NCERT Class 11 Biology Jeev Vigyan: Chapter 2 — जीव विज्ञान
यह अध्याय, 'जीव जगत का वर्गीकरण', सजीव प्राणियों के वर्गीकरण के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रयासों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि कैसे प्राचीन काल में वर्गीकरण सहज ज्ञान पर आधारित था, जैसे कि भोजन और आवास की उपयोगिता। अरस्तू ने पहली बार वैज्ञानिक मानदंडों का उपयोग करके पौधों को वृक्ष, झाड़ी और शाक में वर्गीकृत किया और जानवरों को लाल रक्त की उपस्थिति के आधार पर बांटा। लीनियस की द्विजगत पद्धति, जिसमें प्लांटी और एनिमैलिया जगत शामिल थे, की सीमाओं पर भी प्रकाश डाला गया है, विशेषकर प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक, एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों के बीच अंतर करने में। अध्याय आर.एच. व्हिटेकर द्वारा 1969 में प्रस्तावित पाँच-जगत वर्गीकरण (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमैलिया) का परिचय देता है, जिसमें वर्गीकरण के प्रमुख मानदंड कोशिका संरचना, शारीरिक संरचना, पोषण, प्रजनन और जातिवृत्तीय संबंध थे। यह विभिन्न जगतों के लक्षणों की तुलनात्मक तालिका भी प्रस्तुत करता है। यह अध्याय छात्रों को वर्गीकरण की जटिलताओं और इसके विकास को समझने में मदद करता है, जो जीव विज्ञान की आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | Biology |
| Book | Jeev Vigyan |
| Chapter | Chapter 2 — जीव विज्ञान |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 657 |
Learning outcomes
- वर्गीकरण के ऐतिहासिक प्रयासों को समझना।
- अरस्तू और लीनियस की वर्गीकरण पद्धतियों की सीमाओं को जानना।
- आर.एच. व्हिटेकर के पाँच-जगत वर्गीकरण को समझना।
- पाँच जगतों (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमैलिया) के प्रमुख लक्षणों की पहचान करना।
- वर्गीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न मानदंडों का विश्लेषण करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| वर्गीकरण | जीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर समूहों में व्यवस्थित करना। |
| प्रोकैरियोटिक | ऐसे जीव जिनकी कोशिकाओं में सुस्पष्ट केन्द्रक झिल्ली और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते। |
| यूकैरियोटिक | ऐसे जीव जिनकी कोशिकाओं में सुस्पष्ट केन्द्रक झिल्ली और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं। |
| एककोशिकीय | ऐसे जीव जो केवल एक कोशिका से बने होते हैं। |
| बहुकोशिकीय | ऐसे जीव जो एक से अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं। |
| स्वपोषी | ऐसे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (जैसे प्रकाश संश्लेषण द्वारा)। |
| परपोषी | ऐसे जीव जो अपने भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। |
| द्विजगत पद्धति | जीवों को पादप और प्राणी दो जगतों में वर्गीकृत करने की प्रणाली। |
| पाँच-जगत वर्गीकरण | आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित वर्गीकरण जिसमें मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमैलिया जगत शामिल हैं। |
| कोशिका भित्ति | कोशिका झिल्ली के बाहर पाई जाने वाली कठोर परत। |
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Practice questions
- वर्गीकरण के लिए अरस्तू द्वारा उपयोग किए गए दो मुख्य मानदंड क्या थे? Answer: अरस्तू ने पौधों को वृक्ष, झाड़ी और शाक में वर्गीकृत किया और प्राणियों को लाल रक्त की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर बांटा।
- लीनियस की द्विजगत पद्धति की मुख्य सीमाएँ क्या थीं? Answer: यह पद्धति प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक, एककोशिकीय और बहुकोशिकीय, तथा स्वपोषी और परपोषी जीवों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित नहीं कर पाती थी।
- आर.एच. व्हिटेकर ने अपने पाँच-जगत वर्गीकरण के लिए किन प्रमुख मानदंडों का उपयोग किया? Answer: व्हिटेकर ने कोशिका संरचना, शारीरिक संरचना, पोषण की प्रक्रिया, प्रजनन और जातिवृत्तीय संबंध को वर्गीकरण का आधार बनाया।
- मोनेरा जगत के जीवों की कोशिका भित्ति की क्या विशेषता होती है? Answer: मोनेरा जगत के जीवों की कोशिका भित्ति सेलूलोज रहित होती है।
- प्रोटिस्टा जगत के जीवों में कोशिका भित्ति की क्या स्थिति होती है? Answer: प्रोटिस्टा जगत के कुछ जीवों में कोशिका भित्ति उपस्थित हो सकती है, जो सेलूलोज रहित होती है।
Practice MCQs
Q1. किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम जीवों के वर्गीकरण के वैज्ञानिक मानदंड प्रस्तुत किए?
