कक्षा 12 समाजशास्त्र अध्याय 13: जनसंपर्क और सामाजिक परिवर्तन - NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 12 समाजशास्त्र के अध्याय 13, 'जनसंपर्क और सामाजिक परिवर्तन' के लिए व्यापक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें समाचार-पत्र उद्योग में तकनीकी प्रगति और बाजार की गतिशीलता के कारण हुए परिवर्तनों की पड़ताल की गई है, जिसमें शिक्षित शहरी आबादी की वृद्धि और क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्रों की बढ़ती लोकप्रियता जैसे कारकों पर प्रकाश डाला गया है। समाधानों में यह भी बताया गया है कि कैसे प्रिंट मीडिया ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के उदय के बावजूद अनुकूलन किया है, जिसमें उत्पादन और वितरण के लिए नई तकनीकों को अपनाना और विपणन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह खंड रेडियो के निरंतर महत्व पर चर्चा करता है, यह बताते हुए कि एफएम स्टेशनों के विस्तार और निजीकरण के बावजूद यह एक महत्वपूर्ण जनसंचार माध्यम बना हुआ है। अंत में, टेलीविजन के माध्यम से हुए परिवर्तनों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें ग्रामीण विकास के लिए इसके शुरुआती उपयोग से लेकर उपग्रह चैनलों के प्रसार तक का सफर शामिल है। ये समाधान छात्रों को जनसंचार के विभिन्न माध्यमों और समाज पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | समाजशास्त्र |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 13. जनसंपर्क और सामाजिक परिवर्तन |
Chapter summary
कक्षा 12 समाजशास्त्र के अध्याय 13 के लिए ये NCERT समाधान जनसंपर्क के विभिन्न माध्यमों और सामाजिक परिवर्तन पर उनके प्रभाव पर केंद्रित हैं। इसमें समाचार-पत्र उद्योग में हुए तकनीकी और विपणन संबंधी परिवर्तनों, रेडियो की निरंतर प्रासंगिकता और एफएम स्टेशनों के विस्तार, तथा टेलीविजन के विकास और प्रसार का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को इन माध्यमों के विकास, उनकी चुनौतियों और समाज पर उनके प्रभाव को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- समाचार-पत्र उद्योग में हो रहे विभिन्न परिवर्तनों की पहचान करना।
- प्रिंट मीडिया के विकास में शिक्षित शहरी आबादी और क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका को समझना।
- रेडियो के जनसंचार माध्यम के रूप में निरंतर महत्व का विश्लेषण करना।
- एफएम स्टेशनों के विस्तार और निजीकरण के प्रभाव पर चर्चा करना।
- टेलीविजन के माध्यम से समाज में हुए परिवर्तनों की रूपरेखा प्रस्तुत करना।
- जनसंचार माध्यमों के विकास और सामाजिक परिवर्तन के बीच संबंध को समझना।
Topics covered
Paper topics
- समाचार-पत्र उद्योग में परिवर्तन
- प्रिंट मीडिया का विकास
- क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्र
- नई प्रौद्योगिकियों की भूमिका
- विपणन रणनीतियाँ
- रेडियो की प्रासंगिकता
- एफएम स्टेशनों का विस्तार
- निजीकृत रेडियो
- टेलीविजन का विकास
- उपग्रह टेलीविजन
- जनसंचार माध्यम और सामाजिक परिवर्तन
- मीडिया का व्यावसायिकरण
Important topics
- समाचार-पत्र उद्योग में परिवर्तन और अनुकूलन
- क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्रों का महत्व
- रेडियो की निरंतर प्रासंगिकता और एफएम का विस्तार
- टेलीविजन के माध्यम से हुए सामाजिक परिवर्तन
- जनसंचार माध्यमों पर विज्ञापनदाताओं का प्रभाव
- मीडिया का उपभोक्ता उत्पाद के रूप में विकास
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
समाचार-पत्र उद्योग में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जो मुख्य रूप से तकनीकी प्रगति, बाजार की बदलती गतिशीलता और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रतिस्पर्धा के कारण हुए हैं। इन परिवर्तनों की रूपरेखा इस प्रकार है:
- तकनीकी उन्नयन: नई मुद्रण प्रौद्योगिकियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के आगमन ने समाचार-पत्रों के उत्पादन और वितरण को नया आयाम दिया है। इससे प्रकाशन प्रक्रिया तेज हुई है और गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
