NCERT Class 10 Social Science Samkalin Bharat: Chapter 1 — संसाधन एवं विकास

NCERT CBSE Class 10 Social Science Samkalin Bharat Chapter 1 Hindi PDF

यह अध्याय 'संसाधन एवं विकास' पर केंद्रित है, जो कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान के लिए NCERT की पुस्तक 'समकालीन भारत-1' का पहला अध्याय है। यह बताता है कि संसाधन क्या हैं, वे प्रकृति, प्रौद्योगिकी और संस्थाओं के बीच अंतःक्रिया का परिणाम कैसे हैं। अध्याय संसाधनों के वर्गीकरण पर प्रकाश डालता है, जिसमें उत्पत्ति (जैविक, अजैविक), समाप्यता (नवीकरणीय, अनवीकरणीय), स्वामित्व (व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय) और विकास के स्तर (संभाव्य, विकसित, भंडार, संचित कोष) के आधार पर वर्गीकरण शामिल है। यह संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं, जैसे कि संसाधनों का ह्रास, समाज का दो हिस्सों में बँट जाना, और वैश्विक पारिस्थितिकी संकटों पर भी चर्चा करता है। सतत पोषणीय विकास की अवधारणा और रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन, 1992 तथा एजेंडा 21 का भी उल्लेख किया गया है। अंत में, यह संसाधनों के नियोजन के महत्व पर जोर देता है ताकि न्यायसंगत वितरण और सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके। यह अध्याय छात्रों को संसाधनों के महत्व और उनके विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में शिक्षित करता है।

Quick info

BoardCBSE / NCERT
ClassClass 10
SubjectSocial Science
BookSamkalin Bharat
ChapterChapter 1 — संसाधन एवं विकास
LanguageHindi
PDF typeNCERT Textbook
SessionCBSE 2026
Reading time4 minutes
Word count711

Learning outcomes

Vocabulary

WordMeaning
संसाधनपर्यावरण में उपलब्ध कोई भी वस्तु जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रयुक्त की जा सकती है, जिसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, और जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य है।
जैविक संसाधनवे संसाधन जो सजीवों से प्राप्त होते हैं, जैसे वनस्पति और जीव।
अजैविक संसाधनवे संसाधन जो निर्जीव वस्तुओं से बने हैं, जैसे चट्टानें और धातुएँ।
नवीकरण योग्य संसाधनवे संसाधन जिन्हें भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा नवीकृत या पुनः उत्पन्न किया जा सकता है, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
अनवीकरण योग्य संसाधनवे संसाधन जिनका भंडार सीमित है और जिन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं, जैसे जीवाश्म ईंधन।
सतत पोषणीय विकासविकास की वह प्रक्रिया जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना वर्तमान की आवश्यकताएँ पूरी की जाती हैं और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता नहीं किया जाता।
एजेंडा 211992 में रियो डी जनेरो में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन द्वारा स्वीकृत एक घोषणा, जिसका उद्देश्य भूमंडलीय सतत पोषणीय विकास हासिल करना है।
संसाधन नियोजनसंसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक रणनीति।

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Practice questions

  1. संसाधन किसे कहते हैं? इसके वर्गीकरण के आधारों को समझाइए। Answer: संसाधन पर्यावरण में उपलब्ध कोई भी वस्तु है जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, जिसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, और जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य है। संसाधनों का वर्गीकरण उत्पत्ति, समाप्यता, स्वामित्व और विकास के स्तर के आधार पर किया जाता है।
  2. संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न होने वाली किन्हीं तीन प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए। Answer: संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से कुछ व्यक्तियों के लालचवश संसाधनों का ह्रास, समाज का अमीर और गरीब में बँट जाना, और भूमंडलीय तापन, ओजोन परत अवक्षय जैसे वैश्विक पारिस्थितिकी संकट पैदा हो गए हैं।
  3. सतत पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं? Answer: सतत पोषणीय विकास का अर्थ है कि विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना हो और विकास की प्रक्रिया भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं की अवहेलना न करे।
  4. रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित हुआ था? Answer: रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन जून, 1992 में ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरो में आयोजित हुआ था।
  5. एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य क्या है? Answer: एजेंडा 21 का मुख्य उद्देश्य समान हितों, पारस्परिक आवश्यकताओं एवं सम्मिलित जिम्मेदारियों के अनुसार विश्व सहयोग के द्वारा पर्यावरणीय क्षति, गरीबी और रोगों से निपटना तथा भूमंडलीय सतत पोषणीय विकास हासिल करना है।

Frequently asked questions

संसाधन क्या होते हैं?

संसाधन पर्यावरण में उपलब्ध कोई भी वस्तु है जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, जिसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है, और जो आर्थिक रूप से संभाव्य और सांस्कृतिक रूप से मान्य है।

संसाधनों को मुख्य रूप से किन आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है?

संसाधनों को मुख्य रूप से उत्पत्ति (जैविक, अजैविक), समाप्यता (नवीकरण योग्य, अनवीकरण योग्य), स्वामित्व (व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय) और विकास के स्तर (संभाव्य, विकसित, भंडार, संचित कोष) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से क्या समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?

संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से उनका ह्रास, समाज का अमीर-गरीब में बँटवारा, और भूमंडलीय तापन, ओजोन परत अवक्षय जैसे पारिस्थितिकी संकट उत्पन्न होते हैं।

सतत पोषणीय विकास का क्या अर्थ है?

सतत पोषणीय विकास का अर्थ है कि विकास पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना हो और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता न करे।

रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर उभरती पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास की समस्याओं का हल खोजना था।

एजेंडा 21 क्या है?

एजेंडा 21, 1992 में रियो डी जनेरो में स्वीकृत एक घोषणा है जिसका उद्देश्य भूमंडलीय सतत पोषणीय विकास हासिल करना है।

भारत जैसे देश में संसाधन नियोजन क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत जैसे देश में जहाँ संसाधनों की उपलब्धता में बहुत अधिक विविधता है, संसाधन नियोजन न्यायसंगत वितरण और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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Important topics

संसाधन की परिभाषा और वर्गीकरण संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से उत्पन्न समस्याएँ सतत पोषणीय विकास की अवधारणा रियो डी जनेरो पृथ्वी सम्मेलन और एजेंडा 21 संसाधन नियोजन का महत्व

Topics covered

संसाधन की परिभाषा प्रकृति, प्रौद्योगिकी और संस्थाओं का संबंध संसाधनों का वर्गीकरण (उत्पत्ति, समाप्यता, स्वामित्व, विकास स्तर) जैविक और अजैविक संसाधन नवीकरण योग्य और अनवीकरण योग्य संसाधन व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संसाधन संभाव्य, विकसित, भंडार और संचित कोष संसाधन संसाधनों का विकास संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग की समस्याएँ वैश्विक पारिस्थितिकी संकट सतत पोषणीय विकास रियो डी जेनेरो पृथ्वी सम्मेलन (1992) एजेंडा 21 संसाधन नियोजन

NCERT Class 10 Social Science — Samkalin Bharat — Chapter 1 — संसाधन एवं विकास. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.