाना' क्यों कहा?

लेखिका के पिता रसोईघर को प्रतिभा को नष्ट करने वाला स्थान मानते थे क्योंकि वे चाहते थे कि लेखिका केवल घर-गृहस्थी तक सीमित न रहे, बल्कि देश-समाज के प्रति जागरूक बने।

स्वतंत्रता आंदोलन में लेखिका की क्या भूमिका थी?

लेखिका ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें सड़कों पर नारे लगाना, भाषण देना और हड़तालें करना शामिल था। उसके नेतृत्व में कॉलेज की लड़कियाँ भी आंदोलन में शामिल होती थीं।

क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ वैसी ही हैं जैसी लेखिका के बचपन में थीं?

पाठ के अनुसार, आज परिस्थितियाँ बदल गई हैं। हालाँकि कुछ मायनों में स्वतंत्रता बढ़ी है, लेकिन टीवी संस्कृति और सुरक्षा चिंताओं के कारण माता-पिता लड़कियों को लेकर अधिक सजग हो गए हैं, जिससे उनकी स्वतंत्रता कुछ हद तक सीमित भी हुई है।

महानगरों में 'पड़ोस कल्चर' क्यों समाप्त हो गया है?

महानगरों में लोग व्यस्त जीवनशैली, करियर की दौड़ और व्यक्तिगत जीवन में अधिक सिमट जाने के कारण पड़ोसियों से मेलजोल कम कर पाते हैं, जिससे 'पड़ोस कल्चर' समाप्त हो गया है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.