- पाठकों की संख्या में वृद्धि: ऐसा अनुमान था कि टेलीविजन और इंटरनेट के विकास से प्रिंट मीडिया का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा, लेकिन इसके विपरीत, भारत में शिक्षित शहरी आबादी की वृद्धि के साथ समाचार-पत्रों की प्रसार संख्या में वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, हिंदी दैनिक 'हिंदुस्तान' की प्रतियाँ 2003 से 2005 के बीच अप्रत्याशित रूप से बढ़ीं, जिसका मुख्य कारण दिल्ली की बड़ी हिंदी भाषी आबादी है।
- क्षेत्रीय भाषाओं का महत्व: बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों और गाँवों में पाठकों की रुचियाँ अक्सर अलग होती हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्र इन रुचियों को पूरा करते हैं। 'मलयाली मनोरमा' और 'ईनाडु' जैसे प्रमुख भारतीय भाषा के पत्रों का गठन क्षेत्रीय महत्व को ध्यान में रखकर किया गया था और वे जिला संस्करणों के साथ प्रकाशित होते हैं। 'दिन तंती' जैसे समाचार-पत्रों ने हमेशा सरल और बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है।
- विपणन रणनीतियाँ: भारतीय भाषाओं के समाचार-पत्रों ने उन्नत मुद्रण प्रौद्योगिकियों को अपनाने के साथ-साथ अनुपूरक अंक और साहित्यिक पुस्तिकाएँ प्रकाशित करने जैसे प्रयास किए हैं। दैनिक भास्कर समूह जैसी कंपनियों ने उपभोक्ता संपर्क कार्यक्रम, घर-घर जाकर सर्वेक्षण और अनुसंधान जैसी विपणन संबंधी रणनीतियों को अपनाकर समृद्धि हासिल की है।
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रतिस्पर्धा: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से मुकाबला करने के लिए, विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा के समाचार-पत्रों ने अपनी कीमतें घटाई हैं और एक साथ अनेक केंद्रों से अपने संस्करण निकालने लगे हैं।
- उपभोक्ता उत्पाद के रूप में: समाचार-पत्र अब एक उपभोक्ता उत्पाद का रूप लेते जा रहे हैं। जैसे-जैसे इनकी संरचना बढ़ रही है, बिक्री पर निर्भरता भी बढ़ती जा रही है।
मेरी राय में: ये परिवर्तन दर्शाते हैं कि प्रिंट मीडिया, विशेष रूप से भारतीय संदर्भ में, अभी भी प्रासंगिक है और इसने बदलते परिवेश के अनुकूल खुद को ढाला है। क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय रुचियों पर ध्यान केंद्रित करना इसकी सफलता का एक प्रमुख कारक रहा है। हालांकि, विज्ञापनों पर बढ़ती निर्भरता सामग्री की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर सवाल उठा सकती है। आधुनिक मास मीडिया के लिए एक औपचारिक संरचनात्मक संगठन का होना आवश्यक है ताकि वह प्रभावी ढंग से काम कर सके।
प्रश्न 2
यह अवधारणा कि रेडियो जनसंचार के माध्यम के रूप में समाप्त हो रहा है, गलत साबित हुई है। टेलीविजन, इंटरनेट और अन्य दृश्य-श्रव्य माध्यमों के आने के बावजूद, रेडियो अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। भारत में एफएम स्टेशनों के सामर्थ्य पर उदारीकरण के बाद चर्चा इस प्रकार है:
- रेडियो की व्यापक पहुँच: वर्ष 2000 तक, आकाशवाणी के कार्यक्रम भारत के दो-तिहाई से अधिक घरों में 24 भाषाओं और 146 बोलियों में 12 करोड़ से अधिक रेडियो सेटों पर सुने जा सकते थे। यह दर्शाता है कि रेडियो की पहुँच अभी भी बहुत व्यापक है।
- एफएम स्टेशनों का उदय: 2002 में गैर-सरकारी स्वामित्व वाले एफएम रेडियो स्टेशनों की स्थापना से रेडियो पर मनोरंजक कार्यक्रमों में वृद्धि हुई। इन निजी एफएम स्टेशनों ने श्रोताओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार के लोकप्रिय संगीत और कार्यक्रमों की पेशकश की।
- सामग्री पर प्रतिबंध: गैर-सरकारी एफएम चैनलों को राजनीतिक समाचार बुलेटिन प्रसारित करने की अनुमति नहीं है। इस वजह से, वे श्रोताओं को लुभाए रखने के लिए संगीत या अन्य विशिष्ट प्रकार के कार्यक्रमों में विशेषज्ञता रखते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ चैनल केवल हिट गानों का प्रसारण करते हैं।
- मीडिया समूहों का स्वामित्व: अधिकांश एफएम चैनल, जो युवा शहरी पेशेवरों और छात्रों के बीच लोकप्रिय हैं, बड़े मीडिया समूहों के स्वामित्व में हैं। जैसे 'रेडियो मिर्ची' टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का है, 'रेड एफएम' लिविंग मीडिया का, और 'रेडियो सिटी' स्टार नेटवर्क के स्वामित्व में है।
- स्वतंत्र रेडियो स्टेशनों की कमी: नेशनल पब्लिक रेडियो (यूएसए) या बीबीसी (यूके) जैसे स्वतंत्र सार्वजनिक प्रसारण रेडियो स्टेशनों की तरह, भारत के प्रसारण परिदृश्य में ऐसे स्टेशन कम हैं।
- फिल्मों में रेडियो का प्रयोग: 'रंग दे बसंती' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' जैसी फिल्मों में रेडियो के महत्व और प्रभाव को दर्शाया गया है।
