कक्षा 9 संचयन पाठ 2: स्मृति - श्रीराम शर्मा NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 के हिंदी पाठ्यपुस्तक 'संचयन भाग-1' के अध्याय 2, 'स्मृति' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित इस पाठ में बचपन की स्मृतियों, विशेषकर एक घटना का वर्णन है जहाँ लेखक को अपने बड़े भाई द्वारा दी गई चिट्ठियों को एक साँप वाले कुएँ से निकालना पड़ता है। समाधान पाठ के बोध प्रश्नों पर केंद्रित हैं, जिनमें भाई के बुलाने पर लेखक के डर, बच्चों द्वारा कुएँ में ढेला फेंकने का कारण, लेखक की मनोदशा, चिट्ठियाँ निकालने के निर्णय के पीछे के कारण, साँप का ध्यान भटकाने की युक्तियाँ और कुएँ में उतरकर चिट्ठियाँ निकालने के साहसिक वर्णन का विश्लेषण शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, पात्रों के मनोविज्ञान को समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectसंचयन
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. स्मृति - श्रीराम शर्मा

Chapter summary

कक्षा 9 संचयन भाग-1 के अध्याय 2 'स्मृति' के ये NCERT समाधान श्रीराम शर्मा द्वारा लिखित पाठ पर आधारित हैं। समाधान पाठ के बोध प्रश्नों का उत्तर देते हैं, जिसमें बचपन की स्मृतियाँ, विशेष रूप से एक कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने की घटना शामिल है। ये प्रश्न लेखक के डर, बच्चों की शरारतों, और विषम परिस्थितियों में साहस दिखाने जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। समाधान छात्रों को पाठ की घटनाओं, पात्रों के विचारों और लेखक की भावनाओं को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • लेखक के बचपन के डर और उसकी मनोदशा को समझना।
  • बच्चों की टोली द्वारा कुएँ में ढेला फेंकने के पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
  • साँप जैसे खतरे का सामना करते हुए चिट्ठियाँ निकालने के लेखक के साहस का मूल्यांकन करना।
  • लेखक द्वारा साँप का ध्यान भटकाने के लिए अपनाई गई युक्तियों को पहचानना।
  • पाठ में वर्णित साहसिक कार्य का अपने शब्दों में वर्णन करना सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • बचपन की स्मृतियाँ
  • लेखक का डर
  • साँप और कुआँ
  • साहसिक कार्य
  • भाई का डर
  • चिट्ठियाँ निकालना
  • बच्चों की टोली
  • मनोदशा का विश्लेषण

Important topics

  • कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का साहसिक वर्णन
  • लेखक के डर और मनोदशा का विश्लेषण
  • साँप का ध्यान भटकाने की युक्तियाँ
  • बचपन की स्मृतियों का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?
Solution: भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में इस बात का डर था कि कहीं उसके बड़े भाई उसे डाँटें या पीटें। यह डर इसलिए था क्योंकि लेखक से वे चिट्ठियाँ गिर गई थीं जो उसे डाकखाने में डालने के लिए दी गई थीं। वह जानता था कि चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गई हैं और वह अपने भाई से झूठ भी नहीं बोल सकता था, इसलिए उसे पिटाई का भय सता रहा था।

प्रश्न 2

मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?
Solution: मक्खनपुर पढ़ने जाने के रास्ते में एक सूखा कुआँ पड़ता था, जिसमें एक साँप गिर गया था। बच्चों की टोली उस कुएँ में ढेला फेंककर साँप की फुसकार सुनने का प्रयास करती थी। वे यह जानना चाहते थे कि ढेला लगने पर साँप फुसकार मारता है या नहीं, यह उनकी जिज्ञासा और शरारत का हिस्सा था।

प्रश्न 3

'साँप ने फुसकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं' - यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?
Solution: यह कथन लेखक की उस समय की अत्यधिक भयभीत और बदहवास मनोदशा को स्पष्ट करता है। जब लेखक कुएँ में ढेला फेंक रहा था, उसी समय उसके सिर से टोपी गिर गई और चिट्ठियाँ भी कुएँ में जा गिरीं। इस पूरी घटना के दौरान वह इतना डर गया था कि उसे यह याद ही नहीं रहा कि साँप ने फुसकार मारी थी या नहीं, या ढेला उसे लगा भी था या नहीं। उसका पूरा ध्यान अपनी जान बचाने और चिट्ठियों को निकालने पर केंद्रित हो गया था।

प्रश्न 4

किन कारणों से लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया?
Solution: लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय कई कारणों से लिया:
  1. भाई का डर: चिट्ठियाँ उसके बड़े भाई ने डाकखाने में डालने के लिए दी थीं। यदि वे खो जातीं, तो उसे अपने भाई से पिटाई का डर था।
  2. सच बोलने की मजबूरी: लेखक अपने भाई से बहुत डरता था और जानता था कि वह झूठ बोलकर बच नहीं पाएगा।
  3. जिम्मेदारी का एहसास: चिट्ठियाँ महत्वपूर्ण थीं और उन्हें निकालना आवश्यक था।
  4. आत्म-विश्वास: लेखक को अपने ऊपर भी भरोसा था कि वह किसी तरह इन चिट्ठियों को निकाल लेगा।
इन सभी कारणों ने मिलकर उसे कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने के लिए प्रेरित किया।