Explanation: अरस्तू ने पादपों और प्राणियों के वर्गीकरण के लिए सरल आकारिकीय लक्षणों का उपयोग करके वैज्ञानिक मानदंडों की शुरुआत की।
Q2. लीनियस की द्विजगत पद्धति में कौन से दो जगत शामिल थे?
Explanation: लीनियस ने सभी जीवों को प्लांटी (पादप) और एनिमैलिया (प्राणी) नामक दो जगतों में वर्गीकृत किया था।
Q3. आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित पाँच जगत कौन से हैं?
Explanation: व्हिटेकर ने 1969 में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी और एनिमैलिया नामक पाँच जगतों का प्रस्ताव रखा।
Q4. निम्नलिखित में से किस जगत के जीवों में कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है?
Explanation: कवक (फंजाई) जगत के जीवों की कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है।
Q5. नील-हरित शैवाल (साइनोबैक्टीरिया) को किस जगत में वर्गीकृत किया गया है?
Explanation: नील-हरित शैवाल (साइनोबैक्टीरिया) प्रोकैरियोटिक जीव हैं और इन्हें मोनेरा जगत में रखा गया है।
Q6. क्लेमाइडोमोनास और स्पाइरोगायरा को किस वर्गीकरण पद्धति में एक साथ रखा गया था, जो बाद में अपर्याप्त साबित हुई?
Explanation: द्विजगत वर्गीकरण में, एककोशिकीय शैवाल जैसे क्लेमाइडोमोनास और स्पाइरोगायरा को बहुकोशिकीय पादपों के साथ पादप जगत में रखा गया था।
Frequently asked questions
जीवों का वर्गीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?
वर्गीकरण जीवों को समझने, उनका अध्ययन करने और उनके बीच संबंधों को स्थापित करने में मदद करता है। यह जीव विज्ञान के अध्ययन को व्यवस्थित बनाता है।
आर.एच. व्हिटेकर के पाँच-जगत वर्गीकरण का क्या महत्व है?
व्हिटेकर का वर्गीकरण जीवों को उनकी कोशिका संरचना, पोषण, प्रजनन और जातिवृत्तीय संबंधों के आधार पर अधिक तार्किक रूप से वर्गीकृत करता है, जो पिछले वर्गीकरणों की सीमाओं को दूर करता है।
मोनेरा जगत में कौन से जीव शामिल हैं?
मोनेरा जगत में सभी प्रोकैरियोटिक जीव शामिल हैं, जैसे कि जीवाणु (बैक्टीरिया) और नील-हरित शैवाल (साइनोबैक्टीरिया)।
प्रोटिस्टा जगत की मुख्य विशेषता क्या है?
प्रोटिस्टा जगत में मुख्य रूप से एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीव शामिल हैं, जैसे कि डायटम, डायनोफ्लैजेलेट्स और प्रोटोजोआ।
कवक (फंजाई) को पादपों से अलग क्यों वर्गीकृत किया गया है?
कवक परपोषी होते हैं (अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते) और उनकी कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है, जबकि पादप स्वपोषी होते हैं और उनकी कोशिका भित्ति सेलूलोज की बनी होती है।
क्या वायरस को किसी जगत में शामिल किया गया है?
वर्तमान पाँच-जगत वर्गीकरण में वायरस को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि वे कोशिकीय संरचना नहीं दर्शाते हैं और उन्हें सजीव व निर्जीव के बीच की कड़ी माना जाता है।
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NCERT Class 11 Biology — Jeev Vigyan — Chapter 2 — जीव विज्ञान. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.