कक्षा 12 शस्य विज्ञान (कृषि भाग-2) सिलेबस सत्र 2026-27

UP Board Class 12 कृषि Syllabus 2026-27

UP Board कक्षा 12 कृषि वर्ग के छात्रों के लिए, शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शस्य विज्ञान (षष्टम् प्रश्न-पत्र) पाठ्यक्रम यहाँ उपलब्ध है। यह विस्तृत पाठ्यक्रम इकाई-वार विषयों को स्पष्ट करता है, जिसमें सिंचाई, जल निकास, और शाक एवं फल संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण खंड शामिल हैं। छात्र फसलों की विभिन्न प्रजातियों, उनकी खेती की उन्नत विधियों, प्रभावी रोग एवं कीट प्रबंधन तकनीकों, और बीज उत्पादन की बारीकियों को समझेंगे। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ प्रयोगात्मक विषयों पर भी जोर दिया गया है। प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए अंक विभाजन और मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की गई है, जो छात्रों को परीक्षा की तैयारी को सुव्यवस्थित करने में मदद करेगी। यह सुनिश्चित करते हुए कि वे सभी आवश्यक क्षेत्रों को कवर करें।

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BoardUP Board
Class12
Subjectशस्य विज्ञान
Session2026-27
Mediumहिन्दी
LanguageHindi
Streamकृषि
PDF typeSyllabus
Duration03 Hours
Total marks50
Passing marks16
Last updated2026-08-10

प्रयोगात्मक परीक्षा में बाह्य परीक्षक द्वारा 25 अंक (बीज शैय्या निर्माण, मौखिकी, आंकिक प्रश्न) और आंतरिक परीक्षक द्वारा 25 अंक (बीज, खर-पतवार, खाद, फसलों की पहचान, अभ्यास पुस्तिका, प्रोजेक्ट) का मूल्यांकन किया जाएगा।

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शैक्षिक सत्र-2026-27 (घ) कृषि वर्ग

कक्षा−12

भाग-1

(प्रथम वर्ष)

हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी-

हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय के पाठ्यक्रम व पुस्तकों की स्थिति वही रहेगी जो इस विवरण-पत्रिका में अनिवार्य विषय के अन्तर्गत ‘‘मानविकी वर्ग’’ के लिये निर्धारित है। परन्तु हिन्दी अथवा सामान्य हिन्दी विषय की परीक्षा कृषि, भाग—एक (प्रथम वर्ष) में नहीं ली जायेगी। इस विषय की परीक्षा कृषि, भाग—दो (द्वितीय वर्ष) में एक वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर ली जायेगी।

कृषि भाग—दो (द्वितीय वर्ष)

शस्य विज्ञान

कक्षा-12

षष्टम् प्रश्न–पत्र

शस्य विज्ञान (सिंचाई, जल निकास एवं शाक तथा फल संवर्धन)—

इकाई—1— सिंचाई तथा जल निकास—फसलों को पानी की आवश्यकता, जलमान प्रस्ताव एवं उसका मृदा गठन से सम्बन्ध, सिंचाई जल के अपव्यय की रोकथाम, सिंचाई जल के गुण और उनके प्रभाव। 10 इकाई-2- सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां-भराव सिंचाई, थाला विधि, बौछारी सिंचाई, ड्रिप सिंचाई, उठाव सिंचाई एवं तोड़ सिंचाई, पट्टी सिंचाई (वार्डर विधि) प्रत्येक के लाभ और सीमायें। 05 इकाई—3— सिंचाई जल की माप—बी कटाव एवं कुलावा हेक्टेयर, से० मी०, मीटर माप की प्रणाली। 05 इकाई-4- जल निकास की आवश्यकता-मिट्टी में अति नमी से हानियां, भूमि विकार एवं सुधार (क्षारीय तथा अम्लीय मिट्टियां, उनका बनना, रोकथाम एवं सुधार, प्रक्षेत्र फार्म) प्रबन्ध की सामान्य जानकारी। 05 इकाई-5- दैवी आपदायें-बाढ़, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, उपलवृष्टि, भूकम्प आदि का स्वरूप, संवेदनशील क्षेत्र, हानि, नियंत्रण के उपाय। 05 इकाई-6- शाक तथा फल संवर्द्धन-निम्नलिखित शाकों तथा फलों की फसलों का अध्ययन, संस्तुत प्रजातियां तथा उनके मुख्य गुण, प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्र, बोने का समय, बीज बोने की विधि, खाद देना, सिंचाई करना, रोग एवं कीट पहचान एवं निवारण, उपज एवं बीजोत्पादन। 20

