NCERT Class 12 Accountancy Lekhashastra Part-I: Chapter 4 — साझेदार्री का विघटन
यह अध्याय साझेदारी के विघटन की अवधारणा पर केंद्रित है, जो साझेदारी अधिनियम 1932 की धारा 39 के अनुसार सभी साझेदारों के बीच संबंधों का समापन है। इसमें साझेदारी के विघटन और फर्म के विघटन के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। फर्म का विघटन होने पर साझेदारी का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और सभी परिसंपत्तियों को बेचकर दायित्वों का भुगतान किया जाता है। अध्याय साझेदारी के विघटन के विभिन्न कारणों जैसे लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन, नए साझेदार का प्रवेश, साझेदार की सेवानिवृत्ति, मृत्यु, या दिवालिया होना, निर्दिष्ट कार्य का समापन, या साझेदारी की अवधि की समाप्ति पर चर्चा करता है। यह फर्म के विघटन के तरीकों को भी बताता है, जिसमें समझौते द्वारा, अनिर्वाय रूप से, अनिश्चितता की स्थिति में, सूचना द्वारा, और न्यायालय द्वारा विघटन शामिल हैं। यह छात्रों को खातों को बंद करने और साझेदारों के दावों का निपटारा करने के लिए आवश्यक प्रविष्टियाँ सीखने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Accountancy |
| Book | Lekhashastra Part-I |
| Chapter | Chapter 4 — साझेदार्री का विघटन |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 699 |
Learning outcomes
- साझेदारी के विघटन के अर्थ को समझना।
- साझेदारी के विघटन और फर्म के विघटन के बीच अंतर करना।
- साझेदारी के विघटन की विभिन्न विधियों की पहचान करना।
- साझेदारों के दावों के निपटान के नियमों को समझना।
- वसूली खाता तैयार करना और खातों को बंद करने के लिए आवश्यक प्रविष्टियाँ करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| विघटन | समापन या अंत |
| साझेदारी | दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच लाभ कमाने के उद्देश्य से किया गया अनुबंध |
| फर्म | साझेदारी व्यवसाय का नाम |
| परिसंपत्तियाँ | व्यवसाय के स्वामित्व वाली वस्तुएँ जिनका मौद्रिक मूल्य हो |
| दायित्व | व्यवसाय के प्रति बाहरी व्यक्तियों के प्रति देयताएँ |
| वसूली खाता | संपत्तियों की बिक्री और देनदारियों के भुगतान के लिए खोला गया खाता |
| रोजनामचा प्रविष्टि | लेन-देन को पहली बार दर्ज करने की विधि |
| दिवालिया | वह व्यक्ति जो अपने ऋणों का भुगतान करने में असमर्थ हो |
| अनुबंध | कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता |
| न्यायालय | कानून लागू करने वाली संस्था |
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Practice questions
- साझेदारी का विघटन कब होता है? Answer: साझेदारी का विघटन तब होता है जब सभी साझेदारों के बीच संबंध समाप्त हो जाते हैं।
- साझेदारी के विघटन और फर्म के विघटन में क्या अंतर है? Answer: साझेदारी के विघटन में साझेदारों के बीच संबंध समाप्त होते हैं लेकिन फर्म जारी रह सकती है, जबकि फर्म के विघटन में फर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।
- समझौते द्वारा फर्म का विघटन कैसे हो सकता है? Answer: सभी साझेदारों की सहमति से या साझेदारों के बीच अनुबंध के अनुसार समझौते द्वारा फर्म का विघटन हो सकता है।
- न्यायालय द्वारा फर्म के विघटन के किन्हीं दो आधारों का उल्लेख करें। Answer: न्यायालय द्वारा फर्म के विघटन के दो आधार हैं: जब कोई साझेदार मानसिक संतुलन खो दे, या जब फर्म को व्यवसाय चलाने से हानि के अतिरिक्त कुछ न हो।
Practice MCQs
Q1. साझेदारी अधिनियम 1932 की कौन सी धारा साझेदारी के विघटन से संबंधित है?
Explanation: धारा 39 के अनुसार, सभी साझेदारों के मध्य साझेदारी का विघटन साझेदारी का विघटन कहलाता है।
Q2. जब फर्म का विघटन होता है, तो क्या होता है?
Explanation: फर्म के विघटन के पश्चात फर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाता है और सभी परिसंपत्तियों को बेचकर दायित्वों का भुगतान कर दिया जाता है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा साझेदारी के विघटन का कारण नहीं है?
Explanation: नए साझेदार का प्रवेश साझेदारी के पुनर्गठन का कारण बनता है, न कि साझेदारी के विघटन का।
Q4. यदि फर्म एक निश्चित अवधि के लिए गठित की गई थी, तो उसका विघटन कब हो सकता है?
Explanation: यदि साझेदारी एक निश्चित अवधि के लिए गठित है, तो उस अवधि के समापन पर उसका विघटन हो सकता है।
Q5. न्यायालय द्वारा फर्म के विघटन का एक कारण क्या हो सकता है?
Explanation: जब कोई साझेदार मानसिक संतुलन खो देता है, तो न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश दे सकता है।
Frequently asked questions
साझेदारी का विघटन क्या है?
साझेदारी का विघटन साझेदारी अधिनियम 1932 की धारा 39 के अनुसार सभी साझेदारों के मध्य साझेदारी के संबंध का समापन है।
फर्म का विघटन और साझेदारी का विघटन में क्या अंतर है?
फर्म के विघटन में फर्म का अस्तित्व समाप्त हो जाता है, जबकि साझेदारी के विघटन में साझेदारों के बीच संबंध समाप्त होते हैं, पर फर्म जारी रह सकती है।
साझेदारी के विघटन के मुख्य कारण क्या हैं?
साझेदारी के विघटन के मुख्य कारणों में लाभ-विभाजन अनुपात में परिवर्तन, साझेदार का प्रवेश, सेवानिवृत्ति, मृत्यु, दिवालिया होना, या साझेदारी की अवधि का समापन शामिल है।
फर्म के विघटन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं?
फर्म के विघटन की विधियाँ हैं: समझौते द्वारा, अनिर्वाय रूप से, अनिश्चितता की स्थिति में, सूचना द्वारा, और न्यायालय द्वारा।
न्यायालय फर्म के विघटन का आदेश कब दे सकता है?
न्यायालय तब आदेश दे सकता है जब कोई साझेदार मानसिक संतुलन खो दे, स्थायी रूप से अक्षम हो जाए, अनुबंध का उल्लंघन करे, या फर्म को लगातार हानि हो।
वसूली खाता क्यों तैयार किया जाता है?
वसूली खाता फर्म की परिसंपत्तियों को बेचने और दायित्वों का भुगतान करने के लिए तैयार किया जाता है, ताकि खातों को बंद किया जा सके।
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NCERT Class 12 Accountancy — Lekhashastra Part-I — Chapter 4 — साझेदार्री का विघटन. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.