NCERT Class 10 Social Science Loktantrik Rajniti: Chapter 3 — जाति, धर्म और लैंगिक मसले
यह अध्याय सामाजिक विविधता और लोकतंत्र के बीच संबंधों की पड़ताल करता है, विशेष रूप से भारत के संदर्भ में। यह लिंग, धर्म और जाति पर आधारित तीन प्रमुख सामाजिक असमानताओं पर ध्यान केंद्रित करता है। अध्याय बताता है कि कैसे ये असमानताएं राजनीति में प्रकट होती हैं और लोकतंत्र पर उनका क्या प्रभाव पड़ता है। यह लैंगिक असमानता के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करता है, जिसमें निजी और सार्वजनिक जीवन का विभाजन, श्रम का लैंगिक विभाजन और महिलाओं के काम को कम महत्व देना शामिल है। यह स्पष्ट करता है कि लैंगिक असमानता जैविक नहीं, बल्कि सामाजिक भूमिकाओं और रूढ़ियों पर आधारित है। अंत में, यह तर्क देता है कि परिवार के भीतर सत्ता की गतिशीलता भी राजनीतिक है, जो लोकतंत्र में सामाजिक मुद्दों के महत्व को रेखांकित करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Social Science |
| Book | Loktantrik Rajniti |
| Chapter | Chapter 3 — जाति, धर्म और लैंगिक मसले |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 3 minutes |
| Word count | 583 |
Learning outcomes
- सामाजिक असमानताओं और लोकतंत्र के बीच संबंध को समझना।
- लिंग, धर्म और जाति पर आधारित सामाजिक विभाजनों की पहचान करना।
- लैंगिक असमानता के विभिन्न पहलुओं और उसके सामाजिक कारणों का विश्लेषण करना।
- राजनीति में सामाजिक मुद्दों की अभिव्यक्ति के महत्व को समझना।
- परिवार के भीतर सत्ता की गतिशीलता को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| सामाजिक विविधता | समाज में विभिन्न समूहों का एक साथ रहना। |
| लोकतंत्र | जनता का, जनता के द्वारा, जनता के लिए शासन। |
| सामाजिक असमानता | समाज में लोगों के बीच अवसरों, संसाधनों या स्थिति में अंतर। |
| लैंगिक मसले | पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता से संबंधित मुद्दे। |
| श्रम का लैंगिक विभाजन | घर के कामों का पुरुषों और महिलाओं के बीच बँटवारा। |
| रूढ़ छवियाँ | किसी समूह के बारे में पहले से बनी हुई, अक्सर गलत धारणाएँ। |
| सार्वजनिक जीवन | घर के बाहर का जीवन, जिसमें राजनीति और समाज सेवा शामिल है। |
| निजी जीवन | घर और परिवार से संबंधित जीवन। |
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Practice questions
- सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए खतरा क्यों नहीं है? Answer: सामाजिक विविधता लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं है क्योंकि यह राजनीति में विभिन्न विचारों और अभिव्यक्तियों को सामने लाती है, जो लोकतंत्र को मजबूत कर सकती है।
- श्रम का लैंगिक विभाजन क्या है? Answer: श्रम का लैंगिक विभाजन काम के बँटवारे का वह तरीका है जिसमें घर के अंदर के सारे काम परिवार की औरतें करती हैं।
- लैंगिक असमानता का आधार क्या है? Answer: लैंगिक असमानता का आधार स्त्री और पुरुष की जैविक बनावट नहीं, बल्कि उनके बारे में प्रचलित रूढ़ छवियाँ और तयशुदा सामाजिक भूमिकाएँ हैं।
- परिवार में पुरुष की प्रधानता को राजनीतिक क्यों माना जाना चाहिए? Answer: परिवार में पुरुष की प्रधानता को राजनीतिक इसलिए माना जाना चाहिए क्योंकि राजनीति का अर्थ सत्ता है और परिवार में सत्ता का वितरण भी एक राजनीतिक प्रक्रिया है।
Frequently asked questions
यह अध्याय किस बारे में है?
यह अध्याय सामाजिक विविधता, लोकतंत्र और भारत में लिंग, धर्म और जाति पर आधारित सामाजिक असमानताओं के बीच संबंधों के बारे में है।
लैंगिक असमानता का क्या अर्थ है?
लैंगिक असमानता का अर्थ है पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अवसरों में अंतर, जो अक्सर रूढ़ियों और सामाजिक भूमिकाओं पर आधारित होता है।
श्रम का लैंगिक विभाजन क्या है?
यह काम के बँटवारे की एक व्यवस्था है जहाँ घर के अंदर के काम (जैसे खाना बनाना, बच्चों की देखभाल) मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किए जाते हैं।
क्या महिलाओं के काम को कम महत्व दिया जाता है?
हाँ, अक्सर महिलाओं द्वारा किए जाने वाले घरेलू और अन्य कामों को कम मूल्यवान माना जाता है, भले ही वे दिन-रात काम करती हों।
क्या परिवार के भीतर सत्ता का मुद्दा राजनीतिक है?
हाँ, क्योंकि राजनीति का संबंध सत्ता से है, और परिवार में पुरुषों की प्रधानता सत्ता के वितरण का एक रूप है।
लैंगिक असमानता का आधार क्या है?
लैंगिक असमानता का आधार जैविक अंतर नहीं, बल्कि समाज द्वारा पुरुषों और महिलाओं के लिए तय की गई भूमिकाएँ और रूढ़ि छवियाँ हैं।
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NCERT Class 10 Social Science — Loktantrik Rajniti — Chapter 3 — जाति, धर्म और लैंगिक मसले. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.