कक्षा 7 हिंदी - रहीम के दोहे NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पाठ्यपुस्तक में संकलित 'रहीम के दोहे' पर आधारित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें दोहों के भावार्थ, कथनों और उदाहरणों की पहचान, और जीवन में उनके महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई है। छात्रों को दोहों के माध्यम से परोपकार, सहनशीलता और धन के सदुपयोग जैसे मूल्यों को समझने में मदद मिलेगी। समाधानों में भाषा की बात के प्रश्नों के उत्तर भी शामिल हैं, जो शब्दों के प्रचलित रूपों और अनुप्रास अलंकार की पहचान पर केंद्रित हैं। यह विस्तृत समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 11 रहीम की दोहे |
Chapter summary
कक्षा 7 हिंदी के 'रहीम के दोहे' पाठ के ये NCERT समाधान छात्रों को रहीम द्वारा रचित प्रसिद्ध दोहों को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में दोहों के कथनों और उदाहरणों को अलग करना, क्वार के बादलों और निर्धन व्यक्तियों के बीच तुलना का विश्लेषण करना, और दोहों में निहित जीवन के मूल्यों जैसे परोपकार और सहनशीलता को अपने जीवन में उतारने के लाभों पर चर्चा की गई है। भाषा की बात के अंतर्गत शब्दों के सही रूप और अनुप्रास अलंकार के उदाहरण भी दिए गए हैं।
Learning outcomes
- दोहों में कथन और उदाहरण पंक्तियों को पहचानना सीखें।
- रहीम के दोहों के भावार्थ और जीवनोपयोगी संदेशों को समझें।
- क्वार के बादलों और निर्धन व्यक्तियों के बीच की तुलना का विश्लेषण करें।
- परोपकार और सहनशीलता जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने के लाभों को समझें।
- शब्दों के प्रचलित हिंदी रूपों को पहचानें।
- अनुप्रास अलंकार के प्रयोग को समझें और उसके उदाहरण खोजें।
Topics covered
Paper topics
- दोहों का अर्थ और भावार्थ
- कथन और उदाहरण की पहचान
- सच्चे मित्र की परिभाषा
- परोपकार का महत्व
- सहनशीलता का महत्व
- धन का सदुपयोग
- क्वार के बादल और निर्धन व्यक्ति की तुलना
- सावन के बादल
- शब्दों के प्रचलित रूप
- अनुप्रास अलंकार
Important topics
- दोहों का अर्थ और भावार्थ
- कथन और उदाहरण की पहचान
- सच्चे मित्र की परिभाषा
- परोपकार का महत्व
- सहनशीलता का महत्व
- शब्दों के प्रचलित रूप
- अनुप्रास अलंकार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
रहीम के दोहों में कुछ पंक्तियाँ सीधे सिद्धांत या बात कहती हैं जिन्हें 'कथन' कहा जाता है, और कुछ पंक्तियाँ उस कथन को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
कथन मात्र (बिना उदाहरण के):
- पहला दोहा: 'कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।।' इस दोहे में सच्चे मित्र की पहचान बताई गई है, जो विपत्ति में ही परखे जाते हैं।
- दूसरा दोहा: 'जाल परे जल जात बहि, तिज मीनन को मोह। रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह।।' इसमें मछली के जल के प्रति प्रेम को दर्शाया गया है, जो एक कथन है।
उदाहरण सहित कथन:
- तीसरा दोहा: 'तरूवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति-सचिहं सुजान ।।' यहाँ पहली दो पंक्तियाँ ('तरूवर फल...') उदाहरण हैं कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते। दूसरी दो पंक्तियाँ ('कहि रहीम...') कथन हैं कि सज्जन अपना धन दूसरों की भलाई के लिए संचित करते हैं।
- चौथा दोहा: 'थोथे बादर क्वार के, ज्यों रहीम घहरात। धनी पुरुष निर्धन भए, करें पाछिली बात ।।' यहाँ पहली पंक्ति ('थोथे बादर...') उदाहरण है कि क्वार के बादल केवल गरजते हैं, बरसते नहीं। दूसरी पंक्ति ('धनी पुरुष...') कथन है कि धनी होकर निर्धन हो जाने वाले लोग अपनी पिछली बातें करते रहते हैं।