- भविष्य की संभावनाएँ: एफएम चैनलों के प्रयोग की संभावनाएँ अत्यधिक हैं। रेडियो स्टेशनों के बढ़ते निजीकरण और समुदाय के स्वामित्व वाले रेडियो स्टेशनों के उद्भव से रेडियो स्टेशनों की संख्या में और वृद्धि होने की उम्मीद है। स्थानीय समाचारों को सुनने की माँग बढ़ रही है, जो स्थानीय रेडियो की भूमिका को मजबूत करती है।
निष्कर्षतः, एफएम स्टेशनों के विस्तार और निजीकरण के बावजूद, रेडियो एक महत्वपूर्ण जनसंचार माध्यम बना हुआ है। यह अपनी व्यापक पहुँच, मनोरंजन क्षमता और स्थानीय सामग्री की बढ़ती माँग के कारण समाप्त नहीं हो रहा है, बल्कि नए रूप में विकसित हो रहा है।
प्रश्न 3
टेलीविजन (टीवी) ने भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक और सूचनात्मक परिदृश्य में क्रांति ला दी है। इसके माध्यम से हुए परिवर्तन इस प्रकार हैं:
- प्रारंभिक चरण (ग्रामीण विकास पर ध्यान): भारत में 1959 में प्रायोगिक तौर पर टेलीविजन कार्यक्रमों का आरंभ मुख्य रूप से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। उपग्रह निर्देशित टेलीविजन प्रयोग (SITE) ने अगस्त 1975 से जुलाई 1976 के बीच भारत के छह राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे कार्यक्रम प्रसारित किए, जो 2400 टीवी सेटों के लिए प्रतिदिन 4 घंटे के कार्यक्रम प्रदान करते थे।
- दूरदर्शन का एकाधिकार: 1991 तक, भारत में केवल एक ही राज्य नियंत्रित टीवी चैनल, दूरदर्शन, उपलब्ध था।
- उपग्रह चैनलों का विस्फोट: 1998 तक, चैनलों की संख्या बढ़कर लगभग 70 हो गई थी। 1990 के दशक के मध्य भाग से गैर-सरकारी चैनलों की संख्या में कई गुना वृद्धि देखी गई। गैर-सरकारी उपग्रह टेलीविजन में यह आश्चर्यजनक वृद्धि समकालीन भारत में हुए निर्णायक विकासों में से एक है।
- वैश्विक प्रभाव: 1991 के खाड़ी युद्ध ने सीएनएन (CNN) जैसे अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों को लोकप्रिय बनाया, जिसने वैश्विक घटनाओं के कवरेज के तरीके को बदल दिया। इसी वर्ष हांगकांग के ह्वामपोआ हचिनसन जैसे मीडिया समूहों ने भी विस्तार किया।
- सामग्री और पहुँच में विविधता: उपग्रह चैनलों के आगमन से विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों - समाचार, मनोरंजन, खेल, शिक्षा, संगीत आदि - की उपलब्धता बढ़ी। इसने दर्शकों को अधिक विकल्प प्रदान किए और सूचना तथा मनोरंजन के उपभोग के तरीके को बदल दिया।
- सांस्कृतिक प्रभाव: टेलीविजन ने भारतीय समाज में सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया है, जिससे विभिन्न संस्कृतियों के प्रभाव बढ़े हैं और जीवन शैली में बदलाव आए हैं। इसने सामाजिक मानदंडों और मूल्यों को भी प्रभावित किया है।
- सूचना का प्रसार: टेलीविजन सूचना के प्रसार का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है, जिसने लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से अवगत कराया है।
संक्षेप में, टेलीविजन ने भारत में सूचना, मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है। ग्रामीण विकास के एक उपकरण के रूप में शुरू होकर, यह आज एक बहुआयामी माध्यम बन गया है जिसने समाज के लगभग हर पहलू को प्रभावित किया है।
Common mistakes
- यह मानना कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आगमन से प्रिंट मीडिया समाप्त हो जाएगा।
- रेडियो की प्रासंगिकता को कम आंकना, भले ही एफएम स्टेशनों का विस्तार हुआ हो।
- जनसंचार माध्यमों के व्यावसायिकरण के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
- क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्रों के महत्व को कम समझना।
Revision tips
- प्रत्येक जनसंचार माध्यम (समाचार-पत्र, रेडियो, टेलीविजन) में हुए प्रमुख परिवर्तनों को सूचीबद्ध करें।
- इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मुकाबले प्रिंट मीडिया द्वारा अपनाई गई रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करें।
- एफएम रेडियो स्टेशनों के विस्तार और उनकी सामग्री पर लगे प्रतिबंधों को समझें।
- टेलीविजन के विकास के विभिन्न चरणों और उसके सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करें।
- जनसंपर्क और सामाजिक परिवर्तन के बीच संबंध स्थापित करने वाले उदाहरणों को याद रखें।
Practice MCQs
Q1. समाचार-पत्र उद्योग में वृद्धि का एक प्रमुख कारण क्या है?
