CBSE Class 9 Hindi Kritika Chapter 2: मेरे संग की औरतें NCERT Solutions

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CBSE Class 9 Hindi Kritika Chapter 2, 'Mere Sang Ki Auratein' (The Women of My Life), introduces us to the remarkable women in the author's family. This chapter explores their distinct personalities, focusing on their independence, courage, and unconventional thinking. We learn about the author's grandmother, who held progressive views on marriage, and her mother, who embodied Gandhian principles with her compassion and simplicity. The narrative also touches upon the author's own experiences and her journey of challenging societal norms. The NCERT Solutions for this chapter provide in-depth explanations of these women's lives, their motivations, and their impact. They aim to help students understand the chapter's core themes and characters, offering clear insights that will aid in their Hindi exam preparation by reinforcing the nuances of the text.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
SubjectHindi Kritika
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 2

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 2, 'Mere Sang Ki Auratein', focuses on the inspiring lives of the women in the author's family. It highlights their individuality, courage, and progressive thinking, particularly the author's grandmother's desire for her daughter's marriage to a freedom fighter and her mother's adherence to Gandhian ideals. The solutions explain how these women, despite societal norms, carved their own paths and influenced those around them. This chapter's solutions are crucial for understanding themes of independence, social reform, and personal conviction.

Learning outcomes

  • Understand the influence of the author's grandmother and mother on her life and writing.
  • Analyze the concept of freedom and independence as depicted through the lives of the women.
  • Explain the significance of traditional values versus progressive thinking.
  • Identify the author's mother's unique approach to discipline and compassion.
  • Appreciate the author's efforts in promoting education.

Topics covered

Paper topics

  • Author's Grandmother's progressive views
  • Author's Mother's adherence to Gandhian principles
  • Compassion and reformative approach
  • Independence and freedom
  • Breaking societal norms
  • Promoting education
  • Character analysis of family women
  • Personal conviction and courage
  • Rural education initiatives
  • Individuality and self-reliance

Important topics

  • Grandmother's desire for marriage to a freedom fighter
  • Mother's unique method of reforming a thief
  • Mother's adherence to Gandhian principles
  • Author's efforts in establishing a school
  • Qualities of people viewed with respect

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं ?
Solution: लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था, फिर भी वे उनके व्यक्तित्व से कई कारणों से प्रभावित थीं। पहला, उनकी नानी अपनी बेटी का विवाह एक क्रांतिकारी से करवाना चाहती थीं। उन्होंने अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से भेंट की थी। यह घटना उनके देश के प्रति गहरे प्रेम और स्वतंत्रता की भावना को दर्शाती है। दूसरा, जीवन भर परदे में रहकर भी उन्होंने किसी बाहरी पुरुष से मिलने का साहस दिखाया, जो उनके साहसी स्वभाव और मन में दबी स्वतंत्रता की इच्छा को प्रकट करता है। भले ही वे अनपढ़ और पुराने विचारों वाली महिला थीं, लेकिन निजी जीवन में वे आजाद विचारों की थीं।

प्रश्न 2

लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही ?
Solution: लेखिका की नानी की स्वतंत्रता संग्राम में प्रत्यक्ष रूप से कोई बड़ी भागीदारी नहीं रही, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता की भावना को अपने मन में जीवित रखा। उन्होंने कभी भी अंग्रेजियत को स्वीकार नहीं किया, जबकि उनके पति अंग्रेजों के समर्थक थे। नानी ने अपनी बेटी की शादी एक क्रांतिकारी से करने की इच्छा जताकर अपने देश प्रेम का परिचय दिया। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह था कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी की घटना से अपने बच्चों को अंग्रेज-भक्तों के प्रभाव से मुक्त कर लिया और अप्रत्यक्ष रूप से क्रांतिकारियों को भी प्रेरित किया। इस प्रकार, उनकी भागीदारी अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण थी।

