कक्षा 12 अर्थशास्त्र: प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार - NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 12 अर्थशास्त्र के अध्याय 6, 'प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह छात्रों को कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR), और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच संबंधों को समझने में मदद करता है, विशेष रूप से विभिन्न माँग वक्र आकृतियों के संदर्भ में। समाधानों में यह भी बताया गया है कि कैसे माँग की कीमत लोच (Elasticity of Demand - EDp) इन संप्राप्ति वक्रों के आकार को प्रभावित करती है। छात्रों को विभिन्न परिदृश्यों में कुल संप्राप्ति, माँग वक्र और सीमान्त संप्राप्ति की गणना करने और उनका विश्लेषण करने के तरीके सिखाए जाते हैं। यह विस्तृत स्पष्टीकरण छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
SubjectEconomics.
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार

Chapter summary

अध्याय 6, 'प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार' के ये NCERT समाधान, छात्रों को कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR), और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच महत्वपूर्ण संबंधों को समझने में मदद करते हैं। इसमें विभिन्न माँग वक्रों के तहत TR वक्र के आकार का विश्लेषण किया गया है, जिसमें मूल बिंदु से गुजरने वाली रेखा और क्षैतिज रेखा शामिल हैं। समाधान माँग की कीमत लोच (EDp) के आधार पर MR के व्यवहार की भी पड़ताल करते हैं, और कुल व्यय विधि का उपयोग करके लोच का निर्धारण करते हैं।

Learning outcomes

  • कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR), और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच संबंधों को समझें।
  • विभिन्न माँग वक्रों के लिए TR वक्र के आकार का विश्लेषण करें।
  • माँग की कीमत लोच (EDp) और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच संबंध की व्याख्या करें।
  • कुल व्यय विधि का उपयोग करके माँग की लोच की गणना करें।
  • प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार में संप्राप्ति की अवधारणाओं को लागू करें।

Topics covered

Paper topics

  • प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार
  • कुल संप्राप्ति (TR)
  • औसत संप्राप्ति (AR)
  • सीमान्त संप्राप्ति (MR)
  • माँग वक्र का आकार
  • माँग की कीमत लोच (EDp)
  • प्रतिशत विधि
  • कुल व्यय विधि
  • TR, AR, MR और EDp के बीच संबंध

Important topics

  • TR, AR, MR के बीच संबंध
  • माँग वक्र के विभिन्न आकारों का विश्लेषण
  • माँग की कीमत लोच की गणना (प्रतिशत और कुल व्यय विधि)
  • लोचदार, बेलोचदार और इकाई लोचदार माँग में MR का व्यवहार

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Questions and Solutions

प्रश्न 1 और 2

प्रश्न 1: माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल संप्राप्ति वक्र मूल बिन्दु से होकर गुजरती हुई धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा हो। प्रश्न 2: माँग वक्र का आकार क्या होगा ताकि कुल संप्राप्ति वक्र समस्तरीय रेखा हो।
Solution:

जब कुल संप्राप्ति (TR) वक्र मूल बिंदु से होकर गुजरती हुई एक धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा होती है, तो इसका अर्थ है कि प्रत्येक अतिरिक्त इकाई की बिक्री से समान मात्रा में संप्राप्ति प्राप्त होती है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब औसत संप्राप्ति (AR), जो माँग वक्र का प्रतिनिधित्व करती है, एक क्षैतिज रेखा होती है। एक क्षैतिज AR वक्र पूर्णतः लोचदार माँग को दर्शाता है, जहाँ कीमत स्थिर रहती है।

हालाँकि, प्रश्न में 'धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा' का उल्लेख है, जो AR के नीचे की ओर ढलान को इंगित करता है। इस स्थिति में, TR वक्र मूल बिंदु से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ेगा, लेकिन यह एक सीधी रेखा नहीं होगी यदि AR की लोच बदलती रहती है। यदि AR एक नीचे की ओर ढलान वाली रेखा है, तो TR वक्र पहले बढ़ेगा, अधिकतम होगा, और फिर घटेगा।

