NCERT Class 12 Sociology Bhartiya Samaj: Chapter 1 — भारतीय समाज: एक परिचय (मूल्यांकन के लिए नहीं हैं)
यह अध्याय, 'भारतीय समाज', समाजशास्त्र के परिचय से शुरू होता है, यह बताते हुए कि समाजशास्त्र अन्य विषयों से कैसे भिन्न है। इसमें कहा गया है कि समाजशास्त्र में कोई भी शून्य से शुरुआत नहीं करता क्योंकि हम सभी समाज के बारे में पहले से ही कुछ न कुछ जानते हैं। यह सहज ज्ञान सहायक है क्योंकि यह विषय को कम डरावना बनाता है, लेकिन यह एक बाधा भी है क्योंकि समाजशास्त्र समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है। छात्रों को अपने पूर्व-निर्मित विचारों को 'भूलना' या 'मिटाना' होगा, जैसे स्वेटर को फिर से बुनने के लिए पुरानी बुनाई को उधेड़ना पड़ता है। हमारा सामान्य बोध अक्सर अधूरा और पक्षपाती होता है, जो सामाजिक वास्तविकता का केवल एक हिस्सा दिखाता है। समाजशास्त्र हमें यह भी सिखाता है कि हम खुद को 'बाहर से' कैसे देख सकते हैं, जिसे आत्म-निरीक्षण कहा जाता है, और यह आलोचनात्मक होना चाहिए। यह अध्याय छात्रों को समाज के बारे में अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने और समाजशास्त्र के व्यवस्थित अध्ययन के लिए तैयार करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Sociology |
| Book | Bhartiya Samaj |
| Chapter | Chapter 1 — भारतीय समाज : एक परिचय (मूल्यांकन के लिए नहीं हैं) |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 614 |
Learning outcomes
- समाजशास्त्र को अन्य विषयों से अलग करने वाले मुख्य अंतरों को समझना।
- समाज के बारे में सहज ज्ञान की भूमिका और समाजशास्त्रीय अध्ययन में इसकी सीमाओं का विश्लेषण करना।
- समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए पूर्व-धारणाओं को 'भूलने' या 'मिटाने' की आवश्यकता को पहचानना।
- आत्म-निरीक्षण की अवधारणा और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के महत्व को समझना।
- सामाजिक वास्तविकता को समझने में सामाजिक संदर्भ के प्रभाव का मूल्यांकन करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| सहज-ज्ञान | बिना औपचारिक शिक्षा के प्राप्त ज्ञान या बोध। |
| समाजशास्त्रीय अध्ययन | समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक विश्लेषण। |
| पूर्व-धारणा | किसी चीज़ के बारे में पहले से बना लिया गया विचार, जो अक्सर बिना जाँच-पड़ताल के होता है। |
| आत्म-निरीक्षण | अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहारों का आलोचनात्मक मूल्यांकन। |
| सामाजिक संदर्भ | वह सामाजिक वातावरण और परिस्थितियाँ जिनमें व्यक्ति रहता है और समाजीकृत होता है। |
| पक्षपाती | किसी विशेष पक्ष या दृष्टिकोण की ओर झुका हुआ, निष्पक्ष न होना। |
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Practice questions
- समाजशास्त्र को अन्य विषयों से अलग करने वाला मुख्य बिंदु क्या है? Answer: समाजशास्त्र में कोई भी शून्य से शुरुआत नहीं करता, क्योंकि हम सभी समाज के बारे में पहले से कुछ न कुछ जानते हैं।
- सहज ज्ञान समाजशास्त्र के लिए सहायक और बाधक दोनों कैसे है? Answer: यह सहायक है क्योंकि यह विषय को कम डरावना बनाता है, लेकिन बाधक है क्योंकि समाजशास्त्र समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है, जिसके लिए सहज ज्ञान को भूलना पड़ता है।
- समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए हमें अपने सहज बोध को 'भूलने' की आवश्यकता क्यों है? Answer: क्योंकि हमारा सहज बोध अक्सर अधूरा और पक्षपाती होता है, और समाजशास्त्र समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है।
- आत्म-निरीक्षण का क्या अर्थ है और यह आलोचनात्मक क्यों होना चाहिए? Answer: आत्म-निरीक्षण का अर्थ है स्वयं को 'बाहर से' देखने की क्षमता। यह आलोचनात्मक होना चाहिए ताकि इसमें समीक्षा अधिक और आत्म-मुग्धता कम हो।
Practice MCQs
Q1. समाजशास्त्र का ज्ञान हमें कैसे प्राप्त होता है?