  • (क) गोभी वर्गीय फसलें-फूल गोभी, पत्ता गोभी, गांठ गोभी।
  • (ख) बल्व फसलें–प्याज, लहसुन।
  • (ग) कुकुरबिट–करेला, लौकी, खरबूजा, कद्दू, तुरई।
  • (घ) जड़ फसलें–गाजर, मूली, शकरकन्द, शलजम।
  • (ङ) मशरूम की खेती।
  • (छ) मसाले-लाल मिर्च।
  • (च) लेग्यूम-मटर।
  • (ज) विविध—बैगन, भिण्डी, टमाटर।
  • (झ) केला, सेव, लीची, बेर, आम, अमरूद, नींबू, पपीता, आडू।
  • (ञ) पुष्प उत्पादन–गेंदा, गुलाब, गुलदाउदी।

प्रयोगात्मक

शाक फसलों को उगाना और उनकी बाद की देखभाल, नर्सरी तैयार करना और उनके बीज उत्पादन (सिद्धान्त) निम्नलिखित क्रियाओं में अभ्यास–

  • (क) एक वर्षीय शाक फसलों की बीज शायिका की विभिन्न यंत्रों द्वारा तैयारी।
  • (ख) हाथ तथा बैलों से चलित यंत्रों द्वारा अंतरकर्षण।
  • (ग) प्रतिचयन विधि से उपज का अनुमान।
  • (घ) विभिन्न विधियों से सिंचाई तथा सिंचाई की लागत।
  • (ङ) खाद तथा उर्वरकों के शाक फसलों के संदर्भ में प्रयोग की विधियां।
  • (च) शाक–भाजी के बीज तथा सम्बन्धित खर–पतवारों की पहचान।
  • (छ) शाक–भाजी के मुख्य बीमारियों तथा कीटों की पहचान।
  • (ज) बीमारियों तथा कीड़ों के निवारण के लिये दवाइयों का घोल बनाना तथा डस्टर एवं स्प्रेयर का प्रयोग।

छात्र राजकीय फार्मों तथा किसानों के शाक फार्मों में अध्ययन करने भ्रमणार्थ जायेंगे। प्रयोगात्मक कार्य, फसलों का मुख्य अवलोकनों तथा भ्रमण स्थानों के अध्ययन का अभिलेख रखा जायेगा।

पुस्तकें–

कोई पुस्तक निर्धारित या संस्तुत नहीं की गयी है। विद्यालय के प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पाठ्यक्रम के अनुरूप पुस्तक का चयन कर लें।

अधिकतम अंक : 50 न्यूनतम उत्तीर्णांक : 16 समय : 03 घंटा

  1. वाह्य परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक निर्धारित अंक
  2. बीज शैय्या का निर्माण 08 अंक
  3. मौखिकी 07 अंक
  4. (क) आंकिक प्रश्न द्वारा खाद की गणना करना— 05 अंक
  • (ख) फसलों की सिंचाई से सम्बन्धित आंकिक प्रश्न- 05 अंक
  1. आन्तरिक परीक्षक द्वारा मूल्यांकन - 25 अंक
  2. बीज, खर-पतवार, खाद तथा फसलों की पहचान 10 अंक
  3. अभ्यास पुस्तिका 08 अंक
  4. प्रोजेक्ट ०७ अंक