प्रश्न 3.1

लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में - लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए ।
Solution: लेखिका की माँ एक दुबली-पतली और सुंदर स्त्री थीं, जिन्हें लेखिका ने पारिजात के समान बताया है। वे हमेशा खादी की साड़ी पहनती थीं और आजीवन गांधीजी के सिद्धांतों का पालन करती रहीं। वे सत्यवादी, ईमानदार थीं और उनमें देश की आज़ादी के प्रति गहरा जुनून था। वे आम भारतीय महिलाओं की तरह केवल घर-गृहस्थी और बच्चे संभालने तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि ठोस कामों में उनकी राय ली जाती थी और उसका पूरी तरह पालन भी किया जाता था।

प्रश्न 3.2

लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी इस कथन के आलोक में - लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द चित्र अंकित कीजिए ।
Solution: लेखिका की दादी का घर उस समय के अनुसार काफी अलग और प्रगतिशील माहौल वाला था। वहां सभी सदस्यों को अपनी मर्जी से जीने की आजादी थी। घर में पुत्र और पुत्री के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। स्वयं लेखिका की दादी ने अपनी बहू से पहली संतान के रूप में बेटी ही मांगी थी। घर का वातावरण धार्मिक, स्त्रियों को सम्मान देने वाला और साहित्यिक था, जो उस समय के सामान्य घरों से भिन्न था।

प्रश्न 4

आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी ?
Solution: लेखिका की परदादी एक स्वतंत्र और साहसी महिला थीं। उस समय समाज में जहाँ लड़के को अधिक महत्व दिया जाता था, वहीं परदादी का अपनी पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत मांगना उनके लीक से हटकर सोचने और स्त्री के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है। यह उनके साहस और उस समय की रूढ़िवादी सोच को चुनौती देने का प्रतीक है।

प्रश्न 5

डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है – पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिए ।
Solution: यह बात पाठ के आधार पर पूरी तरह सत्य है कि डराने-धमकाने या उपदेश देने के बजाय सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण लेखिका की माँ का व्यवहार है जब एक चोर पकड़ा गया। लेखिका की माँ ने चोर को पीटने या डांटने के बजाय उससे सेवा ली और उसे अपना पुत्र मान लिया। उन्होंने उसे उपदेश भी नहीं दिया, बस इतना कहा कि अब तुम्हारी मर्जी है, चाहे चोरी करो या खेती। माँ के इस सहज और मानवीय व्यवहार से चोर का हृदय परिवर्तन हो गया और उसने हमेशा के लिए चोरी छोड़ दी। यदि माँ उसके साथ बुरा व्यवहार करतीं, तो शायद चोर सुधरने के बजाय और भी गलत रास्ते पर चला जाता।

प्रश्न 6

'शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है' – इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख करें ।
Solution: लेखिका ने 'शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है' इस सिद्धांत को मानते हुए महत्वपूर्ण प्रयास किए। जब वे कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे बागनकोट में रहती थीं, तो वहाँ उनके बच्चों के लिए शिक्षा की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। लेखिका ने वहाँ स्कूल खुलवाने के लिए बिशप से प्रार्थना की, लेकिन जब वे तैयार नहीं हुए, तो उन्होंने स्वयं कुछ उत्साही लोगों की मदद से एक स्कूल खोला। उन्होंने इस स्कूल को सरकारी मान्यता भी दिलवाई, ताकि स्थानीय बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर न जाना पड़े।

प्रश्न 7

पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है ?
Solution: प्रस्तुत पाठ के अनुसार, जीवन में उन इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है जिनके विचार ऊँचे होते हैं और जो दृढ़ संकल्प वाले होते हैं। जो लोग कभी झूठ नहीं बोलते, हमेशा सच का साथ देते हैं, किसी की बात को इधर-उधर नहीं करते और जिनके इरादे मजबूत होते हैं, उन्हें सम्मान मिलता है। ऐसे लोग जो हीन भावना से ग्रसित नहीं होते, जिनका व्यक्तित्व सरल, सहज और पारदर्शी होता है, और जो सद्भावना से व्यवहार करते हैं, उन्हें समाज आदर की दृष्टि से देखता है। साथ ही, जो लोग आवश्यकता पड़ने पर गलत रूढ़ियों को तोड़ने का साहस रखते हैं, वे भी श्रद्धा के पात्र बनते हैं।

