UP Board Class 12 Sangeet Vadan Syllabus 2026-27
UP Board Class 12 Sangeet Vadan students preparing for the 2026-27 session will find the examination structure clearly defined. Both theory and practical components carry equal weight, with 50 marks allocated to each. The syllabus offers a choice between two primary sections: Part 1 delves into Avnaddh Vadya, focusing on instruments like Tabla and Pakhawaj, while Part 2 explores Tantra Vadya, encompassing Sitar and other string instruments such as Sarod and Sarangi. Within these sections, the curriculum is organized into units. These units cover essential musical concepts, including definitions, in-depth study of various talas and ragas, musicology, the lives of celebrated musicians, and essay writing on diverse musical subjects. The practical examination evaluates students' instrumental proficiency, their command over talas, and their skill in accompanying other musicians.
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Quick info
| Board | UP Board |
|---|---|
| Class | 12 |
| Subject | Sangeet Vadan |
| Session | 2026-27 |
| Language | Hindi |
| PDF type | Syllabus |
| Exam type | Annual |
| Duration | 6 Hours |
| Total marks | 100 |
| Theory marks | 50 |
| Practical marks | 50 |
| Passing marks | 16 |
| Last updated | 2026-08-10 |
The examination is divided into two parts: a 50-mark theory paper and a 50-mark practical examination. The practical exam has external and internal evaluation components.
Syllabus ? full document text
शैक्षिक सत्र-2026-27
विषय—संगीत (वादन)
कक्षा-12
पूर्णाक—100
संगीत वादन पाठ्यक्रम दो भागों में क्रमशः प्रथम भाग अवनद्ध वाद्य (तबला एवं पखावज) तथा द्वितीय भाग सितार एवं अन्य तंत्र वाद्य में विभाजित है। परीक्षार्थी दोनों में से किसी एक भाग का चयन कर अध्ययन कर सकते हैं। प्रत्येक भाग के लिए 50 अंकों की लिखित परीक्षा एवं 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा होगी।
संगीत वादन—प्रथम भाग (50 अंक)
अवनद्ध वाद्य (तबला एवं पखावज)
इकाई-1 सांगीतिक शास्त्रीय शब्दों की परिभाषा एवं व्याख्या-
08 अंक
पेशकार, टुकड़ा, मुखड़ा, परन, तिहाई, लय के प्रकार, परन, रेला, गत, तिहाई के प्रकार, कायदा, पलटा, लय एवं लयकारी और उनके विभिन्न प्रकारों की परिभाषा उदाहरण सहित।
इकाई-2 विस्तृत तालों का अध्ययन (लिखित एवं प्रयोगात्मक)
08 अंक
तीनताल, झपताल, एकताल, आड़ाचारताल आदि का परिचय ठेका, ठाह, दुगुन, तिगुन, चौगुन तथा विभिन्न लयकारियों में लिपिबद्ध करने की क्षमता एवं कायदा, रेला, परन, टुकड़ा, तिहाई, पेशकारा, लिपिबद्ध करने की क्षमता।
इकाई-3 तबला के प्रमुख घराने तथा उनकी वादन शैली-
10 अंक
बाजों के प्रकार (बनारस, फरूखाबाद) तथा उनकी वादन शैलियां, विशेषताएं।
ताल शास्त्र का अध्ययन-
भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास (मध्यकाल व आधुनिक काल), उत्तर भारतीय एवं दक्षिण भारतीय ताल लिपि पद्धतियों का तुलनात्मक अध्ययन, तालों का तुलनात्मक अध्ययन, लय एवं लयकारी का तुलनात्मक अध्ययन, पारिभाषिक शब्दों का तुलनात्मक अध्ययन।
इकाई-4 पाठ्यक्रम से अविस्तृत तालों का अध्ययन