नोट-अभ्यास पुस्तिका एवं प्रोजेक्ट कार्य विद्यार्थियों द्वारा परिषदीय प्रयोगात्मक परीक्षा के समय प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा-

व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा केन्द्र निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक / प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे। उपचारात्मक शिक्षण हेतु चार यूनिट टेस्ट निम्नलिखित है-

  1. प्रथम यूनिट टेस्ट (MCQ आधारित) जुलाई द्वितीय सप्ताह 20 अंक (10 अंक ग्रीष्मावकाश गृहकार्य + 10 अंक यूनिट टेस्ट)
  2. द्वितीय यूनिट टेस्ट (वर्णनात्मक प्रश्न आधारित) अगस्त अन्तिम सप्ताह 20 अंक
  3. तृतीय यूनिट टेस्ट (MCQ आधारित) नवम्बर अन्तिम सप्ताह 20 अंक
  4. चतुर्थ यूनिट टेस्ट (वर्णनात्मक प्रश्न आधारित) दिसम्बर अन्तिम सप्ताह 20 अंक

नोट- उपरोक्त यूनिट टेस्ट उपचारात्मक शिक्षण के अन्तर्गत विद्यालय स्तर पर लिये जायेंगे। इनके प्राप्तांक परीक्षफल में सम्मिलित नहीं किये जायेंगे।

Frequently asked questions

कक्षा 12 शस्य विज्ञान का प्रश्न पत्र कौन सा है?

कक्षा 12 शस्य विज्ञान का प्रश्न पत्र षष्टम् (छठा) प्रश्न पत्र है।

शस्य विज्ञान पाठ्यक्रम में कौन सी प्रमुख इकाइयाँ शामिल हैं?

पाठ्यक्रम में सिंचाई तथा जल निकास, सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां, सिंचाई जल की माप, जल निकास की आवश्यकता, दैवी आपदायें, तथा शाक एवं फल संवर्द्धन जैसी प्रमुख इकाइयाँ शामिल हैं।

शाक एवं फल संवर्धन इकाई के अंतर्गत किन फसलों का अध्ययन किया जाएगा?

इसके अंतर्गत गोभी वर्गीय फसलें, बल्व फसलें, कुकुरबिट, जड़ फसलें, मशरूम, मसाले, लेग्यूम, विविध सब्जियां, फल (केला, सेव, आम आदि) और पुष्प उत्पादन (गेंदा, गुलाब) का अध्ययन किया जाएगा।

शस्य विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा कितने अंकों की होगी?

शस्य विज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा कुल 50 अंकों की होगी, जिसमें 25 अंक बाह्य परीक्षक और 25 अंक आंतरिक परीक्षक द्वारा दिए जाएंगे।

प्रयोगात्मक परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक कितने हैं?

प्रयोगात्मक परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 16 हैं।

क्या शस्य विज्ञान के लिए कोई विशिष्ट पुस्तक निर्धारित है?

पाठ्यक्रम के अनुसार, कोई भी पुस्तक विशेष रूप से निर्धारित या संस्तुत नहीं की गई है। छात्र अपने प्रधान विषय अध्यापक के परामर्श से पुस्तक का चयन कर सकते हैं।

उपचारात्मक शिक्षण हेतु यूनिट टेस्ट कब आयोजित किए जाएंगे?

उपचारात्मक शिक्षण हेतु चार यूनिट टेस्ट जुलाई, अगस्त, नवम्बर और दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताहों में विद्यालय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिनके अंक परीक्षफल में सम्मिलित नहीं होंगे।

Important topics

शाक तथा फल संवर्द्धन (20 अंक) सिंचाई तथा जल निकास (10 अंक) सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां (05 अंक) सिंचाई जल की माप (05 अंक) जल निकास की आवश्यकता (05 अंक) दैवी आपदायें (05 अंक)

Topics covered

सिंचाई तथा जल निकास सिंचाई की प्रणालियां एवं विधियां सिंचाई जल की माप जल निकास की आवश्यकता दैवी आपदायें शाक तथा फल संवर्द्धन

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