CBSE Class 9 Hindi Sparsh NCERT Solutions: पाठ 2 - दुःख का अधिकार

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CBSE Class 9 Hindi Sparsh, Chapter 2, 'Dukh Ka Adhikar' by Yashpal, delves into the societal disparities surrounding the expression of grief. The chapter poignantly illustrates how economic status significantly impacts one's ability to openly mourn. It contrasts the ostentatious displays of sorrow by the wealthy with the often-hidden grief of the less fortunate, who are compelled by their circumstances to set aside personal sorrow and attend to daily responsibilities. The NCERT Solutions for this chapter explore the characters' predicaments, the motivations behind their actions, and the critical social commentary on class distinctions and the universal right to express sorrow. These solutions aim to deepen students' comprehension of the story's subtleties, facilitate thematic analysis, and provide clear, structured answers to aid in exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. यशपाल - दुःख का अधिकार

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh, Chapter 2, 'Dukh Ka Adhikar' by Yashpal, focuses on the theme that the ability to mourn is often dictated by social and economic status. The solutions explain the stark contrast between the affluent and the poor in expressing grief, emphasizing how poverty forces individuals to suppress personal sorrow for the sake of survival. Key questions address the societal judgment faced by the poor and the author's observations on the superficiality of social norms regarding mourning.

Learning outcomes

  • Understand the concept of 'right to grieve' and its social implications.
  • Analyze the impact of economic status on the expression of sorrow.
  • Identify the societal norms and prejudices related to mourning.
  • Explain the author's perspective on class differences and empathy.
  • Summarize the story's central theme and its relevance.

Topics covered

Paper topics

  • Social status and attire
  • The concept of mourning and societal norms
  • Economic disparity and its impact on grief
  • The right to express sorrow
  • Author's observations on human behavior
  • Class differences in society
  • Empathy and social commentary
  • Yashpal's writing style

Important topics

  • The influence of economic status on expressing grief
  • Societal judgment versus individual suffering
  • The author's critique of social hypocrisy
  • The contrast between the poor woman and the affluent lady
  • The meaning of 'Dukh Ka Adhikar' (Right to Grieve)

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Questions and Solutions

1. किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?

किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?
Solution: किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हम समाज में उसके पद, अधिकार और उसकी आर्थिक स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं। पोशाकें अक्सर व्यक्ति की सामाजिक पहचान और हैसियत को दर्शाती हैं।

2. खरबूज़े बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूज़े क्यों नहीं खरीद रहा था?

खरबूज़े बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूज़े क्यों नहीं खरीद रहा था?
Solution: खरबूजे बेचने वाली स्त्री से कोई भी व्यक्ति खरबूजे नहीं खरीद रहा था क्योंकि उसके बेटे की मृत्यु को अभी एक ही दिन हुआ था। भारतीय समाज में, किसी की मृत्यु के तुरंत बाद, विशेषकर तेरहवीं से पहले, किसी भी प्रकार का व्यापार करना या शुभ कार्य करना 'सूतक' माना जाता है, और लोग इस कारण उससे खरीदारी से बच रहे थे।

3. उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?

उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा?
Solution: उस खरबूजे बेचने वाली स्त्री को फटे-पुराने कपड़ों में, घुटनों में सिर गड़ाए रोते हुए देखकर लेखक का मन बहुत व्यथित हो गया। उन्हें उस स्त्री के दुःख और उसकी लाचारी के प्रति गहरी सहानुभूति महसूस हुई और वे उसके दुःख का कारण जानने के लिए बेचैन हो उठे।

4. उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था?

उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था?
Solution: उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण एक साँप का काटना था। वह लड़का सुबह-सुबह खेत से खरबूजे तोड़ रहा था, तभी उसका पैर गीली मेड़ पर आराम कर रहे एक साँप पर पड़ गया और साँप ने उसे डस लिया। ओझा के झाड़-फूँक आदि के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

5. बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?

बुढ़िया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?
Solution: बुढ़िया को कोई भी उधार इसलिए नहीं दे रहा था क्योंकि उसके बेटे भगवाना की मृत्यु हो गई थी। उधार देने वाले यह सोच रहे थे कि अब उसका बेटा जीवित नहीं रहा, तो वह उधार चुकाने की स्थिति में नहीं होगी, और उनका पैसा डूब जाएगा।

6. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?

मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है?
Solution: मनुष्य के जीवन में पोशाक का बहुत महत्व है। यह न केवल व्यक्ति की पहचान और सामाजिक दर्जे को दर्शाती है, बल्कि समाज में ऊँच-नीच का भेद भी पैदा करती है। अच्छी पोशाकें व्यक्ति के लिए अवसरों के द्वार खोल सकती हैं और उसे सम्मान दिला सकती हैं।

7. पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?

पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है?
Solution: पोशाक तब बंधन और अड़चन बन जाती है जब हमें किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति सहानुभूति दिखानी होती है जिसे हम अपनी सामाजिक स्थिति से छोटा समझते हैं। हमारी अपनी पोशाक और सामाजिक रुतबा हमें उस व्यक्ति के करीब जाने और उसके दुःख में शामिल होने से रोकता है, जिससे हम संकोच महसूस करते हैं।

8. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया?

लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया?
Solution: लेखक उस स्त्री के रोने का कारण सीधे तौर पर नहीं जान पाया क्योंकि उसकी पोशाक एक सामाजिक बाधा बन गई थी। वह स्त्री फटे-पुराने कपड़ों में थी और लोग उससे खरबूजे नहीं खरीद रहे थे, जिससे वह दुखी थी। लेखक का मन व्यथित हुआ, पर अपनी सामाजिक स्थिति और पोशाक के कारण वह सीधे उससे पूछकर उसके दुःख का कारण नहीं जान सका।

9. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?

भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था?
Solution: भगवाना शहर के पास अपनी डेढ़ बीघा ज़मीन पर खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह उस ज़मीन पर हरी सब्ज़ियाँ और खरबूजे जैसे फल उगाता था और उन्हें बाज़ार में बेचकर आय अर्जित करता था।

10. लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूज़े बेचने क्यों चल पड़ी?

लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूज़े बेचने क्यों चल पड़ी?
Solution: लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुढ़िया खरबूजे बेचने इसलिए चल पड़ी क्योंकि उसके परिवार के सामने भुखमरी का संकट आ गया था। उसके बच्चे भूख से बिलख रहे थे और उसकी बहू बीमार थी। आर्थिक तंगी इतनी ज़्यादा थी कि वह दुःख मनाने या सूतक पालने का जोखिम नहीं उठा सकती थी, इसलिए उसे अपनी मजबूरी में बाज़ार आना पड़ा।

11. बुढ़िया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?

बुढ़िया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?
Solution: बुढ़िया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद इसलिए आई क्योंकि दोनों के दुःख मनाने के तरीके और परिस्थितियों में जमीन-आसमान का अंतर था। बुढ़िया को आर्थिक तंगी के कारण बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन काम पर लौटना पड़ा, जबकि संभ्रांत महिला अपने बेटे की मृत्यु पर अढ़ाई महीने तक बिस्तर पर पड़ी रहकर शोक मना सकती थी, जिसके लिए डॉक्टर भी मौजूद थे। लेखक यह दिखाना चाहता था कि समाज में दुःख मनाने का अधिकार भी धन और रुतबे पर निर्भर करता है।

12. बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।

बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: बाज़ार के लोग खरबूजे बेचने वाली बुढ़िया के बारे में तरह-तरह की बातें कह रहे थे। वे कह रहे थे कि उसके बेटे को मरे हुए एक ही दिन हुआ है और वह बिना तेरहवीं किए ही खरबूजे बेचने आ गई है। लोग उसे सूतक का हवाला देते हुए खरी-खोटी सुना रहे थे और उसकी मजबूरी को समझे बिना उसे भला-बुरा कह रहे थे। वे यह भी कह रहे थे कि ऐसे समय में फल बेचना अशुभ है।

Common mistakes

  • Confusing the reasons for the old woman's inability to mourn openly.
  • Overlooking the societal commentary on class and grief.
  • Not differentiating between genuine sorrow and performative mourning.
  • Failing to connect the characters' actions to their economic circumstances.

Revision tips

  • Focus on the contrast between the affluent woman and the old woman's grief.
  • Understand the meaning of 'Sutak' and its social impact in the story.
  • Analyze the author's observations and their underlying message.
  • Practice answering questions that require comparing and contrasting characters.
  • Relate the story's themes to real-world social and economic disparities.

Practice MCQs

Q1. लेखिका के अनुसार, किसी व्यक्ति की पोशाक क्या दर्शाती है?

Q2. खरबूजे बेचने वाली स्त्री से लोग खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहे थे?

Q3. लेखक को उस स्त्री को देखकर कैसा महसूस हुआ?

Q4. भगवाना की मृत्यु का मुख्य कारण क्या था?

Q5. बुढ़िया को उधार क्यों नहीं मिल रहा था?

Q6. लेखक को पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?

Frequently asked questions

कक्षा 9 के हिंदी स्पर्श के पाठ 2 'दुःख का अधिकार' में मुख्य विषय क्या है?

इस पाठ का मुख्य विषय यह है कि समाज में दुःख मनाने का अधिकार भी व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर निर्भर करता है। गरीब व्यक्ति को दुःख व्यक्त करने का अवसर भी नहीं मिलता।

लेखक यशपाल ने पाठ में किस प्रकार की सामाजिक असमानता को दर्शाया है?

लेखक ने अमीर और गरीब के बीच दुःख मनाने के तरीके में असमानता को दर्शाया है। जहाँ अमीर व्यक्ति को दुःख मनाने के लिए पूरा समय और सुविधा मिलती है, वहीं गरीब को अपनी आर्थिक मजबूरी के कारण तुरंत काम पर लौटना पड़ता है।

खरबूजे बेचने वाली बुढ़िया के साथ लोग कैसा व्यवहार कर रहे थे?

लोग बुढ़िया से खरबूजे नहीं खरीद रहे थे और उसे ताने मार रहे थे क्योंकि उसके बेटे की मृत्यु के अगले ही दिन वह बिना तेरहवीं किए फल बेचने आ गई थी, जिसे वे सूतक मान रहे थे।

पाठ के अनुसार, 'दुःख का अधिकार' किसे प्राप्त है?

पाठ के अनुसार, दुःख मनाने का अधिकार अक्सर उन्हीं को प्राप्त होता है जो आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं और जिनके पास दुःख व्यक्त करने के लिए पर्याप्त समय और साधन होते हैं। गरीबों को अपनी मजबूरियों के कारण दुःख को दबाना पड़ता है।

यह पाठ छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह पाठ छात्रों को कहानी के पात्रों, उनके सामाजिक-आर्थिक संदर्भों और दुःख की अभिव्यक्ति से जुड़े सामाजिक मानदंडों को समझने में मदद करेगा, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर दे सकेंगे।

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