NCERT Class 11 Political Science Raajneeti Sidhant: Chapter 4 — सामाजिक न्याय
यह अध्याय सामाजिक न्याय की अवधारणा का परिचय देता है, यह बताते हुए कि न्याय प्रेम की तरह ही एक सहज ज्ञान युक्त समझ है, लेकिन यह समाज को व्यवस्थित करने वाले नियमों और लाभों के वितरण से संबंधित है। यह अध्याय न्याय के विभिन्न सिद्धांतों की पहचान करने, वितरणात्मक न्याय को समझने और जॉन रॉल्स के विचारों पर चर्चा करने की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। यह प्राचीन भारतीय समाज, कन्फ्यूशियस और प्लेटो के विचारों के उदाहरणों के माध्यम से न्याय की ऐतिहासिक समझ की पड़ताल करता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि अन्याय करना स्वाभाविक रूप से अच्छा है और बुराई झेलना बुरा है, लेकिन कानून और आपसी समझौते के माध्यम से न्याय स्थापित किया जाता है। सुकरात के विचारों के माध्यम से, यह इस बात पर जोर देता है कि न्यायसंगत होना सभी के दीर्घकालिक हित में है और इसमें सभी की भलाई सुनिश्चित करना शामिल है, जैसे एक डॉक्टर अपने सभी मरीजों की परवाह करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Political Science |
| Book | Raajneeti Sidhant |
| Chapter | Chapter 4 — सामाजिक न्याय |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 788 |
Learning outcomes
- सामाजिक न्याय की अवधारणा को समझना।
- न्याय के विभिन्न ऐतिहासिक सिद्धांतों को पहचानना।
- वितरणात्मक न्याय के अर्थ को स्पष्ट करना।
- न्यायसंगत होने के महत्व को समझना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| सहजानुभूत | सहज ज्ञान से प्राप्त, अंतर्ज्ञान से समझा हुआ |
| सरोकार | संबंध, वास्ता |
| वितरणात्मक न्याय | समाज में लाभों और संसाधनों का उचित बँटवारा |
| तार्विफक | तर्क पर आधारित |
| न्यायोचित | न्याय के अनुसार, उचित |
| प्रसंविदाएँ | आपसी समझौते, अनुबंध |
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Practice questions
- न्याय और प्रेम में क्या समानताएँ और अंतर हैं? Answer: समानता: दोनों सहज ज्ञान युक्त समझ से जुड़े हैं और कोई भी इन्हें बुरा नहीं कहता। अंतर: प्रेम व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़ा है, जबकि न्याय सार्वजनिक जीवन और संसाधनों के वितरण से संबंधित है।
- प्लेटो ने 'द रिपब्लिक' में न्याय के बारे में क्या चर्चा की है? Answer: प्लेटो ने सुकरात और उनके शिष्यों के बीच वार्ता के माध्यम से न्याय पर चर्चा की, जिसमें यह सवाल उठाया गया कि अन्याय करने वाले अक्सर न्यायी लोगों से बेहतर स्थिति में क्यों लगते हैं।
- सुकरात के अनुसार न्यायसंगत होना क्यों महत्वपूर्ण है? Answer: सुकरात के अनुसार, यदि हर कोई अन्याय करे तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा और सबको नुकसान होगा। इसलिए, दीर्घकालिक हित में कानून का पालन करना और न्यायी बनना महत्वपूर्ण है।
Practice MCQs
Q1. न्याय का सरोकार मुख्य रूप से किससे होता है?
Explanation: न्याय का संबंध समाज में नियमों और तरीकों से है जिनके द्वारा लाभों और संसाधनों का बंटवारा किया जाता है।
Q2. प्राचीन भारतीय समाज में न्याय किससे जुड़ा था?
Explanation: प्राचीन भारतीय समाज में न्याय को धर्म और राजा के कर्तव्य से जोड़ा गया था।
Q3. प्लेटो ने न्याय पर किस पुस्तक में चर्चा की है?
Explanation: प्लेटो ने अपनी पुस्तक 'द रिपब्लिक' में न्याय के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है।
Q4. सुकरात के अनुसार, यदि हर कोई अन्याय करे तो क्या होगा?
Explanation: सुकरात का मानना था कि यदि हर कोई अन्याय करे तो किसी को भी लाभ की गारंटी नहीं रहेगी और सभी को नुकसान हो सकता है।
Q5. न्याय में क्या निहित रहता है, जैसा कि सुकरात ने बताया?
Explanation: सुकरात ने स्पष्ट किया कि न्याय में सभी लोगों की भलाई निहित रहती है।
Frequently asked questions
सामाजिक न्याय क्या है?
सामाजिक न्याय समाज में लाभों और संसाधनों के उचित वितरण से संबंधित है, और यह सुनिश्चित करता है कि सभी सदस्यों के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो।
न्याय की अवधारणा प्रेम से कैसे भिन्न है?
प्रेम व्यक्तिगत रिश्तों से जुड़ा है, जबकि न्याय सार्वजनिक जीवन को व्यवस्थित करने वाले नियमों और संसाधनों के वितरण से संबंधित है।
प्राचीन भारतीय समाज में न्याय की क्या समझ थी?
प्राचीन भारतीय समाज में न्याय को धर्म और राजा के कर्तव्य से जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य एक न्यायोचित सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना था।
प्लेटो ने न्याय को कैसे परिभाषित किया?
प्लेटो ने न्याय को सभी लोगों की भलाई से जोड़ा, यह तर्क देते हुए कि एक न्यायसंगत शासक को जनता की भलाई की चिंता करनी चाहिए।
सुकरात के अनुसार, न्यायसंगत होने का क्या महत्व है?
सुकरात के अनुसार, न्यायसंगत होना सभी के दीर्घकालिक हित में है क्योंकि यदि हर कोई अन्याय करे तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
वितरणात्मक न्याय का क्या अर्थ है?
वितरणात्मक न्याय का अर्थ है समाज में उपलब्ध लाभों, संसाधनों और अवसरों का सभी सदस्यों के बीच उचित और निष्पक्ष बँटवारा।
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NCERT Class 11 Political Science — Raajneeti Sidhant — Chapter 4 — सामाजिक न्याय. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.