CBSE Class 8 Social Science Chapter 2: पृष्ठ संख्या 126 NCERT Solutions
This section provides NCERT Solutions for Class 8 Social Science, focusing on the content from page 126 of the textbook. It delves into profound questions about India's identity, its historical significance, and the reasons behind its past decline and subsequent resurgence. The solutions explore the essence of India as a land of diverse people, rich culture, and enduring civilization, contrasting its historical trajectory with that of Europe, particularly in technological development. It also examines Jawaharlal Nehru's perspective on India's ancient yet sophisticated civilization, as evidenced by the Indus Valley Civilization. These solutions are designed to help students grasp the historical context, cultural depth, and developmental aspects of India, aiding in their exam preparation by offering clear explanations and insights into complex historical narratives.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Social Science |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | पृष्ठ संख्या 126 |
Chapter summary
This chapter's NCERT Solutions for Class 8 Social Science, based on page 126, address fundamental questions about India's identity, its historical strengths, and the reasons for its decline. It contrasts India's development with Europe's, highlighting factors like societal mindset and technological progress. The solutions also explore Jawaharlal Nehru's observations on India's ancient, developed civilization, referencing the Indus Valley Civilization. This content is crucial for understanding India's historical journey and cultural resilience.
Learning outcomes
- Understand the multifaceted identity of India beyond its geographical boundaries.
- Analyze the reasons for India's loss and regaining of historical power and influence.
- Compare India's technological development with Europe's and identify contributing factors.
- Explain Jawaharlal Nehru's perspective on India's ancient civilization.
- Appreciate the significance of the Indus Valley Civilization in India's historical narrative.
Topics covered
Paper topics
- India's Identity and Heritage
- Historical Power Dynamics
- Cultural Continuity
- Technological Development Comparison (India vs. Europe)
- Societal Mindset and Progress
- Indus Valley Civilization
- Jawaharlal Nehru's Historical Perspective
- Ancient Indian Civilizations
- Reasons for Decline and Resurgence
- Diversity in Unity
Important topics
- India's multifaceted identity
- Reasons for technological lag compared to Europe
- Significance of ancient civilizations (Indus Valley)
- Nehru's view on India's ancient sophistication
- Enduring cultural heritage
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
भारत केवल एक भौगोलिक भू-भाग का नाम नहीं है, बल्कि यह उस भू-भाग में निवास करने वाले लोगों, उनकी समृद्ध संस्कृति, विकसित सभ्यता, अनूठे रीति-रिवाजों और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। यह इन सभी तत्वों का एक संयुक्त प्रतिनिधित्व है।
अपने अतीत में, भारत ने अनेक संस्कृतियों के उत्थान और पतन को देखा है। कई संस्कृतियाँ यहाँ आईं, या तो भारतीय संस्कृति में विलीन हो गईं या फिर समाप्त हो गईं। इसके बावजूद, भारत ने न केवल अपनी मौलिक संस्कृति को बनाए रखा, बल्कि उसे और भी श्रेष्ठ सिद्ध किया और उसका प्रतिनिधित्व किया।
भारत ने कई आक्रमणों का सामना किया, विभिन्न शासनों को देखा और गुलामी की बेड़ियों को भी झेला। एक समय ऐसा भी आया जब उसने अपनी शक्ति दूसरों के अधीन पाई, परंतु उसने पुनः उठकर अपने सम्मान को प्राप्त किया और अपनी अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा।
आज, भले ही भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, फिर भी उसके पास अपनी अनमोल विरासत सुरक्षित है। इसमें उसकी समृद्ध संस्कृति, महान व्यक्तियों के उच्च विचार, विविधता में एकता का भाव और धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल्य शामिल हैं, जो इसे एक जीवंत राष्ट्र बनाते हैं।
प्रश्न 2
भारत अपनी संकुचित मानसिकता और रूढ़िवादी विचारों के कारण यूरोप की तुलना में तकनीकी विकास की दौड़ में पिछड़ गया। इन रूढ़ियों ने भारत की प्रगति की गति को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया।
हालांकि, प्राचीन भारत में मानसिक सजगता, तकनीकी कौशल और रचनात्मक प्रवृत्ति का अपार भंडार था। लोगों ने प्रकृति और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का प्रयास किया, जिसके प्रमाण हमारे इतिहास में मिलते हैं। परंतु, समय के साथ हमने अपनी इस रचनात्मकता को भुलाकर केवल अनुसरण करने की प्रवृत्ति अपना ली। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि हमने अपनी मौलिक सृजन क्षमता खो दी। जहाँ हमने ब्रह्मांड के रहस्य खोजे थे, वहीं हम व्यर्थ के आडंबरों और भ्रमों में उलझकर अपने ज्ञान को धूमिल कर बैठे।
