NCERT Class 12 Fine Art Bhartiya Kala ka Itihaas Bhag 2: Chapter 7 — भाारतीय कलाा काा परिचय, भााग 2
यह अध्याय आधुनिक भारतीय कला के परिचय से संबंधित है, जो औपनिवेशिक काल के दौरान यूरोपीय कला के प्रभाव और राष्ट्रवादी कला के उदय पर प्रकाश डालता है। इसमें लाहौर, कोलकाता, बॉम्बे और मद्रास जैसे शहरों में स्थापित कला विद्यालयों का उल्लेख है, जिन्होंने अकादमिक और प्रकृतिवादी कला को बढ़ावा दिया। बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना अवनीन्द्रनाथ टैगोर और ई.बी. हैवेल ने की थी, और शांतिनिकेतन में कला भवन की स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर की परिकल्पना थी। अध्याय गगनेंद्रनाथ टैगोर की घनवादी शैली और रवींद्रनाथ टैगोर के डूडल कला पर भी चर्चा करता है। यह नंदलाल बोस, बिनोद बिहारी मुखर्जी और रामकिंकर बैज जैसे कलाकारों के योगदान को भी रेखांकित करता है, जिन्होंने अपनी अनूठी शैलियों के माध्यम से भारतीय समाज और संस्कृति को चित्रित किया। यह अध्याय छात्रों को आधुनिक भारतीय कला के विकास और विभिन्न कलात्मक आंदोलनों को समझने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Fine Art |
| Book | Bhartiya Kala ka Itihaas Bhag 2 |
| Chapter | Chapter 7 — भाारतीय कलाा काा परिचय, भााग 2 |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 693 |
Learning outcomes
- आधुनिक भारतीय कला के विकास को समझना।
- यूरोपीय कला के प्रभाव और राष्ट्रवादी कला के उदय का विश्लेषण करना।
- प्रमुख आधुनिक भारतीय कलाकारों और उनकी शैलियों की पहचान करना।
- बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट और शांतिनिकेतन के कला आंदोलन के महत्व को जानना।
- घनवाद और अभिव्यंजनावाद जैसे अंतरराष्ट्रीय कला आंदोलनों के प्रभाव को समझना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| ऐंद्रिय संवेदना | इंद्रियों से महसूस करने की क्षमता |
| अकादमिक | शैक्षणिक या विद्यालयी प्रणाली से संबंधित |
| प्रकृतिवादी | प्रकृति के यथार्थवादी चित्रण पर आधारित |
| घनचित्रण | घनवाद (Cubism) शैली में चित्रण |
| घनवाद | एक कला आंदोलन जो वस्तुओं को ज्यामितीय आकृतियों में तोड़कर प्रस्तुत करता है |
| अभिव्यंजनावाद | एक कला आंदोलन जो भावनाओं और आंतरिक अनुभवों की अभिव्यक्ति पर जोर देता है |
| अमूर्त | जो किसी ठोस वस्तु या रूप का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि विचारों या भावनाओं को व्यक्त करता है |
| सुलेख | सुंदर हस्तलेखन |
| डूडल | बिना सोचे-समझे या आकस्मिक रूप से की गई रेखाचित्रण |
| रचनातमक | रचना करने या सृजन करने की क्षमता वाला |
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Practice questions
- उन्नीसवीं शताब्दी में भारत के प्रमुख शहरों में किन कला विद्यालयों की स्थापना की गई? Answer: उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य और उत्तरार्ध में लाहौर, कलकत्ता (अब कोलकाता), बॉम्बे (अब मुंबई) और मद्रास (अब चेन्नई) जैसे प्रमुख शहरों में कला विद्यालयों की स्थापना की गई।
- बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट का विकास किसने किया? Answer: बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट का विकास अवनीन्द्रनाथ टैगोर और ई.बी. हैवेल ने किया।
- गगनेंद्रनाथ टैगोर ने अपनी घनवादी शैली में किन रेखाओं का प्रयोग किया? Answer: गगनेंद्रनाथ टैगोर ने अपनी शैली में ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज और तिरछी रेखाओं का प्रयोग किया।
- रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी कविताओं को लिखते समय किस प्रकार की कला का अभ्यास किया? Answer: रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी कविताओं को लिखते समय डूडल (बिना सोचे-समझे किया गया रेखांकन) बनाने का अभ्यास किया, जिससे उन्होंने सुलेख की एक विशेष शैली विकसित की।
- नंदलाल बोस के दो रचनातमक छात्रों के नाम बताइए। Answer: नंदलाल बोस के दो रचनातमक छात्रों में बिनोद बिहारी मुखर्जी और रामकिंकर बैज शामिल थे।
Practice MCQs
Q1. उन्नीसवीं शताब्दी में भारत के प्रमुख शहरों में स्थापित कला विद्यालयों ने किस प्रकार की कला को बढ़ावा दिया?
