NCERT Class 11 Biology Jeev Vigyan: Chapter 4 — प्राणि जगत
यह अध्याय, 'प्राणि जगत', प्राणियों के वर्गीकरण के महत्व पर प्रकाश डालता है, जिसमें अब तक दस लाख से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। यह वर्गीकरण के आधारों की पड़ताल करता है, जिसमें कोशिका व्यवस्था, शारीरिक सममिति, प्रगुहा की प्रकृति, पाचन, परिसंचरण और जनन तंत्र की रचना शामिल हैं। अध्याय संगठन के विभिन्न स्तरों की व्याख्या करता है: कोशिकीय स्तर (स्पंज), ऊतक स्तर (सिलेंटरेट), अंग स्तर (प्लेटीहेल्मिंथीज), और अंग-तंत्र स्तर (ऐनेलिड, आर्थोपोड, आदि)। यह पाचन तंत्र (अपूर्ण और पूर्ण) और परिसंचरण तंत्र (खुला और बंद) के प्रकारों पर भी चर्चा करता है। इसके अतिरिक्त, यह सममिति (अरीय और द्विपक्षीय) और भ्रूणीय स्तरों (द्विकोरिक और त्रिकोरिक) के आधार पर प्राणियों के वर्गीकरण को समझाता है। यह अध्याय छात्रों को प्राणियों की विविधता और उनके वर्गीकरण की वैज्ञानिक प्रणाली को समझने में मदद करता है, जो जीव विज्ञान की आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Biology |
| Book | Jeev Vigyan |
| Chapter | Chapter 4 — प्राणि जगत |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 3 minutes |
| Word count | 456 |
Learning outcomes
- प्राणियों के वर्गीकरण के महत्व को समझना।
- वर्गीकरण के विभिन्न आधारों की पहचान करना।
- संगठन के विभिन्न स्तरों (कोशिकीय, ऊतक, अंग, अंग-तंत्र) को उदाहरण सहित समझाना।
- सममिति के प्रकारों (अरीय, द्विपक्षीय) को पहचानना।
- द्विकोरिक और त्रिकोरिक संगठन के बीच अंतर स्पष्ट करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| वर्गीकरण | जीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करना। |
| सममिति | शरीर के अंगों की व्यवस्था जो किसी अक्ष के सापेक्ष समान हो। |
| प्रगुहा | शरीर भित्ति और पाचन नाल के बीच की गुहा। |
| ऊतक | समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाओं का समूह। |
| अंग | विभिन्न ऊतकों से बना संरचनात्मक इकाई जो एक विशिष्ट कार्य करती है। |
| अंग-तंत्र | विभिन्न अंग मिलकर एक विशिष्ट कार्य करते हैं। |
| द्विकोरिक | भ्रूण जिसमें दो जनन स्तर (बाह्य त्वचा और अंतः त्वचा) होते हैं। |
| त्रिकोरिक | भ्रूण जिसमें तीन जनन स्तर (बाह्य त्वचा, मध्य त्वचा और अंतः त्वचा) होते हैं। |
| परिसंचरण तंत्र | शरीर में रक्त या अन्य तरल पदार्थों के संचरण की प्रणाली। |
| पाचन तंत्र | भोजन के पाचन और अवशोषण की प्रणाली। |
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Practice questions
- वर्गीकरण का महत्व क्यों है? Answer: वर्गीकरण से नई खोजी गई प्रजातियों को उचित स्थान पर रखने और प्राणियों के अध्ययन को व्यवस्थित करने में सहायता मिलती है।
- संगठन के कोशिकीय स्तर का एक उदाहरण दीजिए। Answer: स्पंज कोशिकीय स्तर का संगठन दर्शाते हैं।
- अरीय सममिति किन प्राणियों में पाई जाती है? Answer: अरीय सममिति सीलेंटरेट, टीनोफोर और एकाइनोडर्म में पाई जाती है।
- पूर्ण पाचन तंत्र में कितने द्वार होते हैं? Answer: पूर्ण पाचन तंत्र में दो द्वार होते हैं: मुख और गुदा।
- त्रिकोरकी प्राणी किन्हें कहते हैं? Answer: जिन प्राणियों के विकसित भ्रूण में तीन जनन स्तर (बाह्य त्वचा, मध्य त्वचा और अंतः त्वचा) होते हैं, वे त्रिकोरकी कहलाते हैं।
Practice MCQs
Q1. स्पंज में किस स्तर का संगठन पाया जाता है?
