कक्षा 9 लोकतांत्रिक राजनीति - I: संस्थाओं का कामकाज NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की लोकतांत्रिक राजनीति - I पुस्तक के अध्याय 5, 'संस्थाओं का कामकाज' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भारत में सरकार की प्रमुख संस्थाओं - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - की भूमिका और कार्यों की पड़ताल करता है। इसमें संसद की संरचना, कानून बनाने की प्रक्रिया, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की शक्तियों, और न्यायपालिका की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में मंडल आयोग की सिफारिशों और आरक्षण जैसे विवादास्पद मुद्दों पर सरकारी निर्णयों का भी उल्लेख है। यह संसाधन छात्रों को इन संस्थाओं के कामकाज को समझने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका का विश्लेषण करने में मदद करता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectलोकतांत्रिक राजनीति - I
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. संस्थाओं का कामकाज

Chapter summary

कक्षा 9 की लोकतांत्रिक राजनीति - I के अध्याय 5 के ये NCERT समाधान सरकार की प्रमुख संस्थाओं - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - के कामकाज पर केंद्रित हैं। इसमें संसद के सदनों, कानून निर्माण की प्रक्रिया, सरकार के प्रमुखों की नियुक्ति और शक्तियों, तथा न्यायपालिका की भूमिका जैसे विषयों को स्पष्ट किया गया है। मंडल आयोग और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों के संदर्भ में इन संस्थाओं के आपसी समन्वय और विवाद समाधान की प्रक्रिया को भी समझाया गया है।

Learning outcomes

  • संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की संरचना और कार्यों को समझना।
  • कार्यपालिका (प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद) और विधायिका (संसद) के बीच संबंधों को पहचानना।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सरकारी निर्णयों के विवादों को सुलझाने में इसकी भूमिका का विश्लेषण करना।
  • मंडल आयोग की सिफारिशों और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण सरकारी निर्णयों के संदर्भ को समझना।
  • नागरिकों के प्रति सरकार की जिम्मेदारियों का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • संसद की संरचना और कार्य
  • विधायिका की भूमिका
  • कार्यपालिका (प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद)
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • सरकारी निर्णय और विवाद निपटारा
  • मंडल आयोग और आरक्षण
  • राजनीतिक कार्यपालिका बनाम स्थायी कार्यपालिका
  • राष्ट्रपति की भूमिका
  • लोकसभा और राज्यसभा

Important topics

  • संसद के सदन और उनके कार्य
  • कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका
  • मंडल आयोग की सिफारिशें और आरक्षण
  • राजनीतिक और स्थायी कार्यपालिका में अंतर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

संसद के कितने सदन होते हैं?
Solution: भारतीय संसद में दो सदन होते हैं। ये हैं:
  1. राज्यसभा (जिसे उपरी सदन भी कहा जाता है)
  2. लोकसभा (जिसे निचला सदन भी कहा जाता है)
राज्यसभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, जबकि लोकसभा एक अस्थायी सदन है जो आमतौर पर हर पाँच वर्ष के कार्यकाल के बाद भंग हो जाती है।

प्रश्न 2

एसईबीसी का पूरा नाम लिखिए।
Solution: एसईबीसी (SEBC) का पूरा नाम 'सोशली एंड एज्केशनली बैकवर्ड क्लासेज' (Socially and Educationally Backward Classes) है, जिसका अर्थ है सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग।

प्रश्न 3

1980 में मंडल आयोग द्वारा सुझाए गए उपायों में एक प्रमुख सिफ़ारिश क्या थी?
Solution: 1980 में मंडल आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई प्रमुख सिफारिशों में से एक यह थी कि सरकारी नौकरियों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाए। इस सिफारिश का उद्देश्य इन वर्गों के लोगों को शिक्षा और रोजगार के अवसरों में समानता प्रदान करना था।

प्रश्न 4

सरकारी निर्णय से उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा कौन करते हैं?
Solution: सरकारी निर्णयों से उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा मुख्य रूप से न्यायपालिका द्वारा किया जाता है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालय शामिल हैं। ये न्यायालय संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी निर्णय कानूनी और संवैधानिक दायरे में हों।

प्रश्न 5

सर्वोच्च न्यायालय के कितने न्यायाधीश सबसे वरिष्ठ हैं?
Solution: दिए गए स्रोत के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में 11 न्यायाधीश सबसे वरिष्ठ हैं। यह संख्या सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या का एक हिस्सा है और वरिष्ठता के आधार पर महत्वपूर्ण पदों के निर्धारण में सहायक होती है।

प्रश्न 6

आरक्षण के मामले में किसने क्या किया?
Solution: आरक्षण के मामले में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका इस प्रकार थी:
  • सर्वोच्च न्यायालय: इसने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की औपचारिक घोषणा की।
  • कैबिनेट: कैबिनेट ने एक आदेश जारी करके इस घोषणा को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की।
  • राष्ट्रपति: राष्ट्रपति ने 27% आरक्षण देने के फैसले को अंतिम रूप दिया।
  • सरकारी अधिकारी: सरकारी अधिकारियों ने इस आरक्षण नीति को लागू करने और इसे वैध करार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह दर्शाता है कि एक महत्वपूर्ण सरकारी निर्णय के कार्यान्वयन में विभिन्न संस्थाओं का समन्वय आवश्यक होता है।