Explanation: पाठ के अनुसार, समाज के बारे में हमारा बहुत सारा ज्ञान सुस्पष्ट पढ़ाई के बगैर प्राप्त किया हुआ होता है, यह हमारे बड़े होने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
Q2. सहज बोध (Common sense) समाजशास्त्र के लिए एक बाधा क्यों है?
Explanation: सहज बोध समाजशास्त्र के लिए एक बाधा है क्योंकि समाजशास्त्र समाज के व्यवस्थित व वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है, जिसके लिए हमें अपने सहज बोध को 'भूलने' की कोशिश करनी पड़ती है।
Q3. समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए हमें अपने पूर्व-धारणाओं को क्यों उधेड़ना पड़ता है?
Explanation: हमारा पहले से प्राप्त ज्ञान, यानी सामान्य बोध, एक विशिष्ट दृष् टिकोण से प्राप्त कियाया हुआ होता है और यह अकसर अपूर्ण एववं पूर्वाग्रहपूर्ण होता है।
Q4. आत्म-निरीक्षण (Self-reflection) की क्षमता क्या सिखाती है?
Explanation: समाजशास्त्र हमें यह दिखा सकता है कि दूसरे हमें किस तरह देखते हैं; यह हमें सिखा सकता है कि आप स्वयं को 'बाहर से' कैसे देख सकते हैं, जिसे आत्म-निरीक्षण कहा जाता है।
Q5. समाजशास्त्रीय अध्ययन में 'भूलने की प्रक्रिया' का क्या महत्व है?
Explanation: यह आववश्यक है, क्योंकि समाज के बारे में हमारा पहले से प्राप्त ज्ञान – हमारा सामान्य बोध – एक विशिष्ट दृष् टिकोण से प्राप्त कियाया हुआ होता है और यह अकसर अपूर्ण एववं पूर्वाग्रहपूर्ण होता है।
Frequently asked questions
क्या समाजशास्त्र का अध्ययन करना मुश्किल है?
पाठ के अनुसार, छात्र अक्सर समाजशास्त्र से डरते नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे पहले से ही बहुत कुछ जानते हैं। हालाँकि, समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए अपनी पूर्व-धारणाओं को चुनौती देना आवश्यक है।
समाजशास्त्र में 'सहज ज्ञान' का क्या मतलब है?
सहज ज्ञान वह ज्ञान है जो हमें समाज में रहने और बड़े होने के कारण स्वतः प्राप्त हो जाता है, बिना किसी औपचारिक शिक्षा के।
समाजशास्त्र हमें खुद को कैसे देखने में मदद करता है?
समाजशास्त्र हमें आत्म-निरीक्षण की क्षमता विकसित करने में मदद करता है, जिससे हम खुद को 'बाहर से' या दूसरों के दृष्टिकोण से देख पाते हैं।
क्या हमारा सहज ज्ञान हमेशा सही होता है?
नहीं, पाठ के अनुसार, हमारा सहज ज्ञान अक्सर अधूरा और पक्षपाती हो सकता है, और यह सामाजिक वास्तविकता का केवल एक हिस्सा ही दिखाता है।
समाजशास्त्र सीखने से पहले हमें अपनी पूर्व-धारणाओं को 'भूलना' क्यों पड़ता है?
क्योंकि समाजशास्त्र समाज का एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है, और हमारी पूर्व-धारणाएँ अक्सर हमारे वस्तुनिष्ठ विश्लेषण में बाधा डाल सकती हैं।
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NCERT Class 12 Sociology — Bhartiya Samaj — Chapter 1 — भारतीय समाज : एक परिचय (मूल्यांकन के लिए नहीं हैं). Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.