Explanation: इन कला विद्यालयों में अकादमिक व प्रकृतिवादी कला को बढ़ावा दिया गया, जिसने विक्टोरियन प्रवृत्ति को प्रतिबिंबित किया।
Q2. भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कला विद्यालय, 'कला भवन', कहाँ स्थापित किया गया?
Explanation: भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कला विद्यालय, 'कला भवन', 1919 में शांतिनिकेतन में नव स्थापित विश्वभारती विश्वविद्यालय में स्थापित किया गया।
Q3. गगनेंद्रनाथ टैगोर ने अपनी कला में किन अंतरराष्ट्रीय कला आंदोलनों के तत्वों को समाहित किया?
Explanation: गगनेंद्रनाथ टैगोर ने घनवाद और अभिव्यंजनावाद जैसी अंतरराष्ट्रीय कला के बारे में जाना और घनवादी तत्वों को समाहित करके अपनी विशिष्ट शैली का निर्माण किया।
Q4. रवींद्रनाथ टैगोर की कला का पैलेट मुख्य रूप से किन रंगों तक सीमित था?
Explanation: उनका पैलेट काले, पीले, गेरू, लाल और भूरे रंगों तक ही सीमित था।
Q5. शांतिनिकेतन के बाहरी क्षेत्रों में रहने वाली किस जनजाति का चित्रण रामकिंकर बैज और बिनोद बिहारी मुखर्जी ने किया?
Explanation: शांतिनिकेतन के बाहरी क्षेत्रों में संथाल जनजातियों की एक बड़ी आबादी थी और ये कलाकार अकसर उन्हें चित्रित करते थे तथा उनकी मूर्तियाँ भी बनाते थे।
Frequently asked questions
आधुनिक भारतीय कला की शुरुआत कब और कैसे हुई?
आधुनिक भारतीय कला की शुरुआत उन्नीसवीं शताब्दी में हुई, जब अंग्रेजों ने भारत में यूरोपीय कला के प्रभाव को बढ़ावा दिया और कला विद्यालयों की स्थापना की।
बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट का मुख्य उद्देश्य क्या था?
बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय कला को पश्चिमी प्रभाव से मुक्त कर उसे राष्ट्रवादी पहचान देना था।
गगनेंद्रनाथ टैगोर की कला शैली की क्या विशेषता है?
गगनेंद्रनाथ टैगोर ने घनवादी तत्वों को अपनी शैली में समाहित किया और रहस्यमयी कक्षों के निर्माण में ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज और तिरछी रेखाओं का प्रयोग किया।
रवींद्रनाथ टैगोर ने दृश्य कला में कैसे योगदान दिया?
रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी कविताओं के साथ डूडल बनाकर एक विशेष सुलेख शैली विकसित की, जिसमें मानव चेहरे और भू-दृश्य शामिल थे।
शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किस प्रकार के विषयों का चित्रण किया?
शांतिनिकेतन के कलाकारों, जैसे बिनोद बिहारी मुखर्जी और रामकिंकर बैज ने अपने आसपास के परिवेश, वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, लोगों और विशेष रूप से संथाल जनजातियों का चित्रण किया।
कला भवन, शांतिनिकेतन की स्थापना का क्या महत्व है?
कला भवन, शांतिनिकेतन, भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कला विद्यालय था, जिसने बंगाल शैली की दृष्टि को बनाए रखा और भारतीय समाज में कला को सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
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NCERT Class 12 Fine Art — Bhartiya Kala ka Itihaas Bhag 2 — Chapter 7 — भाारतीय कलाा काा परिचय, भााग 2. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.