- पाँचवाँ दोहा: 'धरती की-सी रीत है, सीत घाम औ मेह। जैसी परे सो सहि रहे, त्यों रहीम यह देह।।' यहाँ पहली पंक्ति ('धरती की-सी...') उदाहरण है कि धरती सर्दी, गर्मी और वर्षा को सहती है। दूसरी पंक्ति ('जैसी परे...') कथन है कि उसी प्रकार यह शरीर भी सुख-दुख को सहन करता है।
प्रश्न 2
रहीम ने क्वार के महीने में गरजने वाले बादलों की तुलना ऐसे निर्धन व्यक्तियों से की है जो कभी धनी थे, क्योंकि क्वार के बादल केवल शोर करते हैं (गरजते हैं) पर बरसते नहीं, जिससे किसी का भला नहीं होता। इसी प्रकार, जो व्यक्ति निर्धन होने पर भी अपनी पिछली अमीरी की बातें करते रहते हैं, वे भी केवल बातें ही करते हैं, उनसे वर्तमान में कोई लाभ नहीं होता। उनकी बातें खोखली होती हैं, ठीक वैसे ही जैसे क्वार के बादलों की गरज।
दोहे के आधार पर, सावन के बादल बरसते हैं और जल प्रदान करते हैं, जिससे धरती हरी-भरी होती है और जीवन को लाभ पहुँचता है। इसलिए, सावन के बरसने वाले बादल 'धनी' कहे जा सकते हैं क्योंकि वे उपयोगी होते हैं। इसके विपरीत, क्वार के केवल गरजने वाले बादल 'निर्धन' कहे जा सकते हैं क्योंकि वे केवल शोर करते हैं और कोई उपयोगी कार्य नहीं करते।
प्रश्न 1
- (क) तरूवर फल ... सचिहें सुजान।।
- (ख) धरती की-सी ... यह देह।।
(क) तरूवर फल ... सचिहें सुजान।।
इस दोहे में यह शिक्षा दी गई है कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना पानी स्वयं नहीं पीते, बल्कि वे दूसरों के हित के लिए होते हैं। इसी प्रकार, सज्जन (सुजान) अपना धन दूसरों की भलाई के लिए संचित करते हैं। यदि हम इस सच्चाई को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज में स्वार्थ की भावना समाप्त हो जाएगी। लोग एक-दूसरे की मदद करने के लिए तत्पर रहेंगे, जिससे आपसी प्रेम, सहयोग और समरसता बढ़ेगी। समाज में अभाव और दुख कम होगा तथा राष्ट्र की प्रगति तीव्र होगी।
(ख) धरती की-सी ... यह देह।।
इस दोहे में यह सीख दी गई है कि मनुष्य के शरीर को धरती के समान होना चाहिए, जो सर्दी, गर्मी, बरसात आदि सभी मौसमों और परिस्थितियों को बिना शिकायत किए सहन करती है। यदि हम इस सच्चाई को अपने जीवन में अपना लें, तो हम सुख और दुख, सफलता और असफलता, प्रशंसा और निंदा जैसी जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार कर पाएंगे। इससे हमारी मानसिक शांति बनी रहेगी और हम किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होंगे।
प्रश्न 1
जैसे-परे-पड़े (रे-ड़े)
बिपति बादर मछरी सीत
दिए गए शब्दों के प्रचलित हिंदी रूप इस प्रकार हैं:
- बिपति - विपत्ति
- बादर - बादल
- मछरी - मछली
- सीत - शीत
प्रश्न 2
- (क) बनत बहुत बहु रीत।
- (ख) जाल परे जल जात बहि।
उपर्युक्त उदाहरणों की पहली पंक्तियों में 'ब' का प्रयोग कई बार किया गया है और दूसरी में 'ज' का प्रयोग। इस प्रकार बार-बार एक ध्वनि के आने से भाषा की सुंदरता बढ़ जाती है। वाक्य रचना की इस विशेषता के अन्य उदाहरण खोजकर लिखिए।
यह विशेषता अनुप्रास अलंकार कहलाती है, जिसमें किसी वर्ण या ध्वनि की आवृत्ति से वाक्य की सुंदरता बढ़ती है। दिए गए उदाहरणों के अतिरिक्त कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं:
- (क) संपति-सचिहं सुजान। (यहाँ 'स' ध्वनि की आवृत्ति है)
- (ख) पीपल पावन पिता सरीखा। (यहाँ 'प' ध्वनि की आवृत्ति है)
- (ग) नीम ननद-ननदोई-सा। (यहाँ 'न' ध्वनि की आवृत्ति है)