Explanation: भारत में, विशेषकर दिल्ली जैसे शहरों में, हिंदी भाषी राज्यों से आए शिक्षित शहरी आबादी की बड़ी संख्या ने हिंदी दैनिकों के प्रसार में अप्रत्याशित वृद्धि की है।
Q2. क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्रों की सफलता का एक कारण क्या है?
Explanation: क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार-पत्र, जैसे 'मलयाली मनोरमा' और 'ईनाडु', स्थानीय महत्व और पाठकों की विशिष्ट रुचियों को ध्यान में रखकर प्रकाशित होते हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ती है।
Q3. एफएम रेडियो स्टेशनों को राजनीतिक समाचार बुलेटिन प्रसारित करने की अनुमति क्यों नहीं है?
Explanation: गैर-सरकारी एफएम चैनलों को राजनीतिक समाचार बुलेटिन प्रसारित करने की अनुमति नहीं है, जिसके कारण वे श्रोताओं को आकर्षित करने के लिए संगीत और अन्य मनोरंजक कार्यक्रमों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
Q4. 1991 के बाद टेलीविजन में किस प्रकार की वृद्धि देखी गई?
Explanation: 1991 के बाद, विशेष रूप से 1990 के दशक के मध्य से, गैर-सरकारी उपग्रह टेलीविजन चैनलों की संख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई, जिसने समकालीन भारत में एक महत्वपूर्ण विकास को चिह्नित किया।
Q5. समाचार-पत्रों की विषय-वस्तु में विज्ञापनदाताओं की भूमिका क्यों बढ़ गई है?
Explanation: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से प्रतिस्पर्धा के कारण समाचार-पत्रों को अपनी कीमतें घटानी पड़ी हैं, जिससे विज्ञापनों के प्रायोजकों पर उनकी निर्भरता बढ़ गई है, और परिणामस्वरूप विज्ञापनों का विषय-वस्तु पर प्रभाव बढ़ा है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 समाजशास्त्र के अध्याय 13 में किन मुख्य जनसंचार माध्यमों पर चर्चा की गई है?
अध्याय 13 मुख्य रूप से तीन जनसंचार माध्यमों पर चर्चा करता है: समाचार-पत्र, रेडियो और टेलीविजन। यह इन माध्यमों में हुए परिवर्तनों और सामाजिक परिवर्तन पर उनके प्रभाव का विश्लेषण करता है।
क्या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आने से समाचार-पत्रों का महत्व कम हो गया है?
स्रोत के अनुसार, ऐसा अनुमान था कि टेलीविजन और इंटरनेट के विकास से प्रिंट मीडिया का भविष्य समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समाचार-पत्रों ने नई तकनीकों को अपनाकर और अपनी रणनीतियों में बदलाव करके अनुकूलन किया है, जिससे उनका प्रसार बढ़ा है।
एफएम रेडियो स्टेशनों की क्या भूमिका है?
एफएम रेडियो स्टेशनों ने रेडियो को एक मनोरंजक माध्यम के रूप में पुनर्जीवित किया है। ये स्टेशन अक्सर युवा शहरी दर्शकों को लक्षित करते हैं और लोकप्रिय संगीत पर ध्यान केंद्रित करते हैं, हालांकि उन्हें राजनीतिक समाचार प्रसारित करने की अनुमति नहीं है।
टेलीविजन ने भारत में सामाजिक परिवर्तन को कैसे प्रभावित किया है?
टेलीविजन, विशेष रूप से उपग्रह चैनलों के प्रसार के बाद, भारत में सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है। इसने सूचना, मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के तरीके को बदल दिया है।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को जनसंचार माध्यमों और सामाजिक परिवर्तन से संबंधित अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। यह परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है।
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