08 अंक
धमार, दीपचन्दी, गजझम्पा, पंचमसवारी, जतताल, मत्तताल, चौताल आदि का सम्पूर्ण परिचय। ठेका, ठाह, दुगुन, तिगुन, चौगुन तथा विभिन्न लयकारियों में लिपिबद्ध करने तथा वादन योग्यता। उपरोक्त तालों के अन्तर्गत आने वाले टुकड़ों एवं परन आदि को लिपिबद्ध करने की योग्यता।
इकाई-5 अपने चुने गये वाद्य का अध्ययन
08 अंक
अपने द्वारा चुने गये वाद्य का सचित्र वर्णन तथा अंगों का ज्ञान तथा मिलाने की विधि। बोल समूहों के आधार पर तालों को पहचानने की योग्यता। तबले की उत्पत्ति एवं विकास। भारतीय वाद्यों का वर्गीकरण। इकाई-6 संगीत सम्बन्धी विषयों पर निबन्ध एवं जीवनियां 08 अंक
संगीत सम्बन्धी साधारण निबन्ध, उदाहरण— संगीत का मानव जीवन पर प्रभाव, वादक के गुण एवं अवगुण, संगीत सीखने के लाभ, किसी संगीत समारोह का आंखों देखा वर्णन।
जीवनी— पं0 विष्णुनारायण भातखण्डे, पं0 विष्णु दिगम्बर पलुष्कर, पं0 गोपाल नायक, पं0 सामता प्रसाद (गोदई महाराज)
प्रयोगात्मक परीक्षा
50 अंक
(तबला या पखावज)
- विद्यार्थियों को पर्याप्त बोल (ठेका, पेशकार, परन, टुकड़े, तिहाइयां आदि) जानना चाहिये। ताल का
पांच मिनट का आकर्षक प्रदर्शन देने की योग्यता होनी चाहिये। इस प्रकार के प्रदर्शन में किसी भी बोल की पुनरावृत्ति न हो वरन् वही बोल विभिन्न लयों और दूसरे प्रकार के तालों से निस्तारण के रूप में यदि जान पड़े तो बजायां जा सकता है। एक ठेके के बोल निश्चय ही दो क्रमिक टुकड़ों आदि के बीच दोहराये जा सकते हैं। एकांकी (सोलों) प्रदर्शन के लिये निम्नलिखित तालें पाठ्यक्रम में है।
तीनताल, धमार, आड़ाचारताल, दीपचन्दी, गजझम्पा, पंचम सवारी और मत्तताल।
- विद्यार्थियों में सरल धुनों के साथ, दीपचन्दी, झपताल, एकताल, चौताल और धमार से संगत करने की योग्यता होनी चाहिये।
- जो वाद्य विद्यार्थी ले, उन्हें मिलाने की योग्यता होनी चाहिये।
- विभिन्न लयकारी जैसे कि दो मात्राओं को तीन में, पाँच मात्राओं को चार मात्राओं में।
दुमरी शैली की संगत अपने वाद्य (तबला) पर विभिन्न प्रकार की लड़ी और लग्गी के साथ करने की योग्यता होनी चाहिये।
संगीत वादन–द्वितीय भाग (50 अंक)
सितार सहित अन्य तन्त्र वाद्य
(सरोद, सारंगी, इसराज अथवा दिलरुबा, वायलिन, गिटार, बांसुरी)
इकाई-01 सांगीतिक शास्त्रीय शब्दों की परिभाषा एवं व्याख्या-
08 अक
नाद, सप्तक, खरज, झाला, सूत, घसीट, गत, लय, गमक एवं गमक के प्रकार, तान एवं तान के प्रकार, लय एवं लय के प्रकार, जमजमा, जोड़, जोड़ालाप, थाट, वादी स्वर, संवादी स्वर, अनुवादी स्वर, वर्जित स्वर, विवादी स्वर, वक्र स्वर, आश्रय राग, संधिप्रकाश राग, परमेल प्रवेशक राग, वाद्य वर्गीकरण, आलाप, अलंकार, अल्पत्व–बहुत्व, अंश स्वर, न्यास स्वर।
इकाई-02- विस्तृत रागों एवं तालों का लिखित एवं प्रयोगात्मक अध्ययन
10 अक
राग वृन्दावनी सारंग, राग केदार, राग जौनपुरी का संपूर्ण परिचय, आरोह—अवरोह पकड़, मसीतखानी एवं रजाखानी गत, तोड़ा एवं झाला सहित।
झपताल, एकताल, चारताल, तीनताल एवं धमार ताल का संपूर्ण परिचय, ठेका, दुगुन, तिगुन और चौगुन की लयकारी में लिखना एवं क्रियात्मक रूप से प्रदर्शित करना।
इकाई-03 संगीत शास्त्र का अध्ययन
08 अक
36’’ वीणा के तार पर शुद्ध स्वरों की स्थापना, थाट से राग उत्पत्ति, भातखंडे एवं विष्णु दिगंबर, स्वर—लिपि पद्धति का तुलनात्मक अध्ययन, पूर्व राग—उत्तर राग, रागों का तुलनात्मक अध्ययन। इकाई-04 पाठ्यक्रम की अर्द्धविस्तृत रागें 08 अक
