NCERT Class 12 Biology Jeev Vigyan: Chapter 12 — 1 पारितंत्रा संरचना एवं क्रियाशीलता
यह अध्याय 12, 'पारितंत्र', जीव विज्ञान में पारितंत्र की संरचना और क्रियाशीलता का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। पारितंत्र को प्रकृति की एक क्रियाशील इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है जहाँ जीवधारी अपने भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। अध्याय स्थलीय और जलीय पारितंत्रों के उदाहरणों के साथ-साथ मानव निर्मित पारितंत्रों पर भी प्रकाश डालता है। इसमें उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषण चक्र जैसे प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की गई है। एक छोटे तालाब के उदाहरण का उपयोग करके, अध्याय जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रियाओं से विकसित होने वाली भौतिक संरचना को स्पष्ट करता है। यह दर्शाता है कि कैसे स्वपोषी, परपोषी और अपघटक ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जीवमंडल की निरंतरता सुनिश्चित होती है। यह अध्याय छात्रों को पारिस्थितिक तंत्र की जटिलताओं और उनके अध्ययन के लिए आवश्यक प्रमुख अवधारणाओं को समझने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Biology |
| Book | Jeev Vigyan |
| Chapter | Chapter 12 — 1 पारितंत्रा संरचना एवं क्रियाशीलता |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 657 |
Learning outcomes
- पारितंत्र की परिभाषा और उसके घटकों को समझना।
- स्थलीय, जलीय और मानव निर्मित पारितंत्रों के उदाहरणों की पहचान करना।
- उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषण चक्र की अवधारणाओं को समझना।
- एक जलीय पारितंत्र (जैसे तालाब) की संरचना और क्रियाशीलता का विश्लेषण करना।
- पारितंत्र में जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रियाओं का वर्णन करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| पारितंत्र | एक क्षेत्र जहाँ जीवधारी आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। |
| जीवधारी | जीवित प्राणी या पौधा। |
| भौतिक पर्यावरण | किसी जीव के आसपास का निर्जीव वातावरण। |
| स्थलीय पारितंत्र | भूमि पर आधारित पारितंत्र, जैसे जंगल, घास के मैदान। |
| जलीय पारितंत्र | जल में स्थित पारितंत्र, जैसे तालाब, झीलें, महासागर। |
| उत्पादकता | किसी पारितंत्र में उत्पादित होने वाले कार्बनिक पदार्थों की दर। |
| अपघटन | मृत कार्बनिक पदार्थों का सरल अकार्बनिक पदार्थों में टूटना। |
| ऊर्जा प्रवाह | पारितंत्र में ऊर्जा का एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर तक स्थानांतरण। |
| पोषण चक्र | पारितंत्र में पोषक तत्वों का चक्रीय प्रवाह। |
| स्वपोषी | वे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (जैसे पौधे)। |
| परपोषी | वे जीव जो अपने भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। |
| स्तरविन्यास | पारितंत्र में विभिन्न प्रजातियों का ऊर्ध्वाधर वितरण। |
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Practice questions
- पारितंत्र को परिभाषित करें। Answer: पारितंत्र प्रकृति की एक क्रियाशील इकाई है जहाँ जीवधारी आपस में तथा अपने भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
- स्थलीय और जलीय पारितंत्र के दो-दो उदाहरण दीजिए। Answer: स्थलीय: जंगल, मरूस्थल। जलीय: तालाब, महासागर।
- पारितंत्र के चार मुख्य क्रियाशील पहलू कौन से हैं? Answer: उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषण चक्र।
- एक तालाब पारितंत्र में स्वपोषी घटक का उदाहरण क्या है? Answer: पादप प्लवक, काई (शैवाल), तथा निमग्न एवं किनारों पर सीमांत पादप।
- ऊर्जा प्रवाह की दिशा क्या होती है? Answer: ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है, जो उच्च पोषी स्तरों की ओर बढ़ता है और ऊष्मा के रूप में हानि होती है।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा एक मानव निर्मित पारितंत्र का उदाहरण है?
Explanation: शस्यभूमि (फसल भूमि) और जलजीवशाला मानव द्वारा निर्मित पारितंत्र के उदाहरण हैं।
Q2. पारितंत्र में जैविक और अजैविक घटकों की परस्पर क्रिया से क्या विकसित होता है?
Explanation: जैविक एवं अजैविक घटकों की परस्पर क्रियाओं के फलस्वरूप एक भौतिक संरचना विकसित होती है जो प्रत्येक प्रकार के पारितंत्र की विशिष्टता है।
Q3. जंगल में वृक्षों का ऊर्ध्वाधर वितरण में कौन सा स्तर होता है?
Explanation: एक जंगल में वृक्ष सर्वोपरि ऊर्ध्वाधर स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Q4. तालाब पारितंत्र में अपघटक का उदाहरण क्या है?
Explanation: कवक एवं जीवाणु तालाब पारितंत्र में अपघटक के रूप में कार्य करते हैं।
Q5. ऊर्जा प्रवाह की विशेषता क्या है?
Explanation: ऊर्जा की एकदिशीय गतिशीलता उच्च पोषी स्तरों की ओर होती है तथा पर्यावरण में इसका अपव्यय और ऊष्मा के रूप में हानि होती है।
Frequently asked questions
पारितंत्र क्या है?
पारितंत्र प्रकृति की एक क्रियाशील इकाई है जहाँ जीवधारी आपस में तथा अपने आस-पास के भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।
पारितंत्र के मुख्य प्रकार कौन से हैं?
पारितंत्र को मुख्य रूप से स्थलीय (जैसे जंगल, घास के मैदान) और जलीय (जैसे झीलें, तालाब) श्रेणियों में बांटा गया है। मानव निर्मित पारितंत्र भी होते हैं जैसे शस्यभूमि।
पारितंत्र की संरचना में किन घटकों का अध्ययन किया जाता है?
पारितंत्र की संरचना में प्रजाति संघटन (पादप एवं प्राणि प्रजातियों की पहचान और गणना) और स्तरविन्यास (विभिन्न प्रजातियों का ऊर्ध्वाधर वितरण) का अध्ययन किया जाता है।
पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की क्या विशेषता है?
ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय होता है, जो उत्पादकों से शुरू होकर विभिन्न पोषी स्तरों तक जाता है और अंततः ऊष्मा के रूप में पर्यावरण में क्षय हो जाता है।
अपघटन प्रक्रिया में कौन से जीव शामिल होते हैं?
अपघटन प्रक्रिया में मुख्य रूप से कवक और जीवाणु जैसे सूक्ष्मजीव शामिल होते हैं, जो मृत कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं।
क्या एक छोटा तालाब भी एक पूर्ण पारितंत्र हो सकता है?
हाँ, एक छोटा तालाब एक पूर्ण पारितंत्र का एक अच्छा उदाहरण है क्योंकि इसमें स्वपोषी, परपोषी, अपघटक, तथा जैविक और अजैविक घटक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होते हैं।
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NCERT Class 12 Biology — Jeev Vigyan — Chapter 12 — 1 पारितंत्रा संरचना एवं क्रियाशीलता. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.