Explanation: स्पंज में कोशिकाएं बिखरे हुए समूहों में होती हैं, जो कोशिकीय स्तर के संगठन को दर्शाती हैं।
Q2. निम्नलिखित में से किसमें द्विपक्षीय सममिति पाई जाती है?
Explanation: ऐनेलिड, आर्थोपोड आदि में द्विपक्षीय सममिति पाई जाती है, जहाँ शरीर को एक अक्ष से दो समरूप भागों में बाँटा जा सकता है।
Q3. प्लेटीहेल्मिंथीज में किस प्रकार का पाचन तंत्र होता है?
Explanation: प्लेटीहेल्मिंथीज में अपूर्ण पाचन तंत्र होता है, जिसमें एक ही द्वार मुख और गुदा दोनों का कार्य करता है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा एक त्रिकोरकी प्राणी है?
Explanation: प्लेटीहेल्मिंथीज से लेकर रज्जुकी तक के प्राणी त्रिकोरकी होते हैं, जिनमें तीन भ्रूणीय स्तर पाए जाते हैं।
Q5. बंद परिसंचरण तंत्र में रक्त का संचार कैसे होता है?
Explanation: बंद परिसंचरण तंत्र में रक्त का संचार हृदय से विभिन्न व्यास की वाहिकाओं (धमनी, शिरा, कोशिकाएं) के द्वारा होता है।
Frequently asked questions
प्राणि जगत में वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?
प्राणि जगत में वर्गीकरण इसलिए आवश्यक है क्योंकि अब तक दस लाख से अधिक प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है, और वर्गीकरण नई खोजी गई प्रजातियों को उचित स्थान देने में मदद करता है।
संगठन के विभिन्न स्तर क्या हैं?
संगठन के मुख्य स्तर हैं: कोशिकीय स्तर (जैसे स्पंज), ऊतक स्तर (जैसे सीलेंटरेट), अंग स्तर (जैसे प्लेटीहेल्मिंथीज), और अंग-तंत्र स्तर (जैसे ऐनेलिड, आर्थोपोड)।
अरीय सममिति और द्विपक्षीय सममिति में क्या अंतर है?
अरीय सममिति में, किसी भी केंद्रीय अक्ष से गुजरने वाली रेखा शरीर को दो बराबर भागों में विभाजित करती है (जैसे सीलेंटरेट)। द्विपक्षीय सममिति में, केवल एक विशिष्ट अक्ष शरीर को दो समरूप दाएं और बाएं भागों में विभाजित करता है (जैसे ऐनेलिड)।
द्विकोरिक और त्रिकोरकी प्राणियों में क्या भिन्नता है?
द्विकोरिक प्राणियों में दो भ्रूणीय स्तर (बाह्य त्वचा और अंतः त्वचा) होते हैं, जबकि त्रिकोरकी प्राणियों में तीन भ्रूणीय स्तर (बाह्य त्वचा, मध्य त्वचा और अंतः त्वचा) होते हैं।
खुले और बंद परिसंचरण तंत्र में क्या अंतर है?
खुले परिसंचरण तंत्र में रक्त सीधे हृदय से बाहर भेजा जाता है और ऊतकों में बहता है। बंद परिसंचरण तंत्र में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से संचारित होता है।
प्लेटीहेल्मिंथीज का पाचन तंत्र कैसा होता है?
प्लेटीहेल्मिंथीज में अपूर्ण पाचन तंत्र होता है, जिसमें एक ही द्वार मुख और गुदा दोनों का कार्य करता है।
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NCERT Class 11 Biology — Jeev Vigyan — Chapter 4 — प्राणि जगत. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.