राग हमीर, राग कामोद, राग बहार का संपूर्ण परिचय, आरोह—अवरोह पकड़ सहित एक रजाखानी गत (समस्त गतें तीनताल में बद्ध होंगी)। (लिखित एवं प्रयोगात्मक)।
इकाई–05 वाद्य विशेष का लिखित एवं प्रयोगात्मक अध्ययन
08 अंक
- वाद्य का सचित्र अंग वर्णन, वाद्य का इतिहास एवं उसकी उत्पत्ति तथा उसका विकास।
- गतों को लिपिबद्ध करने की योग्यता।
- छोटे स्वर समूहों के आधार पर राग पहचानना।
- अलंकार बनाना एवं पूर्ण करना।
- वाद्य को मिलाने की विधि का ज्ञान।
- तोड़ा एवं झाला को लिपिबद्ध करने की योग्यता।
इकाई–06 जीवनी और सांगीतिक निबन्ध तथा संगीत का इतिहास
08 अंक
जीवनी— "भारतरत्न" पं० रविशंकर, पं० विष्णु नारायण भातखण्डे, पं० विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, पन्नालाल घोष, पं० हरिप्रसाद चौरसिया, एम० राजम। निबन्ध–
- संगीत का मानव जीवन पर प्रभाव।
- वादक के गुण एवं अवगुण।
- संगीत सीखने के लाभ।
- संगीत सीखने में गुरु की महत्ता।
संगीत का इतिहास-
संगीत का प्राचीन एवं आधुनिक काल का इतिहास।
सितार आदि लय वाले वाद्यों की प्रयोगात्मक परीक्षा
निम्नलिखित 3 रागों में से प्रत्येक में एक गत मसीतखानी और एक रजाखानी जिसका विस्तार सहित अभ्यास होगा :
वृन्दावनी सारंग, केदार, जौनपुरी।
वाद्य को गरिमा के साथ बजाने की योग्यता।
- राग कामोद, हमीर, बहार रागों में केवल एक गत बिना किसी विशेष विस्तार के बजाना।
विद्यार्थियों को इनमें से प्रत्येक राग का आरोह—अवरोह और पकड़ बजाने की योग्यता होनी चाहिये और जब उन्हें धीमें अभिव्यक्ति आलापों द्वारा प्रस्तुत किया जाय तब पहचानने की योग्यता होनी चाहिये।
- उपरोक्त गतें तीनताल में हो सकती है।
झपताल, एकताल, चारताल, धमार और तीनताल का ज्ञान, ठाह दुगुन, तिगुन, चौगुन हाँथ पर प्रदर्शित करने की योग्यता।
विशेष सूचनाः— गायन या वादन की प्रयोगात्मक परीक्षा के अंकों का विभाजन निम्न प्रकार से होगा :
संगीत गायन/वादन
अधिकतम अंक—50 न्यूनतम उत्तीर्णांक अंक—16 अंक समय –06 घण्टे
एक समय में परीक्षा के लिये परीक्षार्थियों की संख्या पर प्रतिबन्ध आवश्यक है। इण्टरमीडिएट परीक्षा संगीत वादन परीक्षा एक दिन में क्रमशः 20—25 परीक्षार्थियों से अधिक न हो। प्रत्येक खण्ड का विवरण तथा निर्धारित अंक :
- तबला और पखावज लेने वालों के लिये-
- (क) वाह्य मूल्यांकन—25 अंक
- परीक्षार्थियों द्वारा चुने गये अपने ताल का प्रदर्शन। 80
- पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताले। 03
- पाठ्यक्रम में प्रस्तावित विस्तृत अध्ययन की ताले। 05
- तालों का कहना और उनका बजाना। 03
- परीक्षक द्वारा गायी गयी अथवा बजायी गयी धुनों के साथ संगत करने की योग्यता। 03
- वाद्य मिलाने की योग्यता। 03
- (ख) आन्तरिक मूल्यांकन—25 अंक
- रिकॉर्ड । 05
- प्रोजेक्ट। 10
- सत्रीय कार्य। 10
नोट :-संगीत गायन के साथ हारमोनियम की संगत की अनुमति नहीं है। 2 तबला व पखावज के अलावा अन्य संगीत तंत्रवाद्य लेने वाले विद्यार्थियों के लिये-
- विद्यार्थियों द्वारा चुने गये अपने रुचि के साथ गीत अथवा संगीत का प्रदर्शन। 80
- विस्तृत अध्ययन के रागों के ऊपर पूछे गये अलाप। 03
- पाठ्यक्रम में प्रस्तुत विस्तृत अध्ययन की ताल। 05
- पाठ्यक्रम में निहित साधारण अध्ययन की ताल। 03
- राग और स्वर समूह को पहचानने की क्षमता। 03
- परीक्षार्थियों की आवाज और उसका सामान्य प्रभाव। 03 व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा
