NCERT Class 11 Geography Bhart Bhautik Paryabaran: Chapter 3 — अपवाह तंत्र
यह अध्याय अपवाह तंत्र की अवधारणा को प्रस्तुत करता है, जिसमें नदियों, नालों और वाहिकाओं द्वारा जल के प्रवाह का वर्णन किया गया है। यह बताता है कि कैसे ये जलमार्ग अतिरिक्त जल को बहाकर ले जाते हैं और बाढ़ को रोकने में मदद करते हैं। अध्याय में अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले कारकों जैसे भूवैज्ञानिक समय, चट्टानों की प्रकृति, स्थलाकृति, ढाल और जल की मात्रा पर प्रकाश डाला गया है। यह विभिन्न अपवाह प्रतिरूपों जैसे वृक्षाकार, अरीय, जालीनुमा और अभिकेंद्री प्रतिरूपों की व्याख्या करता है, जो पेड़ों की शाखाओं, पर्वतों से निकलने वाली नदियों और झीलों में गिरने वाली नदियों के अनुरूप होते हैं। यह अध्याय छात्रों को भारत के भौतिक पर्यावरण को समझने और जल निकासी प्रणालियों के महत्व को जानने में मदद करता है, जो CBSE पाठ्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Geography |
| Book | Bhart Bhautik Paryabaran |
| Chapter | Chapter 3 — अपवाह तंत्र |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 2 minutes |
| Word count | 356 |
Learning outcomes
- अपवाह और अपवाह तंत्र की परिभाषा को समझना।
- अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों की पहचान करना।
- वृक्षाकार, अरीय, जालीनुमा और अभिकेंद्री जैसे विभिन्न अपवाह प्रतिरूपों का वर्णन करना।
- नदियों के जल प्रवाह की दिशा और जलग्रहण क्षेत्र के महत्व को समझना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| अपवाह | निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह |
| अपवाह तंत्र | अपवाह वाहिकाओं का जाल |
| जलग्रहण क्षेत्र | एक नदी द्वारा अपना जल बहाकर लाया जाने वाला विशिष्ट क्षेत्र |
| वृक्षाकार प्रतिरूप | पेड़ की शाखाओं के अनुरूप अपवाह प्रतिरूप |
| अरीय प्रतिरूप | जब नदियाँ किसी शिखर से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं |
| जालीनुमा प्रतिरूप | जब मुख्य नदियाँ समांतर बहती हैं और सहायक नदियाँ समकोण पर मिलती हैं |
| अभिकेंद्री प्रतिरूप | जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील या गर्त में विसर्जित होती हैं |
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Practice questions
- अपवाह को परिभाषित करें। Answer: निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को अपवाह कहते हैं।
- अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो कारकों का उल्लेख करें। Answer: अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले कारक हैं: भूवैज्ञानिक समय अवधि, चट्टानों की प्रवृत्ति एवं संरचना, स्थलाकृति, ढाल, बहते जल की मात्रा और बहाव की अवधि।
- वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप का एक उदाहरण दें। Answer: उत्तरी मैदान की नदियाँ वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप का उदाहरण हैं।
- अरीय अपवाह प्रतिरूप कब बनता है? Answer: जब नदियाँ किसी शिखर से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं, तो अरीय प्रतिरूप बनता है।
Practice MCQs
Q1. निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को क्या कहते हैं?
Explanation: अध्याय के अनुसार, निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को 'अपवाह' कहा जाता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा कारक अपवाह तंत्र को प्रभावित नहीं करता है?
Explanation: अध्याय में भूवैज्ञानिक समय अवधि, चट्टानों की प्रवृत्ति एवं संरचना, स्थलाकृति, ढाल, बहते जल की मात्रा और बहाव की अवधि को अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले कारक बताया गया है, वनस्पतियों का उल्लेख नहीं है।
Q3. पेड़ों की शाखाओं के अनुरूप अपवाह प्रतिरूप को क्या कहा जाता है?
Explanation: अध्याय में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जो अपवाह प्रतिरूप पेड़ की शाखाओं के अनुरूप हो, उसे वृक्षाकार प्रतिरूप कहा जाता है।
Q4. अमरकंटक श्रृंखला से निकलने वाली नदियाँ किस अपवाह प्रतिरूप का उदाहरण हैं?
Explanation: अमरकंटक श्रृंखला से निकलने वाली नदियाँ अरीय प्रतिरूप का एक अच्छा उदाहरण हैं, जहाँ नदियाँ एक बिंदु से निकलकर विभिन्न दिशाओं में बहती हैं।
Q5. जब मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समांतर बहती हों तथा सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर मिलती हों, तो ऐसे प्रतिरूप को क्या कहते हैं?
Explanation: यह जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप की परिभाषा है, जैसा कि अध्याय में वर्णित है।
Frequently asked questions
अपवाह तंत्र क्या है?
अपवाह तंत्र निश्चित वाहिकाओं के जाल को कहा जाता है जिसके माध्यम से जल प्रवाहित होता है।
अपवाह तंत्र को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?
अपवाह तंत्र को भूवैज्ञानिक समय अवधि, चट्टानों की प्रवृत्ति एवं संरचना, स्थलाकृति, ढाल, बहते जल की मात्रा और बहाव की अवधि जैसे कारक प्रभावित करते हैं।
वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप क्या होता है?
वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप वह होता है जो पेड़ की शाखाओं के अनुरूप दिखाई देता है, जैसे कि उत्तरी मैदान की नदियाँ।
अरीय अपवाह प्रतिरूप का क्या अर्थ है?
अरीय प्रतिरूप तब बनता है जब नदियाँ किसी एक शिखर या बिंदु से निकलकर विभिन्न दिशाओं में फैलती हैं।
जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप की विशेषता क्या है?
जालीनुमा प्रतिरूप में मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समांतर बहती हैं और सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर आकर मिलती हैं।
अभिकेंद्री अपवाह प्रतिरूप कब देखने को मिलता है?
अभिकेंद्री प्रतिरूप तब बनता है जब विभिन्न दिशाओं से आने वाली नदियाँ किसी झील या गर्त में एकत्रित होकर विसर्जित होती हैं।
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NCERT Class 11 Geography — Bhart Bhautik Paryabaran — Chapter 3 — अपवाह तंत्र. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.