- (घ) तरिन तनूजा तट तमाल तरुवर बहुछाए। (यहाँ 'त' ध्वनि की आवृत्ति है)
- (ङ) पीपर पात सरिस मन डोला। (यहाँ 'प' ध्वनि की आवृत्ति है)
Common mistakes
- दोहों में कथन और उदाहरण पंक्तियों को पहचानने में भ्रमित होना।
- दोहों के गहरे अर्थ को सतही तौर पर समझना।
- भाषा की बात के प्रश्नों में शब्दों के सही रूप या अलंकार पहचानने में त्रुटि करना।
Revision tips
- प्रत्येक दोहे को ध्यान से पढ़ें और उसके मुख्य संदेश को समझने का प्रयास करें।
- कथन और उदाहरण वाली पंक्तियों को अलग करने का अभ्यास करें।
- दोहों में दिए गए जीवन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन से जोड़कर देखें।
- भाषा की बात के प्रश्नों में दिए गए उदाहरणों को याद करें और स्वयं नए उदाहरण बनाने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. रहीम के अनुसार, कौन से मित्र सच्चे होते हैं?
Explanation: रहीम के दोहे के अनुसार, जो मित्र विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरते हैं, वही सच्चे मित्र होते हैं।
Q2. क्वार के बादल रहीम ने किसकी तुलना में कहे हैं?
Explanation: रहीम ने क्वार के गरजने वाले लेकिन न बरसने वाले बादलों की तुलना ऐसे निर्धन व्यक्तियों से की है जो अपनी बीती हुई बातें बताते हैं।
Q3. वृक्ष और सरोवर अपने फल और जल का उपयोग क्यों नहीं करते?
Explanation: रहीम के अनुसार, वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते, वे दूसरों के हित के लिए होते हैं।
Q4. मानव शरीर को धरती के समान क्यों बताया गया है?
Explanation: धरती की तरह शरीर को भी सुख और दुख, सर्दी और गर्मी, वर्षा आदि सभी परिवर्तनों को सहजता से सहने में सक्षम बताया गया है।
Q5. निम्नलिखित में से 'बादर' का शुद्ध हिंदी रूप क्या है?
Explanation: दिए गए शब्दों में 'बादर' का प्रचलित हिंदी रूप 'बादल' है।
Frequently asked questions
कक्षा 7 हिंदी के 'रहीम के दोहे' में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?
इस पाठ में रहीम के दोहों के माध्यम से मित्रता, परोपकार, सहनशीलता और धन के सदुपयोग जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को समझाया गया है। इसमें कथनों और उदाहरणों की पहचान तथा भाषा के प्रयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
दोहों में कथन और उदाहरण का क्या अर्थ है?
कथन वह पंक्ति होती है जो कोई बात या सिद्धांत बताती है, जबकि उदाहरण वह पंक्ति होती है जो उस कथन को सिद्ध करने के लिए कोई दृष्टांत प्रस्तुत करती है।
रहीम ने क्वार के बादलों की तुलना किससे की है और क्यों?
रहीम ने क्वार के गरजने वाले लेकिन न बरसने वाले बादलों की तुलना ऐसे निर्धन व्यक्तियों से की है जो अपनी बीती हुई धन-संपत्ति की बातें करके दूसरों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, जबकि उनके पास वर्तमान में कुछ नहीं होता।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान दोहों के विस्तृत अर्थ, अभ्यास प्रश्नों के हल और भाषा संबंधी जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे छात्र पाठ की गहरी समझ विकसित कर सकते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हो सकते हैं।
'भाषा की बात' खंड में क्या सिखाया गया है?
'भाषा की बात' खंड में शब्दों के प्रचलित हिंदी रूपों को पहचानने और अनुप्रास अलंकार के प्रयोग को समझने का अभ्यास कराया गया है, जिससे भाषा की सुंदरता बढ़ती है।
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