- व्यक्तिगत परीक्षार्थियों की प्रयोगात्मक परीक्षा हेतु जो विद्यालय प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए
निर्धारित किये जायेंगे, उन विद्यालयों के सम्बन्धित विषयों के अध्यापक / प्रधानाचार्य द्वारा आन्तरिक परीक्षक रूप में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को पचास प्रतिशत अंक प्रदान किये जायेंगे, शेष पचास प्रतिशत अंक वाह्य परीक्षक द्वारा देय होंगे।
- अध्यापक को प्रत्येक विद्यार्थी के कार्य का वाह्य प्रयोगात्मक परीक्षकों के विचारार्थ रखने के लिये अभिलेख रखना होगा।
उपचारात्मक शिक्षण हेतु चार यूनिट टेस्ट निम्नलिखित है—
- प्रथम यूनिट टेस्ट (MCQ आधारित) जुलाई द्वितीय सप्ताह 20 अंक (10 अंक ग्रीष्मावकाश गृहकार्य + 10 अंक यूनिट टेस्ट)
- द्वितीय यूनिट टेस्ट (वर्णनात्मक प्रश्न आधारित) अगस्त अन्तिम सप्ताह 20 अंक
- तृतीय यूनिट टेस्ट (MCQ आधारित) नवम्बर अन्तिम सप्ताह 20 अंक
- चतुर्थ यूनिट टेस्ट (वर्णनात्मक प्रश्न आधारित) दिसम्बर अन्तिम सप्ताह 20 अंक
नोट- उपरोक्त यूनिट टेस्ट उपचारात्मक शिक्षण के अन्तर्गत विद्यालय स्तर पर लिये जायेंगे। इनके प्राप्तांक परीक्षफल में सम्मिलित नहीं किये जायेंगे।
Frequently asked questions
What are the two main parts of the Class 12 Sangeet Vadan syllabus?
The syllabus is divided into Part 1: Avnaddh Vadya (Tabla & Pakhawaj) and Part 2: Tantra Vadya (Sitar & other string instruments).
What is the total mark distribution for Class 12 Sangeet Vadan?
The total marks are 100, with 50 marks for the theory examination and 50 marks for the practical examination.
Which talas are included in the detailed study for Tabla/Pakhawaj?
The detailed study includes Talas like Teentaal, Jhaptal, Ektaal, Aadacharatal, Dhamar, Deepchandi, Gajajhampa, Panchamsawari, Jatatal, Mattatal, and Chautal.
Which ragas are part of the detailed study for Sitar and other string instruments?
The detailed study includes Ragas like Vrindavani Sarang, Kedar, and Jaunpuri for Masitkhani & Razakhani gats, and Ragas like Hamir, Kamod, and Bahar for a single gat.
What does the practical examination for Sangeet Vadan involve?
The practical exam assesses the student's performance of chosen talas/ragas, accompaniment skills, identification of musical elements, and knowledge of instrument tuning.
Are there any specific requirements for the practical exam for string instruments?
Yes, students need to perform Masitkhani and Razakhani gats in specific ragas, and also play a single gat in other specified ragas, along with demonstrating knowledge of talas and laykari.
What is the passing mark for the practical examination in Sangeet Vadan?
The minimum passing mark for the practical examination is 16 out of 50.
What is the duration of the practical examination for Sangeet Vadan?
The practical examination for Sangeet Vadan has a duration of 6 hours, with a limit of 20-25 candidates per day.
Important topics
Topics covered
UP Board (UPMSP) Class 12 Syllabus ? Sangeet Vadan. Last updated 10 Aug 2026.