जब कुल संप्राप्ति वक्र एक समस्तरीय रेखा (क्षैतिज रेखा) होती है, तो इसका मतलब है कि बेची गई मात्रा में परिवर्तन के बावजूद कुल संप्राप्ति स्थिर रहती है। यह स्थिति तब संभव है जब AR (माँग वक्र) शून्य हो, जो कि व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है क्योंकि फर्म को कुछ कीमत तो वसूलनी ही होगी। यदि AR शून्य नहीं है, तो TR समस्तरीय नहीं हो सकती, जब तक कि AR = 0 न हो।

प्रश्न 3

प्रश्न 3: नीचे दी गई सारणी से कुल संप्राप्ति, माँग वक्र और माँग की कीमत लोच की गणना कीजिए।

मात्रा (Q): 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9

सीमान्त संप्राप्ति (MR): 10, 6, 2, 2, 2, 0, 0, 0, -5

Solution:

हम दी गई सीमान्त संप्राप्ति (MR) से कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR) और माँग की कीमत लोच (EDp) की गणना कर सकते हैं।

1. कुल संप्राप्ति (TR) की गणना:

TR की गणना प्रत्येक मात्रा स्तर पर MR को जोड़कर की जाती है।

मात्रा (Q) सीमान्त संप्राप्ति (MR) कुल संप्राप्ति (TR = ΣMR)
1 10 10
2 6 10 + 6 = 16
3 2 16 + 2 = 18
4 2 18 + 2 = 20
5 2 20 + 2 = 22
6 0 22 + 0 = 22
7 0 22 + 0 = 22
8 0 22 + 0 = 22
9 -5 22 - 5 = 17

2. औसत संप्राप्ति (AR) की गणना:

AR की गणना TR को Q से विभाजित करके की जाती है (AR = TR / Q)। AR माँग वक्र का प्रतिनिधित्व करता है।

मात्रा (Q) कुल संप्राप्ति (TR) औसत संप्राप्ति (AR = TR/Q)
1 10 10 / 1 = 10
2 16 16 / 2 = 8
3 18 18 / 3 = 6
4 20 20 / 4 = 5
5 22 22 / 5 = 4.4
6 22 22 / 6 = 3.66 (लगभग)
7 22 22 / 7 = 3.14 (लगभग)
8 22 22 / 8 = 2.75
9 17 17 / 9 = 1.88 (लगभग)

3. माँग की कीमत लोच (EDp) की गणना:

हम प्रतिशत विधि और कुल व्यय विधि दोनों का उपयोग कर सकते हैं।

a) प्रतिशत विधि: EDp = (ΔQ / Q) / (ΔP / P)