प्रश्न 8

'सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है' इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Solution: 'सच अकेलेपन का मजा ही कुछ और है' यह कथन लेखिका और उनकी बहन के स्वतंत्र और साहसी व्यक्तित्व को दर्शाता है। लेखिका की बहन जिद्दी थी और जो सोचती थी, उसे करके ही दम लेती थी। अत्यधिक बारिश के बावजूद विद्यालय जाना उनके इसी दृढ़ निश्चयी स्वभाव को दिखाता है। इसी प्रकार, लेखिका ने भी डालमिया नगर में स्त्री-पुरुषों के नाटकों द्वारा सामाजिक कार्यों के लिए धन एकत्रित किया और कर्नाटक में स्कूल खोला। ये कार्य उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व, हिम्मत, धैर्य और लीक से हटकर अपनी राह बनाने की क्षमता का प्रमाण हैं। वे दोनों ही अपने विचारों पर अडिग रहने वाली महिलाएं थीं, जिन्हें अपने अकेलेपन में भी अपने कार्यों का आनंद मिलता था।

Common mistakes

  • Confusing the roles and characteristics of the grandmother and mother.
  • Underestimating the impact of indirect influence on social movements.
  • Misinterpreting the mother's leniency as weakness.
  • Failing to connect the characters' actions to their underlying beliefs.

Revision tips

  • Focus on the distinct personalities of each woman mentioned.
  • Note the specific incidents that highlight their courage and convictions.
  • Understand the author's perspective on each woman's life.
  • Relate the characters' actions to broader social and historical contexts.

Practice MCQs

Q1. लेखिका की नानी ने अपनी बेटी का विवाह किससे करने की इच्छा व्यक्त की थी?

Q2. लेखिका की माँ किस सिद्धांत का पालन करती थीं?

Q3. लेखिका की माँ ने चोर के पकड़े जाने पर क्या किया?

Q4. लेखिका ने कर्नाटक के बागनकोट में बच्चों की शिक्षा के लिए क्या किया?

Q5. पाठ के अनुसार, किन लोगों को श्रद्धा भाव से देखा जाता है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी कृतिका के अध्याय 2 'मेरे संग की औरतें' में किन मुख्य पात्रों का वर्णन है?

इस अध्याय में लेखिका की नानी, माँ, परदादी और स्वयं लेखिका के व्यक्तित्व का वर्णन है, जो अपने-अपने समय में लीक से हटकर सोच रखती थीं और साहसी थीं।

लेखिका की नानी ने अपनी बेटी की शादी क्रांतिकारी से कराने की इच्छा क्यों जताई?

लेखिका की नानी ने अपनी बेटी का विवाह एक क्रांतिकारी से कराने की इच्छा जताई क्योंकि वह स्वयं स्वतंत्रता की भावना रखती थीं और देश के प्रति प्रेम रखती थीं, भले ही उन्होंने कभी प्रत्यक्ष रूप से आंदोलन में भाग न लिया हो।

लेखिका की माँ ने चोर को सुधारने के लिए क्या अनूठा तरीका अपनाया?

लेखिका की माँ ने चोर को पकड़ने या दंडित करने के बजाय उससे सेवा ली, उसे अपना पुत्र माना और उसे अपनी मर्जी से चोरी करने या खेती करने का विकल्प दिया। इस सहज व्यवहार से चोर का हृदय परिवर्तन हुआ।

लेखिका ने शिक्षा के प्रसार के लिए क्या प्रयास किए?

लेखिका ने कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे में बच्चों के लिए स्कूल खुलवाया, जहाँ शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने स्वयं प्रयास करके और लोगों की मदद से स्कूल को सरकारी मान्यता भी दिलवाई।

यह अध्याय हमें जीवन के बारे में क्या सिखाता है?

यह अध्याय सिखाता है कि साहस, दृढ़ संकल्प, ईमानदारी और करुणा जैसे गुण हमें जीवन में आगे बढ़ाते हैं। यह भी बताता है कि परंपराओं से बंधे बिना भी हम अपने सिद्धांतों पर चलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

कक्षा 9 के लिए 'मेरे संग की औरतें' पाठ के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ये समाधान छात्रों को पाठ के पात्रों, उनकी प्रेरणाओं और मुख्य संदेशों को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

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