प्रश्न 5

साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाईं?
Solution: साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने कई चतुराई भरी युक्तियाँ अपनाईं:
  1. डंडे का प्रयोग: उसने साँप के पास पड़ी चिट्ठियों को उठाने के लिए डंडा बढ़ाया। जब साँप ने डंडे पर छलांग लगाई, तो लेखक ने डंडा छोड़ दिया, जिससे साँप का आसन बदल गया।
  2. मिट्टी फेंकना: साँप का आसन बदलने के बाद, लेखक ने कुएँ की बगल से एक मुट्ठी मिट्टी उठाई और साँप के दूसरी ओर फेंकी। इससे साँप का ध्यान उस ओर चला गया।
  3. डंडा खींचना: मिट्टी फेंकने के साथ ही, लेखक ने दूसरे हाथ से डंडा खींच लिया। डंडा बीच में होने के कारण साँप उस पर वार नहीं कर पाया और लेखक को चिट्ठियाँ उठाने का मौका मिल गया।
इन युक्तियों से लेखक ने साँप को भ्रमित किया और अपनी जान बचाते हुए चिट्ठियाँ निकालने में सफलता पाई।

प्रश्न 6

कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: लेखक के लिए कुएँ से चिट्ठियाँ निकालना एक अत्यंत साहसिक कार्य था, क्योंकि कुएँ में एक खतरनाक साँप मौजूद था। भाई की दी हुई चिट्ठियाँ कुएँ में गिर जाने के बाद, लेखक ने हिम्मत करके उन्हें निकालने का फैसला किया। उसने अपनी और अपने भाई की धोतियों को रस्सियों से बाँधकर एक मजबूत रस्सी तैयार की और उसी के सहारे कुएँ में उतरना शुरू किया। जैसे ही वह कुछ गज नीचे उतरा, उसने देखा कि साँप फन फैलाए हुए बैठा है। लेखक को एहसास हुआ कि धोती से लटकते हुए वह साँप को डंडे से मार नहीं सकता और न ही उसके पास वार करने के लिए पर्याप्त जगह थी। उसने डंडे से चिट्ठियों को सरकाने की कोशिश की, जिस पर साँप ने डंडे पर हमला कर दिया। इस झटके से लेखक का डंडा छूट गया और उसका पैर भी दीवार से हट गया, जिससे वह केवल धोती के सहारे लटका रह गया। इस विकट परिस्थिति में भी लेखक ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कुएँ की दीवार से थोड़ी मिट्टी उठाई और साँप के दूसरी ओर फेंकी। इससे साँप का ध्यान भटक गया। इसी अवसर का लाभ उठाकर, लेखक ने डंडा खींच लिया और साँप के वार से बचते हुए, बड़ी चतुराई से चिट्ठियाँ उठा लीं। यह पूरा वर्णन लेखक के साहस, सूझबूझ और विषम परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले जज्बे को दर्शाता है।

Common mistakes

  • लेखक के डर को केवल शारीरिक पिटाई तक सीमित समझना।
  • बच्चों द्वारा कुएँ में ढेला फेंकने के उद्देश्य को सतही तौर पर लेना।
  • साँप के खतरे को कम आंकना और लेखक के साहस को सामान्य मानना।
  • चिट्ठियाँ निकालने के निर्णय के पीछे के सभी कारणों को न समझना।

Revision tips

  • पाठ को ध्यान से पढ़ें और लेखक के बचपन के अनुभवों को समझने का प्रयास करें।
  • बोध प्रश्नों के उत्तरों को याद करने के बजाय, उनमें वर्णित घटनाओं और भावनाओं को समझें।
  • कुएँ में उतरकर चिट्ठियाँ निकालने वाले साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • लेखक के बड़े भाई के प्रति डर और उसके कारणों पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?

Q2. मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?

Q3. लेखक को यह स्मरण क्यों नहीं कि ढेला साँप को लगा या नहीं?

Q4. लेखक ने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का निर्णय क्यों लिया?

Q5. साँप का ध्यान बँटाने के लिए लेखक ने क्या युक्ति अपनाई?

Frequently asked questions

कक्षा 9 संचयन पाठ 2 'स्मृति' में लेखक किस घटना का वर्णन करता है?

पाठ में लेखक अपने बचपन की एक घटना का वर्णन करता है जब उसे अपने बड़े भाई द्वारा दी गई चिट्ठियों को एक साँप वाले कुएँ से निकालना पड़ता है।

लेखक को कुएँ में चिट्ठियाँ क्यों गिरानी पड़ीं?

लेखक को चिट्ठियाँ कुएँ में नहीं गिरानी पड़ीं, बल्कि वह उन्हें डाकखाने में डालने जा रहा था और गलती से वे कुएँ में गिर गईं।

साँप वाले कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने में लेखक को क्या डर था?

लेखक को सबसे बड़ा डर साँप के काटने का था, और साथ ही चिट्ठियाँ गिरने पर अपने बड़े भाई से पिटाई का भी डर था।

लेखक ने साँप का ध्यान भटकाने के लिए क्या किया?

लेखक ने साँप का ध्यान भटकाने के लिए कुएँ की मिट्टी फेंककर उसका आसन बदला और डंडे से चिट्ठियों को सरकाने का प्रयास किया।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, मुख्य घटनाओं और पात्रों के मनोविज्ञान को समझने तथा परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

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