हमें AR (कीमत) और Q के मानों से ΔP की गणना करनी होगी।

  • जब Q 1 से 2 होता है (ΔQ = 1), P 10 से 8 होता है (ΔP = -2)। EDp = (1/1) / (-2/10) = 1 / (-0.2) = -5। निरपेक्ष मान 5 है (लोचदार)।
  • जब Q 2 से 3 होता है (ΔQ = 1), P 8 से 6 होता है (ΔP = -2)। EDp = (1/2) / (-2/8) = 0.5 / (-0.25) = -2। निरपेक्ष मान 2 है (लोचदार)।
  • जब Q 3 से 4 होता है (ΔQ = 1), P 6 से 5 होता है (ΔP = -1)। EDp = (1/3) / (-1/6) = 0.33 / (-0.167) = -2 (लगभग)। निरपेक्ष मान 2 है (लोचदार)।
  • जब Q 4 से 5 होता है (ΔQ = 1), P 5 से 4.4 होता है (ΔP = -0.6)। EDp = (1/4) / (-0.6/5) = 0.25 / (-0.12) = -2.08 (लगभग)। निरपेक्ष मान 2.09 है (लोचदार)।
  • जब Q 5 से 6 होता है (ΔQ = 1), P 4.4 से 3.66 होता है (ΔP = -0.74)। EDp = (1/5) / (-0.74/4.4) = 0.2 / (-0.168) = -1.19 (लगभग)। निरपेक्ष मान 1.19 है (लोचदार)।
  • जब Q 6 से 7 होता है (ΔQ = 1), P 3.66 से 3.14 होता है (ΔP = -0.52)। EDp = (1/6) / (-0.52/3.66) = 0.167 / (-0.142) = -1.17 (लगभग)। निरपेक्ष मान 1.17 है (लोचदार)।
  • जब Q 7 से 8 होता है (ΔQ = 1), P 3.14 से 2.75 होता है (ΔP = -0.39)। EDp = (1/7) / (-0.39/3.14) = 0.143 / (-0.124) = -1.15 (लगभग)। निरपेक्ष मान 1.15 है (लोचदार)।
  • जब Q 8 से 9 होता है (ΔQ = 1), P 2.75 से 1.88 होता है (ΔP = -0.87)। EDp = (1/8) / (-0.87/2.75) = 0.125 / (-0.316) = -0.39 (लगभग)। निरपेक्ष मान 0.39 है (बेलोचदार)।

b) कुल व्यय (Total Expenditure - TE) विधि: TE = P × Q = TR

  • Q=1, P=10, TE=10
  • Q=2, P=8, TE=16
  • Q=3, P=6, TE=18
  • Q=4, P=5, TE=20
  • Q=5, P=4.4, TE=22
  • Q=6, P=3.66, TE=22
  • Q=7, P=3.14, TE=22
  • Q=8, P=2.75, TE=22
  • Q=9, P=1.88, TE=17

विश्लेषण:

  • इकाई 1 से 5 तक, कीमत कम होने पर कुल व्यय बढ़ रहा है (10 से 22 तक)। इसका मतलब है कि माँग लोचदार है (EDp > 1)।
  • इकाई 5 से 8 तक, कीमत कम होने पर कुल व्यय स्थिर रहता है (22 पर)। इसका मतलब है कि माँग इकाई लोचदार है (EDp = 1)।
  • इकाई 8 से 9 तक, कीमत कम होने पर कुल व्यय घट रहा है (22 से 17 तक)। इसका मतलब है कि माँग बेलोचदार है (EDp < 1)।

निष्कर्ष:

माँग वक्र (AR) नीचे की ओर ढलान वाला है। सीमान्त संप्राप्ति (MR) धनात्मक है जब माँग लोचदार होती है (Q=1 से Q=5 के बीच), शून्य है जब माँग इकाई लोचदार होती है (Q=5 से Q=8 के बीच), और ऋणात्मक है जब माँग बेलोचदार होती है (Q=9 पर)।

प्रश्न 4

प्रश्न 4: जब माँग वक्र लोचदार हो तो सीमान्त संप्राप्ति का मूल्य क्या होगा?
Solution:

जब माँग वक्र लोचदार होता है, अर्थात माँग की कीमत लोच (EDp) 1 से अधिक होती है (EDp > 1), तो सीमान्त संप्राप्ति (MR) का मूल्य धनात्मक होता है।

इसका कारण यह है कि जब माँग लोचदार होती है, तो कीमत में थोड़ी सी कमी करने पर बेची जाने वाली मात्रा में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि होती है। इस बढ़ी हुई मात्रा को बेचने से कुल संप्राप्ति में वृद्धि होती है, जिससे सीमान्त संप्राप्ति (जो अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल संप्राप्ति में होने वाला परिवर्तन है) धनात्मक होती है।

जैसे-जैसे कीमत गिरती है और माँग लोचदार बनी रहती है, MR धनात्मक रहता है लेकिन घटता जाता है। जब माँग इकाई लोचदार (EDp = 1) हो जाती है, तो MR शून्य हो जाता है। जब माँग बेलोचदार (EDp < 1) हो जाती है, तो MR ऋणात्मक हो जाता है।

