NCERT Class 5 Hindi Veena: Chapter 7 — मेरा बचपन
यह अध्याय 'मेरा बचपन' लेखक के बचपन की स्मृतियों का वर्णन करता है। लेखक अपने टूटे घर, साधारण बिछौने और नंगे बदन खेतों में घूमने के दिनों को याद करते हैं। वे अपने चचेरे भाई हलधर के साथ मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाने का ज़िक्र करते हैं। रामलीला के प्रति उनका उत्साह और पात्रों की सजावट में उनकी सक्रिय भागीदारी का वर्णन है। लेखक गुल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक भारतीय खेलों की महत्ता पर प्रकाश डालते हैं और बताते हैं कि कैसे ये खेल बिना किसी खर्च के खेले जा सकते हैं। वे अंग्रेजी खेलों के महंगे सामान और भारतीय खेलों के प्रति अरुचि पर भी चिंता व्यक्त करते हैं। यह अध्याय बचपन की मासूमियत, खेल और पारंपरिक संस्कृति के महत्व को दर्शाता है, जो कक्षा 5 के छात्रों के लिए CBSE पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | Hindi |
| Book | Veena |
| Chapter | Chapter 7 — मेरा बचपन |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 2 minutes |
| Word count | 305 |
Learning outcomes
- बचपन की स्मृतियों को समझना।
- पारंपरिक भारतीय खेलों के महत्व को जानना।
- सांस्कृतिक धरोहर के प्रति रुचि विकसित करना।
- लेखक के अनुभवों से सीखना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| पयाल | फसल का सूखा तना या भूसा |
| बिछौना | सोने या बैठने के लिए बिछाई जाने वाली चीज़ |
| चबेना | भुने हुए अनाज या दाल का नाश्ता |
| मौलवी | इस्लामी धर्मगुरु या शिक्षक |
| लीला | धार्मिक नाटक, विशेषकर रामलीला |
| पात्र | नाटक या खेल में भूमिका निभाने वाला व्यक्ति |
| उत्साह | जोश, उमंग |
| पेंशन | सेवा निवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सहायता |
| गुल्ली-डंडा | एक पारंपरिक भारतीय खेल |
| विलायती | विदेशी, विशेषकर अंग्रेज़ी |
| ऐब | दोष, कमी |
| अरुचि | पसंद न होना, दिलचस्पी न होना |
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Practice questions
- लेखक अपने बचपन की किन बातों को याद करते हैं? Answer: लेखक अपने टूटे घर, पयाल के बिछौने, नंगे बदन खेतों में घूमने और आम के पेड़ों पर चढ़ने जैसी बातों को याद करते हैं।
- लेखक किसके साथ पढ़ने जाया करते थे? Answer: लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ पढ़ने जाया करते थे।
- रामलीला के प्रति लेखक का क्या उत्साह था? Answer: लेखक रामलीला के प्रति बहुत उत्साहित थे और पात्रों की सजावट में छोटे-मोटे काम करने के लिए दोपहर से ही वहाँ जा बैठते थे।
- लेखक गुल्ली-डंडा को सभी खेलों का राजा क्यों कहते हैं? Answer: क्योंकि यह खेल बिना किसी विशेष सामान या जगह के, आसानी से खेला जा सकता है।
- लेखक भारतीय खेलों के बारे में क्या कहते हैं? Answer: लेखक कहते हैं कि भारतीय खेल बिना दाम कौड़ी के खेले जाते हैं और स्कूलों में इन्हें खिलाया जाना चाहिए।
Frequently asked questions
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय लेखक के बचपन की यादों, उनके अनुभवों और पारंपरिक भारतीय खेलों के महत्व पर आधारित है।
लेखक कहाँ पढ़ने जाते थे?
लेखक अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव में एक मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते थे।
लेखक को रामलीला में क्या पसंद था?
लेखक को रामलीला का उत्साह और पात्रों की सजावट में मदद करना पसंद था।
गुल्ली-डंडा खेल की क्या विशेषता है?
गुल्ली-डंडा खेल की विशेषता यह है कि यह बिना किसी महंगे सामान के, आसानी से खेला जा सकता है।
लेखक ने अंग्रेजी खेलों के बारे में क्या कहा है?
लेखक ने अंग्रेजी खेलों को महंगा और उनके सामान को महँगा बताया है, जिसके कारण भारतीय खेलों के प्रति अरुचि पैदा हो रही है।
यह अध्याय किस कक्षा के लिए है?
यह अध्याय NCERT की कक्षा 5 की हिंदी पुस्तक 'वीणा' का है।
Important topics
Topics covered
NCERT Class 5 Hindi — Veena — Chapter 7 — मेरा बचपन. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.