NCERT Class 12 Geography Manav Bhugol Ke Mool Sidhant: Chapter 8 — 8. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
यह अध्याय 'व्यापार' की अवधारणा पर केंद्रित है, जिसे अध्याय 7 में 'तृतीयक क्रियाकलाप' के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसमें व्यापार के दो मुख्य स्तरों - अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय - पर चर्चा की गई है। अध्याय आदिम समाज में 'विनिमय व्यवस्था' के रूप में व्यापार के प्रारंभिक स्वरूप को स्पष्ट करता है, जहाँ वस्तुओं का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था। गुवाहाटी के पास जागीरॉड में लगने वाला 'जॉन बील मेला' इसका एक जीवित उदाहरण है। मुद्रा के आगमन से विनिमय व्यवस्था की कठिनाइयाँ दूर हुईं, और विभिन्न वस्तुओं का मुद्रा के रूप में प्रयोग किया गया, जैसे कि नमक, जिसका उल्लेख 'सैलेरी' शब्द की उत्पत्ति में भी है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए, अध्याय प्राचीन काल में स्थानीय बाजारों से लेकर रेशम मार्ग जैसे लंबी दूरी के व्यापार तक का वर्णन करता है। औद्योगिक क्रांति के बाद कच्चे माल और निर्मित वस्तुओं की मांग में वृद्धि और यूरोपीय उपनिवेशवाद के उदय ने व्यापार के स्वरूप को बदला, जिसमें दास व्यापार का भी उल्लेख है। अंततः, यह अध्याय बताता है कि कैसे औद्योगिक राष्ट्र एक-दूसरे के मुख्य ग्राहक बन गए।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Geography |
| Book | Manav Bhugol Ke Mool Sidhant |
| Chapter | Chapter 8 — 8. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 5 minutes |
| Word count | 924 |
Learning outcomes
- व्यापार की अवधारणा और उसके महत्व को समझना।
- अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्यापार के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- विनिमय व्यवस्था और मुद्रा के विकास को समझना।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के ऐतिहासिक विकास को जानना।
- औपनिवेशिक काल और औद्योगिक क्रांति के व्यापार पर प्रभाव का विश्लेषण करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| व्यापार | वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान। |
| विनिमय व्यवस्था | वस्तु के बदले वस्तु का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान। |
| अंतर्राष्ट्रीय व्यापार | विभिन्न राष्ट्रों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान। |
| राष्ट्रीय व्यापार | एक राष्ट्र की सीमाओं के भीतर वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान। |
| मुद्रा | विनिमय का माध्यम, जैसे कागजी या धात्विक मुद्रा। |
| दास व्यापार | मनुष्यों को वस्तु की तरह खरीदकर बेचना या श्रम के लिए उपयोग करना। |
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Practice questions
- व्यापार से आप क्या समझते हैं? Answer: व्यापार वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान है, जिसमें दो पक्षों का होना आवश्यक है - एक विक्रेता और एक क्रेता।
- विनिमय व्यवस्था क्या थी? Answer: विनिमय व्यवस्था व्यापार का प्रारंभिक स्वरूप था जिसमें रुपये के स्थान पर वस्तुओं का प्रत्यक्ष आदान-प्रदान होता था।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता क्यों होती है? Answer: राष्ट्रों को उन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता होती है जिन्हें वे स्वयं उत्पादित नहीं कर सकते या जिन्हें वे अन्य स्थानों से कम दामों में खरीद सकते हैं।
- रेशम मार्ग का क्या महत्व था? Answer: रेशम मार्ग लंबी दूरी के व्यापार का एक प्रारंभिक उदाहरण था जो रोम को चीन से जोड़ता था और जिसमें रेशम, ऊन व बहुमूल्य धातुओं जैसी महंगी वस्तुओं का परिवहन होता था।
Practice MCQs
Q1. व्यापार कितने स्तरों पर किया जा सकता है?
Explanation: अध्याय के अनुसार, व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय दो स्तरों पर किया जा सकता है।
Q2. आदिम समाज में व्यापार का आरंभिक स्वरूप क्या था?
Explanation: अध्याय में बताया गया है कि आदिम समाज में व्यापार का आरंभिक स्वरूप 'विनिमय व्यवस्था' था।
Q3. जॉन बील मेला कहाँ लगता है और इसका क्या महत्व है?
Explanation: यह मेला गुवाहाटी से 35 कि.मी. दूर जागीरॉड में लगता है और यह भारत का एकमात्र मेला है जहाँ विनिमय व्यवस्था आज भी जीवित है।
Q4. 'सैलेरी' शब्द किस लैटिन शब्द से बना है?
Explanation: अध्याय के अनुसार, 'सैलेरी' शब्द लैटिन शब्द 'सैलेरिअम' से बना है, जिसका अर्थ नमक के द्वारा भुगतान था।
Q5. लंबी दूरी के व्यापार का एक आरंभिक उदाहरण कौन सा है?
Explanation: अध्याय में रेशम मार्ग को लंबी दूरी के व्यापार का एक आरंभिक उदाहरण बताया गया है।
Frequently asked questions
व्यापार का क्या अर्थ है?
व्यापार का अर्थ है वस्तुओं और सेवाओं का स्वैच्छिक आदान-प्रदान, जिसमें एक पक्ष बेचता है और दूसरा खरीदता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसे कहते हैं?
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विभिन्न राष्ट्रों के बीच राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान को कहते हैं।
विनिमय व्यवस्था में क्या समस्याएँ थीं?
विनिमय व्यवस्था में यह समस्या थी कि आपको एक ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना पड़ता था जिसे आपकी वस्तु की आवश्यकता हो और जिसके पास वह वस्तु हो जिसकी आपको आवश्यकता है।
क्या आज भी विनिमय व्यवस्था प्रचलित है?
हाँ, कुछ स्थानों पर, जैसे कि गुवाहाटी के पास लगने वाले जॉन बील मेले में, विनिमय व्यवस्था आज भी जीवित है।
दास व्यापार कब और कहाँ समाप्त हुआ?
दास व्यापार 1792 में डेनमार्क में, 1807 में ग्रेट ब्रिटेन में और 1808 में संयुक्त राज्य अमेरिका में समाप्त कर दिया गया था।
रेशम मार्ग किस-किस को जोड़ता था?
रेशम मार्ग लगभग 6000 किमी लंबा था और रोम को चीन से जोड़ता था।
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NCERT Class 12 Geography — Manav Bhugol Ke Mool Sidhant — Chapter 8 — 8. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.