Common mistakes

  • TR, AR और MR के बीच के अंतर को समझने में भ्रमित होना।
  • माँग वक्र के आकार और संबंधित संप्राप्ति वक्रों के बीच संबंध को गलत समझना।
  • माँग की कीमत लोच की गणना में त्रुटियाँ करना, विशेष रूप से प्रतिशत विधि या कुल व्यय विधि का उपयोग करते समय।
  • लोचदार, बेलोचदार और इकाई लोचदार माँग की स्थितियों में MR के व्यवहार को गलत तरीके से जोड़ना।

Revision tips

  • TR, AR, और MR के बीच के सूत्रों और उनके ग्राफिक निरूपण को अच्छी तरह से याद करें।
  • विभिन्न माँग वक्रों (जैसे, सीधी रेखा, क्षैतिज रेखा) के लिए TR वक्र के आकार को चित्रित करने का अभ्यास करें।
  • माँग की कीमत लोच की गणना के लिए प्रतिशत विधि और कुल व्यय विधि के चरणों को समझें।
  • लोचदार, बेलोचदार और इकाई लोचदार माँग की स्थितियों में MR के चिन्ह (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य) को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. यदि कुल संप्राप्ति (TR) वक्र मूल बिंदु से होकर गुजरती हुई एक धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा है, तो माँग वक्र (AR) का आकार क्या होगा?

Q2. जब माँग वक्र लोचदार (EDp > 1) होता है, तो सीमान्त संप्राप्ति (MR) का मूल्य क्या होता है?

Q3. कुल व्यय विधि के अनुसार, यदि कीमत कम होने पर कुल व्यय बढ़ता है, तो माँग की लोच (EDp) क्या होगी?

Q4. यदि सीमान्त संप्राप्ति (MR) शून्य है, तो माँग की कीमत लोच (EDp) का मान क्या होगा?

Q5. प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार में, AR वक्र का नीचे की ओर ढलान यह दर्शाता है कि:

Frequently asked questions

कक्षा 12 अर्थशास्त्र में 'प्रतिस्पर्धा रहित बाज़ार' अध्याय के मुख्य बिंदु क्या हैं?

इस अध्याय के मुख्य बिंदु कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR), और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच संबंध, विभिन्न माँग वक्रों के तहत TR वक्र का आकार, और माँग की कीमत लोच (EDp) का MR पर प्रभाव हैं।

TR वक्र का मूल बिंदु से गुजरना क्या दर्शाता है?

यदि TR वक्र मूल बिंदु से गुजरती हुई एक धनात्मक प्रवणता वाली सरल रेखा है, तो यह इंगित करता है कि AR (माँग वक्र) एक क्षैतिज रेखा है, जिसका अर्थ है कि कीमत स्थिर है और फर्म पूर्णतः लोचदार माँग का सामना कर रही है।

माँग की कीमत लोच (EDp) और सीमान्त संप्राप्ति (MR) के बीच क्या संबंध है?

जब माँग लोचदार (EDp > 1) होती है, तो MR धनात्मक होता है। जब माँग इकाई लोचदार (EDp = 1) होती है, तो MR शून्य होता है। जब माँग बेलोचदार (EDp < 1) होती है, तो MR ऋणात्मक होता है।

कुल व्यय विधि से माँग की लोच कैसे ज्ञात की जाती है?

कुल व्यय विधि में, कीमत में परिवर्तन के साथ कुल व्यय (जो कुल संप्राप्ति के बराबर है) में होने वाले परिवर्तन को देखा जाता है। यदि कीमत घटने पर कुल व्यय बढ़ता है, तो माँग लोचदार (EDp > 1) है; यदि कुल व्यय घटता है, तो माँग बेलोचदार (EDp < 1) है; और यदि कुल व्यय स्थिर रहता है, तो माँग इकाई लोचदार (EDp = 1) है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे अवधारणाओं की गहरी समझ विकसित होती है और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकारों को हल करने का अभ्यास मिलता है।

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