NCERT Class 11 Sociology Samaj ka Bodh: Chapter 5 — भारतीय समाजशास्त्राी

NCERT CBSE Class 11 Sociology Samaj ka Bodh Chapter 5 Hindi PDF

यह अध्याय, 'भारतीय समाजशास्त्राी', समाजशास्त्र के भारतीय परिप्रेक्ष्य की स्थापना और विकास पर केंद्रित है। यह बताता है कि यूरोप की तरह भारत में भी समाजशास्त्र एक नया विषय है, जिसकी औपचारिक शिक्षा 1919 में मुंबई विश्वविद्यालय से शुरू हुई। कलकत्ता और लखनऊ विश्वविद्यालयों ने भी 1920 में इस क्षेत्र में शिक्षण और शोध शुरू किया। अध्याय इस बात पर प्रकाश डालता है कि भारत जैसे उपनिवेशित राष्ट्र में समाजशास्त्र की क्या भूमिका होगी, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न था। यह एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर और शरत चंद्र रॉय जैसे प्रारंभिक समाजशास्त्रियों और मानवविज्ञानियों के योगदान का परिचय देता है, जिन्होंने भारतीय संदर्भ में इस विषय को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अध्याय छात्रों को भारतीय समाजशास्त्र के संस्थापकों और उनके द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों से अवगत कराता है, जिससे उन्हें विषय की ऐतिहासिक और सामाजिक प्रासंगिकता को समझने में मदद मिलती है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 11
SubjectSociology
BookSamaj ka Bodh
ChapterChapter 5 — भारतीय समाजशास्त्राी
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time4 minutes
Word count786

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्यसमाज को अध्ययन करने का एक विशेष दृष्टिकोण या नजरिया।
औपचारिक शिक्षाविश्वविद्यालयों या संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली संरचित शिक्षा।
शोधकिसी विषय पर व्यवस्थित जांच या अध्ययन।
उपनिवेशएक देश जो दूसरे देश द्वारा शासित और नियंत्रित होता है।
मानवविज्ञानमानव जाति का अध्ययन, जिसमें उनकी संस्कृति, समाज और जैविक विकास शामिल है।
नृजातीय सर्वेक्षणकिसी विशेष जातीय समूह या समुदाय का विस्तृत अध्ययन।
आदिमप्राचीन या अविकसित अवस्था से संबंधित (इस संदर्भ में आदिवासी समुदायों के लिए प्रयुक्त)।
प्रजातंत्रलोकतांत्रिक शासन प्रणाली।
स्नातकविश्वविद्यालय की डिग्री का पहला स्तर।
स्नातकोत्तरस्नातक डिग्री के बाद की उन्नत डिग्री।

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Practice questions

  1. भारत में समाजशास्त्र की औपचारिक शिक्षा कब और कहाँ प्रारंभ हुई? Answer: भारत में समाजशास्त्र की औपचारिक शिक्षा 1919 ई. में बंबई विश्वविद्यालय में प्रारंभ हुई।
  2. किन दो अन्य विश्वविद्यालयों ने 1920 में समाजशास्त्र में शिक्षण तथा शोध प्रारंभ किया? Answer: कलकत्ता तथा लखनऊ विश्वविद्यालयों ने 1920 में समाजशास्त्र में शिक्षण तथा शोध प्रारंभ किया।
  3. भारतीय समाजशास्त्र के विकास में औपनिवेशिक पराधीनता का क्या महत्व था? Answer: औपनिवेशिक पराधीनता ने भारत में आधुनिकता के अनुभव को जटिल बनाया और समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए विशिष्ट प्रश्न खड़े किए।
  4. एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर का समाजशास्त्र और मानवविज्ञान में क्या योगदान था? Answer: एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर भारत के प्रथम सामाजिक मानवविज्ञानी थे जिन्होंने भारत के नृजातीय सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कलकत्ता विश्वविद्यालय में मानवविज्ञान विभाग की स्थापना में मदद की।
  5. शरत चंद्र रॉय किस क्षेत्र से जुड़े थे और उनका क्या योगदान था? Answer: शरत चंद्र रॉय एक कानूनविद थे जो मानवविज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी थे और उन्होंने भारत में इस विषय के विकास में योगदान दिया।

Practice MCQs

Q1. भारत में समाजशास्त्र की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत किस वर्ष हुई?

Q2. निम्नलिखित में से कौन से विश्वविद्यालय ने 1920 में समाजशास्त्र में शिक्षण और शोध शुरू किया?

Q3. भारतीय समाजशास्त्र के विकास के संदर्भ में एक प्रमुख अंतर क्या था?

Q4. एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर का संबंध किस क्षेत्र से था?

Q5. शरत चंद्र रॉय को किस रूप में जाना जाता है?

Q6. एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर ने किस विश्वविद्यालय में मानवविज्ञान विभाग की स्थापना में मदद की?

Frequently asked questions

भारत में समाजशास्त्र का अध्ययन कब और कहाँ से शुरू हुआ?

भारत में समाजशास्त्र की औपचारिक शिक्षा 1919 ई. में बंबई विश्वविद्यालय से प्रारंभ हुई।

समाजशास्त्र के अलावा किन अन्य विषयों में 1920 में कलकत्ता और लखनऊ विश्वविद्यालयों ने शिक्षण शुरू किया?

कलकत्ता और लखनऊ विश्वविद्यालयों ने 1920 में समाजशास्त्र के साथ-साथ मानवविज्ञान में भी शिक्षण तथा शोध प्रारंभ किया।

भारत जैसे देश में समाजशास्त्र की भूमिका को लेकर क्या प्रश्न खड़े हुए?

यह प्रश्न था कि पाश्चात्य समाजशास्त्र की तरह, भारत जैसे उपनिवेशित देश में इसकी क्या भूमिका होगी, और क्या भारत जैसे प्राचीन सभ्यता वाले देश में 'आदिम' समाज का अध्ययन प्रासंगिक है।

एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर कौन थे और उनका क्या योगदान था?

एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर भारत के प्रथम सामाजिक मानवविज्ञानी थे, जिन्होंने नृजातीय सर्वेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कलकत्ता विश्वविद्यालय में मानवविज्ञान विभाग की स्थापना में मदद की।

शरत चंद्र रॉय का भारतीय समाजशास्त्र में क्या योगदान था?

शरत चंद्र रॉय एक कानूनविद थे जो मानवविज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बने और उन्होंने भारत में इस विषय के विकास में योगदान दिया।

भारतीय समाजशास्त्रियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

उन्हें यह तय करना था कि भारत में समाजशास्त्र की क्या भूमिका होगी, और समाजशास्त्रीय प्रश्नों को भारतीय ऐतिहासिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य के अनुरूप ढालना था।

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Topics covered

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NCERT Class 11 Sociology — Samaj ka Bodh — Chapter 5 — भारतीय समाजशास्त्राी. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.