NCERT Class 12 Political Science Samkalin Vishwa Rajniti: Chapter 6 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

NCERT CBSE Class 12 Political Science Samkalin Vishwa Rajniti Chapter 6 Hindi PDF

यह अध्याय विश्व-राजनीति में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते महत्व पर केंद्रित है, जिसकी शुरुआत 1960 के दशक से हुई। इसमें प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों, साझी संपदा और 'विश्व की साझी विरासत' जैसी अवधारणाओं पर चर्चा की गई है। अध्याय बताता है कि कैसे 1992 के पृथ्वी सम्मेलन ने पर्यावरण को वैश्विक राजनीति के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया। यह कृषि भूमि की घटती उत्पादकता, जल प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव-विविधता की हानि और ओजोन परत में कमी जैसी पर्यावरणीय चिंताओं को रेखांकित करता है। साथ ही, यह अराल सागर जैसी पर्यावरणीय आपदाओं के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और मूलवासी समुदायों के सरोकारों पर भी प्रकाश डालता है। यह अध्याय छात्रों को समकालीन विश्व राजनीति में पर्यावरण के मुद्दों की जटिलताओं और भारत के रुख को समझने में मदद करता है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 12
SubjectPolitical Science
BookSamkalin Vishwa Rajniti
ChapterChapter 6 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time4 minutes
Word count686

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
साझी संपदाऐसी संपत्ति जिस पर किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी का अधिकार हो।
विश्व की साझी विरासतमानव जाति की सामूहिक धरोहर, जिसे संरक्षित करने की जिम्मेदारी सबकी है।
जैव-विविधताकिसी क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की विभिन्न प्रजातियों की विविधता।
ओजोन परतपृथ्वी के वायुमंडल का वह हिस्सा जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकता है।
मूलवासी जनताकिसी क्षेत्र के मूल निवासी, जो बाहरी लोगों के आने से पहले से वहां रह रहे हों।
पारिस्थितिकी तंत्रजीवित जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच परस्पर क्रिया का एक जटिल जाल।

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Practice questions

  1. 1992 के पृथ्वी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था? Answer: 1992 के पृथ्वी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को विश्व राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल कराना था।
  2. वैश्विक राजनीति में पर्यावरण की चिंता क्यों बढ़ रही है? Answer: कृषि योग्य भूमि में कमी, जल प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव-विविधता की हानि और ओजोन परत में कमी जैसे कारणों से वैश्विक राजनीति में पर्यावरण की चिंता बढ़ रही है।
  3. अराल सागर के सूखने से किन उद्योगों पर प्रभाव पड़ा? Answer: अराल सागर के सूखने से मत्स्य-उद्योग और जहाजरानी उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  4. ओजोन परत में कमी का क्या खतरा है? Answer: ओजोन परत में कमी से पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

Practice MCQs

Q1. 1960 के दशक से किस मुद्दे ने जोर पकड़ा?

Q2. किस सम्मेलन ने पर्यावरण को विश्व राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल कराया?

Q3. संयुक्त राष्ट्र की मानव विकास रिपोर्ट (2016) के अनुसार, कितने करोड़ जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं था?

Q4. पृथ्वी की जैव-विविधता का भंडार कहाँ भरा रहता है?

Q5. ओजोन परत में कमी का सीधा संबंध किससे है?

Frequently asked questions

समकालीन विश्व राजनीति में पर्यावरण का मुद्दा कब महत्वपूर्ण हो गया?

1960 के दशक से पर्यावरण के मसले ने जोर पकड़ा और 1992 के पृथ्वी सम्मेलन ने इसे विश्व राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल करा दिया।

पर्यावरण की चिंता के मुख्य कारण क्या हैं?

कृषि-योग्य भूमि में कमी, जल प्रदूषण, चारागाहों का क्षरण, मत्स्य-भंडार में कमी, वनों की कटाई, जैव-विविधता की हानि और ओजोन परत में कमी पर्यावरण की चिंता के मुख्य कारण हैं।

अराल सागर के संकट का क्या प्रभाव पड़ा?

अराल सागर के सूखने से मत्स्य-उद्योग और जहाजरानी उद्योग नष्ट हो गए, जिससे हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा और पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

ओजोन परत में कमी से क्या खतरा उत्पन्न होता है?

ओजोन परत में कमी से पृथ्वी पर हानिकारक पराबैंगनी किरणों का प्रभाव बढ़ जाता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।

इस अध्याय में 'साझी संपदा' और 'विश्व की साझी विरासत' जैसी किन अवधारणाओं पर चर्चा की गई है?

अध्याय में साझी संपदा (ऐसी संपत्ति जिस पर सभी का अधिकार हो) और विश्व की साझी विरासत (मानव जाति की सामूहिक धरोहर) जैसी अवधारणाओं पर चर्चा की गई है।

मूलवासी जनता का पर्यावरण संबंधी मुद्दों से क्या सरोकार है?

मूलवासी जनता अक्सर उन पर्यावरणीय परिवर्तनों से सीधे प्रभावित होती है जो उनके पारंपरिक आवासों और आजीविका को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए उनके सरोकार महत्वपूर्ण हैं।

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Important topics

1992 का पृथ्वी सम्मेलन और पर्यावरण का वैश्विक राजनीति में समावेश वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियाँ (जल संकट, जैव-विविधता हानि, ओजोन क्षरण) साझी संपदा और विश्व की साझी विरासत की अवधारणाएँ पर्यावरण के मुद्दे पर भारत का रुख मूलवासी समुदायों के पर्यावरणीय सरोकार

Topics covered

विश्व-राजनीति में पर्यावरण का बढ़ता महत्व पर्यावरण आंदोलन साझी संपदा की अवधारणा विश्व की साझी विरासत 1992 का पृथ्वी सम्मेलन वैश्विक पर्यावरणीय चिंताएँ (कृषि, जल, चारागाह, मत्स्य-भंडार) वनों की कटाई और जैव-विविधता की हानि ओजोन परत में कमी समुद्रतटीय प्रदूषण अराल सागर का संकट मूलवासी जनता के सरोकार पर्यावरण से जुड़ी बहसों में भारत का पक्ष

NCERT Class 12 Political Science — Samkalin Vishwa Rajniti — Chapter 6 — पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.