जिस समय भारतीय राजाओं ने साहसिक कार्यों और एक जीवंत जीवन शैली के लिए सुदूर देशों तक भारतीय संस्कृति का प्रसार किया, उसी समय हमारी संकीर्ण सोच ने इस प्रसार पर अंकुश लगा दिया। इन संकीर्ण विचारधाराओं ने भारत के विकास के मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। भारत में व्याप्त निरक्षरता और समाज में बढ़ती जाति-पाति की भावना ने भी देश की प्रगति को छिन्न-भिन्न कर दिया। हमारी सोच का दायरा धीरे-धीरे सीमित होने लगा, मानो उस पर जंग लग गया हो। हमारी वैज्ञानिक चेतना इन आडंबरों, रूढ़ियों और संकीर्ण मानसिकता के नीचे दब गई।
इसके विपरीत, यूरोप, जो कभी भारत से पिछड़ा हुआ था, अपनी वैज्ञानिक चेतना, प्रबल जीवन शक्ति और विकसित मानसिकता के कारण तकनीकी विकास में भारत से बहुत आगे निकल गया।
प्रश्न 3
जवाहरलाल नेहरू ने यह कथन विशेष रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में कहा था। उनके अनुसार, सिंधु घाटी जैसी विकसित सभ्यता का उल्लेख इतिहास में दुर्लभ है। उनका मानना था कि इस सभ्यता ने अपने विकास के लिए हजारों वर्षों का समय लिया होगा।
इस सभ्यता ने फारस, मेसोपोटामिया और मिस्र जैसी सभ्यताओं के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे। इस काल की नागरिक सभ्यता अत्यंत उन्नत थी। नेहरू जी के अनुसार, आधुनिक भारत का जुड़ाव इस छह-सात हजार साल पुरानी सभ्यता से है। इसीलिए उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता की भोर-बेला कहा, जो एक छोटे बच्चे की तरह नवजात न होकर, प्रारंभ से ही एक विकसित और परिपक्व रूप में विद्यमान थी।
इस सभ्यता ने न केवल सुंदर वस्तुओं का निर्माण किया, बल्कि आधुनिक सभ्यता के लिए अत्यंत उपयोगी चिन्ह भी छोड़े, जैसे कि उत्कृष्ट हमाम (स्नानघर) और सुनियोजित नालियों की व्यवस्था। इन निर्माणों ने आगे चलकर भवन निर्माण कला और जल निकासी प्रणाली के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। यह सब सिंधु सभ्यता और मोहनजोदड़ो के कारण ही संभव हो सका, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर हैं।
Common mistakes
- Confusing India's identity solely with its landmass rather than its people and culture.
- Underestimating the impact of societal mindset and traditions on technological progress.
- Failing to connect ancient civilizations like the Indus Valley with modern India's development.
- Overlooking the role of cultural continuity and adaptation in India's historical resilience.
Revision tips
- Focus on understanding the core questions posed about India's identity and historical journey.
- Compare and contrast India's developmental path with Europe's, noting key differences.
- Recall Nehru's specific references to ancient Indian civilizations and their sophistication.
- Summarize the main reasons for India's past decline and its enduring cultural strengths.
Practice MCQs
Q1. भारत को केवल एक भू-भाग का नाम न कहकर उसकी पहचान किनसे जोड़ी गई है?
Explanation: समाधान के अनुसार, भारत केवल एक भू-भाग नहीं है, बल्कि यह वहाँ के लोगों, उनकी संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाजों और इतिहास का प्रतिनिधित्व करता है।
Q2. यूरोप की तुलना में भारत के तकनीकी-विकास में पिछड़ने का मुख्य कारण क्या बताया गया है?
Explanation: समाधान बताता है कि भारत की संकुचित मानसिकता, रूढ़ियों और रचनात्मक प्रवृत्ति के खो जाने के कारण वह तकनीकी विकास की दौड़ में यूरोप से पिछड़ गया।
Q3. जवाहरलाल नेहरू ने भारत को 'अनेक रूपों में विकसित सयाने रूप' में किस संदर्भ में वर्णित किया है?
Explanation: नेहरू जी ने यह कथन सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में कहा था, जिसे वे एक अत्यंत विकसित और प्राचीन सभ्यता मानते थे, न कि एक नवजात शिशु की तरह।
Q4. सिंधु घाटी सभ्यता के किन पहलुओं को आधुनिक सभ्यता के लिए उपयोगी माना गया है?
Explanation: समाधान के अनुसार, सिंधु घाटी सभ्यता ने सुंदर वस्तुओं के निर्माण के साथ-साथ आधुनिक भवन निर्माण और जल निकासी प्रणालियों के लिए उपयोगी हमामों और नालियों की व्यवस्था का निर्माण किया।
Q5. भारत ने अपनी प्राचीन शक्ति को खोने के बाद पुनः सम्मान कैसे प्राप्त किया?
Explanation: समाधान के अनुसार, भारत ने आक्रमणों और गुलामी के दौर के बाद भी अपनी सांस्कृतिक विरासत, महापुरुषों के विचारों और विविधता में एकता को बचाए रखकर अपना सम्मान पुनः प्राप्त किया।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान विषय के लिए है, जो पृष्ठ संख्या 126 पर आधारित है।
समाधान में भारत की पहचान को कैसे समझाया गया है?
समाधान में भारत को केवल एक भू-भाग के रूप में नहीं, बल्कि वहाँ के लोगों, उनकी संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाजों और इतिहास के संगम के रूप में समझाया गया है।
भारत तकनीकी विकास में यूरोप से क्यों पिछड़ गया?
समाधान के अनुसार, भारत की संकुचित मानसिकता, रूढ़ियों और रचनात्मक प्रवृत्ति के क्षरण के कारण वह यूरोप की तुलना में तकनीकी विकास में पिछड़ गया।
जवाहरलाल नेहरू ने भारत की प्राचीन सभ्यता के बारे में क्या कहा है?
नेहरू जी ने भारत को उसकी भोर-बेला में ही एक नन्हे बच्चे की तरह नहीं, बल्कि अनेक रूपों में विकसित और सयाने रूप में देखा, विशेषकर सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में।
सिंधु घाटी सभ्यता का क्या महत्व है?
सिंधु घाटी सभ्यता को एक अत्यंत विकसित सभ्यता माना गया है, जिसने नागर सभ्यता, व्यापारिक संबंध और आधुनिक भवन निर्माण व जल निकासी प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को भारत के इतिहास, संस्कृति और विकास की जटिलताओं को समझने में मदद करता है, जिससे वे परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।
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