NCERT Class 12 History Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-II: Chapter 4 — किसान, जमींदार और राज्य
यह अध्याय मुगल साम्राज्य (लगभग 16वीं और 17वीं सदी) के कृषि समाज और राज्य के बीच संबंधों पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि उस समय लगभग 85% आबादी गांवों में रहती थी, जिसमें छोटे खेतिहर और भूमिधर अभिजात वर्ग दोनों शामिल थे। ये दोनों कृषि उत्पादन से जुड़े थे और फसल के हिस्से के दावेदार थे, जिससे उनके बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा के रिश्ते बने। मुगल राज्य अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा कृषि उत्पादन से प्राप्त करता था और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से ग्रामीण समाज पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता था। अध्याय में कृषि उत्पादन, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में खेती की विविधता, और किसानों के बारे में जानकारी के स्रोतों पर भी प्रकाश डाला गया है, विशेष रूप से 'आइन-ए-अकबरी' जैसे ऐतिहासिक ग्रंथों का उल्लेख किया गया है। यह अध्याय छात्रों को मुगल काल की सामाजिक-आर्थिक संरचना और राज्य की भूमिका को समझने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | History |
| Book | Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-II |
| Chapter | Chapter 4 — भारतीय इतिहास के वुफछ विषय |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 721 |
Learning outcomes
- मुगल काल में कृषि समाज की संरचना को समझना।
- किसानों, जमींदारों और राज्य के बीच संबंधों का विश्लेषण करना।
- कृषि उत्पादन और राजस्व प्रणाली के महत्व को जानना।
- ग्रामीण समाज पर मुगल राज्य के प्रभाव का मूल्यांकन करना।
- ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर मुगलकालीन कृषि इतिहास का अध्ययन करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| रैयत | किसान या कृषक। |
| रिआया | रैयत का बहुवचन, किसानों का समूह। |
| मुशरियान | किसानों के लिए प्रयुक्त एक अन्य शब्द। |
| आसामी | खेती करने वाला या किसान। |
| जमींदार | भूमि का स्वामी या भू-राजस्व वसूल करने वाला अधिकारी। |
| आइन-ए-अकबरी | अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ। |
| कृषि उत्पादन | खेती से प्राप्त उपज। |
| राजस्व | सरकार द्वारा लिया जाने वाला कर, विशेषकर भूमि कर। |
The complete chapter text is read in the official NCERT PDF viewer below (streamed from ncert.nic.in). This page provides NCERT Help study material — summary, vocabulary, practice questions, and FAQs — not a full reproduction of the textbook.
Read chapter online
This PDF is loaded from the official NCERT website (ncert.nic.in). Use the page buttons below to read — download is disabled on NCERT Help.
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Practice questions
- सोलहवीं-सत्राहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान की कितनी प्रतिशत आबादी गाँवों में रहती थी? Answer: लगभग 85 प्रतिशत।
- किस ऐतिहासिक ग्रंथ का उल्लेख मुगलकालीन कृषि इतिहास को समझने के लिए किया गया है? Answer: आइन-ए-अकबरी।
- मुगल राज्य अपनी आय का बहुत बड़ा हिस्सा कहाँ से प्राप्त करता था? Answer: कृषि उत्पादन से।
- मुगल काल में किसानों के लिए आमतौर पर किन शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था? Answer: रैयत, रिआया, मुशरियान, आसामी।
Practice MCQs
Q1. सोलहवीं-सत्राहवीं सदी में हिंदुस्तान की ग्रामीण आबादी का अनुमानित प्रतिशत क्या था?
Explanation: पाठ के अनुसार, सोलहवीं-सत्राहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान में करीब-करीब 85 फीसदी लोग गाँवों में रहते थे।
Q2. किस ग्रंथ को अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा था?
Explanation: आइन-ए-अकबरी को अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा था, जो मुगलकालीन कृषि और प्रशासन की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है।
Q3. ग्रामीण समाज पर नियंत्रण रखने के लिए राज्य के नुमाइंदे क्या करते थे?
Explanation: राज्य के नुमाइंदे ग्रामीण समाज पर काबू रखने के लिए राजस्व निर्धारित करने, वसूली करने और हिसाब रखने जैसे कार्य करते थे ताकि राज्य को समय पर कर मिल सके।
Q4. किसानों के बारे में जानकारी के मुख्य स्रोत क्या हैं, क्योंकि किसान स्वयं नहीं लिखते थे?
Explanation: चूंकि किसान अपने बारे में स्वयं नहीं लिखते थे, इसलिए सोलहवीं और सत्राहवीं सदियों के कृषि इतिहास को समझने के लिए मुख्य स्रोत वे ऐतिहासिक ग्रंथ व दस्तावेज हैं जो मुगल दरबार की निगरानी में लिखे गए थे।
Q5. मुगल काल में भारतीय-फारसी स्रोतों में किसानों के लिए आमतौर पर कौन से शब्द इस्तेमाल होते थे?
Explanation: मुगल काल के भारतीय-फारसी स्रोतों में किसानों के लिए आमतौर पर 'रैयत' (बहुवचन 'रिआया') या 'मुशरियान' जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता था।
Frequently asked questions
मुगल साम्राज्य में कृषि का क्या महत्व था?
मुगल साम्राज्य अपनी आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा कृषि उत्पादन से प्राप्त करता था, इसलिए कृषि राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।
सोलहवीं-सत्राहवीं सदी में ग्रामीण समाज की मुख्य विशेषताएं क्या थीं?
लगभग 85% आबादी गांवों में रहती थी, जिसमें छोटे खेतिहर और भूमिधर अभिजात वर्ग शामिल थे, जो कृषि उत्पादन से जुड़े थे और फसल के हिस्से के दावेदार थे।
किसानों के बारे में जानकारी के मुख्य स्रोत क्या हैं?
चूंकि किसान स्वयं नहीं लिखते थे, इसलिए मुगल दरबार की निगरानी में लिखे गए ऐतिहासिक ग्रंथ और दस्तावेज, जैसे 'आइन-ए-अकबरी', किसानों के बारे में जानकारी के मुख्य स्रोत हैं।
जमींदार की भूमिका क्या थी?
जमींदार भूमि के स्वामी होते थे और वे राज्य के लिए राजस्व निर्धारित करने और वसूलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, साथ ही ग्रामीण समाज पर नियंत्रण रखते थे।
आइन-ए-अकबरी का मुख्य उद्देश्य क्या था?
आइन-ए-अकबरी का मुख्य उद्देश्य अकबर के साम्राज्य का एक ऐसा खाका पेश करना था जहाँ एक मजबूत सत्ताधारी सामाजिक मेलजोल बनाए रखता था और राज्य के प्रशासनिक व राजस्व संबंधी इंतजामों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करना था।
किसानों के लिए मुगल काल में किन शब्दों का प्रयोग होता था?
मुगल काल के भारतीय-फारसी स्रोतों में किसानों के लिए आमतौर पर 'रैयत' (बहुवचन 'रिआया') या 'मुशरियान' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। सत्राहवीं सदी के स्रोतों में 'किसान' या 'आसामी' जैसे शब्द भी मिलते हैं।
Related resources
Important topics
Topics covered
NCERT Class 12 History — Bharatiya Itihas ke kuchh Vishay-II — Chapter 4 — भारतीय इतिहास के वुफछ विषय. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 10 Aug 2026. Last updated 10 Aug 2026.