प्रश्न 7

सर्कुलर (परिपत्र) जारी कौन करता है?
Solution: सर्कुलर या परिपत्र आमतौर पर सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। ये सरकारी आदेश, निर्देश या सूचनाएँ होती हैं जिन्हें विभिन्न विभागों, अधिकारियों या जनता तक पहुँचाया जाता है। ये किसी नीति के कार्यान्वयन या किसी विशेष मामले पर स्पष्टीकरण देने के लिए जारी किए जा सकते हैं।

प्रश्न 8

प्रधानमंत्री बनने के लिए क्या जरुरी है?
Solution: प्रधानमंत्री बनने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति को लोकसभा के सदस्यों के बहुमत का समर्थन प्राप्त हो। आमतौर पर, जिस राजनीतिक दल या गठबंधन को लोकसभा चुनावों में बहुमत मिलता है, उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है। बहुमत का समर्थन यह सुनिश्चित करता है कि सरकार के पास विधायी कार्यों को करने के लिए आवश्यक जनादेश है।

प्रश्न 9

मंडल आयोग को क्या जिम्मा सौंपा गया था?
Solution: मंडल आयोग को यह महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा गया था कि वह भारत में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान के लिए उपयुक्त मापदंड तय करे। इसके अतिरिक्त, आयोग को इन पिछड़े वर्गों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव देने का भी कार्यभार दिया गया था।

प्रश्न 10

ओ.एम. नं. 36012/31/90 कब तैयार हो गया?
Solution: ओ.एम. (Office Memorandum) नंबर 36012/31/90, जो संभवतः मंडल आयोग की सिफारिशों से संबंधित सरकारी आदेश था, 13 अगस्त 1990 को तैयार हो गया था। यह वह महत्वपूर्ण तिथि है जब आरक्षण नीति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया था।

प्रश्न 11

सरकार पर नागरिकों के प्रति क्या जिम्मेदारी होती है?
Solution: सरकार पर नागरिकों के प्रति कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ होती हैं। इनमें नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना, कानून व्यवस्था बनाए रखना, और सार्वजनिक कल्याण के लिए आवश्यक सेवाएँ (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा) प्रदान करना शामिल है। सरकार को जनता की इच्छाओं के अनुसार कार्य करना होता है और उनके प्रति जवाबदेह होना होता है, क्योंकि सरकार का गठन ही जनता द्वारा किया जाता है।

Common mistakes

  • कार्यपालिका और विधायिका के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता के महत्व को कम आंकना।
  • सरकारी निर्णयों और उनके कार्यान्वयन की प्रक्रिया को ठीक से न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक संस्था (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) के मुख्य कार्यों को सूचीबद्ध करें।
  • प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और न्यायाधीशों की शक्तियों और सीमाओं की तुलना करें।
  • मंडल आयोग जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों के संदर्भ में संस्थाओं की भूमिका को समझें।
  • कानून बनाने की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. भारतीय संसद के कितने सदन होते हैं?

Q2. सरकारी नौकरियों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश किस आयोग ने की थी?

Q3. सरकारी निर्णयों से उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा मुख्य रूप से कौन करता है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन स्थायी कार्यपालिका का हिस्सा है?

Q5. राज्यसभा को किस नाम से भी जाना जाता है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 के लिए 'संस्थाओं का कामकाज' अध्याय में मुख्य रूप से किन तीन सरकारी संस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से तीन सरकारी संस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है: विधायिका (संसद), कार्यपालिका (प्रधानमंत्री, मंत्री परिषद और नौकरशाह) और न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय)।

संसद के दो सदन कौन-कौन से हैं और उनकी क्या विशेषताएँ हैं?

संसद के दो सदन हैं: लोकसभा (निचला सदन, अस्थायी) और राज्यसभा (उपरी सदन, स्थायी)। लोकसभा हर पाँच साल में भंग हो जाती है, जबकि राज्यसभा कभी भंग नहीं होती।

मंडल आयोग की सिफारिशों का क्या महत्व था?

मंडल आयोग ने 1980 में सरकारी नौकरियों में सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की थी, जो भारत में आरक्षण नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि वह सरकार के अन्य अंगों (विधायिका और कार्यपालिका) के दबाव या हस्तक्षेप के बिना निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकती है। यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका में क्या अंतर है?

राजनीतिक कार्यपालिका में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि (जैसे प्रधानमंत्री और मंत्री) होते हैं जो नीतियों का निर्णय लेते हैं, जबकि स्थायी कार्यपालिका में नौकरशाह (सिविल सर्वेंट) होते हैं जिन्हें लंबे समय के लिए नियुक्त किया जाता है और वे नीतियों को लागू करते हैं।

यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलती है।

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